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अक्टूबर 17, 2010

विलियम ब्लेक के नाम

Don’t adore flowers of happiness as nectar of sorrow is hidden behind it

(William Blake)

विलियम तुमने क्यों
कमतर माना
खुशी को?

क्या तुम स्वीकार नहीं करना चाहते थे
मानव जीवन में खुशी के क्षणों का महत्व?

इन्ही क्षणों की बदौलत
जीवन के दुखों से लड़ने की शक्त्ति मिलती है

यदि खुशी स्थायी नहीं है तो
गम ही कौन सा सदा रहने वाला भाव है?

गम की घटाओं को घिरते आते देखते रहे
तब तो जी चुके जीवन!

तुम साथ यह भी तो कह सकते थे
कि मत डरो
गम रुपी मकरंद से
क्योंकि
इसका तोड़ है हँसी के पास
खुशी के पास।

एक खुली हँसी माथे से शिकन हटा देती है
रात-दिन के तनावों से तनी नसों में
ऊर्जा का संचार करती है।

कोई कैसे
प्रफुल्लित मन की
मुस्कान को दबा ले
उदास बैठ जाये
मुँह लटका कर
यह सोचकर कि
खुशी के फूलों के पीछे
गम रुपी मकरंद छिपा है?

जब जब जीवन हँसने का
खिलखिलाने का मौका दे
तब तब क्यों न उसका आनंद लिया जाये!

यदि तुम ये कहते कि
खुशी को ही जीवन का सम्पूर्ण भाव न समझो
तो सहमत हुआ जा सकता है।

खुशी भी तो जीवन का एक अंग है
जैसे गम है।

जीवन की सम्पूर्णता तो
इसके सारे भावों को
संतुलित रुप से
जीने में ही है न
किसी एक खास भाव के साथ
बह जाने में तो है नहीं।

… [राकेश]

[William Blake (28 November 1757–12 August 1827)]
चित्र साभार उनके ऊपर बने विकीपीडिया पेज से

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