Posts tagged ‘Hafeej Merathi’

जून 1, 2010

हफीज मेरठी : शायर के खून और पसीने से टपके सात सुर

शानो शौकत के लिये तू परेशान है
और मेरी य’ तमन्ना कि तेरा किरदार बने


यह बाँकपन है हमारा कि जुल्म पर हमने
बजाय माला ओ फरियाद के शाइरी की है


पैगाम ये मिला है जनाबे हफीज को
अंजाम पहले सोच लें तब शाइरी करे


पैरहन की मैने जब तारीफ की कहने लगे
हम तुम्हे अच्छे लगे या पैरहन अच्छा लगा


बारी बारी जागना है खौफ से शबखून के
हम तभी सोयेंगे जब बेदार हो जायेंगे आप


हमारा ही जिगर है यह हमारा ही कलेजा है
हम अपने जिस्म रखते हैं नमकदानों से वाबस्ता


हिसारे जब्र में जिंदा बदन जलाये गये
किसी ने दम नहीं मारा मगर धुँआ बोला
कहा न था कि नवाजेंगे हम हफीज तुझे
उड़ा के वह मेरे दामन की धज्जियाँ बोला

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मई 31, 2010

हफीज मेरठी : तीन मोती शायर की विरासत से

कुछ लोग शायद परिचित न हों उर्दू के शायर मरहूम हफीज मेरठी और उनकी शायरी से। मेरठ के रहने वाले हफीज साब ने जिन्दगी से जुड़ी हुयी शायरी की। उनकी शायरी को केवल समय बिताने का ख्याल लिये हुये नहीं पढ़ा जा सकता क्योंकि उनके शब्द पढ़ने वाले को अन्दर तक झकझोरते हैं। उनके शब्द पढ़ने वाले की नींद को तोड़ते हैं। अगर व्यक्ति किसी भी किस्म की खुमारी से घिरा हुआ अपना समय व्यतीत कर रहा है तो मरहूम शायर के शब्द उसकी खुमारी तोड़ कर उसे धरती पर जीते आदमी की जिन्दगी की असलियत से वाकिफ करा देते हैं।

जो लोग कभी भी उनकी शायरी से रुबरु नहीं हुये हैं ऐसे लोगों के लिये हफीज साब द्वारा अपने पीछे छोड़े गये शायरी के अनमोल खजाने से तीन रत्न यहाँ पेश किये जा रहे हैं।

दुआऐं तुमको न दूँगा ऐशो इशरत की,
कि जिन्दगी को जरुरत है सख्त मेहनत की।

बस यही दौड़ है इस दौर के इंसानों की,
तेरी दीवार से ऊँची मेरी दीवार बने

कहीं चमन में नई पौध को जगह न मिले
यह सोच असल में अहसासे कमतरी की है

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