Posts tagged ‘Ghrina’

फ़रवरी 9, 2015

प्यारे बच्चों…

प्यारे बच्चो, हम तुम्हारे काम नहीं आ सके । तुम चाहते थे हमारा क़ीमती
समय तुम्हारे खेलों में व्यतीत हो । तुम चाहते थे हम तुम्हें अपने खेलों
में शरीक करें । तुम चाहते थे हम तुम्हारी तरह मासूम हो जाएँ ।

प्यारे बच्चो, हमने ही तुम्हें बताया था जीवन एक युद्धस्थल है जहाँ
लड़ते ही रहना होता है । हम ही थे जिन्होंने हथियार पैने किये । हमने
ही छेड़ा युद्ध हम ही थे जो क्रोध और घृणा से बौखलाए थे । प्यारे
बच्चो, हमने तुमसे झूठ कहा था ।

यह एक लम्बी रात है । एक सुरंग की तरह । यहाँ से हम देख सकते
हैं बाहर का एक अस्पष्ट दृश्य । हम देखते हैं मारकाट और विलाप ।

बच्चो, हमने ही तुम्हें वहाँ भेजा था । हमें माफ़ कर दो । हमने झूठ कहा
था कि जीवन एक युद्धस्थल है ।

प्यारे बच्चो, जीवन एक उत्सव है जिसमें तुम हँसी की तरह फैले हो ।
जीवन एक हरा पेड़ है जिस पर तुम चिड़ियों की तरह फड़फड़ाते हो ।

जैसा कि कुछ कवियों ने कहा है जीवन एक उछलती गेंद है और
तुम उसके चारों ओर एकत्र चंचल पैरों की तरह हो ।

प्यारे बच्चो, अगर ऐसा नहीं है तो होना चाहिए ।

(मंगरेश डबराल)

जनवरी 10, 2015

छीन लो धर्म ग्रंथ मनुष्यों से…

मनुष्य से घृणा कर के

कौन लोग

कुरान, वेद, बाइबल

चूम रहे हैं बेतहाशा

किताबें और ग्रन्थ छीन लो

जबरन उनसे

मनुष्य को मार कर ग्रन्थ पूज रहा ढोंगियों का दल

सुनो मूर्खों,

मनुष्य ही लाया है ग्रन्थ

ग्रन्थ नहीं लाया मनुष्य को!

(नजरुल इस्लाम)

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