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अप्रैल 9, 2014

अरविंद केजरीवाल: “आप” बचा पायेगी भारतीय राजनीति को कोर्पोरेट के औपनिवेशिक हमले से?

10000CRORbjpदिल्ली में और कई अन्य स्थानों पर कल 10 अप्रैल को चुनाव होना है और आज 9 अप्रैल को कई बड़े कांग्रेसी नेता ट्वीट आदि माध्यमों से बताते रहे कि भाजपा (मोदी) 10,000 करोड़ रूपये खर्च कर चुके हैं| इतनी अथाह धनराशी के बलबूते भारत को एक प्रोपेगंडा में डुबाकर नरेंद्र मोदी की नकली लहर का भ्रम पैदा करने वाली भाजपा के सामने 20 करोड़ के चंदे के साथ खड़ी “आप” कैसे लड़ पायेगी? क्या पैसा सच्चाई को हरा देगा?

देश को देखना और सिद्ध करना है कि लोकतंत्र में पैसा ही सब कुछ नहीं| आखिर जो लोग 10,000 करोड़ रूपये  चुनाव जीतने के लिए खर्च कर रहे हैं वे सत्ता में आने के बाद इस खर्चे की भरपाई भी तो करेंगे ही और वह वह जनता का शोषण किये बगैर तो हो नहीं सकती|

क्या कांग्रेस चुनाव होने से पहले ही हार मान चुकी है? दिल्ली में कुछ अरसा पहले राहुल गांधी के भी पोस्टर लगे थे पर ज्यादातर उन्ही स्थानों पर अब मोदी के पोस्टर लग गये हैं और राहुल गांधी के पोस्टर लगभग गायब हो गये हैं| कांग्रेस कहीं भी ढंग से चुनाव प्रचार करती नहीं दिखाई दे रही| क्या कांग्रेस कोर्पोरेट आकाओं का आदेश मान कर चुप है कि – इस बार मोदी की सरकार बन जाने दो?
अरविंद केजरीवाल जो कहते हैं उसकी तीव्र और तीखी प्रतिक्रया देश भर में होती है और मीडिया और राजनीतिक नेता उन पर आक्रमण कर देते हैं पर कुछ समय बाद ही अरविंद के कथन सच साबित होने लगते हैं| इस बार भी कुछ महीनों में ही स्पष्ट हो जायेगा कि अरविंद वाकई सच बोल रहे थे कि कोर्पोरेट इस देश पर कब्जा कर चुके हैं और कांग्रेस और भाजपा सरकारों की अदला बदली केवल जनता की आँखों में धूल झोंकने का प्रयास मात्र है|

AKatRajghatकल फिर अरविंद केजरीवाल पर हमला हुआ और सोशल मीडिया पर मोदी समर्थक जश्न मनाते दिखाई दिए और कांग्रेस समर्थक चुटकियाँ लेते|

भारत में मोदी समर्थक बहुतायत में सेडिस्ट हैं और यह बार बार सिद्ध हो रहा है| इतनी बड़ी संख्या में मानसिक रुग्णता इस देश का अहित करेगी ही करेगी| मोदी जैसों के मूड न भी हों पर यह भीड़ अपने अंदर की पाशविक हिंसा की संतुष्टि के लिए उन जैसे नेताओं को तानाशाह बना कर ही चैन पायेगी क्योंकि तब इस भीड़ के लिए अपने विरोधियों से बदला चुकाना और निबटना आसान हो जायेगा|

बड़े आनंद की बात है कि विजय मल्होत्रा जैसे निरर्थक हो चुके नेता को सारी कीमियागिरी पता है कि अरविंद केजरीवाल पर हमले उनकी खुद की रची नौटंकी है, तब वे क्यों नहीं ऐसा नाटक करके वर्तमान राजनीति में सार्थक बन जाते? दूसरा आनंद का विषय है कि जब ये थप्पड़-मुक्के मारने वाले नाटक के पात्र बनते हैं तो क्या पिटने के लिए भी तैयार होकर आते हैं? समर्थक तो ऐसे अचानक उत्पन्न हुए हालात में रोकते रोकते भी दो चार रसीद कर ही देते हैं|

भाजपाइयों की थकी हुयी बुद्धि के अनुसार “आप” और अरविंद केजरीवाल सब कुछ मीडिया का ध्यान पाने के लिए करते हैं| भाजपाइयों की मूर्खतापूर्ण सोच के साथ यही सिद्ध होता है पहले दिल्ली विधानसभा में कांग्रेस और भाजपा के पैरों के नीचे से कालीन खींच कर “आप” ने सोचा कि अब सरकार बनाने के बाद तो मीडिया उन्हें पूछेगा नहीं सो उन्होंने आनन्-फानन में विनोद कुमार बिन्नी को लुभाया और उससे कहा कि अब तू “आप” से विद्रोह करने का नाटक कर और रोज मुझे और “आप” को गालियाँ दे| तू भी मीडिया में रहेगा और हम भी| और देखना कहीं भाजपाइयों और कांग्रेसियों के साथ रसगुल्ले खाते हुए न पकड़ा जाना वरना तेरा सारा खेल चौपट और तेरे साथ हमारा भी|

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कुछ दिन ऐसा चला फिर अरविंद ने अपने कई साथियों को, जो “आप” में रहकर दिल में भाजपा को बसाए रखते थे, कहा कि अब वे एक एक करके उनका और “आप” का विरोध करें और “आप” छोड़ दें या “आप” उन्हें निकाल देगी और इस तरह सभी चरित्र मीडिया में बने रहेंगे| “अश्विन उपाध्याय” को भी भरमाया कि भाई तुम ऐसे ऐसे आरोप लगाओ कि मीडिया दौड़ा चला आए तुम्हारे पास और तुम ऐसे ऐसे संवाद बोलना कि मीडिया सारे सारे दिन तुम्हारे वचन ही दिखाता रहे| फिर अरविंद ने अपने को पिटवाने और शारीरिक क्षति पहुंचाने वाले लोग भी तैयार कर लिए| आखिर मीडिया में बने जो रहना था|

बातों के थप्पड़ सही, और लात-घूंसों के मामले झूठे? वाह भाजपा, वाह  कांग्रेस!

वो (भाजपाईकांग्रेसी) क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होती, अरविंद आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम!’ !

सरकार, क़ानून और मीडिया और कांग्रेस + भाजपा क्या अरविंद केजरीवाल और “आप” द्वारा एफ.आई.आर करवाने का ही मुँह ताकते रहते हैं? किसी ने शारीरिक हमला किया, जमाने ने देखा, हमलावर को पकड़ो, जैसी जांच करवानी है करवाओ, उसे क़ानून के घेरे में लाओं| मीडिया और विपक्षी अपने तौर पर गहरी जांच कर लें कि सच्चाई क्या है| दसियों हजार करोड़ खर्च करने वाली भाजपा के पास क्या लोकल जासूसों को देने के लिए भी पैसे नहीं बचे जो सच्चाई सामने लाकर अरविंद को दुनिया के सामने एक्सपोज कर दें? कहाँ गये मीडिया के स्टिंग धुरंधर? ज़रा सामने तो आओ, अपनी कला का नमूना दिखाओ| या भय यह है कि अगर असली मास्टर माइंड तक पहुँच गये लोग तो किरकिरी हो जायेगी?

अरविंद तो खुद ही दिल्ली के पुलिस कमिश्नर श्री बी.एस.बस्सी के पास गये कि उन पर हो रहे लगातार हमलों की जांच करवाई जानी चाहिए जिससे कि पता लग सके इन् सब हमलों के पीछे कौन मास्टर माइंड है?

अरविंद अपने पर आक्रमण करने वाले से मिलने उसके घर गये तो AK laliभाजपा को तो छोड़ ही दें संघ को भी समस्या होने लगी कि वे क्यों अपने पर हमले करने वालों को माफ करे दे रहे हैं|

“लगे रहो अरविंदभाई” गांधीगिरी में, बदलाव आएगा ही आएगा!

जन्म से ही कोई महान नहीं होता, अलबत्ता उसमें ऐसी संभावनाओं के बीज जरुर छिपे रहते हैं पर उसे सप्रयास इन् बीजों को अंकुरित करके पहले पौधे और बाद में फल-फूल से भरा वृक्ष बनाना पड़ता है और यह एक लंबा और सतत चलने वाला और बेहद कठिन और परिश्रमबद्ध कार्य होता है| इस कार्य में परिस्थितियाँ और विरोधी लोग बार-बार अपमान करते हैं, शारीरिक और मानसिक हानि पहुंचाते हैं, पर कठिन परिस्थितियों और बेहद कठिन कसौटियों से गुजर कर ही जन-नायकों का उदय होता है| महात्मा गांधी की आत्मकथा “सत्य के प्रयोग” में अतुल्य हीरा बनने की यात्रा का बेहद असरदार वर्णन है| गांधी जब अपने अंतस पर नियंत्रण पाकर, जनता के दुख दर्द तो आत्मसात करके उनके हित की ही बात करके जीने का प्रण लेकर द.अफ्रीका से भारत आए तो वे 45 साल के थे| और अगले कुछ दशकों में उन्होंने गुलामी के कारण थक-हार कर घिसट-घिसट कर जीवन जीते भारत की न केवल आत्मा को जगाया बल्कि निहत्थे, गरीब और कमजोर भारतीयों को इतने  तेज से भर दिया कि वे पूरे देश में अंग्रेजों और उनकी अथाह ताकत के सामने सिर उठा कर खड़े हो गये और अंग्रेजों को यहाँ से अपना अत्याचारी राज खत्म करके वापिस अपने देश जाना पड़ा|

AAP49daysगांधी का अंतिम सपना “स्वराज” का था परन्तु ऐसे लोग जो अंग्रेजों के शासन में अपनी ज्यादा भलाई समझते थे, उनके ऐसे किसी भी लक्ष्य के विरोधी थे और अंततः साम्प्राद्यिक राजनीति की कुत्सित विचारधारा में पाले बढे अपराधी मानसिकता के लोगों ने गांधी की ह्त्या कर दी| जिन्होने देश को सम्भाला अंग्रेजों के बाद, उनका लक्ष्य “स्वराज” नहीं था, और अपनी तमाम भलमनसाहत के बावजूद वे इस बात के लिए सही तरीके से शिक्षित नहीं थे कि सोच विचार कर गांधी के लक्ष्य को पूरा करने के मार्ग पर चल सकें और बाद के नेताओं की पीढियां तो अपने घर भरने में ही लगी रहीं और भ्रष्टाचार को इस कदर पचने वाला तत्व बना दिया गया भारतीय समाज में भारतीय राजनेताओं द्वारा कि ऐसा माने जाना लगा कि ईमानदारी की बात करने वाला आदमी “पागल” होता है|
दशकों भारत में भ्रष्टाचार का अँधेरा व्याप्त रहा है अब जाकर कुछ रोशनी की किरण चमकी है और इस आशा को जगाने में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का बहुत बड़ा हाथ है, परन्तु यह आंदोलन किसी खास राजनीतिक दल के खिलाफ सीमित नहीं हो सकता और इसीलिए जो लोग इस आंदोलन से अपने राजनीतिक हित साधने के लिए जुड़े थे वे धीरे धीरे करके अपने अपने राजनीतिक आकाओं के पाले में जाकर बैठ गये हैं और खुलकर भारतीय राजनीति में ईमानदारी लेन वाले निष्पक्ष योद्धाओं के खिलाफ मोर्चा संभाल रहे हैं|

AKpolice
45 साल के अरविंद केजरीवाल को भी हम लोग अपने को निरंतर अपने को गढते, तराशते और तैयार करते देख रहे हैं और उनके बहुत से अन्य साथी भी इस कार्य में लगे हुए हैं| और यही एक बात बहुत बड़ी आशा बंधाती है| ऐसा कभी किसी काल में नहीं हुआ कि सिर्फ अपना हित देखने वाले भ्रष्टाचारी, बुरी ताकतों के खिलाफ कोई आवाज उठाये और ये ताकतें उस आंदोलनकारी का पुरजोर विरोध न करें| वे करेंगे और उनका लक्ष्य ऐसे विरोध को कुचलने का और संभव हो तो ऐसे नेता को नष्ट करने का होता है| यही सब कुत्सित प्रयास हमारे इर्द-गिर्द चल रहे हैं| पर बुराई के साथ साथ अच्छाई का जन्म और विकास भी प्रकृति में चलता ही रहता है और हर बार प्रकृति यह स्थापित करके दिखाती है कि अंततः अच्छाई बुराई पर विजय प्राप्त कर ही लेती है| यह जीत आज मिले या दस साल बाद या बीस साल बाद मिले पर भारतीय राजनीति के उद्धार की जो प्रक्रिया शुरू हुई है यह अब रुकने वाली है नहीं| आर्थिक और सुविधाओं के लिहाज से समाज के सबसे नीचे तबके से लेकर सबसे ऊपर के तबके में सुगबुगाहट है और एक मंथन चल रहा है और हर स्तर से लोग इस आंदोलन के समर्थन (और विरोध में भी) में सामने आयेंगे या मौन रहकर अपना मत देकर समर्थन देंगे| इस आंदोलन के कारवाँ के यात्रियों को हमेशा एक बात स्मृति में रखने की जरुरत है कि वे अकेले नहीं हैं और उन जैसी भावनाओं वाले करोड़ों भारतीय देश के कोने कोने में इस महान यात्रा में उनके सहभागी हैं| भारत सुधार की ओर अग्रसर है, सो स्पष्ट है कि भ्रष्ट ताकतें अपने हमलों की तीव्रता और शक्ति बढाएंगी ही पर यही उनकी हताशा का सूबूत भी होगा|

दिल्ली में और कई अन्य स्थानों पर जहां कल चुनाव होगा, “आप” कि स्थिति बहुत बेहतर है कांग्रेस और भाजपा की तुलना में, और ऐसा हुआ है भाजपा और कांग्रेसी षड्यंत्रों के बावजूद|

Vote4AAP
रात में एक आरामपूर्ण नींद के बाद सुबह उठकर ताजगी भरे मन से देश की सफाई की शुरुआत करने की बेहद महत्वपूर्ण घड़ी लोगों के सामने कल सुबह 7 बजे आ जायेगी और पूरे दिन यह शुभ उपलब्ध रहेगा| देश की सफाई के लिए “झाडू” को शक्ति देना एक पुनीत कार्य में हाथ बंटाना है| पहली बार वोट देने वालों ने इतना थ्रिल पहले कभी महसूस नहीं किया होगा जीवन में जैसा वे कल सुबह करेंगे “झाडू” को वोट देते हुए|
“आरम्भ” होती है “आप” की देश-सफाई -यात्रा कल सुबह से! कल का वोट देश में बड़े बदलाव लाने का पहला और बेहद महत्वपूर्ण कदम है|

 

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