Posts tagged ‘Gandha’

दिसम्बर 10, 2013

भीड़ में भीड़ से अलग एक चेहरा

ये आखिर हमें हुआ क्या है…baran-001
हर पल में किसी का एहसास
जैसे कोई छोड़ गया हो हवा में
गंध अपनी देह की

आती जाती सांस में

समा जाता है अहसास

जैसे  उसके स्पर्श का
हर तरफ बस

एक ही चेहरा
भीड़ में

भीड़ से अलग जैसा

Rajnish sign

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नवम्बर 20, 2013

ज़िन्दगी ख्वाब क्यूँ न हुयी…

रात की खुमारी,MB-001
तेरे बदन की खुशबू,
नथुनों में समाती मादक गंध
तेरे होठों से चूती शराब…
तेरे सांचे में ढले बदन की छुअन
रेशम में आग लगी हो जैसे
तराशे हुए जिस्म पे तेरे

फिरते मेरे हाथ
वो लरजना
वो बहकना
वो दहकना
वो पिघलना
हाय वो मिलना

अगर वो ख्वाब था तो इतना कम क्यूँ था
अगर वो ख्वाब था तो ज़िन्दगी ख्वाब क्यूँ न हुयी…

(रजनीश)

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