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जनवरी 25, 2015

अरविंद केजरीवाल : “पैसे सबसे लेना पर वोट झाड़ू पर ही देना” पर चुनाव आयोग को जवाब

AKpoliceदिनांक: 24/01/2015
सेवा में,
माननीय मुख्य चुनाव आयुक्त
भारतीय चुनाव आयोग, दिल्ली
निर्वाचन सदन,
अशोका रोड, नई दिल्ली
मुझे चुनाव आयोग से नोटिस मिला है। मुझ पर आरोप है कि मैं लोगों को रिश्वत लेने के लिए प्रोत्साहित कर रहा हूं। ये आरोप सरासर गलत है। हमारी पार्टी रिश्वतखोरी के सख़्त खिलाफ है। देश की राजनीति को साफ़ करने के लिए और भ्रष्टाचार दूर करने के लिए ही हमारी पार्टी का जन्म हुआ है। ऐसे में मैं किसी को रिश्वत देने अथवा लेने को प्रोत्साहित करूंगा, ऐसा मैं सपने में भी नहीं सोच सकता।आज इस सच को नहीं झुठलाया जा सकता कि हमारे देश के कई नेता और पार्टियां पैसे और अन्य सामान बांट कर वोट खरीदते हैं। सरकार, चुनाव आयोग और कई गैर सरकारी संगठनों के सतत प्रयासों के बावजूद यह अभिशाप हमारे देश की राजनीति का अभिन्न अंग बन चुका है।इसे कैसे रोका जाए? राजनीति की इस कुरीति को रोकने के लिए ही हमने ये तरीका अपनाया है। मैंने अपने भाषणों में जो कुछ कहा उसका असली तात्त्पर्य है- ‘‘जो पैसा दे, उससे पैसा ले लो। लेकिन पैसा देने वालो वोट बिल्कुल नहीं दो। वोट अपने मन से दो। वोट उसे दो जो पैसा नहीं दे रहा।’’

अगर मेरे भाषण को ध्यान से सुने तो मेरे कहने का मर्म यही है। अगर मैं कहता कि जो पैसा दे उसी को वोट दो, तब आप मुझ पर इल्ज़ाम लगा सकते थे कि मैं लोगों को रिश्वत देकर वोट डालने के लिए प्रोत्साहित कर रहा हूं। मैं तो इसके बिल्कुल उल्टा कह रहा हूं। मैं तो कह रहा हूं जो पैसा दे उसे वोट बिल्कुल मत दो। इस तरह से तो मैं रिश्वतखोरी रोकने का काम कर रहा हूं। मैं तो आप ही की मदद कर रहा हूं।

हमने पिछले दिल्ली विधानसभा के चुनाव के पहले भी अपने हर भाषण में ये बात कही थी। तब किसी ने कुछ नहीं कहा। मैंने लोकसभा चुनाव के दौरान भी अपने हर भाषण में यही बात कही थी, तब भी किसी ने कुछ नहीं कहा। लेकिन अब भाजपा और कांग्रेस दोनों ने मेरे खिलाफ शिकायत की है। ऐसा क्यों? अब इन्हें क्या तकलीफ़ हो रही है?

ऐसा इसलिए क्योंकि एक साल के अंदर दिल्ली का वोटर धीरे-धीरे समझदार हो गया है। वो भारी संख्या में इस बात को लागू करने लगा है कि जो पैसा देगा उससे पैसा तो ले लेंगे पर वोट उसे कतई नहीं देंगे। इसलिए ये पार्टियां घबरा गईं कि इनका पैसा बेकार हो जाएगा। अब इन पार्टियों को पता चल गया है कि पैसे देकर वोट नहीं खरीद पाएंगे। अब इन पार्टियों को पता चल गया है कि चुनाव के कि चुनाव के दौरान रिश्वतखोरी नहीं चलेगी। इसलिए इन दोनों पार्टियों ने घबराकर और बौखलाकर मेरे खिलाफ शिकायत की है।

मैंने तो ये अपील करके हमारी राजनीति की एक गंदी परंपरा को बंद करने की दिशा में एक बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। जिसे मीडिया तोड़-मरोड़कर भ्रष्ट पार्टियों के इशारे पर जनता के सामने गलत रूप से पेश कर रही है. अपने हर भाषण में मैं जनता से पूछता हूँ – ‘‘क्या बीजेपी-कांग्रेस वाले चुनाव के टाइम पैसे देने आते हैं?’’ जनता ज़ोर से चिल्लाकर एक आवाज़ में कहती है- ‘‘हां आते हैं।’’ इसका मतलब वोट खरीदने की परंपरा बहुत बड़े पैमाने पर चल रही है।

पिछले एक साल से मेरी अपील ने इस गंदी परंपरा को तोड़ने में बहुत अहम्‌ भूमिका निभाई है। इसीलिए ये दोनों पार्टियां बुरी तरह से घबरा गई हैं। और इसलिए इन्होंने आपके समक्ष मेरी शिकायत की है।

आपको याद होगा कि जब मैं मुख्यमंत्री बना तो मैंने दिल्ली के लोगों को रिश्वतखोरी पर कुछ इसी तरह का आह्‌वान किया था। मेरा आह्‌वान कई लोगों को अटपटा लगा। कुछ लोगों का मानना था कि मैं रिश्वतखोरी को प्रोत्साहन दे रहा हू। लेकिन आपने देखा कि मेरी इस अपील ने भ्रष्ट कर्मचारियों के मन में ऐसा खौप़ पैदा कर दिया कि उन 49 दिनों में दिल्ली में रिश्वतखोरी लगभग बंद हो गई थी।

उस वक्त भी मैंने रिश्वतखोरी बंद करने के लिए जनता से मदद मांगी थी और आज भी रिश्वतखोरी बंद करने के लिए जनता से ही मदद मांग रहा हूं।

आज जब मैं दिल्ली के वोटरों से ये अपील कर रहा हूं कि पैसा सब से ले लो, लेकिन वोट उस पार्टी को दो जो आपको पैसा नहीं दे रही। कुछ लोगों को मेरी अपील अटपटी लग सकती है। लेकिन राजनीति को साफ़ करने में इस अपील ने एक अहम भूमिका निभाई है। और दोनों पार्टियों की बौखलाहट में इसका असर दिखाई देता है।

कानूनी रूप से भी मैंने और मेरे वकीलों ने कानून में दी गई ‘‘रिश्वतखोरी’’ की परिभाषा को अच्छे से पढ़ा है। कानूनन भी मेरी अपील किसी भी तरह से रिश्वतखोरी की अपील नहीं मानी जा सकती। आपके नोटिस कानूनी रूप से जवाब इस पत्र के साथ में संलग्न है।

मैं चुनाव आयोग की बहुत इज्ज़त करता हूं। मैं हमारे संविधान और कानून की भी बहुत इज्ज़त करता हूं। मैं किसी भी हालत में कोई कानून नहीं तोड़ूंगा। मेरी उपर दी गईं दलीलों के बावजूद यदि आपको लगता है कि मेरी अपील गलत है तो जब तक MCC लागू है, तब तक मैं ये अपील करना बंद कर दूंगा। लेकिन मेरी आपसे एक विनती है यदि आप मेरी दलीलों से असहमत हैं तो मुझे एक बार व्यक्तिगत रूप से पेश होकर आपके समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर जरूर दें।

भवदीय,
अरविन्द केजरीवाल!

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अप्रैल 3, 2014

“आप” डायरी (3 अप्रैल 2014) : मेनिफेस्टो, जनसभाएं, ईवीएम में गडबडी

AAP manifestoआम आदमी पार्टी (आप) ने 3 अप्रैल 2014 को लोकसभा चुनाव के लिए अपना घोषणापत्र (मेनिफेस्टो) जारी कर दिया [आप” का मेनिफेस्टो यहाँ पढ़ें| दिल्ली विधानसभा चुनाव के समय “आप” ने 70 विधानसभा क्षेत्रों के लिए अलग-अलग घोषणापत्र जारी किये थे जिनके बहुत सारे अंश बाद में भाजपा ने भी कॉपी किये| भारत में केन्द्र की राजनीति में प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने अभी तक अपना चुनावी घोषणापत्र जारी नहीं किया है और ऐसा बताया गया है कि भाजपा 7 अप्रैल को अपना घोस्नापत्र जारी करेगी| गौरतलब है कि उसी दिन लोकसभा चुनाव का पहला चरण शुरू है और देश के कई हिस्सों में मतदान होगा| इसका अर्थ यह भी कि इन् क्षेत्रों से भाजपा को कोई सरोकार नहीं है वरना पहले ही अपना घोषणापत्र जारी कर देती जिससे कि उस दिन मतदान करने वाले भारतीय भी उसका घोषणापत्र देख लेते और उस पर विचार कर लेते|

अब अगर भाजपा के घोषणापत्र में “आप” के घोषणापत्र से मिलती जुलती बातें मिलती हैं या उनके बिंदुओं की खास काट मिलती है तो यह निश्चित हो जाएगा कि भाजपा केवल “आप” के घोषणापत्र का इंतजार कर रही थी| मुख्य विपक्षी दल होने के नाते और अपना प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा महीनों पहले करने वाले दल को मेनिफेस्टो जारी करने की फुर्सत नहीं मिली यह बात पचती नहीं| या तो भाजपा मेनिफेस्टो को महत्वपूर्ण समझती ही नहीं या उसका भी यही ख्याल है कि मेनिफेस्टो को पढता कौन है? कांग्रेस और भी बड़ी गुनाहगार है इस मामले में क्योंकि आजादी के बाद वही सबसे ज्यादा सत्ता में रही है और उसने भी अपना मेनिफेस्टो कुछ ही दिन पहले जारी किया है|

EVMअसम में ईवीएम की जांच के दौरान पाया गया कि किसी भी पार्टी के उम्मीदवार के लिए मत डालने के लिए बटन दबाया गया पर मत जाकर दर्ज हुआ सिर्फ भाजपा के खाते में! कुछ अरसा पहले एक खबर छपी थी जिसे शायद दबा दिया गया कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ संभव हो सकती है और जिस तरह की तकनीकी खराबी असम वाले मामले में देखी गई है ऐसी ही संभावना का जिक्र उस खबर में था|

क्या लोकतंत्र के पीने के पानी में मिलावट हो गयी है? सीवर का पाइप अपने आप फटा है या इसे फाड़ने वाले हर सरकारी तंत्र में घुस चुके हैं? चुनाव आयोग यदि सोया रह गया तो लोकतंत्र के खात्मे के बाद उसके कर्मचारियों को को हो सकता है नगर पालिका में स्थान्तरित कर दिया जाए|

बीते दिन 2 अप्रैल को आज-तक चैनल ने स्टिंग करके खुलासा किया था कि बहुत बड़ी संख्या में नकली मतदाता पत्र बनाए गये हैं और विशेषज्ञों का कहना था कि 40% तक नकली मत पत्र बने हो सकते हैं| शरद पवार ने तो यह कहकर अपने कथन से पल्ला झाड लिया कि उन्होंने मजाक में कहा था कि वोट देने के बाद उंगली पर लगी स्याही मिटा कर दूसरी जगह जाकर वोट दे आना, पर स्टिंग में साफ़ तौर पर दिखाया गया कि कैसे दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान स्याही का दाग मिटाने वाला ५-५ किलो कैमिकल एक सप्लायर ने कांग्रेस और भाजपा दोनों को दिया| क्या दिल्ली विधानसभा के दौरान ट्रक भर कर कुछ बूथों पर शाम पांच बजे के आसपास पहुंचे मतदाताओं और इस स्टिंग के बीच कोई संबंध है? ऐसा कहा गया है कि जहां भी देर रात तक वोटिंग हुयी वहीं से “आप” के कुछ उम्मीदवार दो हजार से भी कम मतों से हारे|AAP_Delhi2

“आप” को घेर कर खत्म कर देने की ऐसी साजिशों के बीच “आप” का चुनाव प्रचार बदस्तूर जारी है और अरविंद केजरीवाल खुद दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं पिछले दो दिन से और वे सातों लोकसभा क्षेत्रों में रोड शो और जनसभाएं करेंगे| अपेक्षित रूप से जहां भी वे जा रहे हैं अथाह भीड़ उनके साथ चलने के लिए इकट्ठी हो जाती है|

त्रिलोकपुरी में अरविंद केजरीवाल ने राजमोहन गांधी के लिए जनसभा की|

भारत के हर उस क्षेत्र जहां से “आप” के उम्मीदवार खड़े हैं जनता का बड़ा तबका उनसे जुडता जा रहा हैं|

इंदौर में वहाँ के प्रत्याशी अनिल त्रिवेदी के रोड शो का नजारा कम दिलचस्प नहीं|

AAP_Indoreइंदौर मेंअरविंद केजरीवाल ने गुजरात दौरे के बाद नरेंद्र मोदी से 17 सवाल पूछे थे| गुजरात सरकार ने कई दिन बाद 16 सवालों के जवाब दिए| अरविंद केजरीवाल के सवालों के बाद गुजरात सरकार की वेबसाईट से तथ्य एबम आंकड़े हटा दिए गये और हवाला दिया गया चुनाव की वजह से हटाये गएँ हैं|

AK tweet

अरविंद केजरीवाल और “आप” को पानी पी पे कोस रहे भाजपाइयों को यह बात हजम न हो पाए कि बस कुछ ही बरस पहले नरेंद्र मोदी ट्विट के जरिये अरविंद केजरीवाल के भ्रष्टाचार की मुहीम को समर्थन देने की अपील कर रहे थे |

Modi@AK

4 अप्रैल को ही ABP चैनल पर अभिनेता आमिर खान ने ऐसे उमीदवारों की बात की जिन पर अपराध के गंभीर आरोप हैं| और दलों ने तो साँस नहीं लिया सुधार के नाम पर “आप” के मनीष सिसोदिया ने कार्यक्रम में ही घोषणा कर दी कि “आप” दो दागी उम्मीदवारों के टिकट वापिस ले रही है और बाकी 5-6 के ऊपर जांच के बाद यथोचित कार्यवाही होगी|

http://www.dailymotion.com/video/x1lmcbt_asar-with-aamir-khan-3rd-april-2014-video-watch-online-pt3_people?start=2

 

भाजपा केवल टीवी कार्यक्रम में ही आएं बाएं नहीं गाने लगी दागी उम्मीदवारों के मामले पर, बल्कि कुछ अरसा पहले इसके एक पूर्व अध्यक्ष को ऑन-रिकार्ड कहते पाया गया था कि “अगर भाजपा ईमानदार उम्मीदवारों को टिकट दे दे तो एक भी सीट न मिले”| नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से भ्रष्टाचारियों को भाजपा के अंदर से चुन कर और बाहर दूसरे दलों से आमंत्रित करके लोकसभा के टिकट बांटे हैं उससे स्पष्ट है वे किस तरह का भारत चाहते हैं और किस तरह की राजनीति उनके नियंत्रण में चलेगी|

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