Posts tagged ‘Duniyavi’

जनवरी 4, 2014

शून्य…

दुनियावी झमेलों से शुरू होकरlifeman-001

कभी न खत्म होने वाली भूलभुलैया

के बीच,

रास्ते में एक विश्राम

अब यदि हो बारिश, तो होवे

अब यदि आएं झंझावात, तो आवें!

मेरा बहुत पुराना स्व:

इस अस्तित्वहीन प्रकृति में

जहां,

मृत्यु के बाद न है जाना कहीं

न है कुछ भी !

Yugalsign1

[Zen Ikkyu की एक कविता का अनुवाद …]

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दिसम्बर 21, 2013

बंद हूँ तेरे ही प्राणों के मद में…

मेरे मन ने देह को त्याग दिया हैavishkar-001

और वह

बिस्तरे के सामने

ठीक सामने तस्वीर टांगने वाली

खूंटी पर जा बैठा है |

करवट पड़ी तुम्हारी आँखें

अब भी खुली हैं

जिनमें मेरे मन के ही प्रश्न हैं

सखे, सुन

मेरी देह से मेरे मन का न ले भान

जब तू मुझमें निमग्न हो

छूएगी अपने ही प्रान

तो पायेगी,

मन तो मेरा चिर तेरा कामी

पर देह अभ्यासी दुनियावी अनुगामी

मैं तो जब तुझमें डूबा था,

उस रात्री प्रथम

तब से,

बंद वहीं हूँ,

डूबता, तिरता, उतराता

तेरी ही साँसों की लय में,

तेरे ही प्राणों के मद में!

Yugalsign1

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