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नवम्बर 27, 2010

दुख! क्यों भटक जाता है तू … (कविता – रफत आलम)

दुख!

क्यों भटक जाता है तू ?
तेरा नाम दो आखर का
ज़रा सा,
मैं तेरा दोस्त पुराना
छह फुटा
बड़ा सा।

रग ओ जान में बसाता हूँ तुझे
अश्क के मोतियों से सजाता हूँ तुझे
खुद जाग कर सुलाता हूँ तुझे
यानि हर हाल लढ़ाता हूँ तुझे
क्या है के बहक जाता है तू
मेरे होते दुनिया को सताता है तू
दुख! क्यों भटक जाता है तू

 

(रफत आलम)

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