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मई 12, 2010

पूर्ण समर्पण

जो हुआ ठीक हुआ

बीत गया सो बात गयी

सुबह नयी है

फिर से आया है सूरज आकाश में

हवा भी तो इठलाती बल खाती चलती है साथ में

अपने हाथ फैला कर रख लो

होने वाली है सपनो की बरसात पास में

कदमों को यूँ उठा कर चलो

दिशाएं नृत्य करने लगें साथ में

आओ तुम एक गीत गा लो

जीवन को साकार बना लो

हृदय में अपनी ख़ुशियाँ भर लो

और आँखों में सितारे

कर दो पूर्ण समर्पण

वह खुदा है

सारे कारज वक़्त पर करेगा

…[राकेश]

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