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दिसम्बर 5, 2013

मुसकराहट का मंत्र

रात ने फिर से पुकारा manmoon-001

खिड़की पर पड़ा पर्दा हल्के से हिला

तारों की रौशनी में यात्रा करते चन्दा ने

झांका खिड़की से भीतर

“हैलो “!

चन्दा मुसकराया,

मैं नहीं!

फिर गुजरी रात –

और रातें गुजरती रहीं…

आज फिर,

रात ने पुकारा

पर्दे ने ज़रा सा सरककर फिर बनाई जगह

चाँद ने फिर झांका

“हैलो”!

“हैलो, आज भी नहीं मुसकराओगे?

सार्थकता की तलाश की राह में

छाती पर पत्थर रखे,

कब तक चलोगे?

देखो-

मैं विश्व घूम आया

बंद कमरों में झाँक-झाँक कर

मुस्कराहट देने का मंत्र लेकर!”

Yugalsign1

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