Posts tagged ‘Chauraha’

नवम्बर 28, 2013

उठो, समय हो गया है!

थके,manroad-001

बोझिल कदम लिए बैठा है वह

धुंए और धूल से भरी आँखें लिए

चौराहे की बैंच पर

आते-जाते परिंदों की आवाजाही

भुट्टे टूंगने की जद्दोजहद

होटल लौटने का समय हो गया है|

असमंजस के चौराहे पर

लाठी को पटक-पटक कर मारा है

छोटे-बड़े दायरों में

आवाज के वृत बनते हैं-बिगड़ते हैं

आसमान से झाँक कर,

पर कोई तो मुस्कराया है

कि-

नई डगर चलने का समय हो गया है|

Yugalsign1

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सितम्बर 6, 2011

कैसे हुई बदनाम कहानी?

शायद कहता नहीं तो रह जाती गुमनाम कहानी
किन्तु मुझे भी ज्ञात नहीं है कैसे हुई बदनाम कहानी,

कुहरे की मैं शाम हो गया
घर-बाहर नीलाम हो गया
तेरे साथ घड़ी भर रहकर
जीवन भर बदनाम हो गया

तेरी-मेरी खास बात थी मगर बन गई आम कहानी
किन्तु मुझे भी ज्ञात नहीं है कैसे हुई बदनाम कहानी,

चर्चित भी मैं खूब हुआ हूँ
गली रही हो या चौराहा
मधुर-मिलन के पहले लेकिन
आना था आया दोराहा

अलग वहाँ से होनी ही थी अपनी वो सरनाम कहानी
किन्तु मुझे भी ज्ञात नहीं है कैसे हुई बदनाम कहानी,

तुम क्या छूटे मंजिल छूटी
दिल टूटा पर प्रीत न टूटी
जैसे किसी सुहागन की हो
यौवन में ही किस्मत फूटी

सब कुछ तो लुट गया मगर शेष रही नाकाम कहानी
किन्तु मुझे भी ज्ञात नहीं है कैसे हुई बदनाम कहानी,

यूँ तो सारा खेल जगत में
विधि का ही बस रचा हुआ है
लेकिन मेरे भोले मन पर
एक प्रश्न यह खिंचा हुआ है

आखिर उजले मन की ही क्यों बन जाती है श्याम कहानी
किन्तु मुझे भी ज्ञात नहीं है कैसे हुई बदनाम कहानी।

{कृष्ण बिहारी}

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