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सितम्बर 13, 2013

आओ हम तुम चन्दा देखें

Moon

लहरों के इन हिचकोलों पर

आज नाव में संग बैठकर

साथी हसीं रात में गाते

आओ हम तुम चन्दा देखें

आओ हम तुम चन्दा देखें …

नर्म हथेली को सहलाएं

भावों में शबनम पिघलाएं

जल में अपने पाँव हिलाते

आओ हम तुम चन्दा देखें

आओ हम तुम चन्दा देखें …

धडकन जब लहरों पर धडके

अधरों पर बिजली सी तड़के

कोई भारी कसम उठाते

आओ हम तुम चन्दा देखें

आओ हम तुम चन्दा देखें …

चन्दन के पेड़ों से लिपटकर

खुशबू के घेरे में सिमटकर

करते कभी महकती बातें

आओ हम तुम चन्दा देखें

आओ हम तुम चन्दा देखें …

देखो रात जा रही है घर से

कोई गज़ल गा रही स्वर से

दामन में ले सुर-सौगातें

आओ हम तुम चन्दा देखें

आओ हम तुम चन्दा देखें …

{कृष्ण बिहारी}

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जनवरी 29, 2013

दुश्मन आवारा मन

चन्दन के वृक्षों की

खुशबू में डूबा मन

शायद मन राधा है

या फिर है वृन्दावन|

मन में क्या झूम उठी

अंग अंग चूम उठी

तन में फिर यौवन की

आंधी सी घूम उठी|

पागल सा फिरता है

अब तो बंजारा मन

आखिर क्यों इतना है

दुश्मन आवारा मन|

दूर कहीं कली खिली

नयन-नयन धूप ढली

लहरों के पंखों पर

अधरों की प्यास चली|

चलो चलें और छुएं

सागर का खारा मन

अपनी ही चाहत से

हारा बेचारा मन

{कृष्ण बिहारी}

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