Posts tagged ‘Chahat’

जनवरी 29, 2013

दुश्मन आवारा मन

चन्दन के वृक्षों की

खुशबू में डूबा मन

शायद मन राधा है

या फिर है वृन्दावन|

मन में क्या झूम उठी

अंग अंग चूम उठी

तन में फिर यौवन की

आंधी सी घूम उठी|

पागल सा फिरता है

अब तो बंजारा मन

आखिर क्यों इतना है

दुश्मन आवारा मन|

दूर कहीं कली खिली

नयन-नयन धूप ढली

लहरों के पंखों पर

अधरों की प्यास चली|

चलो चलें और छुएं

सागर का खारा मन

अपनी ही चाहत से

हारा बेचारा मन

{कृष्ण बिहारी}

जुलाई 9, 2011

तुम्हारे बिना – अंधेरा जीवन

शाम ढ़ले बाद
कई बार
होश के सभी रास्ते
चल पड़ते हैं
खुद्फ़रामोशी के अँधेरे की तरफ़।

जिस्म का जलता हुआ जुनून
भटका देता है
चाहत की रुपहली मरीचिका में
प्यास कुछ देर को मर जाती है
मगर
मेरी खोई हुई दोस्त!
जिस्म के सियाह तकाजे भी
शायद तुम्हे भुला नहीं पाते
हवस की राह में गुमनाम हमसफर
अक्सर पूछ बैठते हैं
ये अभी…
आपने किसका नाम लिया था?

(रफत आलम)

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