Posts tagged ‘Bhavna’

नवम्बर 30, 2014

अरी ओ करुणा प्रभामय…अज्ञेय

जियो उस प्यार में जो मैंने तुम्हें दिया हैagyeya
उस दुख में नही जिसे बेझिझक मैने पिया है।
उस गान में जियो जो मैंने तुम्हें सुनाया है,
उस आह में नही जिसे मैंने तुमसे छिपाया है।

उस द्वार से गुजरो जो मैंने तुम्हारे लिए खोला है
उस अंधकार से नहीं जिसकी गहराई को
बार बार मैंने तुम्हारी रक्षा की भावना से टटोला है।

वह छादन तुम्हारा घर हो
जिसे मैं असीसों से बुनता हूँ, बुनूँगा,
वे काँटेगोखतो मेरे हैं
जिन्हें मैं राह से चुनता हूँ, चुनूँगा।

वह पथ तुम्हारा हो
जिसे मैं तुम्हारे हित बनाता हूँ, बनाता रहूँगा,
मैं जो रोड़ा हूँ, उसे हथौड़े से तोड़तोड़
मैं जो कारीगर हूँ, करीने से
सँवारता सजाता हूँ, सजाता रहूँगा।

सागर के किनारे तक
तुम्हें पहुँचाने का
उदार उद्यम मेरा होः
फिर वहॉ जो लहर हो, तारा हो,
सोनतरी हो, अरुण सवेरा हो,
वह सब, ओ मेरे वर्ग !
तुम्हारा हो, तुम्हारा हो, तुम्हारा हो।

(अज्ञेय)

नवम्बर 23, 2013

गीत क्या खाक बनेंगे?

अगर मैं लिख सकताtabu-001

तो एक गीत ज़रूर लिखता

गीत लिखता…

तुम्हारे नाम

रसपूर्ण…

भावपूर्ण…

स्नेहसिक्त …

प्रेममय…

गीत,

जो होता अभिव्यक्ति…

तुम में मेरी श्रद्धा का…

मेरे मित्रवत स्नेह  का…

मेरे उद्दाम प्रेम का…

गीत,

जो जगाता  तुम्हारे मन को…

हौले से

जो खोलता…

हृदय कपाटों को

जो कानो में घुल के

उतर  जाता गहरे मन में

गीत,

लिखता…

तुम्हारे रक्तिम होंठो पे

गहरे झील से नयनो पे

उठती गिरती चितवन पे

तुम्हारे  उन्नत यौवन पे

साँसों के आन्दोलन पे

भावनाओ के ज्वार पे

और दिल में दबे प्यार पे

पास आओ तो शायद शब्द ढल जाएँ

गीत में

तुम्हारे बिना तो

शब्द

खोखले हैं

बेमानी हैं

गीत क्या खाक बनेंगे?

(रजनीश)

%d bloggers like this: