Posts tagged ‘Bemani’

नवम्बर 23, 2013

गीत क्या खाक बनेंगे?

अगर मैं लिख सकताtabu-001

तो एक गीत ज़रूर लिखता

गीत लिखता…

तुम्हारे नाम

रसपूर्ण…

भावपूर्ण…

स्नेहसिक्त …

प्रेममय…

गीत,

जो होता अभिव्यक्ति…

तुम में मेरी श्रद्धा का…

मेरे मित्रवत स्नेह  का…

मेरे उद्दाम प्रेम का…

गीत,

जो जगाता  तुम्हारे मन को…

हौले से

जो खोलता…

हृदय कपाटों को

जो कानो में घुल के

उतर  जाता गहरे मन में

गीत,

लिखता…

तुम्हारे रक्तिम होंठो पे

गहरे झील से नयनो पे

उठती गिरती चितवन पे

तुम्हारे  उन्नत यौवन पे

साँसों के आन्दोलन पे

भावनाओ के ज्वार पे

और दिल में दबे प्यार पे

पास आओ तो शायद शब्द ढल जाएँ

गीत में

तुम्हारे बिना तो

शब्द

खोखले हैं

बेमानी हैं

गीत क्या खाक बनेंगे?

(रजनीश)

नवम्बर 21, 2013

एक टुकड़ा सच

कल नहीं होंगे विषादvon-001

जब हम-तुम याद करेंगे

कि-

जीवन जितना भी देता है

सहेजने- संजोने को होता है

सखे, पीड़ा का सत्व

सुखकर होगा अवश्य ही|

कल,

जब हम-तुम संधान कर चुकेंगे

कि –

होती है एक छोटी सी मुलाक़ात भी,

सम्पूर्ण

नहीं होता है सब कुछ बेमानी

मौन भी है बोलता कभी-कभी

प्रिये,

अमूल्य हैं पोरों पर अटके ये मोती

कल फिर मिलेंगे हम,

तो जानेंगे कि-

हमने जिया है

एक टुकड़ा सच

साथ-साथ

Yugalsign1

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