Posts tagged ‘Bebas’

नवम्बर 22, 2013

आह! मेरे मन

चौतरफा घिर गयेRKap-001

शावक सा

बेबस,

भूल-भुलैया में खोये

बालक सा

भयभीत,

आस की डोर छोड़ चुके

चकोर सा

कातर,

मेरा मन!

तिरती- डूबती कश्ती का संघर्ष

निरुद्देश्यता का कालापन, चहुँ ओर

और,

इनसे अपनी उपजी घटाटोप विवशता

उनींदी आँखों में लाल डोरों की जद्दोजहद

किसलिए?

एक टुकड़ा बादल,

मुट्ठी में भर लेने की चाह

आह,

मेरे मन!

Yugalsign1

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सितम्बर 30, 2011

सब बेकार की बातें हैं

आदमी की कीमत नहीं मानव अंगों का बाज़ार है बड़ा
रहम-करम, दया-करुणा, शराफत सब बेकार की बातें हैं

आत्महत्या करने पर मजबूर है बेबस सर्वहारा आदमी
ईमानदारी, इन्साफ, इंसानियत सब बेकार की बातें हैं

शहर में आजकल फैशन है दो रातें लिवइन रिश्तों का
इश्क, प्रीत–प्रेम, प्यार, मोहब्बत सब बेकार की बातें हैं

खूनेदिल का लिखा रद्दीभाव, सरकारी चालीसे चलते हैं
गद्य, कविता, समीक्षा, ज़हानत सब बेकार की बातें हैं

झूठ को सौ बार बोल कर सच बनाने वाले का दौर है
सत्य, यथार्थ, सच्चाई, हकीक़त सब बेकार की बातें हैं

सकून की ज़रूरत कहाँ तनाव पालने वाली बस्ती को
सूफी–दरबार, आध्यात्मिक-संगत सब बेकार की बातें हैं

ज़हानत – बुद्धिजीविता

(रफत आलम)

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