Posts tagged ‘Arvind Kejriwal’

अप्रैल 23, 2015

अरविन्द केजरीवाल के नाम खुला पत्र : (योगेन्द्र यादव, प्रशांत भूषण का पार्टी से निष्काषन)

श्री अरविन्द केजरीवाल, संयोजक (आम आदमी पार्टी) के नाम खुला पत् र:

आम आदमी पार्टी की अनुशासन समिति द्वारा चार प्रमुख सदस्यों प्रशांत, योगेन्द्र, आनन्द कुमारअजित झा को पार्टी से निष्कासित किये जाने के फैसले की हम {परमजीतसिंह (सचिव) व राजीव गोदारा (मुख्य प्रवक्ता) आम आदमी पार्टी}, घोर निंदा करते हैं व इस फैसले को आप के मूल सिद्धांत स्वराज के खिलाफ मानते हैं |

जिस अनुशासन समिति का गठन 29 मार्च को किया गया उसी समिति ने प्रशांत भूषण, योगेन्द्र यादव, आनन्द कुमारअजीत झा को कारण बताओ नोटिस जारी कर 48 घंटे मेंजवाब मांगा | प्रशांत, योगेन्द्र व आनन्द कुमार ने विस्तृत जवाब दिए जबकि अजीत झा ने नोटिस भेजने वालीअनुशासन समिति को असैंवधानिक करार देते हुए जवाब नहीं दिया |

प्रशांत व योगेन्द्र ने कारण बताओ नोटिस के अपने जवाब में समिति के दो सदस्यों पंकज गुप्ताआशीष खेतान से निवेदन किया था कि वे दोनों लोग पहले ही प्रशांत व योगेन्द्र के खिलाफ सार्वजनिक रूप से ब्यान देकर उन्हें पार्टी विरोधी करार दे चुके हैं, इस लिए इन दोनों को फैसला करने की प्रक्रिया से हट जाना चाहिए | कारण बताओ नोटिस में वही आरोप लगाए गए हैं जिन पर पंकज गुप्ताआशीष खेतान पहले ही फैसला दे चुके हैं |

जवाब दिए जाने के कुछ ही घंटों बाद “अनुशासनसमिति” ने रात को ही इन चारों नेताओं को पार्टी से निकालेजाने का फैसला ले लिया व इन नेताओं को भेजने से पहले ही मिडिया को भेज दिया गया | हमें उम्मीद थी पार्टी कि अनुशासन समिति अपने फैसले की प्रति को भी सार्वजानिक करेगी, जबकि फैसला व आरोप सार्वजानिक किये गए हैं | हमें आशा थी कि उस फैसले में निष्काषित किये गए नेताओं के जवाब पर विचार कर उसे संतोषजनक ना माने जाने के कारण बताये जायेंगें व साथ साबित हुए आरोपों बारे भी स्पष्टता होगी | मगर लम्बी इन्तजार के बाद भी फैसले की जानकारी नहीं मिल पाई है | यह भी नहीं कहा बताया गया कि कौन से आरोप साबित हुए |

हम निम्न कारणों के चलते इस फैसले का विरोध करतें है:

1) फैसले के सार्वजानिक नहीं होने से व निष्काषित लोगों को नहीं मिलने से यह साफ़ हो जाता है कि इन लोगों के जवाब को जांचा ही नहीं गया |

2) समिति के दो सदस्यों पंकज गुप्ता व आशीष खेतान दोनों ने प्रशांत व योगेन्द्र के खिलाफ न सिर्फ आरोप लगाए बल्कि नोटिस से पहले ही उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियाँ करने का दोषी करार दिया था | उन्हीं दो लोगों को जाँच समिति में रखा गया | पूर्वाग्रह के चलते इन्हें फैसले की प्रक्रिया से हट जाने के निवेदन के बाद भी स्वीकार नहीं किया गया | ना ही कोई कारण बताया गया कि ये दोनो लोग फैसले की प्रक्रिया से अलग क्यों नहीं हुए |

3) प्रशांत, योगेन्द्र व आनन्द कुमार के जवाब में दिए गए तथ्यों व जवाब की समीक्षा नहीं की गई |

4) प्रशांत जी के जवाब के साथ उनकी अध्यक्षता वाली अनुशासन समिति (जिसमें पंकज गुप्ता भी सदस्य थे) की कार्यवाही की मिनट्स भी भेजे गए | उससे जाहिर होता है कि जिन लोगों के खिलाफ अनुशासनहीनता की कार्यवाही चल रही थी उन्हें व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाया गया था, मगर इन चार वरिष्ठ साथियों को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए नहीं बुलाया गया |

हम मानते हैं कि ऊपर दिए गए तथ्य चार नेताओं के निष्कासन की निंदा करने के लिए पर्याप्त कारण हैं | इस फैसले से न्याय के हर सिद्धांत को तिलांजली दी गई है | यह फैसला साफ़ करता है कि स्वराज व आंतरिक लोकतंत्र की आवाज उठाने वालों को इसी तरह से पार्टी से बाहर किया जाएगा |

मगर हम स्वराज व आन्तरिक लोकतंत्र के लिए स्वयं की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए “अनुशासन समिति” द्वारा प्रशांत, योगेन्द्र, आनन्द कुमार व अजीत झा को पार्टी से बहार किये जाने के फैसले की कड़ी निंदा करते हैं, साथ ही आगाह करना चाहते हैं कि पार्टी अपने स्वराज के रास्ते से भटक रही है | यदि समय रहते पार्टी का राष्ट्रिय नेतृत्व नहीं चेता तो जनता उसके अहंकार का जवाब देगी |

हम अंत में कहना कहते हैं कि प्रशांत भूषण ने जो मुद्दे अपने जवाब में उठाये हैं, उन की तुरंत जाँच करवाई जाये | साथ ही हमारी मांग है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान जिन दो उम्मीदवारों की टिकट लोकपाल के कहे पर बदली गई थी, उन टिकटों को दिए जाने की सिफारिस करने वालों के नाम सार्वजानिक किये जाएँ व उनके खिलाफ कार्रवाई की जाये | हम मांग करते हैं कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य नवीन जयहिंद के खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों व आर्थिक अनियमितताओं सम्बन्धी मामले में लंबित जाँच, जिसमें हरियाणा के संयोजक से डिटेल रिपोर्ट भेजी जा चुकी है (प्रशांत जी के जवाब के साथ 16/10/2014 को हुई अनुशासन समिति की बैठक के फैसले का सलंगन दस्तावेज यह बताता हैं) को लोकपाल समिति के पास तुरंत भेजा जाए | साथ ही राजेश गर्ग (पूर्व विधायक) द्वारा जेटली के नाम से फोन करवाने के आरोपों के मामले की जाँच जल्द पूरी करने के लिए दिल्ली पुलिस को आग्रह किया जाये |

परमजीत सिंह (8950213717 ) राजीव गोदारा (9417150798)

सचिव मुख्य प्रवक्ता

आम आदमी पार्टी, हरियाणा आम आदमी पार्टी, हरियाणा

मार्च 19, 2015

“आम आदमी पार्टी” राजनीतिक अव्यावहारिकता का संकट : ओम थानवी

AAP_OmThanvi

साभार : प्रभात खबर ( १४ मार्च २०१५)

फ़रवरी 4, 2015

योगेन्द्र यादव का सर्वे (आप जीतेगी 51 सीटें या अधिक ) : अरविंद केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल द्वारा सोशल मीडियाऔर अन्य स्थानों पर जारी बयान के मुताबिक़ –

Aam Aadmi Party leader and noted psephologist Yogendra Yadav on Wednesday made public the findings of the pre-poll survey commissioned by the party before the Delhi assembly elections.
Survey findings are based on questions to 3188 respondents (the exercise conducted on Jan 31 & Feb 1) in 35 constituencies (odd assemblies picked).

The main findings of the survey are :

Party vote percentage : AAP 46%, BJP 33%, Cong 11 % (finally adjusted from raw data)

Seat projection for parties (likely scenario) : AAP 51, BJHP 15 and Cong + others 4.

आम आदमी जीत रहा है!

7 फ़रवरी को इतिहास लिखा जाने वाला है!

 

AAP survey

फ़रवरी 1, 2015

आम आदमी पार्टी : मेनिफेस्टो (दिल्ली विधानसभा चुनाव 2015)

दिल्ली विधानसभा चुनाव घोषणापत्र-2015

70 सूत्री कार्ययोजना

आम आदमी पार्टी के लिए, राजनीति एक परस्पर संवादात्मक और निरंतर संवाद की प्रक्रिया है। दिल्ली विधान सभा नवंबर 2014 के पहले सप्ताह में भंग कर दी गई थी, इसके तुरंत बाद, आम आदमी पार्टी ने अपने बहुचर्चित व सफल कार्यक्रम दिल्ली संवाद Delhi Dialogue  की शुरूआत की। और इस अनूठी पहल के जरिए पार्टी ने समाज के विभिन्न वर्गों के विशेषज्ञों व आम नागरिकों के बीच साझेदारी के जरिए नए व गंभीपर सुझावों के आधार पर पार्टी के घोषणापत्र की रूपरेखा तैयार की है।

एक ईमानदार, जवाबदेह और उत्तरदायी राजनीतिक दल शासन में लोगों की भागीदारी को अहम मानती है। दिल्ली डायलॉग में जाने-माने शिक्षाविदों, व्यवसायियों, नौकरशाहों,निर्वाचित अधिकारियों, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विद्वान, विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ और आम आदमी के विचार को भी शामिल किया गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इऩ सबने मिलकर दिल्ली के भविष्य के लिए-हमारे भविष्य के एक ठोस व प्रभावी खाका तैयार किया है।

विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के साथ आम लोगों की सैकड़ों बैठकों और गोल मेज के आयोजनों, ऑनलाइन टिप्पणियों, ईमेल सुझाव, WhatsApp संदेश, ट्वीट्स और फेसबुक टिप्पणियों के जरिए हजारों प्राप्त सुझावों के बाद आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के युवाओं, महिलाओं, व्यापारियों. व्यावसायियों, उद्यमियों, ग्रामीण व शहरीकृत गांवों, सफाई कर्मचारियो, अल्पसंख्यकों, अनधिकृत व पुनर्वास कॉलोनियों, जेजे कल्सटर्स, रेसिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन, कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटियों और ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों के लिए 70 सूत्री कार्ययोजना तैयार की है।

दिल्ली के नागरिकों की दृष्टिकोण और आकांक्षाओं को सूचित करने के लिए बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, स्वच्छता, रोजगार, परिवहन, सामाजिक न्याय, महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा के मुद्दों पर दिल्ली डायलॉग के तहत चर्चा हुई। दिल्ली डायलॉग के दौरान कई ऐसे मुद्दे भी उठे जो दिल्ली सरकार के अधिकार क्षेत्र के तहत नहीं आते । आम आदमी पार्टी ऐसे मुद्दों का भी नेतृत्व करेगी और अपनी पूरी नैतिक और राजनीतिक अधिकार के साथ इन मुद्दों का समाधान देश के समक्ष लाने की कोशिश करेगी।

दिल्ली डायलॉग का उद्देश्य दिल्ली के विकास के लिए ऐसा खाका तैयापर करना था जो दिल्ली के सभी क्षेत्रों के लोगों के इंद्रधनुषी आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करेगा। आम आदमी पार्टी की नजर में दिल्ली की परिकल्पना:-

 

  • सबके लिए रोजगार

  • सबके लिए उच्च स्तरीय शिक्षा

  • सर्वोत्तम स्वास्थ्य सुविधाएं

  • महिलाओं की सुरक्षा

  • आबादी के हिसाब से सड़कें, वाहन और परिवहन सुविधाएं

  • बिजली सस्ती और सबके लिए

  • मुफ्त पीने का पानी

  • नागरिकों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं

  • यमुना की सफाई, स्वच्छता और सौंदर्यीकरण

  • सभी धर्म और समुदाय के बीच परस्पर प्रेम

  • प्रदूषण मुक्त दिल्ली

  • शासन व विकास में आम जनता की भागीदारी

  • समृद्ध, आधुनिक और प्रगतिशील दिल्ली

 

 

आम आदमी पार्टी दिल्ली में ऐसी सरकार लेकर आएगी जो पारदर्शिता सहाभागिता और परस्पर संवाद की पक्षधर होगी और दिल्ली में अपने 70 सूत्री कार्य योजना को पूरा करने की दिशा में काम करेगी-

  1. दिल्ली जनलोकपाल बिल: आम आदमी पार्टी सत्ता में आने के बाद दिल्ली जन लोकपाल विधेयक को पारित करेगी। दिल्ली सरकार के सभी सरकारी अधिकारी (मुख्यमंत्री,मंत्री और विधायक) भी इसके जांच के दायरे में आएंगे। दिल्ली के सरकारी अधिकारियों के लिए अपनी परिसंपत्तियों के बारे में सालाना घोषणा करना जरूरी होगा। किसी भी अघोषित परिसंपत्तियों को जब्त कर लिया जाएगा। भ्रष्टाचार के मामलों की समयबद्ध जांच सुनिश्चित होगी। दिल्ली लोकपाल को भ्रष्टाचार के आरोपी लोगों के खिलाफ जांच और अभियोजन शुरू करने की शक्ति होगी। दिल्ली के सभी सरकारी दफ्तरों में’नागरिक चार्टर भी शुरू की जाएगी। ह्विसल्ब्लोअर्स को सुरक्षा दी जाएगी और भ्रष्टाचार विरोधी प्रणाली में योगदान देने के लिए उन्हें सम्मानित भी किया जाएगा।

  2. स्वराज विधेयक: आम आदमी पार्टी स्वराज लाएगी -यानि स्व-शासन और सबसे अच्छा प्रशासन। आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली में शासन संरचना में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध है जिसमें स्थानीय समुदायों को सूक्ष्म स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता होगी। इससे नौकरशाहों और निर्वाचित प्रतिनिधियों की बजाए फैसले लेने की राजनीतिक क्षमता आमलोगों के हाथों में होगी। इसके लिए आम आदमी पार्टी स्वराज विधेयक कानून लाएगी। स्थानीय समुदाय को प्रभावित करने वाले निर्णय नागरिकों द्वारा लिए जाएंगे और उन्हें सचिवालय द्वारा लागू किया जाएगा। मोहल्ला सभा को और रेसिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन को स्थानीय क्षेत्र विकास (सी-लाड) फंड दिया जाएगा।

3.दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा- संवैधानिक ढांचे के भीतर रहते हुए आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए अपनी नैतिक और राजनीतिक अधिकार का प्रयोग करेगी। डीडीए, एमसीडी और दिल्ली पुलिस दिल्ली की निर्वाचित सरकार के प्रति जवाबदेह हो यह भी सुनिश्चित करेगी।

4.बिजली बिल आधे किए जाएंगे- आम आदमी पार्टी की सरकार बिजली के बिल को आधे से कम करने के अपने वादे को निभाएगी। साथ ही बिलिंग में गड़बड़ियों और मीटर दोषों को सही करने के अलावा  बढ़ती बिजली बिलों से परेशान जनता को राहत प्रदान करने के उपाय करेगी।

5.डिस्कॉम का स्वतंत्र ऑडिट- आम आदमी पार्टी बिजली वितरण कंपनियों को ऑडिट कराएगी। ऑडिट परिणाम विधानसभा में पेश करने के बाद, बिजली टैरिफ का पुनर्गठन किया जाएगा।

6.दिल्ली का अपना पॉवर स्टेशन- आम आदमी पार्टी दिल्ली में अपना पावर स्टेशन लगाने की पक्षधर है और मानती है कि इससे दिल्ली में 6200MW तक बिजली की खपत को पूरा करने में सहायता मिलेगी और इससे बिजली समस्या का समाधान होगा। राजघाट और बवाना संयंत्र का कुशलता से संचालन भी किया जाएगा।

7.बिजली वितरण कंपनियों में प्रतिस्पर्धा की शुरूआत- आम आदमी पार्टी उपभोक्ताओं को बिजली प्रदाताओं के बीच चयन करने का अधिकार प्रदान करने संबंधी दिसम्बर 2013 के दिल्ली घोषणा पत्र  में किए अपने वादे को फिर से दोहराती है। दिल्ली में बेहतर सेवाएं प्रदान करने और टैरिफ में कमी के लिए प्रतिस्पर्धी वितरण प्रणाली को लागू करेगी।

8.दिल्ली को सोलर सिटी बनाने की योजना- आम आदमी पार्टी ऊर्जा के अक्षय और वैकल्पिक स्रोतों के लिए एक चरणबद्ध पारी की शुरूआत करेगी। घरों, हाउसिंग सोसायटी,उद्यम और उद्योगो को सौर उर्जा के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। वर्ष 2025 तक दिल्ली में ऊर्जा जरूरतों का 20 प्रतिशत सौर ऊर्जा के माध्यम से प्राप्त करने का लक्ष्य है।

9.पानी का अधिकार- आम आदमी पार्टी एक अधिकार के रूप में पानी उपलब्ध कराएगी। पार्टी किफायती मूल्य पर दिल्ली के सभी नागरिकों को स्वच्छ पेयजल की सुविधा देगी। पानी को अधिकार बनाने के लिए आम आदमी पार्टी दिल्ली जल बोर्ड के अधिनियम में भी संशोधन करेगी। एक समयबद्ध योजना के तहत दिल्ली को दिल्ली जल बोर्ड के पाइप कनेक्शन व सीवेज नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।  पानी सप्लाई व वितरण प्रणाली को सुचारू बनाया जाएगा।

10.मुफ्त पानी- आम आदमी पार्टी दिल्ली जल बोर्ड के मीटर के जरिए प्रति माह हर घर के लिए 20 किलोलीटर (20,000 लीटर) तक मुफ्त जीवन रेखा पानी सुनिश्चित करेगी। इस योजना से हाउसिंग सोसायटी भी लाभान्वित होंगे।

11.निष्पक्ष और पारदर्शी पानी मूल्य निर्धारण- आम आदमी पार्टी सस्ती व स्थायी कीमत पर दिल्ली के सभी नागरिकों को पीने के पानी की सुविधा मुहैया कराएगी। पानी की दरों में अनिवार्यत: सालाना 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी के प्रावधान को समाप्त करेगी और किसी भी तरह की बढ़ोतरी विचार-विमर्श के बाद ही की जाएगी।

  1. मुनक नहर से पानी-दिल्ली हरियाणा से अतिरिक्त कच्चे पानी की हकदार है । उच्च न्यायालय के इस आदेश  का कार्यान्वयन हो इसके लिए आम आदमी पार्टी पूरी कोशिश करेगी।
  2. जल संसाधन बढाने पर जोर-आम आदमी पार्टी की सरकार वर्षा जल संचयन, कुओं के पुनर्भरण, वाटरशेड विकास और मिट्टी-जल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं के जरिए जल संसाधनों की कमी को पाटने की पहल करेगी। आम आदमी पार्टी मोहल्ला सभा की साझेदारी से झीलों, तालाबों और बावड़ियों जैसे जल निकायों को पुनर्जीवित करेगी।
  3. पानी माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई-आम आदमी पार्टी राजनीतिक नेताओं के संरक्षण में पनप रहे दिल्ली के शक्तिशाली पानी माफिया पर रोक लगानेके लिए प्रतिबद्ध है। आम आदमी पार्टी एक पारदर्शी टैंकर पानी वितरण प्रणाली विकसित करेगी। विभिन्न इलाकों में सक्रिय टैंकरों की अनुसूची ऑनलाइन और मोबाइल फोन पर उपलब्ध कराई जाएगी। निजी टैंकरों को आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा बनाये दिशा निर्देशों के तहत काम करने की अनुमति दी जाएगी। इससे काफी हद तक पानी के अधिक मूल्य निर्धारण और निजी टैंकर ऑपरेटरों की मनमानी से उपभोक्ताओं की रक्षा हो सकेगी।
  4. यमुना पुनर्जीवित-यमुना नदी एक लंबे समय से दिल्ली की सामूहिक स्मृति का हिस्सा रही है लेकिन जीवन रेखा नदी मर रही है। आम आदमी पार्टी इसको फिर से पुनर्जीवित करने के लिए संभावित कदम उठाएगी। इसी कड़ी में एक व्यापक सीवरेज नेटवर्क और नई कार्यात्मक मलजल उपचार संयंत्रों के निर्माण किया जाएगा। साथ ही यमुना नदी में अनुपचारित पानी और औद्योगिक अपशिष्ट के प्रवेश पर सख्ती से रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाएगी।
  5. वर्षा जल संचयन को प्रोत्साहन-आम आदमी पार्टी की सरकार वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देगी। वर्षा जल संचयन को अपनाने वाले परिवारों को पानी अनुकूल परिवारों-water- friendly families कहा जाएगा। ऐसे परिवारों को सरकार प्रोत्साहन भी देगी।
  6. 200,000 सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण-आम आदमी पार्टी 2 लाख शौचालय बनवाएगी। मलिन बस्तियों और जेजे क्लस्टरों में लगभग 1.5 लाख शौचालय और सार्वजनिक स्थलों में 50,000 शौचालय बनवाए जाएंगे।  एक लाख शौचालयों महिलाओं के लिए बनाए जाएंगे। ये शौचालय मुख्य रूप से सार्वजनिक स्थलों और स्लम क्षेत्रों बनाए जाएंगे। आम आदमी पार्टी पानी की बचत के लिए ईको-शौचालयों का निर्माण करेगी।
  7. बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन-आम आदमी पार्टी बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन के लिए दुनिया भर के अपशिष्ट प्रबंधन तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी। घरेलू स्तर परbiodegradable और गैर biodegradable कचरे के रीसाइक्लिंग को भी प्रोत्साहित करेगी। सार्वजनिक स्थानों पर कचरा या किसी भी तरह के मलबे के निपटान करने पर भारी जुर्माना भरना पड़ेगा। आम आदमी पार्टी शहर में प्लास्टिक की थैलियों पर प्रतिबंध को सख्ती से लागू करेगी।

19.500 नए सरकारी स्कूल- दिल्ली के हर बच्चे के लिए बेहतर क्वालिटी की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए आम आदमी पार्टी 500 नए स्कूलों का निर्माण करेगी। इसमें माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक स्तर के स्कूल होंगे।

  1. उच्च शिक्षा गारंटी योजना-12 वीं के बाद की पढ़ाई की इच्छा रखने वाले छात्रों को सरकार बैंक से ऋण लेने की सुविधा देगी। इसके लिए गारंटी भी सरकार देगी। ऋण ट्यूशन फीस और रहने का खर्च दोनों को कवर करेगी। छात्र ऋण का भुगतान नौकरी लगने के बाद कर सकते हैं।

21.20 नए डिग्री कॉलेज- आम आदमी पार्टी गांवों के साथ साझेदारी कर शहर के बाहरी इलाके में 20 नए डिग्री कॉलेज खोलेगी। इसके अलावा दिल्ली के प्रमुख विश्वविद्यालय,अम्बेडकर विश्वविद्यालय सहित दिल्ली सरकार के कॉलेजों में मौजूदा सीटों की क्षमता दोगुनी की जाएगी।

22.निजी स्कूलों की फीस पर निगरानी- निजी स्कूलों की फीस को नियमित करने के लिए आम आदमी पार्टी फीस स्ट्रक्चर और उनके अकाउंट को ऑनलाइन करेगी। कैपिटेशन शुल्क भी समाप्त कर दिया जाएगा।

23 स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता- आम आदमी पार्टी नर्सरी और केजी में दाखिले की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाएगी। प्रवेश प्रक्रिया को कारगर बनाने के लिए, नर्सरी दाखिले के लिए एक केंद्रीकृत ऑनलाइन प्रणाली विकसित की जाएगी। इससे दाखिला संबंधी भ्रष्टाचार पर भी रोक लगेगी।

  1. सरकारी स्कूलों को अच्छे निजी स्कूलों के समकक्ष लाने की योजना-आम आदमी पार्टी दिल्ली के सभी नागरिकों को शिक्षा की उच्च गुणवत्ता प्रदान करने के लिए सरकारी स्कूलों के स्तर में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। हर स्कूल में विशेष रूप से लड़कियों के लिए शौचालय बनाया जाएगा। स्कूलों में लाइट, पंखे, ब्लैकबोर्ड और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के लिए स्कूल के प्रिंसिपल को पर्याप्त बजट दिए जाने की योजना है। कंप्यूटर और उच्च गति के इंटरनेट कनेक्टिविटी की सुविधा हर स्कूल में होगी। सरकारी स्कूलों में सत्रह हजार नए शिक्षकों की भर्ती की जाएगी।
  2. शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च में वृद्धि-शिक्षा और स्वास्थ्य आम आदमी पार्टी की शीर्ष प्राथमिकता होगी। स्वास्थ्य सेवा पर कुल बजटीय आवंटन में इसपर होने वाले खर्च के अनुसार वृद्धि की जाएगी।

26.स्वास्थ्यवर्धक बुनियादी ढ़ांचो में वृद्धि- आम आदमी पार्टी 900 नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और अस्पतालों में 30,000 अतिरिक्त बेड की सुविधा देगी। इसमें 4000 बेड प्रसूति वार्ड के लिए होगा।  आम आदमी पार्टी दिल्ली में हर 1000 लोगों के लिए पांच बेड के अंतरराष्ट्रीय मानदंड को भी सुनिश्चित करेंगी।

  1. सभी के लिए सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं-दवा और दवा उपकरणों की खरीद को सौ फीसदी भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए इसे केंद्रीकृत किया जाएगा। सामान्य, सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं जनता के लिए आसानी से उपलब्ध कराई जाएंगी।
  2. सड़कों पर पर्याप्त रोशनी-दिल्ली में सत्तर प्रतिशत सड़कों की बत्ती नहीं जलती। रात में सड़कों पर पसरा अंधेरा विशेष रूप से महिलाओं के खिलाफ अपराधों को बढ़ावा देता है। आम आदमी पार्टी दिल्ली की हर सड़क हर गली में सौ फीसदी रोशनी की व्यवस्था करेगी।
  3. लास्ट माइल कनेक्टिविटी-महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या को कम करने में प्रभावी सार्वजनिक परिवहन प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके लिए आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली में लास्ट माइल कनेक्टिविटी की सुविधा देगी। साझा ऑटो रिक्शा, मेट्रो फीडर सेवाओं और ई-रिक्शा को लास्ट माइल कनेक्टिविटी के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इन साझा सेवाओं को निश्चित स्थान से मेट्रो और बस के समय के साथ समन्वयित किया जाएगा।
  4. सार्वजनिक स्थलों और बसों में सीसीटीवी कैमरे-अपराधों पर रोक लगाने के लिए आम आदमी पार्टी डीटीसी बसों,बस स्टैंडों पर और भीड़-भाड़ वाले जगहों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना बना रही है। आम आदमी पार्टी सुनिश्चित करना चाहती हैं कि घर से बाहर हर जगह महिलाएंअपने आपको सुरक्षित महसूस करे।
  5. त्वरित न्याय-आम आदमी पार्टी की सरकार महिला उत्पीड़न और अन्य अपराधों के मामलों के तुरत निपटान के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन पर जोर देगी। आम आदमी पार्टी ने त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए जनवरी 2014 में नई फास्ट ट्रैक कोर्ट के निर्माण का ऐलान किया था। आम आदमी पार्टी की सरकार के आने के बाद 47 नई फास्ट ट्रैक कोर्ट में काम शुरू हो जाएगा। यदि जरूरत पड़ी तो महिलाओं के खिलाफ अपराधों की सुनवाई के लिए कोर्ट में दो पारियों में भी सुनवाई पर विचार कर सकती है। ताकि छह महीने के भीतर सभी मामलों की सुनवाई पूरी हो सके।

32- दिल्ली में वकीलों और न्यायपालिका का सशक्तीकरण- नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की जाएगी। आम आदमी पार्टी की सरकार निचली अदालतों में प्रैक्टिस कर रहे सरकारी अधिवक्ताओं और वकीलों के लिए किफायती आवास मुहैया कराएगी। कानूनी अधिकारियों को चिकित्सा योजनाओं की अधिकतम कवरेज सुविधा सुनिश्चित करने के लिए सरकार मौजूदा कानून को अधिक कारगर बनाएगी।

  1. महिला सुरक्षा बल-आम आदमी पार्टी की सरकार 15,000 होमगार्ड जवानों की मदद से महिला सुरक्षा दल या महिलाओं सुरक्षा बल का गठन करेगी। ये होम गार्ड जवान वर्तमान में वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रियों के आवासों पर नौकरों, ड्राइवरों और रसोइयों के रूप में काम करने को मजबूर हैं। आम आदमी पार्टी महिला की सुरक्षा के लिए सार्वजनिक परिवहनों में 5000 मार्शलों की भी नियुक्ति करेगी।
  2. सुरक्षा बटन-आम आदमी पार्टी की सरकार हर मोबाइल फोन पर एक सुरक्षा या एसओएस बटन की सुविधा देगी। इस सुरक्षा बटन के जरिए महिलाएं आपात स्थिति में निकटतम पुलिस स्टेशन, पीसीआर वैन, रिश्तेदारों और स्वयंसेवक समुदाय से संपर्क कर सकती हैं।
  3. मोबाइल फोन पर शासन-सभी सरकारी सेवाओं की जानकारी और फार्म ऑनलाइन उपलब्ध होंगे। ये जानकारी फोन पर भी उफलब्ध होगी। सभी सरकारी परियोजनाओं,उनसे से संबंधित जानकारियां, खातों और सरकारी कर्मियों से संबंधित आंकड़े ऑनलाइन पोस्ट किए जाएंगे। इससे शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की शुरूआत होगी।
  4. गांवों के विकास पर विशेष ध्यान-दिल्ली के गांवों के विकास के बारे में निर्णय ग्राम सभा, द्वारा लिया जाएगा। ग्राम सभा ग्राम विकास निधि का उपयोग गांव में विकास कार्यों की प्राथमिकताओं के अनुसार कर सकेगी। सरकार कृषि और पशुपालन में लगे लोगों को प्रोत्साहन और ढांचागत समर्थन देगी। गांवों के युवाओं को खेल में प्रोत्साहित करने के लिए गांवों में खेल सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी। ग्रामीण दिल्ली के लिए बस और मेट्रो सेवाओं के माध्यम से कनेक्टिविटी में वृद्धि की जाएगी।

37.किसान समर्थक भूमि सुधार- आम आदमी पार्टी दिल्ली भूमि सुधार अधिनियम की धारा 33 और 81, हटाएगी। कोई भी भूमि ग्राम सभा की सहमति के बिना अधिग्रहित नहीं की जाएगी। गांवों में भूमि के उपयोग के संबंध में अनावश्यक प्रतिबंध को हटाने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव डालेगी।

  1. वाई-फाई दिल्ली-आम आदमी पार्टी पूरी दिल्ली में वाई-फाई की सुविधा देगी। इससे शिक्षा, उद्यम, व्यवसाय, और रोजगार को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही महिलाओं की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
  2. दिल्ली में व्यापार और खुदरा हब –आम आदमी पार्टी व्यापारियों के अनुकूल नीतियों तैयार करेगी और व्यवसायों की स्थापना और चलाने के लिए संबंधित नियमों और कानूनों को कारगर बनाएगी। आम आदमी पार्टी व्यापारियों के लिए अनुपालन और लाइसेंस को आसान बनाने के लिए सिंगल विंडो क्लियरेंस की प्रणाली विकसित करेगी। आम आदमी पार्टी दिल्ली में कोई भी नया व्यापार या व्यवसाय शुरू करने के लिए एक सप्ताह का समय सुनिश्चित करेगी। व्यापार संबंधी नीतियों को तैयार करने में व्यापारियों की भागीदारी को भी प्रोत्साहित करेगी।
  3. खुदरा में कोई प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नहीं-हमारी सरकार दिल्ली में खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर रोक के अपने फैसले पर कायम रहेगी।
  4. सबसे कम वैट व्यवस्था-देश मेंदिल्ली में सबसे कम वैट की व्यवस्था होगी। आम आदमी पार्टी वैट और अन्य टैक्स संरचनाओं को सरल बनाएगी। हर इलाके और बाजार से एकत्र वैट के एक हिस्से को व्यवसाय और व्यापार को बढ़ाने में लगाया जाएगा। इस राशि को बाजार के रखरखाव और उन्नयन के लिए उपयोग में लाया जाएगा।
  5. छापे और इंस्पेक्टर राज का अंत-आम आदमी पार्टी की सरकार छापे की संस्कृति और इंस्पेक्टर राज प्रथा को खत्म करेगी। केवल विशेष परिस्थितियों में वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति से छापा डाला जा सकेगा।
  6. वैट नियमों का सरलीकरण-आम आदमी पार्टी वैट नियमों, प्रक्रियाओं और इसके प्रारूपों को सरल बनाएगी। 30 पेज लंबे वैट फार्म को व्यापारियों की सहुलियत के लिए एक पेज में तब्दील करेगी। संबंधित विभाग के साथ सभी संचार प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जाएगा। लाइसेंस का आवेदन और इसकी प्राप्ती घर बैठे कर सकते हैं।
  7. दिल्ली कौशल मिशन का गठन- दिल्ली में अचल कौशल की खाई को पाटने के लिए आम आदमी पार्टी की सरकार स्कूलों और कॉलेजों में व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देगी। युवाओं को सक्षम करने के लिए दिल्ली कौशल मिशन पैदा करेगी।
  8. 8 लाख रोजगार के अवसर-आम आदमी पार्टी अगले पांच साल में आठ लाख नए रोजगार के अवसर पैदा करेगी। आम आदमी पार्टी उद्यमियों को सहायता मुहैया कराने के लिए अभिनव और निजी स्टार्टअप की सुविधा भी देगी। निजी उद्दोगों के माध्यम से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र बनाएगी।
  9. दिल्ली एक स्टार्ट-अप हब-सरकार विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में व्यापार और प्रौद्योगिकी इन्क्यूबेटरों की स्थापना करकेstartups हब के लिए प्रोत्साहित करेगी। एक पायलट परियोजना के रूप में, तीन लाख वर्ग फुट में व्यापार के लिए सस्ती जगह भी विकसित की जाएगी।
  10. ठेके के सभी पद नियमित किए जाएंगे-आम आदमी पार्टी दिल्ली सरकार और दिल्ली सरकार के स्वायत्त निकायों में 55,000 रिक्तियों को तत्काल आधार पर भरेगी। साथ ही 4000 डॉक्टरों और 15,000 नर्सों और सहयोगी स्टाफ को स्थायी किया जाएगा।
  11. सामाजिक सुरक्षा पर जोर-आम आदमी पार्टी एक लचीला और निष्पक्ष श्रम नीति लागू करेगी। हमारी नीति असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करेगी। इस नीति से मजदूरी, सेवाओं और घरेलू श्रमिकों के काम के घंटे को निर्धारित करने और खपरैल बीनने के काम की स्थिति में सुधार होगा। स्थानीय मोहल्ला सभा निर्धारित स्थानों के लिए फेरी वाले और हॉकरों को लाइसेंस देगी।
  12. प्रदूषण कम करने पर जोर-दिल्ली शहर की आत्मा दिल्ली रिज को अतिक्रमण और वनों की कटाई से संरक्षित किया जाएगा। स्थानीय मोहल्ला सभा के सहयोग से पर्यावरण के अनुकूल वनीकरण को दिल्ली के सभी भागों में बढ़ावा दिया जाएगा। आम आदमी पार्टी शहर को साफ करने के लिए यंत्रीकृत वैक्यूम सफाई वाहनों को अधिग्रहित करेगी। सड़कों से कारों की संख्या को कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहनों की हालत सुधारेगी। इसके अतिरिक्त सीएनजी और बिजली की तरह कम उत्सर्जन ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अलावा प्रदूषण कम करने के लिए सरकार कार-पूलिंग को प्रोत्साहित करेंगी। और ईंधन में मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त  कार्रवाई करेगी।
  13. एकीकृत परिवहन प्राधिकरण-आम आदमी पार्टी मेट्रो,बसों, ऑटो रिक्शा, रिक्शा और ई-रिक्शा सहित सभी परिवहन व्यवस्था के लिए समग्र परिवहन नीतियों का गठन करेगी। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए एक ‘एकीकृत परिवहन प्राधिकरण’ स्थापित करेगी।

51.बस सेवाओं में बड़े पैमाने पर विस्तार- आम आदमी पार्टी दिल्ली में भारी पैमाने पर बस सेवाओं का विस्तार करेगी। आगामी पांच साल में शहर को कम से कम 5,000 नई बसों से जोड़ने की योजना है।  इससे शहर में परिवहन लागत कम हो जाएगी और प्रदूषण भी कम होगा।

  1. ईरिक्शा के लिए तत्काल निष्पक्ष नीति-पिछले कई महीने सेदिल्ली के ई-रिक्शा चालक असंमजस की स्थिति में है। भाजपा सरकार की गलत नीतियों के कारण कई महीने से बेकार बैठे है। आम आदमी पार्टी सुरक्षा पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ई-रिक्शा चालकों के स्वामित्व और सुचारू संचालन के लिए एक स्पष्ट नीति और मानक लेकर आएगी।
  2. मेट्रो रेल का विस्तार-आम आदमी पार्टी मेट्रो रेल का विस्तार और दिल्ली में रिंग रेल सेवा को विकसित करने के लिए भारतीय रेलवे के साथ समझौता करेगी। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, दिल्ली मेट्रो का बड़े पैमाने पर विस्तार करने की योजना है। वरिष्ठ नागरिकों, छात्रों और विकलांग लोगों को बसों पर और मेट्रो में रियायत देने का भी प्रावधान है।
  3. ऑटो चालकों के लिए निष्पक्ष व्यवस्था-ऑटो रिक्शा स्टैंड की संख्या में वृद्धि की जाएगी। ऑटो-रिक्शा की खरीद के लिए त्वरित बैंक ऋण की सुविधा होगी। आचरण में सुधार के लिए ऑटो चालकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। ऑटो यात्रियों के हितों की रक्षा के लिए सख्त कानून बनाए जाएंगे। और, किसी भी तरह के दुर्व्यवहार के मामले में ऑटो चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाएगी। आम आदमी पार्टी पुलिस से ऑटो रिक्शा चालकों के उत्पीड़न रोकने संबंधी कानून भी बनाएगी।
  4. पुनर्वास कालोनियों का फ्रीहोल्ड-आम आदमी पार्टी पुनर्वास कालोनियों को फ्रीहोल्ड अधिकार देने के लिए सरल समाधान का प्रस्ताव लाएगी। मूल आवंटी को सिर्फ 10,000 रुपये में उसके प्लाट का स्वामित्व मिलेगा।

जो मूल आवंटी नहीं हैं उन्हें 50000 रूपए में प्लाट के स्वामित्व का अधिकार मिलेगा। बोझिल बहु पृष्ठ प्रपत्र का सरलीकरण करके एक ही पृष्ठ के फार्म में तब्दील किया जाएगा।

  1. अनधिकृत कालोनियों का नियमितिकरण व परिवर्तन-हम पुनर्वास कालोनियों में संपत्ति और बिक्री के कामों में पंजीकरण का अधिकार देंगे। इसके अलावा,हम एक व्यवस्थित और चरणबद्ध तरीके से बिजली, पानी,सीवर लाइन और, स्कूलों व अस्पतालों की सुविधा भी मुहैया कराएंगे। बुनियादी जरूरतों को पूरा करके ही  अनधिकृत कालोनियों को सशक्त बनाने के लिए एक ही रास्ता है। आम आदमी पार्टी की सरकार के गठन के एक वर्ष के भीतर, इन अनधिकृत कालोनियों को नियमित कर दिया जाएगा और निवासियों के स्वामित्व अधिकार दिया जाएगा।
  2. सभी के लिए किफायती आवास: आम आदमी पार्टी की सरकार कम आय वर्ग के लिए किफायती आवास  बनाएगी। दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड की वर्तमान में खाली पड़ी 200 एकड़ की जमीन को किफायती आवास के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
  3. मलिन बस्तियों में सीटू विकास-झुग्गी वासियों को मौजूदा मलिन बस्ती में ही भूखंड या फ्लैट्स उपलब्ध कराया जाएगा। यह संभव नहीं हुआ, तो उनका निकटतम संभावित स्थान में पुनर्वास कराया जाएगा। मोहल्ला सभा पुनर्वास प्रक्रिया की योजना है और इसके सफल कार्यान्वयन की निगरानी की जाएगी। पुनर्वास कार्य तक मलिन बस्तियों को किसी भी हाल में ध्वस्त नहीं किया जाएगा। पीने के पानी, साफ-सफाई और दूसरी बुनियादी सुविधाएं सभी मलिन बस्तियों में उपलब्ध कराई जाएंगी। मलिन बस्तियों में गलियों की मरम्मत की जाएगी और सड़कें पक्की बनाई जाएंगी।

59-वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल- सरकार तुरंत एक सार्वभौमिक और गैर-अंशदायी वृद्धावस्था पेंशन प्रणाली शुरू करेगी। एक न्यूनतम सम्मानजनक राशि मुद्रास्फीति में सूचीबद्ध के लिए दी जाएगी। संवितरण और पेंशन के संबंध में मनमाने ढंग से फैसलों में देरी का सफाया हो जाएगा। भुगतान अदायगी व पेंशन से संबंधित फैसलों में मनमाने ढ़ंग से होने वाली देरी को दूर किया जाएगा।

  1. नियंत्रित मूल्य वृद्धि-खुदरा और थोक व्यापार में,जमाखोरी और मुनाफाखोरी को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। आम आदमी पार्टी की सरकार सब्जियों, फलों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए काला बाजारी, जमाखोरी को रोकने के लिए पूरी ताकत लगा देगी। राशन की दुकानों और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को भ्रष्टाचार मुक्त करेगी और बढ़ती लागत से आम आदमी को राहत देगी।

  2. नशा मुक्त दिल्ली-आम आदमी पार्टी दिल्ली को पूरी तरह से नशा मुक्त राज्य बनाना चाहता है। नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए निगरानी प्रणाली और दोषियों के लिए सख्त सजा का प्रावधान बनाएगी। नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाएगी और ऐसे लोगों के पुनर्वास में मानसिक और मनोरोग समर्थन दिया जाएगा। साथ ही स्कूलों में किशोरों के लिए प्रभावी परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराएगी।

  3. विकलांगों का सशक्तिकरण-आम आदमी पार्टी विकलांग व्यक्तियों (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है, और उम्मीद करती है कि दिल्ली भारत के बाकी के हिस्से के लिए मिसाल साबित होगी। आम आदमी पार्टी विकलांग व्यक्तियों के लिए तीन प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करेगी। आम आदमी पार्टी सरकारी स्कूलों में विशेष शिक्षकों की भर्ती करेगी। आम आदमी पार्टी विकलांग बच्चों के स्कूलों और कॉलेजों में प्रवेश के लिए आसान प्रावधान बनाएगी और विकलांग बच्चों के लिए काम कर रही संस्थानों को वित्तीय सहायता भी देगी।

  4. 1984 के दंगों पीड़ितों के लिए न्याय-1984का दंगा दिल्ली के इतिहास का सबसे काला पन्ना है। इस हादसे के जिम्मेदार लोग आज भी खुलेआम घूम रहे हैं। न्याय से वंचित सिख समुदाय की भावना को आम आदमी पार्टी अच्छी तरह समझती है। इस मुद्दे पर केंद्र की भाजपा नेतृत्व वाली सरकार का रवैया अभी भी संदेहास्पद है। आम आदमी पार्टी की सरकार ने जनवरी 2014 1984 सिख विरोधी दंगे की जांच के लिए एसआईटी के गठन का आदेश दिया था। आम आदमी पार्टी की सरकार इस दिशा में फिर से प्रयास करेगी। और, इस दंगे की जांच प्रक्रिया को दोबारा कराने का वादा करती है।

  5. पूर्व सैनिकों का सम्मान-पूर्व सैनिकों और महिलाओं की सबसे बड़ी आबादी दिल्ली में रहती है। आम आदमी पार्टी “एक रैंक, एक पेंशन ‘की मांग कर रहे भूतपूर्व सैनिकों की लड़ाई में उनके साथ है। दिल्ली रोजगार बोर्ड और अन्य निकायों को पूर्व सैनिकों की जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता साथ पूरा करने का निर्देश दिया जाएगा। आरक्षित नौकरी की रिक्तियों को केवल पूर्व सैनिकों से भरा जाएगा।

  6. अल्पसंख्यकों को समानता और विकास-दिल्ली में हाल ही में कुछ स्थानों पर हुए सांप्रदायिक तनाव ने पूरी तरह से शहर के सामाजिक ताने-बाने को हिला कर रख दिया है। दिल्ली भर में पूजा स्थलों पर भड़काऊ भाषणों की भी आम आदमी पार्टी निंदा करती है। आम आदमी पार्टी ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए मोहल्ला सभा शांति समितियों की स्थापना करेगी। समिति का मकसद स्वराज की भावना को बनाए रखने और पास-पड़ोस में शांति व सद्भाव सुनिश्चित करने की कोशिश होगी। आम आदमी पार्टी दिल्ली वक्फ बोर्ड के कामकाज में पारदर्शिता लाने व निजी पार्टियों और सरकार द्वारा वक्फ संपत्ति पर अतिक्रमण हटाने की दिशा में भी ठोस पहल करेगी।

  7. सफाई कर्मचारी को गरिमा-आम आदमी पार्टी की सरकार ठेका प्रथा को खत्म करेगी। ठेके पर काम कर रहे मौजूदा कर्मचारियों को नियमित किया जाएगा। सीवेज नालों में प्रवेश करने वाले श्रमिकों को मास्क,सूट और मशीनों जैसे सुरक्षात्मक गियर उपलब्ध कराए जाएंगे। आग सेनानियों के लिए बीमा का प्रावधान होगा। सफाई कर्मचारियों के कैरियर में उन्नति के लिए उनके शिक्षा व प्रशिक्षण में सहायता दी जाएगी । ड्यूटी के दौरान “सफाई कर्मचारी” की मौत पर उनके शोक संतप्त परिवार को 50 लाख रूपए दिए जाएंगे।

  8. हाशिए की जिंदगी गुजार रहे लोगों को सुरक्षा-आम आदमी पार्टी की सरकार अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े जाति वर्गों के लिए दिल्ली सरकार की नौकरियों में आरक्षण की नीतियों के पालन को सुनिश्चित करेगी। अनुसूचित जातियों के उद्यमियों के लिए छोटे व्यवसायों की शुरूआत के लिए शून्य या कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराने का प्रावधान होगा। जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाएगा। आम आदमी पार्टी दिल्ली में बसे डिनोटिफाइड और खानाबदोश समुदायों के भेदभाव और उत्पीड़न को समाप्त करने के लिए कदम उठाएगी। ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और उचित पहचान पत्र दिया जाएगा।

  9. खेल संस्कृति को बढ़ावा-आम आदमी पार्टी विशेष रूप से दिल्ली के ग्रामीण और शहरी गांवों में, एथलीटों के लिए खेल सुविधाएं, बुनियादी ढांचे और प्रभावी मानव संसाधन प्रबंधन पैदा करेगी। युवाओं के लिए दिल्ली में नए स्टेडियम और खेल परिसर खोले जाएंगे। 3000 से अधिक सरकारी स्कूलों में खेल के मैदान बनाए जाएंगे जहां स्कूल के बाद खेलने की सुविधा होगी।

  10. पंजाबी,संस्कृत और उर्दू को बढ़ावा- उर्दू और पंजाबी को दूसरी भाषा का दर्जा देगी । उर्दू और पंजाबी पढ़ाने के लिए शिक्षकों की संख्या बढ़ाई जाएगी। दिल्ली के विभिन्न विश्वविद्यालयों में उर्दू और पंजाबी में रिसर्च को प्रोत्साहित किया जाएगा। संस्कृत के अध्ययन और रिसर्च को भी प्रोत्साहित किए जाने की योजना।

  11. हमारी विरासत और साहित्य का संरक्षण-दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। सभी के लिए सुलभ एक जीवंत सार्वजनिक स्थान मुहैया कराने की योजना। पढ़ने और जिज्ञासा की संस्कृति को प्रोत्साहित करेगी आम आदमी पार्टी की सरकार। एक सार्वजनिक पुस्तकालय या समुदायिक पढ़ने की जगह दिल्ली के हर निर्वाचन क्षेत्र में बनाने की योजना।

 

 

जनवरी 30, 2015

दिल्ली चुनाव : मोदी बनाम अरविंद केजरीवाल – (उदय प्रकाश)

Aap cartoonयह सिर्फ़ मेरा निजी आब्जर्वेशन है कि अब दिल्ली का चुनाव पूरी तरह से मोदी बनाम अरविंद केजरीवाल हो गया है। किरन बेदी, जो अब साफ़-साफ प्राक्सी कैंडिडेट हैं, उनकी हास्यास्पद हार को बचाने के लिए (जो दरअसल मोदी हाइप की ढलान का शुरुआती संकेत है) न सिर्फ़ संसार के सबसे ताक़तवर राष्ट्र अमेरिका के राष्ट्रपति ओबामा के आगमन, गणतंत्र दिवस की संवैधानिक गरिमा का लोकल इस्तेमाल किया गया, बल्कि लगभग सारा केंद्रीय कैबिनेट, राज्यों के मुख्यमंत्री , बालीवुड के स्टार्स, कार्पोरेट्स के अधीनस्थ टीवी चैनल, धर्म, विकासवादी सम्मोहन और समस्त संसाधनों को झोंक दिया गया।
लगता है जैसे यह हस्तिनापुर का युद्ध है, जिसमें अकेला अभिमन्यु कुरु सैन्यविशारदों के चक्रव्यूह को भेदने और पार पाने के लिए जूझ रहा है।
हर रोज़ एक व्यूह दरकता है और हर रोज़ एक और व्यूह रच लिया जाता है।
अन्ना हज़ारे समेत उन सबको अब समझ लेना चाहिए कि यह उनकी भूमिका का सबसे निर्णायक समय है। यह समय तय कर देगा कि कौन किस पक्ष में खड़ा था।
हो सकता है यह आकलन एक मासूम अराजनीतिक आकलन हो, लेकिन यह कार्पोरेट पावर और आम नागरिक के बीच की निर्णायक लड़ाई है।
मैजिक अब उतार पर है।
साफ़ है।

साभार : टिप्पणी – उदय प्रकाश ( हिंदी के प्रसिद्द लेखक)

कार्टून – गुरप्रीत

जनवरी 27, 2015

किरन बेदी का समर्थन क्यों संभव नहीं? (कृष्ण बिहारी)

मैं किरण बेदी के खिलाफ क्यों हूँ ?

२ अगस्त २०१२ को मैं दिल्ली में था,  साथ में हिन्दी कथाकार अमरीक सिंह दीप जी भी थे| अन्ना आन्दोलन शिखर पर था| मंच पर केजरीवाल , कुमार विश्वास , अर्चना पूरण सिंह थे, अन्ना तो थे ही, अनुपम खेर भी थे|

लेकिन उस दिन अन्ना हजारे ने अपने संबोधन में कहा था कि दिल्ली की बहरी सरकार कुछ सुन नहीं रही, अब हमें राजनीतिक लड़ाई लड़नी पड़ेगी| उस संबोधन से पहले मैंने कभी अन्ना को राजनीतिक होते नहीं देखा-सुना था| मुझे जयप्रकाश नारायण की याद आई और लगा कि १९७७ दुहराया जाएगा| अरविन्द केजरीवाल को पहचानने लगे थे|किरन बेदी और कुमार विश्वास को लोग जानते थे| उस दिन तक राजनीतिक दल ‘आप‘ का गठन नहीं हुआ था| यह जरूर स्पष्ट हो गया था कि कोई दल अस्तित्व में आएगा|

लेकिन जैसे ही ‘आप‘ का औपचारिक रूप सामने आना शुरू हुआ वैसे ही किरन बेदी का सत्ता प्रेमी हुक्मरान भी सामने आने के लिए छटपटाने लगा| चूंकि , अन्ना  हजारे, अरविन्द को ईमानदार के विशेषण से नवाज़ चुके थे इसलिए ‘आप‘ में अरविन्द केजरीवाल ही नम्बर-१ के स्थान पर स्वीकृत हो चुके थे|  किरन बेदी के लिए यह बरगद से बोनसाई होना था| उन्होंने साहिल से भी दूरी बना ली, बाढ़ में उतरने का तो प्रश्न ही नहीं था| जनरल विक्रम सिंह ने तो किरन बेदी से पहले ही भांप लिया कि अरविन्द के सामने उनका व्यक्तित्व भी बौना है और यह कहाँ सुनिश्चित है कि सत्ता के आगे आर्थिक रूप से कमजोर पार्टी ‘आप‘ अपना प्रभाव दिखा सकेगी तो उन्होंने अन्ना से दूरी बनाई और जैसे ही मौका मिला भाजपा में शामिल हो गए|  उन्हें भी अपने जनरल रह चुकने का गुमान कभी सामान्य आदमी बनने नहीं देता| उनका गुमान पार्टी हाई कमान ने कुछ ऐसा कुचला है कि अब वे खुद को खुर्दबीन से खोज रहे हैं| आम आदमी पार्टी बनी| उससे पहले बाबा रामदेव की कुटाई हो चुकी थी| उनका भी अता-पता भाजपा के शक्ति केंद्र बन जाने के बाद ही लगा| उनके योग का महत्त्व आज तो स्थापित हो गया और उनकी चलती दूकान बंद होने से बच गई,  लेकिन यदि कहीं ऐसा नहीं हुआ होता तो एक बार शलवार-कुरता पहनकर जान किसी तरह बच गई थी, दूसरा मौका नहीं मिलना था| उन्होंने भी अरविन्द के मंच से किनारा किया|

आम आदमी पार्टी बनने और चुनाव में हिस्सा लेने के बाद ‘बिन्नी‘ की भूमिका को देश ने देखा है, और इसलिए ‘बिन्नी’ पर कोई बात महत्त्वपूर्ण नहीं है. शाजिया को इस बात की गलतफहमी है कि वे दिल्ली की दूसरी इमाम हैं और पूरी दिल्ली उनके फतवे को सुनकर अमल करेगी| दो-दो चुनाव हारने के बाद भी अपनी कमजोरियों को वे विशेषताएं ही समझती हैं, उन्हें ऐसा समझने से कौन रोक सकता है!

आम आदमी पार्टी की सरकार किन परिस्थितियों में बनी, ४९ दिन तक कैसे चली ? यह सब देश ने देखा है कि दिल्ली विधान सभा में कांग्रेस और भाजपा एक होकर सदन में क्या कर रहे थे ? या कि शोएब ने सदन में क्या किया था ? अब चुनाव एक बार फिर सामने हैं| 

किरन बेदी को सत्ता पर काबिज़ होने का एक मौका भाग्य से फिर मिल गया है, जो वह चाहती थीं| लेकिन, उन्हें जानना चाहिये कि जनता सत्ता और संघर्ष का अर्थ जानती है| वे केवल सत्ता का अर्थ जानती हैं, उनका दिल्ली की जनता के प्रति प्रेम कितना है इसे उनसे बेहतर जनता जानती है| चुनाव में , खासतौर पर भारत में सभी हथकंडे आजमाए जाते हैं, हो सकता है कि वे जीत भी जाएँ लेकिन यह यकीनी तौर पर मान लें कि वे  अरविन्द केजरीवाल के आगे हार चुकी है| और , अरविन्द के खिलाफ चुनाव न लड़कर उनके पहले कदम पर ही हार की मुहर लग गई है…

 

कृष्ण बिहारी (हिंदी के प्रसिद्द लेखक एवं पत्रिका ‘निकट‘ के सम्पादक)

जनवरी 26, 2015

दिल्ली की एक बहादुर लड़की का सन्देश नेताओं के नाम

क्या देश के नेता जागेंगे और महिला सुरक्षा के प्रति संवेदनशील होंगे?

अवकाश प्राप्ति की ओर बढ़ रहे एक विदेशी राष्ट्र प्रमुख के लिए रातों रात दिल्ली में हजारों CCTV कैमरे लग जाते हैं, नेताओं की सुरक्षा में हजारों सुरक्षाकर्मी तैनात हो जाते हैं पर आम महिला की सुरक्षा के प्रति कोई सरकार कदम नहीं उठाती|

पुरुष की तरह, महिला भी स्वतन्त्र रूप से सुरक्षित महसूस करते हुए देश की राजधानी में विचरण कर सके ऐसी इच्छा बहत बड़ी तो नहीं| इतना अधिकार तो महिलाओं का दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नागरिक होने के नाते बनता ही है|

दिसम्बर 16, 2014

कुमार विश्वास : दामिनी – तुम्हे श्रद्धांजलि निर्भया लाडो

KV16 दिसंबर 2012 … मन बहुत व्यथित था !

एक पत्रकार ने अभी-अभी फोन पर बताया था कि पांच-छह दरिंदो ने एक लड़की के साथ बेहद क्रूर बलात्कार किया है ! उसने जो-जो बताया उसे सुन कर दिमाग गुस्से से दहक उठा था ! उस दिन मेरा ड्राइवर छुट्टी पर था सो मैं खुद ड्राइव कर के सफदरगंज-अस्पताल पहुँचा !

ऐसी परिस्थिति का सामना करने में अजीब सा लग रहा था तो मैंने अपनी साथी शाज़िआ इल्मी और डॉ वर्तिका नंदा को भी घटना की सूचना दे कर बुला लिया ! हम तीनो दामिनी के माँ-पिता जी से मिले, उसे बेड पर निश्छल आँखें बंद किये लेटे देखा ! वहाँ मौजूद डॉ मुझे पहचानते थे, उन्होंने जो बताया उसे सुन कर आखँ छलकने लगीं, आँसूं रोकना मुश्किल पड़ गया !

बाहर प्रेस से सामना हुआ तो एक चैनल के कांग्रेसी-पत्रकार (जो आजकल एक पूर्व कांग्रेसी केंद्रीय मंत्री का निजी सचिव है) ने मुझ से कैमरे पर बदतमीज़ी की ! उसने कहा “आप लोग मामले को हवा देना चाहते हैं, शर्म करिये, इस परेशान परिवार को अपने हाल छोड़ दीजिये !”

मैं उलझन-दुःख और बेचारगी में लिपटा घर वापस आ गया !

दो दिन बड़ी बेचैनी से बीते! साथी कह रहे थे, हमें कुछ नहीं करना चाहिए, गलत लिया जायेगा मीडिया द्वारा !

21 दिसंबर की रात मैंने फेसबुक पर लिखा कि मैं इस लोकतंत्र  के सबसे बड़े बाबा “महामहिम राष्ट्रपति” जी घर जा रहा हूँ देश की इस बेटी की चीखों का हिसाब माँगने, जिसे आना हो विजय-चौक आ जाये !

सुबह-सुबह कुछ सौ लड़के-लड़कियाँ साथ आये ! वक़्त बढ़ते-बढ़ते गुस्से से तमतमाते हज़ारों युवा “we want justice” का नारा लगाते विजय-चौक पर फ़ैल गए !

सुबह 10 बजे तक पुलिस ने दर्ज़न बार ठंडा-गन्दा पानी फेंका और लगभग 7 बार लाठियाँ चलाईं ! 11 बजे के आस-पास एक लाठीचार्ज में दिल्ली-पुलिस के एक पुराने परेशान अफसर नें RPF की टुकड़ी को विशेष दिखा कर इशारा किया ! राष्ट्रपति भवन के दायीं और लॉन की झाड़ियों के पास गिरा कर RPF ने बड़ी बेहरमी से तब तक लाठियां मारी जब तक ANI का कैमरा भागता-भागता वहाँ आ नहीं गया ! दिन भर ठंड भीगा शरीर लाठियाँ खा कर जगह-जगह से सूज गया पर वहाँ से कोई हटने को तैयार नहीं था ! हारकर पुलिस ने रात होने का इंतज़ार किया और आखिर रात 12 बजे एक बार फिर लाठीचार्ज कर के सब को खदेड़ दिया !

अगले कुछ दिन सरकार और हमारे बीच इसी तरह के संघर्ष में बीते!

आधी रात दामिनी के माता-पिता से मिल कर आया कि हम कुछ कर सकते हैं क्या उसकी चिकित्सा के लिए !

सरकार की नीचताओं पर शक था सो सिंगापुर में अपने एक दोस्त को छूटी दिला कर हॉस्पिटल के आस-पास बने रहने को कहा !

एक दिन सुबह 4 बजे उसका फ़ोन आया ! नींद में सुना “भाई वो नहीं बची“!

ऐसा लगा जैसे घर का कोई मर गया !

दिमाग सुन्न पड़ गया !

आँखें भर आई.……दो साल हो गए हैं !

अभी कुछ दिन पहले एक लड़की से बलात्कार करते हुए एक दरिंदे ने कहा “मुहँ खोला तो दामिनी की तरह “—–” रॉड डाल दूँगा ” !

पता नहीं क्या बदला है ?

क्या बदलना है ?

सरकार-चेहरे-घटना ?

हमें माफ़ कर दो लाड़ो !

अगले जनम मेरी बिटिया बन कर मेरे आँगन में आना !

(कुमार विश्वास)

अप्रैल 30, 2014

ध्रुवीकरण के धुरंधर – रवीश कुमार (NDTV)

Muslim tirangaमुसलमान एक तरफ़ जाएगा तो उसके ख़िलाफ़ हिन्दू दूसरी तरफ़ जाएगा। इससे मिलता जुलता विश्लेषण आप टीवी पर ख़ूब सुनते होंगे। मतदान की आती तस्वीरों के साथ टीवी स्टुडियो में बैठे जानकार किस आधार पर यह बात कह रहे होते हैं समझना मुश्किल है। हमारी राजनीति में धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण एक तथ्य है मगर यह मिथक भी है। ध्रुवीकरण सतही और सामान्य व्याख्या का ऐसा औज़ार हो गया है जिसके सहारे जानकार एक मतदाता को साम्प्रदायिक रंग से पेंट कर देते हैं। इसी के साथ एक और मिथक की रचना करने लगते हैं। ‘टैक्टिकल वोटिंग’ का मिथक। क्या अन्य जाति धर्म समूह इस तरह से वोटिंग नहीं करते अगर करते हैं तो क्या वो इस कथित टैक्टिकल वोटिंग के जैसा ही है।

एक साइड मुसलमान तो दूसरी साइड हिन्दू। ऐसा लगता है कि स्टुडियो में बैठे जानकार एक ख़ास समुदाय की तरफ़ इशारा कर रहे हैं कि मुसलमान एकजुट हो रहे हैं । भाजपा के ख़िलाफ़ एकजुट हो रहे हैं लिहाज़ा स्वाभाविक रूप से हिन्दुओं को भी भाजपा के पक्ष में एकजुट हो जाना चाहिए। अख़बारों में भी ऐसी बातें ख़ूब लिखी जा रही हैं। कई बार लगता है कि एक रणनीति के तहत ऐसा किया जा रहा है। मतदान प्रक्रिया का एक अदना सा एक्सपर्ट भी जान सकता है कि कुछेक अपवादों को छोड़ सामान्य रूप से यह बात सही नहीं है। कई बार लगता है कि चुनाव के समय ऐसे विश्लेषणों के सहारे समाज में साम्प्रदायिकता को भड़काने का काम किया जाता है।

क्या हिन्दू हमेशा यह देखकर वोट देता है कि मुसलमान किस तरफ़ वोट दे रहा है या मुसलमान यह देखकर वोट देता है कि हिन्दू किस तरफ़ देता है । इसका वैज्ञानिक आधार क्या है। हर चुनाव में मुस्लिम मतदाता को ब्रांड करने का खेल खेला जाता है। जैसे उसकी अपनी कोई आकांक्षा नहीं है और वो सिर्फ मुसलमान बनकर वोट करता है। अगर ऐसा होता तो यह बात सही होती कि एक आम मुस्लिम मतदाता इमाम बुख़ारी जैसे धर्मगुरुओं के कहने पर ही वोट कर देता। किसी भी चुनाव का आँकड़ा देखेंगे तो यह ग़लत साबित होता है। आम मुस्लिम मतदाता बड़े आराम से मतदान के फ़ैसले में मुल्ला मौलवियों की दख़लंदाज़ी को पसंद नहीं करता। खुलकर बोलता भी है लेकिन मीडिया ऐसे धर्मगुरुओं के बहाने मुस्लिम मतदाताओं का सांप्रदायिकरण करता रहता है।

इसी संदर्भ में एक और बात कहना चाहता हूँ। बाबा रामदेव जैसे कई योग गुरु और धर्मगुरु भी तो किसी पार्टी के लिए वोट मांगते हैं। इमाम बुख़ारी का अपील करना साम्प्रदायिक और बाबा रामदेव या शंकराचार्य का अपील करना राष्ट्रभक्ति। कैसे? मैं दोनों की तुलना नहीं कर रहा लेकिन मूल बात यह है कि सभी प्रकार के मज़हबी नेता चुनाव के वक्त सक्रिय होते हैं। कोई आशीर्वाद के नाम पर इनके पास जाता है तो कोई अपने भाषणों में देवी देवताओं के प्रतीकों का इस्तमाल करके धर्म का इस्तमाल करता है। खुद को ईश्वर का दूत बताना क्या है।

आम मतदाता को इससे सचेत होने की ज़रूरत है। यह भी ध्यान में रखने की बात है कि हमारे तमाम धर्मों के गुरुओं का समाज से गहरा नाता होता है। झट से उनके किसी राजनीतिक आचरण को साम्प्रदायिक क़रार देने से पहले देखना चाहिए कि वे क्यों ऐसा कर रहे हैं। उनका आधार सांप्रदायिक है धार्मिक है या राजनीतिक। अगर विरोध करना है तो एक साथ डेरों, मठों, मस्जिदों की राजनीतिक दख़लंदाज़ी का विरोध कीजिये।

मैं फिर से लौटता हूँ अपनी मूल बात पर। तमाम अध्ययन बताते हैं कि मुस्लिम मतदाता अपनी पसंद के हिसाब से अलग अलग राज्यों में अलग अलग पार्टी और नेता को वोट करता है। मुसलमान एक नहीं कई दलों को वोट करने के साथ साथ बीजेपी को भी वोट करता है। मध्यप्रदेश राजस्थान और गुजरात में भी करता है। हो सकता है कि प्रतिशत के लिहाज़ से कम हो लेकिन आप यह भी तो देखिये कि बीजेपी ने इन राज्यों में लोकसभा के चुनावी मैदान में कितने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं। उत्तर प्रदेश में कितने उतारे हैं। पिछले लोक सभा चुनाव में बीजेपी को पचीस छब्बीस प्रतिशत मत मिले थे शेष और पचहत्तर फ़ीसदी मत अन्य दलों को। अगर हिन्दू वोट जैसा कुछ होता तो बीजेपी को पचहत्तर फ़ीसदी वोट मिलते। जो हिन्दू बीजेपी को वोट नहीं करते उनके न करने के आधार क्या हैं। हमारे ये जानकार हिन्दू मतदाताओं के विवेक के साथ भी अन्याय करते हैं। मतदाताओं का अति हिन्दूकरण कर साम्प्रदायिक रंग देते हैं।

चलिये इस बात को एक और तरीके से देखते हैं। हर समुदाय या जाति के लोग अपने उम्मीदवारों को वोट देते हैं। इसी आधार पर कांग्रेस बीजेपी सब अपने उम्मीदवार तय करते हैं। तब भी बीजेपी को हराने के लिए मुसलमान किसी मुसलमान उम्मीदवार को वोट नहीं करता है। वो उसी दल या उम्मीदवार को वोट करेगा जिसके पास पर्याप्त वोट हो। यह वोट कहाँ से आता है। कथित रूप से हिन्दू समाज से ही न। तो यह बात कैसे उचित ठहराई जा सकती है कि हिन्दू एक तरफ़ जाते हैं और मुस्लिम दूसरी तरफ़ । क़ायदे से तो एक दूसरे की पार्टी को हराने के लिए दोनों मिल-जुल कर एक दूसरे के ख़िलाफ़ गोलबंद होते हैं। इसके बाद भी सारे मुसलमान किसी एक व्यक्ति या दल को वोट नहीं करेंगे।

मुसलमानों को कथित रूप से बीजेपी के ख़िलाफ़ पेश किये जाने के बाद भी जानकार जानते हैं कि वे कहीं भी एकमुश्त वोटिंग नहीं करते। यह संभव भी नहीं है। ऐसा होने लगा तो समझिये कि मुस्लिम समाज के भीतर आपसी टकराव ही समाप्त हो जायें। आप भी जानते हैं कि मुसलमानों के बीच अगड़े पिछड़े और दलित मुसलमानों के हक़ को लेकर ज़बरदस्त टकराव है। पिछले दिनों कई राज्यों में जैसे उत्तर प्रदेश, केरल और असम, मुस्लिम दलों का उदय हुआ है क्या ये सभी बीजेपी के ख़िलाफ़ उभरे हैं? नहीं। इनसे चुनौती कांग्रेस सपा बसपा लेफ़्ट को भी मिलती है।

इसीलिए जानकारों को ध्रुवीकरण की बेहद सतही और ख़तरनाक व्याख्या से बचना चाहिए। बनारस में नरेंद्र मोदी जब अपने नामांकन के लिए जा रहे थे तो उस भीड़ में भी कैमरे मुसलमान ढूँढ रहे थे। उनका क्लोज़ अप दिखा रहे थे। मुझे इस बात से आपत्ति है। क्या कैमरे उस भीड़ में शामिल अन्य लोगों को भी उसी निगाह से देख रहे थे। अगर नहीं तो फिर एक या दो मुसलमान की तलाश क्यों हो रही थी। तब भी जब नरेंद्र मोदी के साथ मुख़्तार अब्बास नकवी नज़र आ रहे थे। बीजेपी भले हिन्दुत्व या संघ के कहने पर चले पर उसे मिलने वाला हर वोट इसके लिए नहीं मिलता। बीजेपी के कार्यकर्ता चाहें जितना हिन्दुत्व के रंग रूप में ढल कर आक्रामक हो जायें उनकी पार्टी को मिलने वाला हर वोट हिन्दू वोट नहीं है। ज़्यादातर दलित मतदाताओं को खुद को इस पहचान से जोड़ कर देखे जाने से आपत्ति हो सकती है जबकि हो सकता है कि वो वोट बीजेपी को दें।

हमें जनमत का साम्प्रदायिकरण नहीं करना चाहिए। सांप्रदायिकता और ध्रुवीकरण हमारी राजनीति की ख़तरनाक सच्चाई है लेकिन ऐसा हर जगह किसी एक फ़ार्मूले के तहत नहीं होता कि मुसलमान इधर गए तो हिन्दू उधर चले जायेंगे । कई बार लगता है कि जानकार मुस्लिम मतदाताओं का मज़हबी चरित्र चित्रण करते हुए ग़ैर मुस्लिम मतदाताओं को इशारा कर रहे होते हैं कि उन्हें वोट कहाँ देना चाहिए।

(रवीश कुमार)

अप्रैल 12, 2014

अरविंद केजरीवाल का मूल्याँकन सीटों से नहीं (रवीश कुमार – NDTV)

AKej@homeहार जायें या हवा हो जायें या जीत जायें । इन तीनों स्थितियों को छोड़ दें तो अरविंद केजरीवाल ने राजनीति को बदलने का साहसिक प्रयास तो किया ही । हममें से कई राजनीतिक व्यवस्था को लेकर मलाल करते रहते हैं लेकिन अरविंद ने कुछ कर के देखने का प्रयास किया । कुछ हज़ार लोगों को प्रेरित कर दिया कि राजनीति को बदलने की पहली शर्त होती है इरादे की ईमानदारी । अरविंद ने जमकर चुनाव लड़ा । उनका साथ देने के लिए कई लोग विदेश से आए और जो नहीं आ पाये वो इस बदलाव पर नज़रें गड़ाए रहें । आज सुबह जब मैं फ़ेसबुक पर स्टेटस लिख रहा था तब अमरीका से किन्हीं कृति का इनबाक्स में मैसेज आया । पहली बार बात हो रही थी । कृति ने कहा कि वे जाग रही हैं । इम्तहान की तरह दिल धड़क रहा है । ऐसे कई लोगों के संपर्क में मैं भी आया ।

अरविंद ने बड़ी संख्या में युवाओं को राजनीति से उन पैमानों पर उम्मीद करने का सपना दिखाया जो शायद पुराने स्थापित दलों में संभव नहीं है । ये राजनीतिक तत्व कांग्रेस बीजेपी में भी जाकर अच्छा ही करेंगे । कांग्रेस और बीजेपी को भी आगे जाकर समृद्ध करेंगे । कौन नहीं चाहता कि ये दल भी बेहतर हों । मैं कई लोगों को जानता हूँ जो अच्छे हैं और इन दो दलों में रहते हुए भी अच्छी राजनीति करते हैं । ज़रूरी है कि आप राजनीति में जायें । राजनीति में उच्चतम नैतिकता कभी नहीं हो सकती है मगर अच्छे नेता ज़रूर हो सकते हैं ।
एक्ज़िट पोल में आम आदमी पार्टी को सीटें मिल रहीं हैं । लेकिन आम आदमी पार्टी चुनाव के बाद ख़त्म भी हो गई तब भी समाज का यह नया राजनीतिक संस्करण राजनीति को जीवंत बनाए रखेगा । क्या कांग्रेस बीजेपी चुनाव हार कर समाप्त हो जाती है ? नहीं । वो बदल कर सुधर कर वापस आ जाती है । अरविंद से पहले भी कई लोगों ने ऐसा प्रयास किया । जेपी भी हार गए थे । बाद में कुछ आई आई टी के छात्र तो कुछ सेवानिवृत्त के बाद जवान हुए दीवानों ने भी किया है । हममें से कइयों को इसी दिल्ली में वोट देने के लिए घर से निकलने के बारे में सोचना पड़ता है लेकिन अरविंद की टोली ने सोचने से आगे जाकर किया है ।  वैसे दिल्ली इस बार निकली है । जमकर वोट दिया है सबने ।
राजनीति में उतर कर आप राजनीतिक हो ही जाते हैं । अरविंद बार बार दावा करते हैं कि वे नहीं है । शायद तभी मतदान से पहले कह देते हैं कि किसी को भी वोट दीजिये मगर वोट दीजिये । तब भी मानता हूँ कि अरविंद नेता हो गए हैं । आज के दिन बीजेपी और कांग्रेस के विज्ञापन दो बड़े अंग्रेज़ी दैनिक में आए हैं आम आदमी पार्टी का कोई विज्ञापन नहीं आया है । अरविंद के कई क़दमों की आलोचना भी हुई, शक भी हुए और सवाल भी उठे । उनके नेतृत्व की शैली पर सवाल उठे । यही तो राजनीति का इम्तहान है । आपको मुफ़्त में सहानुभूति नहीं मिलती है । कांग्रेस बीजेपी से अलग जाकर एक नया प्रयास करना तब जब लग रहा था या ऐसा कहा जा रहा था कि अरविंद लोकपाल के बहाने बीजेपी के इशारे पर हैं तो कभी दस जनपथ के इशारे पर मनमोहन सिंह को निशाना बना रहे हैं । मगर अरविंद ने अलग रास्ता चुना । जहाँ हार उनके ख़त्म होने का एलान करेगी या मज़ाक़ का पात्र बना देगी मगर अरविंद की जीत हार की जीत होगी । वो जितना जीतेंगे उनकी जीत दुगनी मानी जायेगी । उन्होंने प्रयास तो किया । कई लोग बार बार पूछते रहे कि बंदा ईमानदार तो है । यही लोग लोक सभा में भी इसी सख़्ती से सवाल करेंगे इस पर शक करने की कोई वजह नहीं है । अरविंद ने उन मतदाताओं को भी एक छोटा सा मैदान दिया जो कांग्रेस बीजेपी के बीच करवट बदल बदल कर थक गए थे ।
इसलिए मेरी नज़र में अरविंद का मूल्याँकन सीटों की संख्या से नहीं होना चाहिए । तब भी नहीं जब अरविंद की पार्टी धूल में मिल जाएगी और तब भी नहीं जब अरविंद की पार्टी आँधी बन जाएगी । इस बंदे ने दो दलों से लोहा लिया और राजनीति में कुछ नए सवाल उठा दिये जो कई सालों से उठने बंद हो गए थे । राजनीति में एक साल कम वक्त होता है मगर जब कोई नेता बन जाए तो उसे दूर से परखना चाहिए । अरविंद को हरा कर न कांग्रेस जीतेगी न बीजेपी । तब आप भी दबी ज़ुबान में कहेंगे कि राजनीति में सिर्फ ईमानदार होना काफी नहीं है । यही आपकी हार होगी ।
जनता के लिए ईमानदारी के कई पैमाने होते हैं ।
इस दिल्ली में जमकर शराब बंट गई मगर सुपर पावर इंडिया की चाहत रखने वाले मिडिल क्लास ने उफ्फ तक नहीं की । न नमो फ़ैन्स ने और न राहुल फ़ैन्स ने । क्या यह संकेत काफी नहीं है कि अरविंद की जीत का इंतज़ार कौन कर रहा है । हार का इंतज़ार करने वाले कौन लोग हैं ? वो जो जश्न मनाना चाहते हैं कि राजनीति तो ऐसे ही रहेगी । औकात है तो ट्राई कर लो ।
कम से कम अरविंद ने ट्राई तो किया ।
शाबाश अरविंद ।
यह शाबाशी परमानेंट नहीं है । अभी तक किए गए प्रयासों के लिए है । अच्छा किया आज मतदान के बाद अरविंद विपासना के लिए चले गए । मन के साथ रहेंगे तो मन का साथ देंगे।
साभार कस्बा
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