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मई 30, 2010

गुलजार साब ने चेतन भगत को सीख दी

लेखक चेतन भगत को वर्तमान समय के उन भाग्यशाली सितारों में गिना जा सकता है जिन्हे कला के क्षेत्र में उनकी योग्यता से कहीं ज्यादा सफलता मिल जाती है। फिल्मी दुनिया में ऐसा हमेशा से होता रहा है परन्तु गाहे बेगाहे लेखन की दुनिया में भी ऐसा देखने को मिल जाता है। उनके लेखन पर फिल्मों का असर बहुत ज्यादा है और वे इसी विचारधारा के साथ लिखते भी दिखाई देते हैं कि उनके लिखे हुये पर फिल्म बनेगी। अपने लिखे में विजुअल्स के तत्व का मुलम्मा चढ़ाने में कोई बुराई नहीं है। पर वे ऐसा कतई नहीं लिखते या अब तक ऐसा कतई नहीं लिख पाये हैं जिससे कि उन्हे मिली केवल आर्थिक सफलता और प्रसिद्धि के आधार पर ही अच्छे लेखकों और कवियों की जमात में शामिल कर लिया जाये।

ऊँट कभी कभी पहाड़ के नीचे आ भी/ही जाता है और ऐसा ही चेतन के साथ हो गया। आजकल कुछ भी कहीं भी कभी भी बोलने का फैशन हो गया है और चेतन को तो शशि थरुर जैसे लेखकों की संगत में भी देखा जा सकता है सो उन्हे इस बात की गलतफहमी हो जाना स्वाभाविक है कि वे विद्वान भी उच्च कोटि के हैं और अब वे कुछ भी कहीं भी और कभी भी कह सकते हैं और दुनिया उन्हे मौन होकर सुनेगी।

चेतन की प्रसिद्धि के कारण उन्हे आजकल कई कार्यक्रमों में देखा जाने लगा है। इस बार गलती से वे गुलजार साब को छेड़ बैठे। एक कार्यक्रम में चेतन गुलजार साब के बारे में बोलते हुये  कह गये,” मुझे गुलजार साब द्वारा लिखा गया गाना कजरारे कजरारे बहुत पसंद है, क्या पोएट्री है उसमें“।

उन्होने तो यह ऐसा दिखाने के लिये किया होगा कि वे पोएट्री की समझ रखते हैं या आजकल जैसा कि लोग एक दूसरे की तारीफ करके सम्बंध मधुर बनाने के प्रयत्न में लगे रहते हैं और सोचते हैं कि ऐसा करके वे अपने लेखन आदि की स्वीकृति भी सबसे ले लेंगे, ऐसा ही कुछ उन्होने भी किया होगा। उन्होने सोचा होगा कि शशि थरुर आदि लेखकों को जीतने के बाद अब वे गुलजार साब के किले में भी प्रवेश कर सकते हैं। परन्तु उनका मिठास भरा प्रयास गुलजार साब को हत्थे से उखाड़ गया और नाराज होकर उन्होने माइक्रोफोन मांगा और उसी समय कहा,”चेतन मुझे खुशी है कि आपके जैसे लेखक को गाना पसंद आया पर मुझे नहीं लगता कि उसमें उपस्थित कवित्त भाव को आप समझ पाये हैं जैसा कि आप यहाँ सबके सामने दर्शाने की कोशिश कर रहे हैं। पर अगर आप जोर देंगे तो मैं आपको उस गाने की दो पक्त्तियाँ सुनाता हूँ और आप मुझे उनका मतलब बता दें“।

तेरी बातों में किमाम की खुशबू है
तेरा आना भी गरमियों की लू है
“।

चेतन हक्के बक्के रह गये गुलजार साब की ऐसी स्पष्टवादिता का स्वाद चखकर। गुलजार साब ने आगे उनसे अनुरोध किया।
कृपया उसके बारे में बोलें जिसके बारे में आपको जानकारी है। जिस बात के बारे में आपको जानकारी नहीं है उसके बारे में बोलने का प्रयत्न न करें“।

आजकल हर बात मैनेजमेंट के अंतर्गत मानी जानी लगी है और ऐसा माना जाने लगा है कि सब चलता है और सब कुछ अपने प्रबंधन से मैनेज किया जा सकता है और कला का क्षेत्र भी इस बीमारी से अछूता नहीं रह पाया है।

आधी अधूरी जानकारी और कला के क्षेत्र में थोड़ी बहुत दखलअंदाजी के बलबूते लोग दुनिया इस आधार पर फ़तेह करने निकल पड़े हैं कि वे अपनी व्यवहारकुशलता और सामने वाले की तारीफ करके सब सम्भाल लेंगे।

ऐसा भी संभव है कि ज्यादातर लोग गुलजार साब को ही दोषी ठहरायें और कहें कि कि ऐसे चेतन भगत को टोका जाना गलत था पर उनका भड़क जाना एक सूक्ष्म किस्म के भ्रष्टाचार के खिलाफ एक प्रयास है

कोई दो तीन साल पहले लेखक निर्देशक अनुराग कश्यप ने अपने एक ब्लॉग में गुलजार साब से जुड़ी एक रोचक घटना का जिक्र किया था।

सत्या बनाये जाते समय निर्देशक राम गोपाल वर्मा और उनकी टीम, जिसमें अनुराग कश्यप और सौरभ शुक्ला आदि भी शामिल थे, ने महसूस किया कि गुलजार साब द्वारा लिखे गये एक गाने के दो प्रकारों में से पहले वाला ज्यादा उपयुक्त्त लगता है।

गुलजार साब ने पहले लिखा था “ग़म के नीचे बम लगा के ग़म उड़ा दे” और बाद में उन्हे लगा कि “गोली मार भेजे में” ज्यादा अच्छा है।

तय किया गया कि अनुराग ही गुलज़ार साब को यह बताने की जहमत उठायेंगें कि “ग़म के नीचे बम” वाला गीत ज्यादा अच्छा है।

अपनी नादानी में जैसे ही अनुराग ने कहा कि ” सर गम काम नहीं करता “ गुलजार साब ने उन्हे टोक दिया,” बरखुरदार पहले ग़म को ढ़ंग से बोलना तो सीख लो“।

अनुराग लिखते हैं कि बस मैं तो विचार विमर्श से एकदम बाहर ही हो गया उसके बाद। वे आगे लिखते हैं,” शुक्र है भगवान का कि उन्होने गोली मार भेजे वाले संस्करण पर जोर दिया। क्या गाना बना था वो“।

आशा है अनुराग कश्यप की तरह चेतन भी इस घटना को इसके सही परिपेक्षय में लेंगे और इसे अपनी मानहानि का मुद्दा न बना कर इससे कुछ सीखने की कोशिश करेंगे।

डिस्क्लेमर : गुलजार साब और चेतन भगत वाले मामले को छ्पी रिपोर्टस के आधार पर कोट किया गया है।

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