Posts tagged ‘Angrez’

मार्च 23, 2015

भगतसिंह की सेक्युलर विरासत

Bhagat Singh

Advertisements
अप्रैल 7, 2011

नया गाँधी और भूरे अंग्रेज

जो बेचते  थे मुल्क कभी वो विदेशी थे
तुमने यारो जयचंद को भी मात किया
गरीब के फंड में जब डाका डलना था
नेता ने सबसे आगे अपना हाथ किया
……..
बूढ़ा साधु बेईमानों को सबक सिखाने निकला है
नौजवान बच्चो तुम्हारे ज़मीर का इम्तेहान होना है

लाखों बंद लाकरों में देश काला धन अटा पड़ा है
चाबियाँ जाच एजेंसी का प्रमुख खुद छुपा लेता है

पगार तेरी चालीस हज़ार बच्चा विदेश में पढता  है
बता तो सही अफसर ये ऊँचा महल केसे बना है

माना के भ्रष्टाचार का विष रग रग में उतर गया है
ईमानदारी की दवा से रोग का उपचार हो सकता है

टूटती  साँसें पहले भी कह कर गुज़र गयी है राम
इन्कलाब उठाने फिर एक मसीहा उठ खड़ा हुआ है

मुट्ठियाँ तानो छले हुए लोगो न्याय की राह चुन लो
चलो के भ्रष्टाचार का विष वृक्ष जड़ से मिटाना है

वो भूखा बैठा है और राजा दावतें उड़ाते फिर रहे हैं
चले आओ शोषितों अपनी भूख का बदला लेना है

किसी भी तरह से जुडो यारो सच के साथ आ जुडो
गाँधी का इन्कलाब उठाने अन्ना खम ठोके खड़ा है

(रफत आलम)

%d bloggers like this: