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सितम्बर 26, 2016

अभी कई बातें …(Sándor Weöres)

sandorअभी तो कहने को कई बातें शेष हैं,

घटनाएं जिन्हें हमने जिया,

बातें जो हमने सीखीं,

वस्तुएं जिन्हें हमने देखा,

और मुलाकातें जो कई बार हुईं

और वे जो हुईं सिर्फ एक बार,

हर फूल इंतजार कर कर रहा है अपना जिक्र किये जाने का,

हर मुट्ठी भर धूल इस लायक है कि उस पर ध्यान दिया जाए,

मगर जब इन पर कुछ कहने का मौक़ा आएगा इनमें से सिर्फ एक,

और उस एक के भी कुछ टुकड़े समा पायेंगें कहने में,

जहां तक स्मृतियों का सवाल है मनुष्य करोड़पति होता है,

मगर जब उन्हें कलमबद्ध करने का वक्त्त आता है तो

वह पाता है खुद को कंगाल,

लगभग हर चीज किताब के बाहर छूट जाती है,

और अंदर रह जाते हैं चंद टुकड़े और स्वप्न|

(Sándor Weöres, हंगेरियन कवि)

प्रस्तुति – साभार विनोद शर्मा

 

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जनवरी 28, 2014

जिस्म ही तो नहीं था

मैं जिसे बरसों चाहा किया

वो जिस्म में ढला तो था

पर जिस्म ही नहीं था…

जिस्म से इतर ही सब कुछ था…

वो था सबसे अलग जो

उस जिस्म के अन्दर में था…

Rajnish sign

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जनवरी 19, 2014

धुंध में…

जब धुंध में fog-001

हाथ को हाथ नहीं

सूझता था

मैं चला उसके साथ

सीमेंट की

पुरानी रोड पर !

एक दूसरे को

तलाशते, पहचानते और जानते

हम चले गये दूर तक

और तब मैंने पाया

कि हम तो एक से हैं

अलग अलग खोलों के अंदर

मुझे बेहतर महसूस हुआ

ज्यादा शान्ति और संतुष्टि

ने मुझे घेर लिया

और मैं पहले से ज्यादा इंसान बना!

Yugalsign1

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