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नवम्बर 14, 2013

हर सिम्त फैली है खुशबू तेरी

ये अहसास भी कितना अजीब हैbaran-001

हर तरफ बस देखना तुझ को ही

धुंध में लिपटा हर चेहरा तेरा

सरदी की रातों में तलाशना गर्मी तुझ में

रात रानी की महक को तेरा नाम देना

तुम दिल में गहरे जाकर बस गयीं

और मैं

बस वहीं रुक गया

उन तेरह दिनों की  दीवार के पास

यहीं से उस पार झाँक लेता हूँ

जहां से मुस्करा कर

तुम चले गये थे

तुम्हारे न होने का अहसास  भला क्यूँ कर हो…

हर सिम्त फैली है खुशबू तेरी

चार सू नुमायाँ है चेहरा तेरा

(रजनीश)

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