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दिसम्बर 1, 2013

ये क्या जिद ले बैठा

सुकून भी गया था एक बार मंदिर में,

पर

hoffman-001घडियालों के शोर से घबरा कर भाग आया|

सोचता हूँ बंद कमरे में गुमसुम बैठा,

ले बैठा मैं ये जिद,

ये क्या जिद मैं ले बैठा?

अपनों के आजमाने से आजिज आकर,

गैरों की तरफ कदम बढाए,

अब ये बैचेनी और बेबसी है मेरी कि

दोनों ही तरफ,

एक से लोग नजर आए हैं|

Yugalsign1

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