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फ़रवरी 19, 2015

स्वाइन फ़्लू : लक्षण, रक्षा और उपचार

क्या है स्वाइन फ्लू

स्वाइन फ्लू श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारी है, जो ए टाइप के इनफ्लुएंजा वायरस से होती है। यह वायरस एच1 एन1 के नाम से जाना जाता है और मौसमी फ्लू में भी यह वायरस सक्रिय होता है। 2009 में जो स्वाइन फ्लू हुआ था, उसके मुकाबले इस बार का स्वाइन फ्लू कम पावरफुल है, हालांकि उसके वायरस ने इस बार स्ट्रेन बदल लिया है यानी पिछली बार के वायरस से इस बार का वायरस अलग है।

कैसे फैलता है

जब आप खांसते या छींकते हैं तो हवा में या जमीन पर या जिस भी सतह पर थूक या मुंह और नाक से निकले द्रव कण गिरते हैं, वह वायरस की चपेट में आ जाता है। यह कण हवा के द्वारा या किसी के छूने से दूसरे व्यक्ति के शरीर में मुंह या नाक के जरिए प्रवेश कर जाते हैं। मसलन, दरवाजे, फोन, कीबोर्ड या रिमोट कंट्रोल के जरिए भी यह वायरस फैल सकते हैं, अगर इन चीजों का इस्तेमाल किसी संक्रमित व्यक्ति ने किया हो।

शुरुआती लक्षण

– नाक का लगातार बहना, छींक आना, नाक जाम होना।

– मांसपेशियां में दर्द या अकड़न महसूस करना।

– सिर में भयानक दर्द।

– कफ और कोल्ड, लगातार खांसी आना।

– उनींदे रहना, बहुत ज्यादा थकान महसूस होना।

– बुखार होना, दवा खाने के बाद भी बुखार का लगातार बढ़ना।

– गले में खराश होना और इसका लगातार बढ़ते जाना।

नॉर्मल फ्लू से कैसे अलग

सामान्य फ्लू और स्वाइन फ्लू के वायरस में एक फर्क होता है। स्वाइन फ्लू के वायरस में चिड़ियों, सूअरों और इंसानों में पाया जाने वाला जेनेटिक मटीरियल भी होता है। सामान्य फ्लू और स्वाइन फ्लू के लक्षण एक जैसे ही होते हैं, लेकिन स्वाइन फ्लू में यह देखा जाता है कि जुकाम बहुत तेज होता है। नाक ज्यादा बहती है। पीसीआर टेस्ट के माध्यम से ही यह पता चलता है कि किसी को स्वाइन फ्लू है। स्वाइन फ्लू होने के पहले 48 घंटों के भीतर इलाज शुरू हो जाना चाहिए। पांच दिन का इलाज होता है, जिसमें मरीज को टेमीफ्लू दी जाती है।

कब तक रहता है वायरस

एच1एन1 वायरस स्टील, प्लास्टिक में 24 से 48 घंटे, कपड़े और पेपर में 8 से 12 घंटे, टिश्यू पेपर में 15 मिनट और हाथों में 30 मिनट तक एक्टिव रहते हैं। इन्हें खत्म करने के लिए डिटर्जेंट, एल्कॉहॉल, ब्लीच या साबुन का इस्तेमाल कर सकते हैं। किसी भी मरीज में बीमारी के लक्षण इन्फेक्शन के बाद 1 से 7 दिन में डिवेलप हो सकते हैं। लक्षण दिखने के 24 घंटे पहले और 8 दिन बाद तक किसी और में वायरस के ट्रांसमिशन का खतरा रहता है।

चिंता की बात

इस बीमारी से लड़ने के लिए सबसे जरूरी है दिमाग से डर को निकालना। ज्यादातर मामलों में वायरस के लक्षण कमजोर ही दिखते हैं। जिन लोगों को स्वाइन फ्लू हो भी जाता है, वे इलाज के जरिए सात दिन में ठीक हो जाते हैं। कुछ लोगों को तो अस्पताल में एडमिट भी नहीं होना पड़ता और घर पर ही सामान्य बुखार की दवा और आराम से ठीक हो जाते हैं। कई बार तो यह ठीक भी हो जाता है और मरीज को पता भी नहीं चलता कि उसे स्वाइन फ्लू था। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट बताती है कि जिन लोगों का स्वाइन फ्लू टेस्ट पॉजिटिव आता है, उनमें से इलाज के दौरान मरने वालों की संफ्या केवल 0.4 फीसदी ही है। यानी एक हजार लोगों में चार लोग। इनमें भी ज्यादातर केस ऐसे होते हैं, जिनमें पेशंट पहले से ही हार्ट या किसी दूसरी बीमारी की गिरफ्त में होते हैं या फिर उन्हें बहुत देर से इलाज के लिए लाया गया होता है।

यह रहें सावधान

5 साल से कम उम्र के बच्चे, 65 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं। जिन लोगों को निम्न में से कोई बीमारी है, उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए :

– फेफड़ों, किडनी या दिल की बीमारी

– मस्तिष्क संबंधी (न्यूरोलॉजिकल) बीमारी मसलन, पर्किंसन

– कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग

– डायबीटीजं

– ऐसे लोग जिन्हें पिछले 3 साल में कभी भी अस्थमा की शिकायत रही हो या अभी भी हो। ऐसे लोगों को फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

– गर्भवती महिलाओं का प्रतिरोधक तंत्र (इम्यून सिस्टम) शरीर में होने वाले हॉरमोन संबंधी बदलावों के कारण कमजोर होता है। खासतौर पर गर्भावस्था के तीसरे चरण यानी 27वें से 40वें सप्ताह के बीच उन्हें ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है।

अकसर पूछे जाने वाले सवाल

– अगर किसी को स्वाइन फ्लू है और मैं उसके संपर्क में आया हूं, तो क्या करूं?

सामान्य जिंदगी जीते रहें, जब तक फ्लू के लक्षण नजर नहीं आने लगते। अगर मरीज के संपर्क में आने के 7 दिनों के अंदर आपमें लक्षण दिखते हैं, तो डॉक्टर से सलाह करें।

– अगर साथ में रहने वाले किसी शफ्स को स्वाइन फ्लू है, तो क्या मुझे ऑफिस जाना चाहिए?

हां, आप ऑफिस जा सकते हैं, मगर आपमें फ्लू का कोई लक्षण दिखता है, तो फौरन डॉक्टर को दिखाएं और मास्क का इस्तेमाल करें।

– स्वाइन फ्लू होने के कितने दिनों बाद मैं ऑफिस या स्कूल जा सकता हूं?

अस्पताल वयस्कों को स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखने पर सामान्यत: 5 दिनों तक ऑब्जर्वेशन में रखते हैं। बच्चों के मामले में 7 से 10 दिनों तक इंतजार करने को कहा जाता है। सामान्य परिस्थितियों में व्यक्ति को 7 से 10 दिन तक रेस्ट करना चाहिए, ताकि ठीक से रिकवरी हो सके। जब तक फ्लू के सारे लक्षण खत्म न हो जाएं, वर्कप्लेस से दूर रहना ही बेहतर है।

– क्या किसी को दो बार स्वाइन फ्लू हो सकता है?

जब भी शरीर में किसी वायरस की वजह से कोई बीमारी होती है, शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र उस वायरस के खिलाफ एक प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेता है। जब तक स्वाइन फ्लू के वायरस में कोई ऐसा बदलाव नहीं आता, जो अभी तक नहीं देखा गया, किसी को दो बार स्वाइन फ्लू होने की आशंका नहीं रहती। लेकिन इस वक्त फैले वायरस का स्ट्रेन बदला हुआ है, जिसे हो सकता है शरीर का प्रतिरोधक तंत्र इसे न पहचानें। ऐसे में दोबारा बीमारी होने की आशंका हो सकती है।

दिल्ली में इलाज के लिए कहां जाएं

सरकारी अस्पताल

जीटीबी अस्पताल, दिलशाद गार्डन

एलएनजेपी अस्पताल, दिल्ली गेट

सफदरजंग अस्पताल, रिंग रोड

राम मनोहर लोहिया अस्पताल, बाबा खड़क सिंह मार्ग

दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल, हरिनगर

संजय गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल, मंगोलपुरी

लाल बहादुर शास्त्री हॉस्पिटल, खिचड़ीप़ुर

पं. मदन मोहन मालवीय अस्पताल, मालवीय नगर

बाबा साहब आंबेडकर हॉस्पिटल, रोहिणी

चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय, गीता कॉलोनी

भगवान महावीर अस्पताल, रोहिणी

महर्षि वाल्मीक अस्पताल, पूठ खुर्द

बाबू जगजीवन राम मेमोरियल अस्पताल, जहांगीरपुरी

अरुणा आसफ अली अस्पताल, राजपुर रोड

एयरपोर्ट हेल्थ ऑर्गनाइजेशन हॉस्पिटल, आईजीआई एयरपोर्ट

प्राइवेट हॉस्पिटल

मूलचंद हॉस्पिटल, लाजपतनगर

सर गंगाराम हॉस्पिटल, राजेंद्र नगर

अपोलो हॉस्पिटल, सरिता विहार

ऐक्शन बालाजी हॉस्पिटल, पश्चिम विहार

सेंट स्टीफंस हॉस्पिटल, तीस हजारी

एनसीआर में स्वाइन फ्लू सेंटर

नोएडा: डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल, नोएडा

गुड़गांव: सिविल हॉस्पिटल, ओल्ड गुड़गांव

फरीदाबाद: बादशाह खान (बीके) हॉस्पिटल, फरीदाबाद

गाजियाबाद: एमएमजे हॉस्पिटल, जसीपुरा मोड़, गाजियाबाद

स्वाइन फ्लू से बचाव और इसका इलाज

स्वाइन फ्लू न हो, इसके लिए क्या करें?

– साफ-सफाई का ध्यान रखा जाए और फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते ही सावधानी बरती जाए, तो इस बीमारी के फैलने के चांस न के बराबर हो जाते हैं।

– जब भी खांसी या छींक आए रूमाल या टिश्यू पेपर यूज करें।

– इस्तेमाल किए मास्क या टिश्यू पेपर को ढक्कन वाले डस्टबिन में फेंकें।

– थोड़ी-थोड़ी देर में हाथ को साबुन और पानी से धोते रहें।

– लोगों से मिलने पर हाथ मिलाने, गले लगने या चूमने से बचें।

– फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते ही अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

– अगर फ्लू के लक्षण नजर आते हैं तो दूसरों से 1 मीटर की दूरी पर रहें।

– फ्लू के लक्षण दिखने पर घर पर रहें। ऑफिस, बाजार, स्कूल न जाएं।

– बिना धुले हाथों से आंख, नाक या मुंह छूने से परहेज करें।

आयुर्वेद

ऐसे करें बचाव

इनमें से एक समय में एक ही उपाय आजमाएं।

– 4-5 तुलसी के पत्ते, 5 ग्राम अदरक, चुटकी भर काली मिर्च पाउडर और इतनी ही हल्दी को एक कप पानी या चाय में उबालकर दिन में दो-तीन बार पिएं।

– गिलोय (अमृता) बेल की डंडी को पानी में उबाल या छानकर पिएं।

– गिलोय सत्व दो रत्ती यानी चौथाई ग्राम पौना गिलास पानी के साथ लें।

– 5-6 पत्ते तुलसी और काली मिर्च के 2-3 दाने पीसकर चाय में डालकर दिन में दो-तीन बार पिएं।

– आधा चम्मच हल्दी पौना गिलास दूध में उबालकर पिएं। आधा चम्मच हल्दी गरम पानी या शहद में मिलाकर भी लिया जा सकता है।

– आधा चम्मच आंवला पाउडर को आधा कप पानी में मिलाकर दिन में दो बार पिएं। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

स्वाइन फ्लू होने पर क्या करें

यदि स्वाइन फ्लू हो ही जाए तो वैद्य की राय से इनमें से कोई एक उपाय करें:

– त्रिभुवन कीर्ति रस या गोदंती रस या संजीवनी वटी या भूमि आंवला लें। यह सभी एंटी-वायरल हैं।

– साधारण बुखार होने पर अग्निकुमार रस की दो गोली दिन में तीन बार खाने के बाद लें।

– बिल्वादि टैब्लेट दो गोली दिन में तीन बार खाने के बाद लें।

होम्योपैथी

कैसे करें बचाव

फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखने पर इन्फ्लुएंजाइनम-200 की चार-पांच बूंदें, आधी कटोरी पानी में डालकर सुबह-शाम पांच दिन तक लें। इस दवा को बच्चों समेत सभी लोग ले सकते हैं। मगर डॉक्टरों का कहना है कि फ्लू ज्यादा बढ़ने पर यह दवा पर्याप्त कारगर नहीं रहती, इसलिए डॉक्टरों से सलाह कर लें। जिन लोगों को आमतौर पर जल्दी-जल्दी जुकाम खांसी ज्यादा होता है, अगर वे स्वाइन फ्लू से बचना चाहते हैं तो सल्फर 200 लें। इससे इम्यूनिटी बढ़ेगी और स्वाइन फ्लू नहीं होगा।

स्वाइन फ्लू होने पर क्या है इलाज

1: बीमारी के शुरुआती दौर के लिए

जब खांसी-जुकाम व हल्का बुखार महसूस हो रहा हो तब इनमें से कोई एक दवा डॉक्टर की सलाह से ले सकते हैं:

एकोनाइट (Aconite 30), बेलेडोना (Belladona 30), ब्रायोनिया (Bryonia 30), हर्परसल्फर (Hepursuphur 30), रसटॉक्स (Rhus Tox 30), चार-पांच बूंदें, दिन में तीन से चार बार।

2: अगर फ्लू के मरीज को उलटियां आ रही हों और डायरिया भी हो तो नक्स वोमिका (Nux Vomica 30), पल्सेटिला (Pulsatilla 30), इपिकॉक (Ipecac-30) की चार-पांच बूंदें, दिन में तीन से चार बार ले सकते हैं।

3: जब मरीज को सांस की तकलीफ ज्यादा हो और फ्लू के दूसरे लक्षण भी बढ़ रहे हों तो इसे फ्लू की एडवांस्ड स्टेज कहते हैं। इसके लिए आर्सेनिक एल्बम (Arsenic Album 30) की चार-पांच बूंदें, दिन में तीन-चार बार लें। यह दवा अस्पताल में भर्ती व ऐलोपैथिक दवा ले रहे मरीज को भी दे सकते हैं।

योग

शरीर के प्रतिरक्षा और श्वसन तंत्र को मजबूत रखने में योग मददगार साबित होता है। अगर यहां बताए गए आसन किए जाएं, तो फ्लू से पहले से ही बचाव करने में मदद मिलती है। स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले अभ्यास करें:

– कपालभाति, ताड़ासन, महावीरासन, उत्तानपादासन, पवनमुक्तासन, भुजंगासन, मंडूकासन, अनुलोम-विलोम और उज्जायी प्राणायाम तथा धीरे-धीरे भस्त्रिका प्राणायाम या दीर्घ श्वसन और ध्यान।

– व्याघ्रासन, यानासन व सुप्तवज्रासन। यह आसन लीवर को मजबूत करके शरीर में ताकत लाते हैं।

डाइट

– घर का ताजा बना खाना खाएं। पानी ज्यादा पिएं।

– ताजे फल, हरी सब्जियां खाएं।

– मौसमी, संतरा, आलूबुखारा, गोल्डन सेव, तरबूज और अनार अच्छे हैं।

– सभी तरह की दालें खाई जा सकती हैं।

– नींबू-पानी, सोडा व शर्बत, दूध, चाय, सभी फलों के जूस, मट्ठा व लस्सी भी ले सकते हैं।

– बासी खाना और काफी दिनों से फ्रिज में रखी चीजें न खाएं। बाहर के खाने से बचें।

मास्क की बात

न पहने मास्क

– मास्क पहनने की जरूरत सिर्फ उन्हें है, जिनमें फ्लू के लक्षण दिखाई दे रहे हों।

– फ्लू के मरीजों या संदिग्ध मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों को ही मास्क पहनने की सलाह दी जाती है।

– भीड़ भरी जगहों मसलन, सिनेमा हॉल या बाजार जाने से पहले सावधानी के लिए मास्क पहन सकते हैं।

– मरीजों की देखभाल करने वाले डॉक्टर, नर्स और हॉस्पिटल में काम करने वाला दूसरा स्टाफ।

– एयरकंडीशंड ट्रेनों या बसों में सफर करने वाले लोगों को ऐहतियातन मास्क पहन लेना चाहिए।

कितनी देर करता है काम

– स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए सामान्य मास्क कारगर नहीं होता, लेकिन थ्री लेयर सर्जिकल मास्क को चार घंटे तक और एन-95 मास्क को आठ घंटे तक लगाकर रख सकते हैं।

– ट्रिपल लेयर सजिर्कल मास्क लगाने से वायरस से 70 से 80 पर्सेंट तक बचाव रहता है और एन-95 से 95 पर्सेंट तक बचाव संभव है।

– वायरस से बचाव में मास्क तभी कारगर होगा जब उसे सही ढंग से पहना जाए। जब भी मास्क पहनें, तब ऐसे बांधें कि मुंह और नाक पूरी तरह से ढक जाएं क्योंकि वायरस साइड से भी अटैक कर सकते हैं।

– एक मास्क चार से छह घंटे से ज्यादा देर तक न इस्तेमाल करें, क्योंकि खुद की सांस से भी मास्क खराब हो जाता है।

कैसा पहनें

– सिर्फ ट्रिपल लेयर और एन 95 मास्क ही वायरस से बचाव में कारगर हैं।

– सिंगल लेयर मास्क की 20 परतें लगाकर भी बचाव नहीं हो सकता।

– मास्क न मिले तो मलमल के साफ कपड़े की चार तहें बनाकर उसे नाक और मुंह पर बांधें। सस्ता व सुलभ साधन है। इसे धोकर दोबारा भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

ध्यान रखें कि

– जब तक आपके आस-पास कोई मरीज या संदिग्ध मरीज नहीं है, तब तक मास्क न लगाएं।

– अगर मास्क को सही तरीके से नष्ट न किया जाए या उसका इस्तेमाल एक से ज्यादा बार किया जाए तो स्वाइन फ्लू फैलने का खतरा और ज्यादा होता है।

– खांसी या जुकाम होने पर मास्क जरूर पहनें।

– मास्क को बहुत ज्यादा टाइट पहनने से यह थूक के कारण गीला हो सकता है।

– अगर यात्रा के दौरान लोग मास्क पहनना चाहें तो यह सुनिश्चित कर लें कि मास्क एकदम सूखा हो। अपने मास्क को बैग में रखें और अधिकतम चार बार यूज करने के बाद इसे बदल दें।

कीमत
– थ्री लेयर सजिर्कल मास्क : 10 से 12 रुपये

– एन-95 : 100 से 150 रुपये

swainflu

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मई 14, 2014

आयुर्वेदिक दोहे

ayurvedaजहाँ कहीं भी आपको,काँटा कोइ लग जाय।
दूधी पीस लगाइये, काँटा बाहर आय।।

मिश्री कत्था तनिक सा,चूसें मुँह में डाल।
मुँह में छाले हों अगर,दूर होंय तत्काल।।

पौदीना औ इलायची, लीजै दो-दो ग्राम।
खायें उसे उबाल कर, उल्टी से आराम।।

छिलका लेंय इलायची,दो या तीन ग्राम।
सिर दर्द मुँह सूजना, लगा होय आराम।।

अण्डी पत्ता वृंत पर, चुना तनिक मिलाय।
बार-बार तिल पर घिसे,तिल बाहर आ जाय।।

गाजर का रस पीजिये, आवश्कतानुसार।
सभी जगह उपलब्ध यह,दूर करे अतिसार।।

खट्टा दामिड़ रस, दही,गाजर शाक पकाय।
दूर करेगा अर्श को,जो भी इसको खाय।।

रस अनार की कली का,नाक बूँद दो डाल।
खून बहे जो नाक से, बंद होय तत्काल।।

भून मुनक्का शुद्ध घी,सैंधा नमक मिलाय।
चक्कर आना बंद हों,जो भी इसको खाय।।

मूली की शाखों का रस,ले निकाल सौ ग्राम।
तीन बार दिन में पियें, पथरी से आराम।।

दो चम्मच रस प्याज की,मिश्री सँग पी जाय।
पथरी केवल बीस दिन,में गल बाहर जाय।।

आधा कप अंगूर रस, केसर जरा मिलाय।
पथरी से आराम हो, रोगी प्रतिदिन खाय।।

सदा करेला रस पिये,सुबहा हो औ शाम।
दो चम्मच की मात्रा, पथरी से आराम।।

एक डेढ़ अनुपात कप, पालक रस चौलाइ।
चीनी सँग लें बीस दिन,पथरी दे न दिखाइ।।

खीरे का रस लीजिये,कुछ दिन तीस ग्राम।
लगातार सेवन करें, पथरी से आराम।।

बैगन भुर्ता बीज बिन,पन्द्रह दिन गर खाय।
गल-गल करके आपकी,पथरी बाहर आय।।

लेकर कुलथी दाल को,पतली मगर बनाय।
इसको नियमित खाय तो,पथरी बाहर आय।।

दामिड़(अनार) छिलका सुखाकर,पीसे चूर बनाय।
सुबह-शाम जल डाल कम, पी मुँह बदबू जाय।।

चूना घी और शहद को, ले सम भाग मिलाय।
बिच्छू को विष दूर हो, इसको यदि लगाय।।

गरम नीर को कीजिये, उसमें शहद मिलाय।
तीन बार दिन लीजिये, तो जुकाम मिट जाय।।

अदरक रस मधु(शहद) भाग सम, करें अगर उपयोग।
दूर आपसे होयगा, कफ औ खाँसी रोग।।

ताजे तुलसी-पत्र का, पीजे रस दस ग्राम।
पेट दर्द से पायँगे, कुछ पल का आराम।।

बहुत सहज उपचार है, यदि आग जल जाय।
मींगी पीस कपास की, फौरन जले लगाय।।

रुई जलाकर भस्म कर, वहाँ करें भुरकाव।
जल्दी ही आराम हो, होय जहाँ पर घाव।।

नीम-पत्र के चूर्ण मैं, अजवायन इक ग्राम।
गुण संग पीजै पेट के, कीड़ों से आराम।।

दो-दो चम्मच शहद औ, रस ले नीम का पात।
रोग पीलिया दूर हो, उठे पिये जो प्रात।।

मिश्री के संग पीजिये, रस ये पत्ते नीम।
पेंचिश के ये रोग में, काम न कोई हकीम।।

हरड बहेडा आँवला चौथी नीम गिलोय,
पंचम जीरा डालकर सुमिरन काया होय॥

दही मथें माखन मिले, केसर संग मिलाय,
होठों पर लेपित करें, रंग गुलाबी आय..

बहती यदि जो नाक हो, बहुत बुरा हो हाल,
यूकेलिप्टिस तेल लें, सूंघें डाल रुमाल..

अजवाइन को पीसिये, गाढ़ा लेप लगाय,
चर्म रोग सब दूर हो, तन कंचन बन जाय..

अजवाइन को पीस लें , नीबू संग मिलाय,
फोड़ा-फुंसी दूर हों, सभी बला टल जाय…

अजवाइन-गुड़ खाइए, तभी बने कुछ काम,
पित्त रोग में लाभ हो, पायेंगे आराम..

ठण्ड लगे जब आपको, सर्दी से बेहाल,
नीबू मधु के साथ में, अदरक पियें उबाल…

अदरक का रस लीजिए. मधु लेवें समभाग,
नियमित सेवन जब करें, सर्दी जाए भाग..

रोटी मक्के की भली, खा लें यदि भरपूर,
बेहतर लीवर आपका, टी० बी० भी हो दूर…

गाजर रस संग आँवला, बीस औ चालिस ग्राम,
रक्तचाप ह्रदय सही, पायें सब आराम..

शहद आंवला जूस हो, मिश्री सब दस ग्राम,
बीस ग्राम घी साथ में, यौवन स्थिर काम…

चिंतित होता क्यों भला, देख बुढ़ापा रोय,
चौलाई पालक भली, यौवन स्थिर होय..

लाल टमाटर लीजिए, खीरा सहित सनेह,
जूस करेला साथ हो, दूर रहे मधुमेह…

प्रातः संध्या पीजिए, खाली पेट सनेह,
जामुन-गुठली पीसिये, नहीं रहे मधुमेह..

सात पत्र लें नीम के, खाली पेट चबाय,
दूर करे मधुमेह को, सब कुछ मन को भाय…

सात फूल ले लीजिए, सुन्दर सदाबहार,
दूर करे मधुमेह को, जीवन में हो प्यार…

तुलसीदल दस लीजिए, उठकर प्रातःकाल,
सेहत सुधरे आपकी, तन-मन मालामाल…

थोड़ा सा गुड़ लीजिए, दूर रहें सब रोग,
अधिक कभी मत खाइए, चाहे मोहनभोग…

अजवाइन और हींग लें, लहसुन तेल पकाय,
मालिश जोड़ों की करें, दर्द दूर हो जाय…

ऐलोवेरा-आँवला, करे खून में वृद्धि,
उदर व्याधियाँ दूर हों, जीवन में हो सिद्धि…

दस्त अगर आने लगें, चिंतित दीखे माथ,
दालचीनि का पाउडर, लें पानी के साथ…

मुँह में बदबू हो अगर, दालचीनि मुख डाल,
बने सुगन्धित मुख, महक, दूर होय तत्काल..

कंचन काया को कभी, पित्त अगर दे कष्ट,
घृतकुमारि संग आँवला, करे उसे भी नष्ट…

बीस मिली रस आँवला, पांच ग्राम मधु संग,
सुबह शाम में चाटिये, बढ़े ज्योति सब दंग..

बीस मिली रस आँवला, हल्दी हो एक ग्राम,
सर्दी कफ तकलीफ में, फ़ौरन हो आराम…

नीबू बेसन जल शहद , मिश्रित लेप लगाय,
चेहरा सुन्दर तब बने, बेहतर यही उपाय..

मधु का सेवन जो करे, सुख पावेगा सोय, कंठ
सुरीला साथ में , वाणी मधुरिम होय…

पीता थोड़ी छाछ जो, भोजन करके रोज,
नहीं जरूरत वैद्य की, चेहरे पर हो ओज..

ठण्ड अगर लग जाय जो नहीं बने कुछ काम,
नियमित पी लें गुनगुना, पानी दे आराम…

कफ से पीड़ित हो अगर, खाँसी बहुत सताय,
अजवाइन की भाप लें, कफ तब बाहर आय..

अजवाइन लें छाछ संग, मात्रा पाँच गिराम,
कीट पेट के नष्ट हों, जल्दी हो आराम…

छाछ हींग सेंधा नमक, दूर करे सब रोग,
जीरा उसमें डालकर, पियें सदा यह भोग

जुलाई 25, 2011

फाइबर : अच्छे पाचन-तंत्र की युक्त्ति

आंतों को स्वस्थ रखने और कैंसर जैसी प्राण-घातक बीमारी से बचाने की विधि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के लिये भी चिंतन का विषय है। मनुष्य इतना ज्यादा जंक फूड और मीट आदि खाता है कि उसकी आंतों की स्वस्थता एक बड़ा मसला बन जाती है।
आयुर्वेद की भांति आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी अब Animal Food के बजाय Plant Food को तरजीह देने लगा है। खायी हुयी कोई भी खाद्य-सामग्री आंतों से गुजर कर जाती है और खाद्य-सामग्री में उपस्थित अघुलनशील फाइबर roto-rooter की तरह से कार्य करता हुआ पचने से बचे हुये बेकार अवशेषों और शरीर के लिये जहरीले तत्वों को शरीर से बाहर करने में मुख्य भूमिका निभाता है। खाद्य-सामग्री में फाइबर की मात्रा पर्याप्त न होने से कब्ज हो सकता है और अगर किसी को 24 घंटे तक एक बार भी हाजत नहीं होती तो उसे अपनी भोजन सामग्री में फाइबर की कम मात्रा के बारे में चिंतन करना चाहिये और इस मात्रा को कई गुना बढ़ा देना चाहिये।

कई दशकों पहले तक भारत में बहुत ज्यादा चोकर डालकर रोटी सेकी जाती थी जबकि उस समय के लोग शारीरिक श्रम आज के भारतीयों के मुकाबले ज्यादा करते थे, पैदल ज्यादा चलते थे। आज के भारतीय का जीवन आरामतलब हो गया है और गेहूँ का आटा चोकर रहित होकर मैदा बन गया है।

आज के मशीनी सहायता से चलने वाले दौर में ज्यादा अघुलनशील फाइबर भोजन का आवश्यक अंग होना चाहिये और मनुष्य को ऐसे फाइबर को भोजन के साथ ग्रहण करके बाद में पूरे दिन काफी मात्रा में पानी पीना चाहिये।

घुलनशील फाइबर पाचन-तंत्र से रक्त्त में मिश्रित होकर arteries और veins की दीवारों से cholesterol, fats और plaque को हटाता है जिससे कि ब्लड-प्रैशर और दिल की बीमारी से बचाव होता है।

मीट, मछली, अंडों, पोल्ट्री और डेरी पदार्थों जैसी खाद्य-सामग्रियों को खाने से यथासंभव बचना चाहिये और अगर ऐसा न हो सके तो इनकी मात्रा धीरे-धीरे काफी कम कर देनी चाहिये।

फलों, सब्जियों, अनाज, सीडस, बीन्स, और मेवों में फाइबर होता है अतः इनका अधिकाधिक प्रयोग करना चाहिये और ये खाद्य-पदार्थ फाइबर-सप्लीमेंट्स से हर तरह से श्रेष्ठ विकल्प हैं। इनमें विटामिन्स और मिनरल्स भी ज्यादा होते हैं जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायता करते हैं।

रेड मीट (पोर्क, बीफ, बकरा, लैम्ब) और प्रोसेस्ड मीट (हैम, सलामी, हॉट डॉग, एवम सौसेसेज़ आदि) को एकदम तिलांजलि देनी चाहिये। शोध बताते हैं कि इन्हे खाने से आंतों के कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है।

अच्छे पाचन-तंत्र को बनाये रखने के लिये नियमित रुप से व्यायाम या शारीरिक श्रम आवश्यक है। सारे समय का आरामतलब जीवन और अच्छा पाचन-तंत्र नदी के दो किनारों के समान हैं जो मुश्किल से ही मिल सकते हैं।

(चिकित्सा विज्ञान और खाद्य-सामग्री  संबंधी लेखों में दी जानकारी पर आधारित)

जुलाई 23, 2011

स्वास्थ्य : ब्लड टैस्टस -1

जिस तरह से भारत में थल, जल और वायु के प्रदुषणों ने स्थायी घर बना लिया है और वातावरण को प्रदुषित करके जन समूह को अपनी चपेट में लेने का कार्य आरम्भ कर दिया है, उससे बिल्कुल स्वस्थ रहना एक चुनौती बन गया है। ऐसे माहौल में करेले पर नीम चढ़े की कहावत को चिरतार्थ कर रहे हैं बहुत सारे लोभी व्यापारी, जो मौत के सौदागर बनकर खाद्य-पदार्थों में मिलावट कर रहे हैं। यूरिया केवल खेत में ही नहीं पड़ता वरन यह दूध और मावे की शोभा भी बढ़ाता है भारत में। एक से बढ़कर एक गम्भीर बीमारियाँ भारतीयों को अपनी चपेट में ले रही हैं। ऐसे प्रदुषित माहौल में हरेक व्यक्त्ति के सामने अपने को स्वस्थ बनाये रखने की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। जीविकोपार्जन के लिये संघर्षपूर्ण जीवन जी रहे भारतीयों के लिये स्वास्थ्य का प्रश्न बहुत बड़ा है। बहुत सारी बीमारियाँ तभी सामने आती हैं जब वे विकसित अवस्था में पहुँच चुकी होती हैं। ऊपर से स्वस्थ दिखायी दे रहे व्यक्त्ति भी बीमार हो सकते हैं या गम्भीर बीमारी का शिकार हो सकते हैं। जीवन में स्वास्थ्य को बनाये रखने के लिये बहुत जरुरी हो गया है कि खान-पान, व्यायाम और संतुलित जीवन शैली अपनाने के अलावा साल भर में एक बार हरेक को शरीर की पूरी मेडिकल जाँच करवा लेनी चाहिये।

गांव-देहात और छोटी जगहों पर लोग आर.एम.पी या अन्य ऐसे चिकित्सकों के रहमोकरम पर रहते हैं जिन्हे चिकित्सा विज्ञान का बहुत ज्ञान नहीं होता और इसीलिये तात्कालिक लाभ लेकर व्यक्त्ति गम्भीर बिमारियों की तरफ से मुँह मोड़ लेता है और जब तक चेतता है तब तक बीमारी गम्भीर अवस्था में पहुँच चुकी होती है।

कुछ ब्लड टैस्टस ऐसे होते हैं जो शरीर में ऐसी बीमारियों के आगमन की सूचना दे देते हैं जो शरीर का दरवाजा बस खटखटा ही रही होती हैं। चिकित्सा विज्ञान निरंतर तरक्की कर रहा है और बहुत सी गम्भीर बीमारियों से मानव बच सकता है अगर उनके संक्रमण की आरम्भिक अवस्था में ही उनका पता लगा लिया जाये।

अगर सारे ब्लड टैस्ट्स सामान्य आते हैं तो व्यक्त्ति सोच सकता है कि बेकार पैसा और समय नष्ट किये पर यही टैस्ट्स उसे बताते हैं कि हाल-फिलहाल उसका     शरीर सुचारु रुप से कार्य कर रहा है। और अगर दुर्भाग्य से किसी बीमारी के लक्षण नजर आते हैं तो डाक्टर्स के पास पूरा मौका रहता है बीमारी के शिकार होने वाले व्यक्त्ति को बीमारी की प्रारम्भिक अवस्था में ही चिकित्सा प्रदान करने का।

रक्त्त/खून/ब्लड शरीर में सारे सेल्स, न्यूट्रियेन्ट्स और ऑक्सीजन की आपूर्ति करता है और यह शरीर से कार्बन-डाई-ऑक्साइड और अन्य बेकार पदार्थ बाहर निकालता है। दर्जनों तरह के ब्लड टैस्टस हो सकते हैं और कुछ सामान्य परन्तु शरीर के लिहाज से महत्वपूर्ण टैस्टस शरीर के स्वास्थ्य के सम्बंध में महत्वपूर्ण जानकारी दे सकते हैं। वक्त्त पर ही चेताने वाले कुछ टैस्टस नीचे दिये गये हैं।

(1) Fasting Glucose Test : इस टैस्ट से रक्त्त में मौजूद ग्लूकोज की मात्रा पता लगती है। अगर किसी के रक्त्त के नमूने में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ी मिलती है तो वह व्यक्त्ति या तो डायबिटीज का शिकार हो चुका है या होने वाला है।

(2) Lipids Test : इस टैस्ट के द्वारा triglycerides, HDL cholestrol और LDL cholestrol के स्तरों के बारे में पता चलता है। triglycerides, और LDL cholestrol के उच्च स्तर और  HDL cholestrol  के निम्न स्तर से पता चलता है कि व्यक्त्ति या दिल के रोग का शिकार हो चुका है या इस गम्भीर बीमारी की ओर अग्रसर है। चालीस पार कर चुके व्यक्त्तियों के लिये यह टैस्ट बहुत उपयोगी हो सकता है और वे समय पर अपने शरीर में कोलेस्ट्रोल और ट्रैग्लिसराइड्स की मात्रायें जानकर अपनी जीवन शैली में अनुकूल परिवर्तन कर सकते हैं जिससे ह्रदय रोग से बच सकें।

(3) TSH ( Thyroid Stimulating Hormone) : TSH, शरीर में उपस्थित एक रसायन है जो Thyroid gland को प्रेरित करता है Thyroid Hormone उत्पन्न करने के लिये और TSH का असमान्य स्तर जताता है कि Thyroid सही तरीके से अपने लिये निर्धारित कार्य को अंजाम नहीं दे रहा है।

(4) ALT (Alanine Aminotransferase) : ALT लीवर द्वारा बनाये जाने वाले एंजाइम्स में से एक है। और ऐसे किसी भी एंजाइम का बढ़ा हुआ स्तर बताता है कि लीवर सही ढ़ंग से काम नहीं कर रहा है और व्यक्त्ति हेपाटाइटिस और गॉल ब्लेडर से सम्बन्धित रोगों के खतरे का सामना कर रहा है।

(5) CBC (Compelete Blood Count) : CBC न केवल रैड ब्लड सैल्स, व्हाइट ब्लड सैल्स और Platelets (जो कि ब्लड क्लॉटिंग में सहायता करते हैं) के बारे में बता है बल्कि यह एनीमिया, ल्यूकेमिया और रक्त्त न जमने जैसी बीमारियों के बारे में भी बताता है।

अगर परिवार में किसी बीमारी या किन्ही बिमारियों का इतिहास रहा है तो व्यक्त्ति को ज्यादा चौकन्ना रहना चाहिये और सही आयु आने पर सम्बंधित टैस्ट करवा लेने चाहियें। अपने जनरल डाक्टर के मार्गदर्शन में वांछित टैस्ट करवा लेने चाहियें। बीमारी झेलने से बहुत अच्छा वक्त्त पर उसके बारे में जान लेना है। समय पर बरती गयी सतर्कता अवश्य ही इलाज से हर लिहाज से कम खर्चीली होती है।

(चिकित्सा विज्ञान से सम्बंधित लेखों में दी गयी जानकारी पर आधारित)

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