Archive for ‘स्थान’

अगस्त 6, 2013

हिरोशिमा-नागासाकी में ट्रूमन का खेल

बहुत बड़ी गलती नहीं की क्या

प्रकृति ने ?

Hiroshima

इंसान तो बनाया ही बनाया

साथ उसे  प्रदान कर दी,

जरुरत से ज्यादा

सोचने और समझने की शक्ति!

प्रकृति बसाती जाती है

इंसान उजाड़ता जाता है,

विध्वंस का प्रयोग करता है

एक इंसान दूसरे इंसान के विरुद्ध

पेड़-पौधे और जानवर तो

अणु बम बनाते नहीं

ये सब कारनामें तो इंसान के ही हैं|

आइंस्टाइन की वैज्ञानिक मेधा का दुरुपयोग करके

जब ट्रूमन ने हिरोशिमा और नागासाकी

में विनाश फैलाने की योजना बनाई

तब उसे पता तो था

कि जापान आत्मसमर्पण के लिए तैयार था

फिर क्यों इतना बड़ा विध्वंस रचा उसने?

क्या उसके दिमाग पर शैतान ने कब्जा कर लिया था?

या उसे बाकी देशों को अपनी शक्ति दिखानी थी?

कारण जो भी रहा हो उसके बोये बीजों से

उपजी फसल धरती पर जीवन को

हमेशा के लिए संक्रमित कर गई है|

जिनके पास अपने नागरिकों को खिलाने के

लिए भोजन तक नहीं है ऐसे

देश भी एटम बम थैले में लिए घूम रहे हैं|

आत्मघाती तो इंसान सदा से ही रहा है-

वरना वह धरती पर प्रकृति की देन का ऐसा नाश न करता रहता-

ट्रूमन के कदम ने

उसे पूरी धरती को नष्ट करने का औजार देकर

भस्मासुर भी बना दिया|

देर-सबेर कोई न कोई

सनकी राजनीतिज्ञ

इस धरती को लील कर ही

अंतिम  शान्ति को प्राप्त होगा|

जून 2, 2010

पहचानविहीन लोगों की कब्रगाह (वियना)

आस्ट्रिया की राजधानी वियना में डेन्यूब नदी के किनारे एक ऐसी कब्रगाह है जहाँ ऐसे लोग दफन हैं जो किसी भी कारण से डेन्यूब में डूब कर मर गये और उनके शव नदी की मुख्य धारा से थोड़ा हट कर इस मुहाने पर पहुँच गये। इन लोगों की शिनाख्त नहीं हो पायी अतः इनके लिये यहीं एक कब्रगाह बना दिया गया और इसे Friedhof-der-Namenlosen (graveyard of the namelessनामहीन लोगों की कब्रगाह) के नाम से जाना जाने लगा।

ऐसा अनुमान है कि सन 1840 के आसपास यह कब्रगाह अस्तित्व में आया और यहाँ करीब सन 1940 तक नामहीन और पहचानविहीन लोगों को दफनाया जाता रहा। 1940 के बाद से बह कर यहाँ आने वाले अंजान लोगों के शवों को वियना की केन्द्रीय शवगाह में ही दफनाया जाता है। वियना के अंतर्राष्ट्रीय हवाई अडडे से बहुत दूर नहीं है यह जगह।

हमारे देश सहित कई देश ऐसे हैं जहाँ देश के प्रसिद्ध व्यक्तियों की कब्रों और समाधियों को भी ढ़ंग से नहीं सम्भाला जाता और एक वियना है जहाँ अंजान लोगों की कब्रगाह की भी ढ़ंग से देखभाल की जाती है। यह वहाँ के टूरिस्ट स्पॉटस में गिना जाता है। इस कब्रगाह का अस्तित्व एक राष्ट्र की अपने लोगों के प्रति संवेदन्शीलता को दर्शाता है। भारत समेत बहुत सारे देश आस्ट्रिया जैसे योरोपियन देशों से सीख सकते हैं कि कैसे अपनी सांस्कृतिक और एतिहासिक विरासत को सहेज कर रखा जा सकता है। भारत तो बेहद लचर देश है इस मामले में। यहाँ तो लोग ऐतिहासिक महत्व की इमारतों से ईँटे तक निकाल कर ले जाते हैं और सरकारें, सम्बंधित मंत्रालय, कार्यालय और प्रशासन आँखें मूँदे सोये रहते हैं।

Richard Linklater की प्रसिद्ध फिल्म Before Sunrise ने इस जगह को और ज्यादा प्रसिद्धी
प्रदान की और वियना की सैर करने वाले टूरिस्ट जो पहले इस जगह के बारे में नहीं जानते थे वे भी इस जगह के बारे में पूछ पूछ वहाँ जाने लगे।

नीचे दिये गये विडियो लिंक्स के द्वारा इस कब्रगाह के बारे में कुछ हद तक कुछ अहसास किया जा सकता है।
Link 1

Link 2

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