Archive for ‘सिनेमा’

मई 23, 2013

अमिताभ बच्चन का हिंदी प्रेम : असली नकली?

Amitabhलगता है भारत में लोगों के जीवन में वाकई बोरियत आ गयी है या कि भीषण गर्मी का असर है| जनता का एक तबका इसी बात पर न्यौछावर हुआ जा रहा है कि श्री अमिताभ बच्चन ने कान फेस्टीवल में हिंदी में अपना भाषण/संबोधन बोला/पढ़ा? अमिताभ बच्चन इलाहाबद में जन्मे, पिता उनके हिंदी के लेखक, और वे पढ़ाते भले ही अंगरेजी रहे हों, पर जीवन में सम्मान और उच्च पद उन्हें हिंदी की बदौलत ही प्राप्त हुए| प्रो. ड़ा हरिवंश राय बच्चन के पास इतना धन तो था हे कि वे अपने दो बेटों को शेरवुड जैसे पब्लिक स्कूल में पढवा पाए और उन्हें अंग्रेजी में भी पारंगत करवा दिया| अमिताभ को भी सारी धन-संपदा, मान- सम्मान हिंदी फिल्मों में काम करने से ही प्राप्त हुआ है पर वह वक्त बहुत पुराना नहीं हुआ है जब इस बात की चर्चा की जाती थी कि अमिताभ अंग्रेजी बहुत अच्छी बोलते हैं| यह समझ से परे है कि अमिताभ के कान में हिंदी बोलने पर इतना बवाल क्यों? अमिताभ ऐसे हिंदी प्रेमी भे नहीं हैं| अगर होते तो अस्सी के दशक में जब उन्होंने बिलियर्ड चैम्पियनशिप में (शायद गीत सेठी जिस साल चैम्पियन बने उस साल) हिंदी में बोलते, या जब कि बम्बई में उन्हें सीए एसोसियेशन ने बुलाया मुख्य अतिथि के तौर पर तब वे हिंदी में बोलते (बोफोर्स तब चल ही रहा था, और एक सज्जन की टिप्पणी छपी थी कि- अंग्रेजी में कितना जबरदस्त बोलता है यह आदमी, बेचारे को गलत फंसा दिया)| अस्सी और नब्बे के दशक के ज्यादातर पुराने कार्यक्रमों में अमिताभ अंग्रेजी में ही बोलते दिखाई देंगे| क्यों? क्या इसलिए कि हिंदी फिल्मों के ज्यादातर कलाकार हिंदी में ही बोलते थे उस समय और अमिताभ को अलग दिखना था, एक अलग कुलीन छवि बनाए रखनी थी? नब्बे के दशक में जब अमिताभ ने फिल्मों से अस्थायी अवकाश ले लिया था तब पत्र-पत्रिकाओं में उनके एक अंग्रेजी साक्षात्कार के बड़ी चर्चा थी क्योंकि उसमें उन्होंने अंग्रेजी डिक्शनरी में उपस्थित (उस वक्त) सबसे बड़ा शब्द- Floccinaucinihilipilification, प्रयुक्त किया था| उस वक्त अमिताभ के चर्चे ऐसे अभिनेता के रूप में ही थे जो हिंदी फिल्मों का बड़ा सितारा है और जो बहुत अच्छी अंग्रेजी बोलता है|
नब्बे के दशक में जब हिंदी भाषी अभिनेताओं के अंग्रेजीदां पुत्र नायक बन हिंदी फिल्मों पर छ गये और पिछले बीस-पच्चीस सालों में ज्यादातर अभिनेता और अभिनेत्रियां अंग्रेजी ही बोलने, लिखने और पढ़ने वाले हो गये तो अमिताभ के हिंदी की चर्चा भी जोर पकड़ने लगी| क्या अब हिंदी पर उनका इतना जोर व्यवसायिक कारणों से नहीं है? अमिताभ के सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिंदी में बोलने के ग्राफ का संबंध उनके जीवन में आर्थिक पतन (ऐ.बी.सी.एल के डूबने) और फिर के.बी.सी के कारण उत्थान से भी जोड़ा जा सकता है| के.बी.सी में जन-साधारण से हिंदी के कारण बार्तालाप से बढ़ी उनकी प्रसिद्धि का बहुत बड़ा हाथ है उनके हिंदी प्रेम के पीछे|

अगर वे इतने हिंदी प्रेमी होते तो उनके बेटे – अभिषेक और बेटी-श्वेता, हिंदी में तंग हाथ वाले न होते| अमिताभ के हिंदी प्रेम को हार पहनाकर उस दिन सम्मान देना उचित न होगा जिस दिन अभिषेक बच्चन बिना तैयारी के मौके पर ही धाराप्रवाह सही हिंदी में पांच मिनट बोल लें? क्या अमिताभ की जिम्मेवारी इतना कहने भर से खत्म हो जाती है कि वे तो अभिषेक से खूब कहते हैं कि हिंदी पर पकड़ मजबूत बनाओ – (कई सालों से अभिषेक कोशिश भी कर रहे हैं, और तरक्की भी की है उन्होंने)| पर इसके मूल में भी यही बात है कि अभिषेक को हिंदी फिल्मों में काम करके जीविकोपार्जन करना है इसलिए अमिताभ को इस बात कि चिंता है कि अभिषेक को सही हिंदी सीखनी चाहिए जिससे वह अपने साथी कलाकारों से आगे रह सके| अगर अमिताभ को हिंदी की चिंता होती तो वे बचपन से इस बात पर ध्यान देते (जैसे उनके पिता ने उन पर दिया होगा)| अभिनय को क्यों इतना तूल दिया जा रहा है? ज्यादातर दुनिया के सभी अभिनेता वैश्विक आयोजनों में अपनी भाषा में ही बोलते हैं| अमिताभ ने हिंदी में बोल दिया तो क्या गजब कर दिया| क्या हिन्दुस्तानी वेशभूषा भे उन्होंने पहनी अपना भाषण देते हुए?

वास्तव में पहले उन्होंने नफीस अंग्रेजी में अपनी बात कही और फिर हिन्दुस्तानियों के लिए वही बात हिंदी में भी बोली| या सारा मामला पी.आर गतिविधियों का है?


 

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जून 11, 2010

हिन्दी सिनेमा के अभिनेता : क्विज

[1] नायक के रुप में अपनी पहली ही फिल्म में इन्हे उत्कृष्ट अभिनय के लिये
राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया परन्तु इन्होने सत्तर के दशक के एक सुपर स्टार
की एक फिल्म में दो मिनट से भी कम समय का एक शराबी का रोल भी
किया था, बाद में ये भी सुपर स्टार रहे। ये कौन हैं? चाहें तो उपरोक्त्त
दोनों फिल्मों के नाम भी याद कर लें।

[2] इन्होने अधिकतर हास्य उत्पन्न करने वाले रोल्स ही किये परन्तु निजी जीवन
में ये हॉरर फिल्मों के दीवाने थे। इन्होने फिल्में बनायी भीं और निर्देशित भी
कीं, इन्होने एकाधिक शादियाँ कीं और कुछ फिल्मों में इन्होने अपनी पत्नी के
साथ भी काम किया। इन्होने एक ऐसी फिल्म में काम किया था जिसमें फिल्म
का नायक इन्हे जिस नाम से पुकारता था वह नाम बाद में इनका एक
निकनेम बन गया। बाद में एक भारतीय विश्व सुंदरी को लेकर इस नाम
के शीर्षक वाली एक फिल्म बनी।

[3] इन्होने लगभग पाँच साल की अवधि के अंदर ही एक ही अभिनेत्री के पति,
प्रेमी, पिता और ससुर का रोल अलग अलग फिल्मों में किया।

[4] इन अभिनेता ने अपनी पहली फिल्म में कुछ मिनटों की अवधि वाली भूमिका
निभाई। इस फिल्म की अभिनेत्री को अभिनय तो नहीं परन्तु एक दूसरे ही
क्षेत्र में किये कार्य के कारण अंतर्राष्ट्रीय ख्याति का पुरस्कार मिला और और
अब ये और अभिनेता दोनों ही अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शख्सियत हैं।

[5] इन अभिनेता को एक अंतर्राष्ट्रीय फिल्म में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति वाले व्यक्ति की
भूमिका, ऑडिशन देने के बावजूद निभाने को नहीं मिली पर ड्रामा और फिल्म
स्कूल में ट्रेनिंग के समय से ही वे दिल्ली के रहने वाले एक प्रसिद्ध
ऐतिहासिक व्यक्ति का रोल करना चाहते थे और उन्हे वह रोल मिल ही गया
हालाँकि वह रोल एक प्रसिद्ध टीवी सीरियल में निभाने को मिला। बाद में एक
फिल्म में उन्हे वह रोल भी करने को मिल गया जो उन्हे अंतर्राष्ट्रीय फिल्म में
नहीं मिल पाया था।

[6] इन्होने और देव आनंद की एक फिल्म से शुरुआत करने वाले एक
अभिनेता ने एक ही शीर्षक और विषय वाली दो फिल्मों में एक जैसा चरित्र
निभाया। इन्होने सिर्फ एक ही फिल्म का निर्देशन किया और उस फिल्म को
अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी अभिनीत एक हिट फिल्म के लिये एक
प्रेरणा स्त्रोत माना जा सकता है।

[7] ये अकेले ऐसे भारतीय अभिनेता रहे जिन्हे अंतर्राष्ट्रीय स्तर का एक पुरस्कार
एक रोचक श्रेणी में दिया गया। वैसे इन्होने एक बार ऐसा काम भी किया जो
दिवंगत अमजद खान द्वारा किये गये एक प्रसिद्ध काम से सम्बंध रखता था।

[8] इनमें और हॉलीवुड के एक एक्शन फिल्म स्टार, जिनकी लिखी एक फिल्म
का ऑस्कर में नामांकन हुआ था, में एक समानता है। इनके माता पिता,
मामा और जीजा भी फिल्मों से सम्बंधित रहे हैं।

[9] इन अभिनेता के फिल्मी जीवन में और हॉलीवुड के स्टार्स मार्लन ब्रांडो,
डस्टिन हॉफमैन के फिल्मी जीवन में कुछ एक जैसा है।

[10] इन्होने भारत के एक जाने माने अभिनेता के साथ सिर्फ दो ही फिल्मों में
काम किया। पहली फिल्म में वे प्रसिद्ध अभिनेता के भाई बने और दूसरी में
दोस्त और दुश्मन दोनों बने। इन्होने मुंशी प्रेमचंद की कहानी पर बनी एक
फिल्म में भी काम किया।

[11] सालों एक मशहूर अभिनेता रहने के बाद इन्होने अपने द्वारा निर्देशित पहली
फिल्म में भारत की एक दुश्मन देश के साथ लड़ाई को पृष्ठभूमि में रखा और
उसमें नायक की भूमिका भी निभाई। एक निर्माता और निर्देशक के रुप में ये
समसामायिक विषयों पर फिल्में बनाने के लिये प्रसिद्ध रहे। अपने द्वारा
निर्मित दो फिल्मों में इन्होने गेरुये वस्त्र धारण किये।

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