Archive for ‘लोकपाल’

फ़रवरी 2, 2015

दिल्ली में ‘आम आदमी पार्टी’ की लहर है : योगेन्द्र यादव

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Advertisements
फ़रवरी 1, 2015

आम आदमी पार्टी : मेनिफेस्टो (दिल्ली विधानसभा चुनाव 2015)

दिल्ली विधानसभा चुनाव घोषणापत्र-2015

70 सूत्री कार्ययोजना

आम आदमी पार्टी के लिए, राजनीति एक परस्पर संवादात्मक और निरंतर संवाद की प्रक्रिया है। दिल्ली विधान सभा नवंबर 2014 के पहले सप्ताह में भंग कर दी गई थी, इसके तुरंत बाद, आम आदमी पार्टी ने अपने बहुचर्चित व सफल कार्यक्रम दिल्ली संवाद Delhi Dialogue  की शुरूआत की। और इस अनूठी पहल के जरिए पार्टी ने समाज के विभिन्न वर्गों के विशेषज्ञों व आम नागरिकों के बीच साझेदारी के जरिए नए व गंभीपर सुझावों के आधार पर पार्टी के घोषणापत्र की रूपरेखा तैयार की है।

एक ईमानदार, जवाबदेह और उत्तरदायी राजनीतिक दल शासन में लोगों की भागीदारी को अहम मानती है। दिल्ली डायलॉग में जाने-माने शिक्षाविदों, व्यवसायियों, नौकरशाहों,निर्वाचित अधिकारियों, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विद्वान, विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ और आम आदमी के विचार को भी शामिल किया गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इऩ सबने मिलकर दिल्ली के भविष्य के लिए-हमारे भविष्य के एक ठोस व प्रभावी खाका तैयार किया है।

विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के साथ आम लोगों की सैकड़ों बैठकों और गोल मेज के आयोजनों, ऑनलाइन टिप्पणियों, ईमेल सुझाव, WhatsApp संदेश, ट्वीट्स और फेसबुक टिप्पणियों के जरिए हजारों प्राप्त सुझावों के बाद आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के युवाओं, महिलाओं, व्यापारियों. व्यावसायियों, उद्यमियों, ग्रामीण व शहरीकृत गांवों, सफाई कर्मचारियो, अल्पसंख्यकों, अनधिकृत व पुनर्वास कॉलोनियों, जेजे कल्सटर्स, रेसिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन, कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटियों और ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों के लिए 70 सूत्री कार्ययोजना तैयार की है।

दिल्ली के नागरिकों की दृष्टिकोण और आकांक्षाओं को सूचित करने के लिए बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, स्वच्छता, रोजगार, परिवहन, सामाजिक न्याय, महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा के मुद्दों पर दिल्ली डायलॉग के तहत चर्चा हुई। दिल्ली डायलॉग के दौरान कई ऐसे मुद्दे भी उठे जो दिल्ली सरकार के अधिकार क्षेत्र के तहत नहीं आते । आम आदमी पार्टी ऐसे मुद्दों का भी नेतृत्व करेगी और अपनी पूरी नैतिक और राजनीतिक अधिकार के साथ इन मुद्दों का समाधान देश के समक्ष लाने की कोशिश करेगी।

दिल्ली डायलॉग का उद्देश्य दिल्ली के विकास के लिए ऐसा खाका तैयापर करना था जो दिल्ली के सभी क्षेत्रों के लोगों के इंद्रधनुषी आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करेगा। आम आदमी पार्टी की नजर में दिल्ली की परिकल्पना:-

 

  • सबके लिए रोजगार

  • सबके लिए उच्च स्तरीय शिक्षा

  • सर्वोत्तम स्वास्थ्य सुविधाएं

  • महिलाओं की सुरक्षा

  • आबादी के हिसाब से सड़कें, वाहन और परिवहन सुविधाएं

  • बिजली सस्ती और सबके लिए

  • मुफ्त पीने का पानी

  • नागरिकों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं

  • यमुना की सफाई, स्वच्छता और सौंदर्यीकरण

  • सभी धर्म और समुदाय के बीच परस्पर प्रेम

  • प्रदूषण मुक्त दिल्ली

  • शासन व विकास में आम जनता की भागीदारी

  • समृद्ध, आधुनिक और प्रगतिशील दिल्ली

 

 

आम आदमी पार्टी दिल्ली में ऐसी सरकार लेकर आएगी जो पारदर्शिता सहाभागिता और परस्पर संवाद की पक्षधर होगी और दिल्ली में अपने 70 सूत्री कार्य योजना को पूरा करने की दिशा में काम करेगी-

  1. दिल्ली जनलोकपाल बिल: आम आदमी पार्टी सत्ता में आने के बाद दिल्ली जन लोकपाल विधेयक को पारित करेगी। दिल्ली सरकार के सभी सरकारी अधिकारी (मुख्यमंत्री,मंत्री और विधायक) भी इसके जांच के दायरे में आएंगे। दिल्ली के सरकारी अधिकारियों के लिए अपनी परिसंपत्तियों के बारे में सालाना घोषणा करना जरूरी होगा। किसी भी अघोषित परिसंपत्तियों को जब्त कर लिया जाएगा। भ्रष्टाचार के मामलों की समयबद्ध जांच सुनिश्चित होगी। दिल्ली लोकपाल को भ्रष्टाचार के आरोपी लोगों के खिलाफ जांच और अभियोजन शुरू करने की शक्ति होगी। दिल्ली के सभी सरकारी दफ्तरों में’नागरिक चार्टर भी शुरू की जाएगी। ह्विसल्ब्लोअर्स को सुरक्षा दी जाएगी और भ्रष्टाचार विरोधी प्रणाली में योगदान देने के लिए उन्हें सम्मानित भी किया जाएगा।

  2. स्वराज विधेयक: आम आदमी पार्टी स्वराज लाएगी -यानि स्व-शासन और सबसे अच्छा प्रशासन। आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली में शासन संरचना में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध है जिसमें स्थानीय समुदायों को सूक्ष्म स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता होगी। इससे नौकरशाहों और निर्वाचित प्रतिनिधियों की बजाए फैसले लेने की राजनीतिक क्षमता आमलोगों के हाथों में होगी। इसके लिए आम आदमी पार्टी स्वराज विधेयक कानून लाएगी। स्थानीय समुदाय को प्रभावित करने वाले निर्णय नागरिकों द्वारा लिए जाएंगे और उन्हें सचिवालय द्वारा लागू किया जाएगा। मोहल्ला सभा को और रेसिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन को स्थानीय क्षेत्र विकास (सी-लाड) फंड दिया जाएगा।

3.दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा- संवैधानिक ढांचे के भीतर रहते हुए आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए अपनी नैतिक और राजनीतिक अधिकार का प्रयोग करेगी। डीडीए, एमसीडी और दिल्ली पुलिस दिल्ली की निर्वाचित सरकार के प्रति जवाबदेह हो यह भी सुनिश्चित करेगी।

4.बिजली बिल आधे किए जाएंगे- आम आदमी पार्टी की सरकार बिजली के बिल को आधे से कम करने के अपने वादे को निभाएगी। साथ ही बिलिंग में गड़बड़ियों और मीटर दोषों को सही करने के अलावा  बढ़ती बिजली बिलों से परेशान जनता को राहत प्रदान करने के उपाय करेगी।

5.डिस्कॉम का स्वतंत्र ऑडिट- आम आदमी पार्टी बिजली वितरण कंपनियों को ऑडिट कराएगी। ऑडिट परिणाम विधानसभा में पेश करने के बाद, बिजली टैरिफ का पुनर्गठन किया जाएगा।

6.दिल्ली का अपना पॉवर स्टेशन- आम आदमी पार्टी दिल्ली में अपना पावर स्टेशन लगाने की पक्षधर है और मानती है कि इससे दिल्ली में 6200MW तक बिजली की खपत को पूरा करने में सहायता मिलेगी और इससे बिजली समस्या का समाधान होगा। राजघाट और बवाना संयंत्र का कुशलता से संचालन भी किया जाएगा।

7.बिजली वितरण कंपनियों में प्रतिस्पर्धा की शुरूआत- आम आदमी पार्टी उपभोक्ताओं को बिजली प्रदाताओं के बीच चयन करने का अधिकार प्रदान करने संबंधी दिसम्बर 2013 के दिल्ली घोषणा पत्र  में किए अपने वादे को फिर से दोहराती है। दिल्ली में बेहतर सेवाएं प्रदान करने और टैरिफ में कमी के लिए प्रतिस्पर्धी वितरण प्रणाली को लागू करेगी।

8.दिल्ली को सोलर सिटी बनाने की योजना- आम आदमी पार्टी ऊर्जा के अक्षय और वैकल्पिक स्रोतों के लिए एक चरणबद्ध पारी की शुरूआत करेगी। घरों, हाउसिंग सोसायटी,उद्यम और उद्योगो को सौर उर्जा के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। वर्ष 2025 तक दिल्ली में ऊर्जा जरूरतों का 20 प्रतिशत सौर ऊर्जा के माध्यम से प्राप्त करने का लक्ष्य है।

9.पानी का अधिकार- आम आदमी पार्टी एक अधिकार के रूप में पानी उपलब्ध कराएगी। पार्टी किफायती मूल्य पर दिल्ली के सभी नागरिकों को स्वच्छ पेयजल की सुविधा देगी। पानी को अधिकार बनाने के लिए आम आदमी पार्टी दिल्ली जल बोर्ड के अधिनियम में भी संशोधन करेगी। एक समयबद्ध योजना के तहत दिल्ली को दिल्ली जल बोर्ड के पाइप कनेक्शन व सीवेज नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।  पानी सप्लाई व वितरण प्रणाली को सुचारू बनाया जाएगा।

10.मुफ्त पानी- आम आदमी पार्टी दिल्ली जल बोर्ड के मीटर के जरिए प्रति माह हर घर के लिए 20 किलोलीटर (20,000 लीटर) तक मुफ्त जीवन रेखा पानी सुनिश्चित करेगी। इस योजना से हाउसिंग सोसायटी भी लाभान्वित होंगे।

11.निष्पक्ष और पारदर्शी पानी मूल्य निर्धारण- आम आदमी पार्टी सस्ती व स्थायी कीमत पर दिल्ली के सभी नागरिकों को पीने के पानी की सुविधा मुहैया कराएगी। पानी की दरों में अनिवार्यत: सालाना 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी के प्रावधान को समाप्त करेगी और किसी भी तरह की बढ़ोतरी विचार-विमर्श के बाद ही की जाएगी।

  1. मुनक नहर से पानी-दिल्ली हरियाणा से अतिरिक्त कच्चे पानी की हकदार है । उच्च न्यायालय के इस आदेश  का कार्यान्वयन हो इसके लिए आम आदमी पार्टी पूरी कोशिश करेगी।
  2. जल संसाधन बढाने पर जोर-आम आदमी पार्टी की सरकार वर्षा जल संचयन, कुओं के पुनर्भरण, वाटरशेड विकास और मिट्टी-जल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं के जरिए जल संसाधनों की कमी को पाटने की पहल करेगी। आम आदमी पार्टी मोहल्ला सभा की साझेदारी से झीलों, तालाबों और बावड़ियों जैसे जल निकायों को पुनर्जीवित करेगी।
  3. पानी माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई-आम आदमी पार्टी राजनीतिक नेताओं के संरक्षण में पनप रहे दिल्ली के शक्तिशाली पानी माफिया पर रोक लगानेके लिए प्रतिबद्ध है। आम आदमी पार्टी एक पारदर्शी टैंकर पानी वितरण प्रणाली विकसित करेगी। विभिन्न इलाकों में सक्रिय टैंकरों की अनुसूची ऑनलाइन और मोबाइल फोन पर उपलब्ध कराई जाएगी। निजी टैंकरों को आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा बनाये दिशा निर्देशों के तहत काम करने की अनुमति दी जाएगी। इससे काफी हद तक पानी के अधिक मूल्य निर्धारण और निजी टैंकर ऑपरेटरों की मनमानी से उपभोक्ताओं की रक्षा हो सकेगी।
  4. यमुना पुनर्जीवित-यमुना नदी एक लंबे समय से दिल्ली की सामूहिक स्मृति का हिस्सा रही है लेकिन जीवन रेखा नदी मर रही है। आम आदमी पार्टी इसको फिर से पुनर्जीवित करने के लिए संभावित कदम उठाएगी। इसी कड़ी में एक व्यापक सीवरेज नेटवर्क और नई कार्यात्मक मलजल उपचार संयंत्रों के निर्माण किया जाएगा। साथ ही यमुना नदी में अनुपचारित पानी और औद्योगिक अपशिष्ट के प्रवेश पर सख्ती से रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाएगी।
  5. वर्षा जल संचयन को प्रोत्साहन-आम आदमी पार्टी की सरकार वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देगी। वर्षा जल संचयन को अपनाने वाले परिवारों को पानी अनुकूल परिवारों-water- friendly families कहा जाएगा। ऐसे परिवारों को सरकार प्रोत्साहन भी देगी।
  6. 200,000 सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण-आम आदमी पार्टी 2 लाख शौचालय बनवाएगी। मलिन बस्तियों और जेजे क्लस्टरों में लगभग 1.5 लाख शौचालय और सार्वजनिक स्थलों में 50,000 शौचालय बनवाए जाएंगे।  एक लाख शौचालयों महिलाओं के लिए बनाए जाएंगे। ये शौचालय मुख्य रूप से सार्वजनिक स्थलों और स्लम क्षेत्रों बनाए जाएंगे। आम आदमी पार्टी पानी की बचत के लिए ईको-शौचालयों का निर्माण करेगी।
  7. बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन-आम आदमी पार्टी बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन के लिए दुनिया भर के अपशिष्ट प्रबंधन तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी। घरेलू स्तर परbiodegradable और गैर biodegradable कचरे के रीसाइक्लिंग को भी प्रोत्साहित करेगी। सार्वजनिक स्थानों पर कचरा या किसी भी तरह के मलबे के निपटान करने पर भारी जुर्माना भरना पड़ेगा। आम आदमी पार्टी शहर में प्लास्टिक की थैलियों पर प्रतिबंध को सख्ती से लागू करेगी।

19.500 नए सरकारी स्कूल- दिल्ली के हर बच्चे के लिए बेहतर क्वालिटी की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए आम आदमी पार्टी 500 नए स्कूलों का निर्माण करेगी। इसमें माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक स्तर के स्कूल होंगे।

  1. उच्च शिक्षा गारंटी योजना-12 वीं के बाद की पढ़ाई की इच्छा रखने वाले छात्रों को सरकार बैंक से ऋण लेने की सुविधा देगी। इसके लिए गारंटी भी सरकार देगी। ऋण ट्यूशन फीस और रहने का खर्च दोनों को कवर करेगी। छात्र ऋण का भुगतान नौकरी लगने के बाद कर सकते हैं।

21.20 नए डिग्री कॉलेज- आम आदमी पार्टी गांवों के साथ साझेदारी कर शहर के बाहरी इलाके में 20 नए डिग्री कॉलेज खोलेगी। इसके अलावा दिल्ली के प्रमुख विश्वविद्यालय,अम्बेडकर विश्वविद्यालय सहित दिल्ली सरकार के कॉलेजों में मौजूदा सीटों की क्षमता दोगुनी की जाएगी।

22.निजी स्कूलों की फीस पर निगरानी- निजी स्कूलों की फीस को नियमित करने के लिए आम आदमी पार्टी फीस स्ट्रक्चर और उनके अकाउंट को ऑनलाइन करेगी। कैपिटेशन शुल्क भी समाप्त कर दिया जाएगा।

23 स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता- आम आदमी पार्टी नर्सरी और केजी में दाखिले की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाएगी। प्रवेश प्रक्रिया को कारगर बनाने के लिए, नर्सरी दाखिले के लिए एक केंद्रीकृत ऑनलाइन प्रणाली विकसित की जाएगी। इससे दाखिला संबंधी भ्रष्टाचार पर भी रोक लगेगी।

  1. सरकारी स्कूलों को अच्छे निजी स्कूलों के समकक्ष लाने की योजना-आम आदमी पार्टी दिल्ली के सभी नागरिकों को शिक्षा की उच्च गुणवत्ता प्रदान करने के लिए सरकारी स्कूलों के स्तर में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। हर स्कूल में विशेष रूप से लड़कियों के लिए शौचालय बनाया जाएगा। स्कूलों में लाइट, पंखे, ब्लैकबोर्ड और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के लिए स्कूल के प्रिंसिपल को पर्याप्त बजट दिए जाने की योजना है। कंप्यूटर और उच्च गति के इंटरनेट कनेक्टिविटी की सुविधा हर स्कूल में होगी। सरकारी स्कूलों में सत्रह हजार नए शिक्षकों की भर्ती की जाएगी।
  2. शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च में वृद्धि-शिक्षा और स्वास्थ्य आम आदमी पार्टी की शीर्ष प्राथमिकता होगी। स्वास्थ्य सेवा पर कुल बजटीय आवंटन में इसपर होने वाले खर्च के अनुसार वृद्धि की जाएगी।

26.स्वास्थ्यवर्धक बुनियादी ढ़ांचो में वृद्धि- आम आदमी पार्टी 900 नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और अस्पतालों में 30,000 अतिरिक्त बेड की सुविधा देगी। इसमें 4000 बेड प्रसूति वार्ड के लिए होगा।  आम आदमी पार्टी दिल्ली में हर 1000 लोगों के लिए पांच बेड के अंतरराष्ट्रीय मानदंड को भी सुनिश्चित करेंगी।

  1. सभी के लिए सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं-दवा और दवा उपकरणों की खरीद को सौ फीसदी भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए इसे केंद्रीकृत किया जाएगा। सामान्य, सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं जनता के लिए आसानी से उपलब्ध कराई जाएंगी।
  2. सड़कों पर पर्याप्त रोशनी-दिल्ली में सत्तर प्रतिशत सड़कों की बत्ती नहीं जलती। रात में सड़कों पर पसरा अंधेरा विशेष रूप से महिलाओं के खिलाफ अपराधों को बढ़ावा देता है। आम आदमी पार्टी दिल्ली की हर सड़क हर गली में सौ फीसदी रोशनी की व्यवस्था करेगी।
  3. लास्ट माइल कनेक्टिविटी-महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या को कम करने में प्रभावी सार्वजनिक परिवहन प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके लिए आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली में लास्ट माइल कनेक्टिविटी की सुविधा देगी। साझा ऑटो रिक्शा, मेट्रो फीडर सेवाओं और ई-रिक्शा को लास्ट माइल कनेक्टिविटी के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इन साझा सेवाओं को निश्चित स्थान से मेट्रो और बस के समय के साथ समन्वयित किया जाएगा।
  4. सार्वजनिक स्थलों और बसों में सीसीटीवी कैमरे-अपराधों पर रोक लगाने के लिए आम आदमी पार्टी डीटीसी बसों,बस स्टैंडों पर और भीड़-भाड़ वाले जगहों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना बना रही है। आम आदमी पार्टी सुनिश्चित करना चाहती हैं कि घर से बाहर हर जगह महिलाएंअपने आपको सुरक्षित महसूस करे।
  5. त्वरित न्याय-आम आदमी पार्टी की सरकार महिला उत्पीड़न और अन्य अपराधों के मामलों के तुरत निपटान के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन पर जोर देगी। आम आदमी पार्टी ने त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए जनवरी 2014 में नई फास्ट ट्रैक कोर्ट के निर्माण का ऐलान किया था। आम आदमी पार्टी की सरकार के आने के बाद 47 नई फास्ट ट्रैक कोर्ट में काम शुरू हो जाएगा। यदि जरूरत पड़ी तो महिलाओं के खिलाफ अपराधों की सुनवाई के लिए कोर्ट में दो पारियों में भी सुनवाई पर विचार कर सकती है। ताकि छह महीने के भीतर सभी मामलों की सुनवाई पूरी हो सके।

32- दिल्ली में वकीलों और न्यायपालिका का सशक्तीकरण- नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की जाएगी। आम आदमी पार्टी की सरकार निचली अदालतों में प्रैक्टिस कर रहे सरकारी अधिवक्ताओं और वकीलों के लिए किफायती आवास मुहैया कराएगी। कानूनी अधिकारियों को चिकित्सा योजनाओं की अधिकतम कवरेज सुविधा सुनिश्चित करने के लिए सरकार मौजूदा कानून को अधिक कारगर बनाएगी।

  1. महिला सुरक्षा बल-आम आदमी पार्टी की सरकार 15,000 होमगार्ड जवानों की मदद से महिला सुरक्षा दल या महिलाओं सुरक्षा बल का गठन करेगी। ये होम गार्ड जवान वर्तमान में वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रियों के आवासों पर नौकरों, ड्राइवरों और रसोइयों के रूप में काम करने को मजबूर हैं। आम आदमी पार्टी महिला की सुरक्षा के लिए सार्वजनिक परिवहनों में 5000 मार्शलों की भी नियुक्ति करेगी।
  2. सुरक्षा बटन-आम आदमी पार्टी की सरकार हर मोबाइल फोन पर एक सुरक्षा या एसओएस बटन की सुविधा देगी। इस सुरक्षा बटन के जरिए महिलाएं आपात स्थिति में निकटतम पुलिस स्टेशन, पीसीआर वैन, रिश्तेदारों और स्वयंसेवक समुदाय से संपर्क कर सकती हैं।
  3. मोबाइल फोन पर शासन-सभी सरकारी सेवाओं की जानकारी और फार्म ऑनलाइन उपलब्ध होंगे। ये जानकारी फोन पर भी उफलब्ध होगी। सभी सरकारी परियोजनाओं,उनसे से संबंधित जानकारियां, खातों और सरकारी कर्मियों से संबंधित आंकड़े ऑनलाइन पोस्ट किए जाएंगे। इससे शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की शुरूआत होगी।
  4. गांवों के विकास पर विशेष ध्यान-दिल्ली के गांवों के विकास के बारे में निर्णय ग्राम सभा, द्वारा लिया जाएगा। ग्राम सभा ग्राम विकास निधि का उपयोग गांव में विकास कार्यों की प्राथमिकताओं के अनुसार कर सकेगी। सरकार कृषि और पशुपालन में लगे लोगों को प्रोत्साहन और ढांचागत समर्थन देगी। गांवों के युवाओं को खेल में प्रोत्साहित करने के लिए गांवों में खेल सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी। ग्रामीण दिल्ली के लिए बस और मेट्रो सेवाओं के माध्यम से कनेक्टिविटी में वृद्धि की जाएगी।

37.किसान समर्थक भूमि सुधार- आम आदमी पार्टी दिल्ली भूमि सुधार अधिनियम की धारा 33 और 81, हटाएगी। कोई भी भूमि ग्राम सभा की सहमति के बिना अधिग्रहित नहीं की जाएगी। गांवों में भूमि के उपयोग के संबंध में अनावश्यक प्रतिबंध को हटाने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव डालेगी।

  1. वाई-फाई दिल्ली-आम आदमी पार्टी पूरी दिल्ली में वाई-फाई की सुविधा देगी। इससे शिक्षा, उद्यम, व्यवसाय, और रोजगार को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही महिलाओं की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
  2. दिल्ली में व्यापार और खुदरा हब –आम आदमी पार्टी व्यापारियों के अनुकूल नीतियों तैयार करेगी और व्यवसायों की स्थापना और चलाने के लिए संबंधित नियमों और कानूनों को कारगर बनाएगी। आम आदमी पार्टी व्यापारियों के लिए अनुपालन और लाइसेंस को आसान बनाने के लिए सिंगल विंडो क्लियरेंस की प्रणाली विकसित करेगी। आम आदमी पार्टी दिल्ली में कोई भी नया व्यापार या व्यवसाय शुरू करने के लिए एक सप्ताह का समय सुनिश्चित करेगी। व्यापार संबंधी नीतियों को तैयार करने में व्यापारियों की भागीदारी को भी प्रोत्साहित करेगी।
  3. खुदरा में कोई प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नहीं-हमारी सरकार दिल्ली में खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर रोक के अपने फैसले पर कायम रहेगी।
  4. सबसे कम वैट व्यवस्था-देश मेंदिल्ली में सबसे कम वैट की व्यवस्था होगी। आम आदमी पार्टी वैट और अन्य टैक्स संरचनाओं को सरल बनाएगी। हर इलाके और बाजार से एकत्र वैट के एक हिस्से को व्यवसाय और व्यापार को बढ़ाने में लगाया जाएगा। इस राशि को बाजार के रखरखाव और उन्नयन के लिए उपयोग में लाया जाएगा।
  5. छापे और इंस्पेक्टर राज का अंत-आम आदमी पार्टी की सरकार छापे की संस्कृति और इंस्पेक्टर राज प्रथा को खत्म करेगी। केवल विशेष परिस्थितियों में वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति से छापा डाला जा सकेगा।
  6. वैट नियमों का सरलीकरण-आम आदमी पार्टी वैट नियमों, प्रक्रियाओं और इसके प्रारूपों को सरल बनाएगी। 30 पेज लंबे वैट फार्म को व्यापारियों की सहुलियत के लिए एक पेज में तब्दील करेगी। संबंधित विभाग के साथ सभी संचार प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जाएगा। लाइसेंस का आवेदन और इसकी प्राप्ती घर बैठे कर सकते हैं।
  7. दिल्ली कौशल मिशन का गठन- दिल्ली में अचल कौशल की खाई को पाटने के लिए आम आदमी पार्टी की सरकार स्कूलों और कॉलेजों में व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देगी। युवाओं को सक्षम करने के लिए दिल्ली कौशल मिशन पैदा करेगी।
  8. 8 लाख रोजगार के अवसर-आम आदमी पार्टी अगले पांच साल में आठ लाख नए रोजगार के अवसर पैदा करेगी। आम आदमी पार्टी उद्यमियों को सहायता मुहैया कराने के लिए अभिनव और निजी स्टार्टअप की सुविधा भी देगी। निजी उद्दोगों के माध्यम से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र बनाएगी।
  9. दिल्ली एक स्टार्ट-अप हब-सरकार विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में व्यापार और प्रौद्योगिकी इन्क्यूबेटरों की स्थापना करकेstartups हब के लिए प्रोत्साहित करेगी। एक पायलट परियोजना के रूप में, तीन लाख वर्ग फुट में व्यापार के लिए सस्ती जगह भी विकसित की जाएगी।
  10. ठेके के सभी पद नियमित किए जाएंगे-आम आदमी पार्टी दिल्ली सरकार और दिल्ली सरकार के स्वायत्त निकायों में 55,000 रिक्तियों को तत्काल आधार पर भरेगी। साथ ही 4000 डॉक्टरों और 15,000 नर्सों और सहयोगी स्टाफ को स्थायी किया जाएगा।
  11. सामाजिक सुरक्षा पर जोर-आम आदमी पार्टी एक लचीला और निष्पक्ष श्रम नीति लागू करेगी। हमारी नीति असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करेगी। इस नीति से मजदूरी, सेवाओं और घरेलू श्रमिकों के काम के घंटे को निर्धारित करने और खपरैल बीनने के काम की स्थिति में सुधार होगा। स्थानीय मोहल्ला सभा निर्धारित स्थानों के लिए फेरी वाले और हॉकरों को लाइसेंस देगी।
  12. प्रदूषण कम करने पर जोर-दिल्ली शहर की आत्मा दिल्ली रिज को अतिक्रमण और वनों की कटाई से संरक्षित किया जाएगा। स्थानीय मोहल्ला सभा के सहयोग से पर्यावरण के अनुकूल वनीकरण को दिल्ली के सभी भागों में बढ़ावा दिया जाएगा। आम आदमी पार्टी शहर को साफ करने के लिए यंत्रीकृत वैक्यूम सफाई वाहनों को अधिग्रहित करेगी। सड़कों से कारों की संख्या को कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहनों की हालत सुधारेगी। इसके अतिरिक्त सीएनजी और बिजली की तरह कम उत्सर्जन ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अलावा प्रदूषण कम करने के लिए सरकार कार-पूलिंग को प्रोत्साहित करेंगी। और ईंधन में मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त  कार्रवाई करेगी।
  13. एकीकृत परिवहन प्राधिकरण-आम आदमी पार्टी मेट्रो,बसों, ऑटो रिक्शा, रिक्शा और ई-रिक्शा सहित सभी परिवहन व्यवस्था के लिए समग्र परिवहन नीतियों का गठन करेगी। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए एक ‘एकीकृत परिवहन प्राधिकरण’ स्थापित करेगी।

51.बस सेवाओं में बड़े पैमाने पर विस्तार- आम आदमी पार्टी दिल्ली में भारी पैमाने पर बस सेवाओं का विस्तार करेगी। आगामी पांच साल में शहर को कम से कम 5,000 नई बसों से जोड़ने की योजना है।  इससे शहर में परिवहन लागत कम हो जाएगी और प्रदूषण भी कम होगा।

  1. ईरिक्शा के लिए तत्काल निष्पक्ष नीति-पिछले कई महीने सेदिल्ली के ई-रिक्शा चालक असंमजस की स्थिति में है। भाजपा सरकार की गलत नीतियों के कारण कई महीने से बेकार बैठे है। आम आदमी पार्टी सुरक्षा पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ई-रिक्शा चालकों के स्वामित्व और सुचारू संचालन के लिए एक स्पष्ट नीति और मानक लेकर आएगी।
  2. मेट्रो रेल का विस्तार-आम आदमी पार्टी मेट्रो रेल का विस्तार और दिल्ली में रिंग रेल सेवा को विकसित करने के लिए भारतीय रेलवे के साथ समझौता करेगी। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, दिल्ली मेट्रो का बड़े पैमाने पर विस्तार करने की योजना है। वरिष्ठ नागरिकों, छात्रों और विकलांग लोगों को बसों पर और मेट्रो में रियायत देने का भी प्रावधान है।
  3. ऑटो चालकों के लिए निष्पक्ष व्यवस्था-ऑटो रिक्शा स्टैंड की संख्या में वृद्धि की जाएगी। ऑटो-रिक्शा की खरीद के लिए त्वरित बैंक ऋण की सुविधा होगी। आचरण में सुधार के लिए ऑटो चालकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। ऑटो यात्रियों के हितों की रक्षा के लिए सख्त कानून बनाए जाएंगे। और, किसी भी तरह के दुर्व्यवहार के मामले में ऑटो चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाएगी। आम आदमी पार्टी पुलिस से ऑटो रिक्शा चालकों के उत्पीड़न रोकने संबंधी कानून भी बनाएगी।
  4. पुनर्वास कालोनियों का फ्रीहोल्ड-आम आदमी पार्टी पुनर्वास कालोनियों को फ्रीहोल्ड अधिकार देने के लिए सरल समाधान का प्रस्ताव लाएगी। मूल आवंटी को सिर्फ 10,000 रुपये में उसके प्लाट का स्वामित्व मिलेगा।

जो मूल आवंटी नहीं हैं उन्हें 50000 रूपए में प्लाट के स्वामित्व का अधिकार मिलेगा। बोझिल बहु पृष्ठ प्रपत्र का सरलीकरण करके एक ही पृष्ठ के फार्म में तब्दील किया जाएगा।

  1. अनधिकृत कालोनियों का नियमितिकरण व परिवर्तन-हम पुनर्वास कालोनियों में संपत्ति और बिक्री के कामों में पंजीकरण का अधिकार देंगे। इसके अलावा,हम एक व्यवस्थित और चरणबद्ध तरीके से बिजली, पानी,सीवर लाइन और, स्कूलों व अस्पतालों की सुविधा भी मुहैया कराएंगे। बुनियादी जरूरतों को पूरा करके ही  अनधिकृत कालोनियों को सशक्त बनाने के लिए एक ही रास्ता है। आम आदमी पार्टी की सरकार के गठन के एक वर्ष के भीतर, इन अनधिकृत कालोनियों को नियमित कर दिया जाएगा और निवासियों के स्वामित्व अधिकार दिया जाएगा।
  2. सभी के लिए किफायती आवास: आम आदमी पार्टी की सरकार कम आय वर्ग के लिए किफायती आवास  बनाएगी। दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड की वर्तमान में खाली पड़ी 200 एकड़ की जमीन को किफायती आवास के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
  3. मलिन बस्तियों में सीटू विकास-झुग्गी वासियों को मौजूदा मलिन बस्ती में ही भूखंड या फ्लैट्स उपलब्ध कराया जाएगा। यह संभव नहीं हुआ, तो उनका निकटतम संभावित स्थान में पुनर्वास कराया जाएगा। मोहल्ला सभा पुनर्वास प्रक्रिया की योजना है और इसके सफल कार्यान्वयन की निगरानी की जाएगी। पुनर्वास कार्य तक मलिन बस्तियों को किसी भी हाल में ध्वस्त नहीं किया जाएगा। पीने के पानी, साफ-सफाई और दूसरी बुनियादी सुविधाएं सभी मलिन बस्तियों में उपलब्ध कराई जाएंगी। मलिन बस्तियों में गलियों की मरम्मत की जाएगी और सड़कें पक्की बनाई जाएंगी।

59-वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल- सरकार तुरंत एक सार्वभौमिक और गैर-अंशदायी वृद्धावस्था पेंशन प्रणाली शुरू करेगी। एक न्यूनतम सम्मानजनक राशि मुद्रास्फीति में सूचीबद्ध के लिए दी जाएगी। संवितरण और पेंशन के संबंध में मनमाने ढंग से फैसलों में देरी का सफाया हो जाएगा। भुगतान अदायगी व पेंशन से संबंधित फैसलों में मनमाने ढ़ंग से होने वाली देरी को दूर किया जाएगा।

  1. नियंत्रित मूल्य वृद्धि-खुदरा और थोक व्यापार में,जमाखोरी और मुनाफाखोरी को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। आम आदमी पार्टी की सरकार सब्जियों, फलों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए काला बाजारी, जमाखोरी को रोकने के लिए पूरी ताकत लगा देगी। राशन की दुकानों और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को भ्रष्टाचार मुक्त करेगी और बढ़ती लागत से आम आदमी को राहत देगी।

  2. नशा मुक्त दिल्ली-आम आदमी पार्टी दिल्ली को पूरी तरह से नशा मुक्त राज्य बनाना चाहता है। नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए निगरानी प्रणाली और दोषियों के लिए सख्त सजा का प्रावधान बनाएगी। नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाएगी और ऐसे लोगों के पुनर्वास में मानसिक और मनोरोग समर्थन दिया जाएगा। साथ ही स्कूलों में किशोरों के लिए प्रभावी परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराएगी।

  3. विकलांगों का सशक्तिकरण-आम आदमी पार्टी विकलांग व्यक्तियों (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है, और उम्मीद करती है कि दिल्ली भारत के बाकी के हिस्से के लिए मिसाल साबित होगी। आम आदमी पार्टी विकलांग व्यक्तियों के लिए तीन प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करेगी। आम आदमी पार्टी सरकारी स्कूलों में विशेष शिक्षकों की भर्ती करेगी। आम आदमी पार्टी विकलांग बच्चों के स्कूलों और कॉलेजों में प्रवेश के लिए आसान प्रावधान बनाएगी और विकलांग बच्चों के लिए काम कर रही संस्थानों को वित्तीय सहायता भी देगी।

  4. 1984 के दंगों पीड़ितों के लिए न्याय-1984का दंगा दिल्ली के इतिहास का सबसे काला पन्ना है। इस हादसे के जिम्मेदार लोग आज भी खुलेआम घूम रहे हैं। न्याय से वंचित सिख समुदाय की भावना को आम आदमी पार्टी अच्छी तरह समझती है। इस मुद्दे पर केंद्र की भाजपा नेतृत्व वाली सरकार का रवैया अभी भी संदेहास्पद है। आम आदमी पार्टी की सरकार ने जनवरी 2014 1984 सिख विरोधी दंगे की जांच के लिए एसआईटी के गठन का आदेश दिया था। आम आदमी पार्टी की सरकार इस दिशा में फिर से प्रयास करेगी। और, इस दंगे की जांच प्रक्रिया को दोबारा कराने का वादा करती है।

  5. पूर्व सैनिकों का सम्मान-पूर्व सैनिकों और महिलाओं की सबसे बड़ी आबादी दिल्ली में रहती है। आम आदमी पार्टी “एक रैंक, एक पेंशन ‘की मांग कर रहे भूतपूर्व सैनिकों की लड़ाई में उनके साथ है। दिल्ली रोजगार बोर्ड और अन्य निकायों को पूर्व सैनिकों की जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता साथ पूरा करने का निर्देश दिया जाएगा। आरक्षित नौकरी की रिक्तियों को केवल पूर्व सैनिकों से भरा जाएगा।

  6. अल्पसंख्यकों को समानता और विकास-दिल्ली में हाल ही में कुछ स्थानों पर हुए सांप्रदायिक तनाव ने पूरी तरह से शहर के सामाजिक ताने-बाने को हिला कर रख दिया है। दिल्ली भर में पूजा स्थलों पर भड़काऊ भाषणों की भी आम आदमी पार्टी निंदा करती है। आम आदमी पार्टी ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए मोहल्ला सभा शांति समितियों की स्थापना करेगी। समिति का मकसद स्वराज की भावना को बनाए रखने और पास-पड़ोस में शांति व सद्भाव सुनिश्चित करने की कोशिश होगी। आम आदमी पार्टी दिल्ली वक्फ बोर्ड के कामकाज में पारदर्शिता लाने व निजी पार्टियों और सरकार द्वारा वक्फ संपत्ति पर अतिक्रमण हटाने की दिशा में भी ठोस पहल करेगी।

  7. सफाई कर्मचारी को गरिमा-आम आदमी पार्टी की सरकार ठेका प्रथा को खत्म करेगी। ठेके पर काम कर रहे मौजूदा कर्मचारियों को नियमित किया जाएगा। सीवेज नालों में प्रवेश करने वाले श्रमिकों को मास्क,सूट और मशीनों जैसे सुरक्षात्मक गियर उपलब्ध कराए जाएंगे। आग सेनानियों के लिए बीमा का प्रावधान होगा। सफाई कर्मचारियों के कैरियर में उन्नति के लिए उनके शिक्षा व प्रशिक्षण में सहायता दी जाएगी । ड्यूटी के दौरान “सफाई कर्मचारी” की मौत पर उनके शोक संतप्त परिवार को 50 लाख रूपए दिए जाएंगे।

  8. हाशिए की जिंदगी गुजार रहे लोगों को सुरक्षा-आम आदमी पार्टी की सरकार अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े जाति वर्गों के लिए दिल्ली सरकार की नौकरियों में आरक्षण की नीतियों के पालन को सुनिश्चित करेगी। अनुसूचित जातियों के उद्यमियों के लिए छोटे व्यवसायों की शुरूआत के लिए शून्य या कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराने का प्रावधान होगा। जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाएगा। आम आदमी पार्टी दिल्ली में बसे डिनोटिफाइड और खानाबदोश समुदायों के भेदभाव और उत्पीड़न को समाप्त करने के लिए कदम उठाएगी। ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और उचित पहचान पत्र दिया जाएगा।

  9. खेल संस्कृति को बढ़ावा-आम आदमी पार्टी विशेष रूप से दिल्ली के ग्रामीण और शहरी गांवों में, एथलीटों के लिए खेल सुविधाएं, बुनियादी ढांचे और प्रभावी मानव संसाधन प्रबंधन पैदा करेगी। युवाओं के लिए दिल्ली में नए स्टेडियम और खेल परिसर खोले जाएंगे। 3000 से अधिक सरकारी स्कूलों में खेल के मैदान बनाए जाएंगे जहां स्कूल के बाद खेलने की सुविधा होगी।

  10. पंजाबी,संस्कृत और उर्दू को बढ़ावा- उर्दू और पंजाबी को दूसरी भाषा का दर्जा देगी । उर्दू और पंजाबी पढ़ाने के लिए शिक्षकों की संख्या बढ़ाई जाएगी। दिल्ली के विभिन्न विश्वविद्यालयों में उर्दू और पंजाबी में रिसर्च को प्रोत्साहित किया जाएगा। संस्कृत के अध्ययन और रिसर्च को भी प्रोत्साहित किए जाने की योजना।

  11. हमारी विरासत और साहित्य का संरक्षण-दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। सभी के लिए सुलभ एक जीवंत सार्वजनिक स्थान मुहैया कराने की योजना। पढ़ने और जिज्ञासा की संस्कृति को प्रोत्साहित करेगी आम आदमी पार्टी की सरकार। एक सार्वजनिक पुस्तकालय या समुदायिक पढ़ने की जगह दिल्ली के हर निर्वाचन क्षेत्र में बनाने की योजना।

 

 

मई 3, 2014

भारतीय राजनीति में “आम आदमी पार्टी” की भूमिका: एडमिरल रामदास एवं ललिता रामदास

aap new logoमीडिया में आवाजों और क्रोध भरी चिल्लाहटें हिंसक होती जाती हैं और कष्टदायक लगने लगती हैं…बल्कि एक हद के बाद असहनीय होने लगती हैं…

हमारे करीबी और दूर रहने वाले लोग फोन करते हैं, चिट्ठियाँ भेजते हैं, ई-मेल करते हैं और पूछते हैं,”आप बता सकते हैं कि आम आदमी पार्टी” में क्या हो रहा है, हमें पता नहीं चल रहा कि क्या सोचें और क्या निर्णय लें, पार्टी में रहें या इसे छोड़ दें?”
मैं और रामू बर्मादे की खामोशी में बैठ कर सुनहरे-नारंगी रंग में रंगे पूरे चाँद को नारियल के पेड़ों के बीच से अपनी पूरी आभामय खूबसूरती के साथ उदय होते हुए देखते हैं और उसकी छटा हमें हर बार आश्चर्यचकित कर जाती है| अपने पूरे शबाब के साथ चन्दा हमारी इस आश्रय स्थली को चमका देता है जो हमने बीस साल के अथक प्रयासों से बनाई है और जिसे तहस नहस करने, लूटने और छीनने के लिए लालची शिकारी, और लुटेरे  प्रयासरत रहे हैं| हमने वे लड़ाइयां लड़ी और जीती हैं जिनके बारे में हमने कभी नहीं सोचा था| स्वयंभू कथित देशभक्तों ने हम पर देश द्रोही और गद्दार होने के आरोप लगाए हैं क्योंकि हमने परमाणु हथियार और परमाणु ऊर्जा के खिलाफ बोला, पाकिस्तान के साथ शांतिपूर्ण संबंध बनाने पर जोर दिया और पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध कायम करने के सिद्धांतों पर गंभीर होकर काम करने के लिए कहा| और अपने साहसिक अभियान के अंतिम चरण में हमें स्पष्ट आभास हुआ कि अगर हम जैसे लोग घर से बाहर नहीं निकलते और देश के आमजन- स्त्री और पुरुष,  के लिए आशा की किरण बन कर उभरी नई शक्ति को अपना सक्रिय समर्थन नहीं देते तो यह अपने पूर्वजों और आजाद मुल्क के माताओं और पिताओं के सपनों के साठ विश्वासघात के बराबर होगा और हमने निर्णय लिया नई आशा के साथ जाने का| हमें साथ जाना पड़ा, जमीर की आवाज पर|

हमारे दिमाग में कहीं कोई भ्रम नहीं है कि हम क्यों “आप” के साथ हैं| इसके साथ साथ थोड़ी चिंता भी है कि लोगों में “आप” को लेकर प्रश्न, भ्रम और संदेह भी उठ रहे हैं ऐसा इसलिए भी है क्योंकि  “आप” पुरानी अवधारणाओं को, कि राजनीति कैसी होनी चाहिए और आन्दोलन कैसे होने चाहियें, खारिज करती है और अपनी ही एक नयी परिपाटी बिछाती चलती है|  उत्तेजना और व्यथा से घिरे माहौल के मध्य आप सबसे वे बातें साझा करनी हैं जो एक ऐसे छोटे पर जुनूनी समूह ने लिखी हैं, जिसने अपने संदेह, अविश्वास और अलग अलग विचारधाराओं को सम्मिलित करके उन सब प्रश्नों से मुखातिब होने का प्रयास किया है जो कि बहुत सारे लोगों को मथ रहे हैं| यदि आपको इन विचारों के साथ कोई सामंजस्य दिखाई दे तो इन् बातों अको और बहुत से लोगों के साथ साझा करें…

रामू एवं ललिता दास – उन सब लोगों को धन्यवाद के साथ जिन्होने यह प्रयास किये हैं और जो गुमनाम ही रहना चाहते हैं …


“आप” की भूमिका भारतीय लोकतंत्र में :

सदस्यों और समर्थकों से एक अपील
1. “आप” की चुनावी सफलता की सार्थकता
“आप” द्वारा दिल्ली विधानसभा चुनावों में पाई गई सफलता से भारत की राष्ट्रीय पार्टियों के विरुद्ध जनता में उपजे माहौल की सनद मिलती है और यह माहौल राजनीतिक परिवर्तन के पक्ष में दिखाई देता है| अछूता रहने वाले मध्य-वर्ग ने, शहरी गरीबों ने और कामकाजी लोगों ने इस परिवर्तन के लिए अपना मत और समर्थन दिया| य निश्चित ही यह संकेत देता है कि अगर लोगों के सामने एक गंभीर और सार्थक विकल्प उपस्थित हो तो वे उसे वोट देंगें| एक साफ़-सुथरी सरकार देने के वादे पर टिके “आप” के चुनाव प्रचार ने हर वर्ग के भारतीयों को छुआ है| “आप” का उदय राष्ट्रीय महत्त्व की घटना है और “आप” क्षेत्रवाद, जाति और सम्प्रदाय से घिरे मुद्दों से परे ले जाती है भारतीय राजनीति को|
क्या “आप” विचारधारा से रहित पार्टी है? विचारधारा की अनुपस्थिति यह नहीं दर्शाती कि विचारों और आदर्श की भी अनुपस्थिति है| “आप” ने वास्तव में निम्नलिखित मुद्दों पर अपनी राजनीतिक दृष्टि जाहिर और निश्चित की है:
अपनी सरकार के प्रति नागरिकों की जिम्मेदारी
भारतीय संविधान को लागू करने के प्रति नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और जिम्मेदारी
जन-संस्थाओं को जनहित के प्रति वास्तविक रूप में जवाबदेह बनाए जाने की आवश्यकता
अहिंसक और लोकतान्त्रिक तरीकों से संवाद और भागीदारी बनाकर संस्थानिक बदलाव लाने की संभावना
सो पार्टी लोकतंत्र की रक्षा, देश के क़ानून का पालन, और भारतीय संविधान के रक्षा हेतु प्रतिबद्ध है| “आप” के ये संकल्प यह भी दर्शाते हैं कि अब तक मौजूद राजनीतिक दल इन कर्तव्यों का निर्वाह करने में असफल रहे हैं| यह भी स्पष्ट हो जाता है कि हमारे अपने संविधान में ही ऐसे प्रावधान और आदर्श उपस्थित हैं जो कि अगर सही तरीके और सही भावना से लागू किये जाएँ तो भारतीय समाज और संस्कृति की बहुत सी समस्याएं हल हो सकती हैं|
2. आप और उदार भारतीय राष्ट्रवाद
“आप” को मिला जनसमर्थन आश्चर्य में डालने वाला था|  1977 में जनता पार्टी को मिले जन समर्थन से “आप” की तुलना की गई| हालांकि जनता पार्टी जल्दी में पहले से उपस्थित बहुत से समूहों को मिलाकर बनाया गया गठबंधन था|  “आप” का विकास भारतीय जनता के हितों के लिए एकदम से उभरी नई पार्टी का उदय है|  एक दृष्टि से 1920 के दशक में जब महात्मा गांधी द्वारा जन समूह को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जोड़ने के लिए चवन्नी देकर मेंबर बनने की योजना चलाई जाने के बाद कांग्रेस एक मध्य-वर्ग की पार्टी से आम-जन-समूह की पार्टी बन गई थी, उस प्रक्रिया से “आप” का उभार समझा जा सकता है|
जाति, भाषा और सम्प्रदाय की सार्थकता के बावजूद भारतीय राजनीति ने राष्ट्रीय चेतना के छाते तले काम किया है| इसलिए राष्ट्रीय दलों के ह्रास के बावजूद अभी तक वे किसी भी गठबंधन की धुरी रहे हैं| इस चेतना के दो मूल रहे हैं –  महात्मा गांधी द्वारा चलाया गया “सम्मिलित और मध्यमार्गीय राष्ट्रवाद” और अतिवादी एवं कट्टर समूहों द्वारा प्रचलित “संकीर्ण  राष्ट्रवाद”
कांग्रेस ने हमेशा यह दावा किया कि वह गांधी द्वारा दिखाए मार्ग पर चलती रही है| लेकिन अस्सी के दशक के बाद हुयी घटनाओं ने बहुत से लोगों को यह स्वीकारने के लिए विवश किया है कि इसने अपने आदर्शों के साथ विश्वासघात किया है| दलों और उनके द्वारा उपलब्ध कराये जा रहे मंचों में बहुत बड़ा अंतर होता है| दल से संबद्धता से बहुत बड़ा होता है विचार!
राजनीति पार्टियों को छोड़ दिया जाए तो भारतीय नागरिको के सामने दो विकल्प हैं – उदारतावाद  बनाम अतिवाद!  अतिवाद, क्षेत्रवाद, जातिवाद या सम्प्रदायवाद किसी भी रूप में सामने आ सकता है| यह बाजार की अंध-भक्ति के रूप में भी सामने आ सकता है, खासकर तब जबकि ठेकेदारों और कोर्पोरेट्स के हितों को सारे भारतीयों के हित के रूप में प्रचारित करता है इन तत्वों द्वारा संचालित मीडिया| अतिवादी विचार और राजनीति अक्सर देश को हिंसा की आग में झोंक देते हैं|
“आप” उदारवाद और अहिंसा का पुरजोर समर्थन करती है| भारतीय लोकतंत्र में “आप” की जगह  बनाने के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण और केन्द्रीय मुद्दा है|  “आप” उदार, अहिंसा और सबको साथ  लेकर चलने वाले राष्ट्रवाद में यकीन करने वाले नागरिकों की अपेक्षाओं का राजनीतिक प्रतिविम्ब है|  “आप”  प्रतिनिधित्व करती है जो कि बहुत लंबे समय से हाशिए पर रखे गये हैं| इसकी खुली सदस्यता और इसकी लचीली विचारधारा इसके बहुत बड़े आकर्षण हैं|
3. आप पर आक्रमण और हमारी अंदुरनी समस्याएँ
आप पर छिपे हुए वामपंथी दल होने का आरोप लगाकर आक्रमण किये जा रहे हैं| य प्रवृत्ति फिर से सिद्ध करती है कि कैसे राजनीतिक साजिश के तहत शहरी गरीबों, कामगारों (नियमित और अनियमित और गैरपरम्परागत), मुकदमे झेल रहे आदिवासियों, सामाजिक न्याय, पर्यावरण को हानि से सम्बंधित मुद्दे, और स्त्री-विरोधी हिंसा, आदि सभी मुद्दों को कम्युनिज्म से सम्बंधित मामलों का रूप दे दिया जाता है| हमें यह बात उठानी चाहिए कि सत्ता विरोधमात्र के प्रति असहिष्णु हो चुकी है और सत्ता तंत्र ने ऐसी आर्थिक नीतियां लागू की हैं जिससे समाज के बहुत बड़े तबके के हित नष्ट हो रहे हैं| अराजक होने के स्थान पर “आप” मध्यमार्ग और उदारता में विश्वास रखती है जबकि सत्ता तंत्र इसके उलट राजनीतिक, पर्यावरण और संप्रदायों से सम्बंधित मामलों में अतिवादी हो चुका है|
मध्य-वर्गीय भारतीयों के अलावा श्रमिक, गरीब और सुविधाओं से वंचित, शोषित भारतीय “आप” के उदय से उत्साहित और प्रेरित हैं| हमारे आर्थिक और राजनीतिक अभिजात्य वर्ग को एक बात स्पष्ट रूप से समझने की जरुरत है कि ये दबे-कुचले लोग और इनकी समस्याएं और उन्हें उठाने वाले आंदोलनकर्मी गायब नहीं होने वाले हैं वामपंथी दलों के ह्रास के कारण| उन सब लोगों से, जो “आप” पर अपनी मर्जी से कई तरह के लेबल चिपकाना चाहते हैं, हम कहना चाहते हैं कि  हाँ शोषित भारतीयों की जरूरतों, उनकी अभिलाषाओं और उनके संघर्षों को बहुत से लोग और संस्थाएं रेखांकित करते रहे हैं और हम उनकी राजनीतिक मुखरता का स्वागत करते हैं और हम भी उनके मुद्दों को उठाने वालों में से एक हैं| और हम यहाँ जमने आए हैं हमारा संघर्ष लंबा है और हम मैदान छोड़ने वालों में से नहीं हैं| हम पूर्ण बदलाव का सपना लेकर आए हैं और लक्ष्यपूर्ति करे बगैर हम थकने वालों में से नहीं हैं|
4. क्या आप भ्रमित है और एकत्रित ढाँचे के रूप में रहने में असमर्थ है? हमें क्या करना चाहिए? 
“आप” की तेजी और अनवरत रूप से बढ़ती सदस्य संख्या और इसकी भिन्न अभिलाषाओं के कारण बहुत से लोग भविष्यवाणियां करते रहते हैं कि “आप” जल्द ही टूट जायेगी, बिखर जायेगी| हो सकता है यह संभव हो पर हमें एक लाओक्तान्त्रिक आंदोलन के धनात्मक पहलुओं और इसके समर्थकों की जिम्मेदारियों के बारे में सोचना चहिये| सत्य, अहिंसा और सामाज के सबसे गरीब और साधनहीन व्यक्तियों के बारे में गांधीजी द्वारा रखे गये आदर्श हमारे लिए दिशासूचक का कार्य कर सकते हैं| “आप” भले ही अपनी नवजात स्थिति में हो पर जो लोग इस्स्में सम्मिलित हो रहे हैं वे अनुभवी हैं| यह उन सबके अनुभवों से पोषित होगी और अलग-अलग क्षेत्रों और विचारधाराओं से आए लोगों के निरंतर संवाद से उत्पन्न ज्ञान से समृद्ध होगी|
क्या है जो हमें जोड़ता है? 
हमारे समाज के साधनसम्पन्न लोगों की संकीर्णता से उलट हम लोग उदारवाद में विश्वास रखते हैं| हम लोग अतिवादी नहीं हैं| हम भारतीयों में आर्थिक, पर्यावरण, और सुरक्षा संबंधी उन मसलों पर खुली बहस चाहते हैं जिन्होने हममें से बहुत से लोगों के जीवन को कठिनाइयों से भर दिया है| ऐसी बहस एक ऐसे माहौल में ही हो सकती है और होनी चाहिए जहां पारस्परिक रूप से आदर का भाव हो| “आप” के सदस्यों को प्रेरित किया जाता है वे भारतीयों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को भली भांति समझें और उसके बाद आपस में और अन्य लोगों के साथ उन मुद्दों पर बातचीत प्रारम्भ करें| ऐसी सार्थक बहसों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता हमें आपस में जोड़ती हैं|
भारत में आर्थिक नीति का मामला हो या पर्यावरण संबंधी मामले हों हम चाहते हैं कि इनसे सम्बंधित नीतियों की समय सामी पर समुचित समीक्षा होती रहनी चाहिए और इनमें समयानुसार धनात्मक बदलाव लाते रहने चाहियें| नियमित समीक्षा न होने की वजह से इन् मुद्दों ने देश के सामने बहुत बड़ी बड़ी समस्याएं खड़े कर दी हैं|
हमारी न्यायिक व्यवस्था में ह्रास, स्त्रियों पर आक्रमण, और मानवीय अधिकारों के प्रति हमारे अनादरपूर्ण भाव ने भारतीय समाज में कड़वाहट और भय का समावेश किया है| समाज के सभी वर्गों को सभी ज्वलंत मुद्दों पर मुक्त संवाद को बढ़ावा देना चाहिए| हम उन सभी तत्वों से अपील करते हैं,जिन्होने राज्यसत्ता के खिलाफ हथियार उठा लिए हैं, कि वे हिंसा का मार्ग त्याग कर खुले दिमाग से संवाद करने का मार्ग अपनाएँ|   भारतीय संविधान को हिंसा के माध्यम से उलट देने के विचार से उलट हमें ऐसे अहिंसक जन-आंदोलन की जरुरत है जो भारतीय संविधान को पूर्णरुपेण लागू करे|  यह भी एक आदर्श है जो हमें जोड़ता है|
देश में विखंडन “आप” के कारण नहीं बल्कि सड़े गले तंत्र की यथास्थिति बनाए रखने की जिद के कारण है| मौजूदा तंत्र के सनक भरे व्यवहार के उलट “आप” आशा और जनसेवा के आदर्श की ताजी बयार के रूप में सामने आई है|  यही सब योग्यताएं हैं जो देश को विखंडित होने से बचा सकती हैं| The “आप” देश को पुनर्जीवित करने वाले प्रतिनिधि के रूप में सामने आई है|  यह दक्षिण एशिया में हमारे पड़ोसियों को प्रेरित कर सकती है कि वे भी ऐसे प्रयोग शुरू करें और ऐसे संकेत भी मिल रहे हैं कि ऐसा होना आरम्भ भी हो चुका है|  इस तरह से “आप” हमारे उपमहाद्वीप में औरों के नजदीक जाने के लिए पुल का काम कर रही है|  हम क्षेत्र में शान्ति के संदेशवाहक बन सकते हैं|

“आप” केवल एक राजनीतक दल मात्र नहीं है| इससे भी ज्यादा यह राष्ट्रीय जनांदोलन है| यह अलग अलग तरह के उन लोगों के बीच परस्पर संवाद की शुरुआत है, जो कि भारतीय हैं और जो हमेशा भारतीय ही रहेंगे| हम सदस्यों, समर्थकों से अपील करते हैं कि वे उन भारतीय नागरिकों, जो हमसे अलग राय रखते हैं, से मित्रतापूर्ण संवाद कायम करें और पूरी शिद्दत से उन्हें समझाएं कि हम लोग साथ में अपने समाज को बदल सकते हैं और इसकी बुराइओं को खत्म करके इसकी बीमारियों का इलाज कर सकते हैं|

– रामू और ललिता रामदास

मई 1, 2014

“आप” संकल्प-पत्र @ वाराणसी

AAP@BanarasManifesto1

AAP@BanarasManifesto2

AAP@BanarasManifesto3
AAP@BanarasManifesto4
AAP@BanarasManifesto5
AAP@BanarasManifesto6
AAP@BanarasManifesto7
AAP@BanarasManifesto8

अप्रैल 28, 2014

श्रीमती अरविंद केजरीवाल आपको डर नहीं लगता अपने पति के लिए?

Arvindwifeलोग मुझसे अक्सर पूछते हैं कि तुम अरविंद की पत्नी होने में कैसा महसूस करती हो?

क्या तुम्हें डर नहीं लगता?

मैं उन्हें मुस्कुरा कर जवाब देती हूँ कि नहीं, मुझे डर नहीं लगता|

मगर सच्चाई ये है कि मुझे कभी कभी थोड़ा डर महसूस होता है|

खास तौर से तब जब अरविंद घर पर नहीं होते|

आधी रात को उठ कर अपने दोनों बच्चों के बेड के पास जाकर घंटों खड़ी रहती हूँ| कभी कोई बुरा ख़याल आ जाता है तो खामोशी से रो लेती हूँ|

शायद ये स्वाभाविक भी है|

पहले पहले दिल करता था कि अरविंद से कह दूं कि देश की चिंता छोड़ो.

अपने बच्चों की चिंता करो,

अपनी पत्नी की,

अपने बूढ़े माँ-बाप की चिंता करो|

देश की चिंता के लिए भगवान किसी और को खड़ा कर देगा…

मगर अब मुझे अपनी उस सोच पर शर्म आती है…

अब मुझे अपनी किस्मत पर गर्व होता है

कि अरविंद ने मुझे अपना जीवनसाथी चुना है|

अरविंद के साथ रह कर मेरा ये विश्वास भी पक्का हो गया कि आख़िर में जीत

सच्चाई की ही होती है|

हाँ…अरविंद

सच्चाई के इस रास्ते पर मैं

तुम्हारे साथ हूँ और हमेशा रहूंगी|

भगवान मेरा सुहाग सलामत रखेगा, और तुम्हें बहुत सारे लोग मिलेंगे जो इस सच्चाई के रास्ते में तुम्हारा साथ देंगे|

अप्रैल 28, 2014

अरविंद केजरीवाल Vs नरेंद्र मोदी @ वाराणसी में नामांकन

Neetish@Modi

भीड़ दोनों तरफ है फर्क बस इतना है

एक तरफ आई हुई है

दूसरी तरफ लाई हुई है

हवा दोनों तरफ है

फर्क बस इतना है

एक तरफ बनी हुई है

दूसरी तरफ पैसे के दम पर बनाई हुई है

जीत का विश्वास दोनों तरफ है

फर्क बस इतना है

एक तरफ आम लोगो के दम पर है

दूसरी तरफ अंबानी अडानी के दम पर है

चर्चा दोनों तरफ की है

फर्क बस इतना है

एक तरफ की चर्चा आम जनता में है

दूसरी तरफ मीडिया ने बनाई हुई है

AKvsModi@Benaras

लगता है कि बनारस में कारपोरेट मीडिया/भाजपा समर्थित कथित ‘सुनामी’ के सबसे पहले शिकार ख़ुद पत्रकार हो गए हैं और यह ‘सुनामी’ उन्हें पूरी तरह बहा ले गई है.

सबूत चाहिए तो कल टीवी पर और आज के अखबारों में बनारस में नमो के नामांकन की रिपोर्टिंग पढिए. जिस श्रद्धा और भक्ति से रिपोर्टिंग की गई है, उसमें सबसे पहले तथ्यों को अनदेखा किया गया है|

उदाहरण के लिए टाइम्स आफ इंडिया और इकनामिक टाइम्स की रिपोर्टों में तथ्यों में फ़र्क़ है| उनकी तुलना बाक़ी अख़बारों की रिपोर्टों से करें तो उन सबके बीच तथ्यों का फ़र्क़ साफ़ दिखने लगता है.

कुछ साल मैंने भी बनारस में गुज़ारे हैं. कुछ सवाल सिर्फ तथ्यों के बारे में. पहली बात यह है कि अगर मलदहिया से मिंट हाउस,नदेसर की दूरी गूगल मैप के मुताबिक़ १.७ किमी है, उसे २ किमी भी मान लिया जाए और उसे पूरी तरह लोगों से भरा हुआ भी मान लिया जाए तो उसमें ४० हज़ार से ज़्यादा लोग नहीं होंगे. वह लाखों और कुछ अख़बारों/चैनलों में ३ लाख तक कैसे पहुँच गई? थोड़ा सा गणित का इस्तेमाल कीजिए,आपको वहाँ पहुँची भीड का अंदाज़ा लग जाएगा|

susheel modi tweetयह ज़रूर ‘सुनामी’ का ही असर है! श्रद्धा में बह रहे मीडिया में तथ्य बह जाएँ तो किमाश्चर्यम?

एक आदमी को खड़े होने के लिए एक हाथ लम्बी और एक हाथ चौड़ी जगह तो चाहिए ही. मतलब 18 इंच गुने 18 इंच. यानी लगभग 50 cm x 50 cm. यानि कि 1 sq meter में अधिकतम ४ आदमी

वाहन के आस पास के 200 meter में 1 sq meter में ४ आदमी घनत्व, उसके पिछले 300 meter में 1 sq meter में केवल 2 आदमी का घनत्व तथा बाकी 1500 meter में 2 sq meter में 3 आदमी के घनत्व के हिसाब से मलदहिया से कचहरी के बीच की सड़क को 60 फीट (यानि 18 meter) चौड़ी मानते हुए ये संख्या होगी [(200x18x4)+(300x18x2)+(1500x18x2/3)] यानी कुल 14400+10800+18000 = 43200

अगर ये मान भी लिया जाए कि 7-8 हजार लोग लंका, काशी विद्यापीठ और मलदहिया और बीच के रास्ते में ही रह गये और जुलूस में शामिल नहीं हुए तो जुलूस की पूरी संख्या 50 हजार कही जा सकती है

अब अगर इसमें से बनारस की अन्य लोकसभा क्षेत्रों, पूर्वांचल के अन्य लोकसभा क्षेत्रों और बिहार से आये हुए लोगों की संख्या (जैसा सुशील मोदी का दावा है) को, यानि की कुल 25 लोकसभा क्षेत्रों के लिए @ 1000 के हिसाब से तथा गुजरात और अन्य राज्यों से आकर बनारस में कैम्प कर रहे 5 हजार लोग यानी कुल बाहरी संख्या को 30 हजार भी मानकर घटा दिया जाए तो यह तथाकथित सुनामी बनारस संसदीय क्षेत्र से केवल 20 हजार लोगों को ही बटोर पाई.” [Anand Pradhan]

…..

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी रोज चार से छह रैलियां करते हैं। वह देश के कोने-कोने जाकर प्रचार कर रहे हैं। लेकिन, रात अपने बंगले में ही बिताते हैं। (यह भी एक रहस्य की बात है!) उन्हे उड़ाने के लिए तीन जहाजों का बेड़ा हमेशा तैनात रहता है। इनमें एक जेट प्लेन और दो चॉपर शामिल हैं। ये विमान अदाणी ग्रुप और डीएलएफ जैसी कंपनियों के हैं।

मोदी को उड़ाने के लिए अहमदाबाद एयरपोर्ट पर हर सुबह एक एंब्रेयर एयरक्राफ्ट EMB-135BJ तैयार रहता है। यह जेट विमान करनावती एविएशन का है, जो अदाणी ग्रुप की ही एक कंपनी है। मोदी के हवाई बेड़े में अगस्ता AW-139 चॉपर भी शामिल है। यह डीएलएफ ग्रुप का विमान है। इनके अलावा निजी कंपनी के चॉपर बेल 412 से भी मोदी ने उड़ानें भरी हैं। बिहार और यूपी जैसे राज्योंु के लिए मोदी ने अगस्ता AW-139 चॉपर का इस्ते माल किया था।

विशेषज्ञों के मुताबिक एक इंजन के चॉपर विमान से उड़ान भरने की कुल लागत 70,000 से 75000 रुपए प्रति घंटे के हिसाब से बैठती है। दो इंजन वाले चॉपर विमान से उड़ान भरने की कुल लागत 1 से 1.2 लाख प्रति घंटे के हिसाब से बैठती है। वहीं जेट विमान के जरिए उड़ान भरने की कुल लागत करीब 3 लाख रुपए प्रति घंटे के हिसाब से बैठती है। नरेंद्र मोदी देशभर में अब तक तकरीबन 150 रैलियां कर चुके हैं। इस दौरान उन्हों ने 2.4 लाख किमी की यात्रा की है। यानी, रोज लगभग 1,100 किमी का सफर। हिसाब लगाइये की कम्पनियां कितना पैसा खर्च कर रही हैं।

अब देश की समझदार जनता विचार करे की मोदी के ऊपर इतना पैसा खर्च करने वाली कंपनियां मोदी के सत्ता में आते साथ ही किस तरह से अपनी रकम की कई गुना वसूली करने का जालिमाना तरीका अपनाएंगी![Anurag Ojha]

अप्रैल 22, 2014

गुजरात का विकास : मोदी से बहुत पहले की कहानी है!

(Reetika Khera, Assistant Professor, Humanities and Social Sciences department, IIT-Delhi)

मेरी ही उम्र का एक सोलह साल का लड़का पटना से बड़ोदा आया, जो कि मेरा शहर था| उसके लिए बड़ा ही आश्चर्यजनक यह देखना कि बड़ोदा में बिजली नियमित रूप से रहती थी| सड़कें बहुत अच्छी थीं| महिलायें देर रात्री में भी सड़कों पर दिखाई दे जाती थीं, अकेली जाती हुयी या दोपहिया वाहन पर, आकर्षक कपड़े पहने हुए, बैकलेस चोली पहने हुए गरबा करती हुयी… उसे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं होता था| मैंने कभी बिहार नहीं देखा था अतः मेरे लिए अचरज भरा था उसका यूं आश्चर्यचकित रह जाना|

एक और समय, जब मेरे पिता अपने व्यापार के सिलसिले में पंजाब के दौरे पर ज रहे थे| ट्रेन में उन्हें एक पंजाबी व्यापारी मिले, और दोनों व्यापार में लाभ की बातें करने लगे| जब मेरे पिता ने उनसे बिजली के बिल के बारे में बताया तो वे सज्जन अचरज में पड़ गये और बोले,” आप को बिजली का बिल देना पड़ता है तब लाभ कैसे होता है?” ऐसा सुनकर मेरे पिता को भी उतना ही आश्चर्य हुआ जैसा मुझे पटना से आए लड़के की बातों से हुआ था|

ये दनों घटनाएं 1989 की हैं| आजकल दूसरे प्रदेशों से गुजरात में पहली बार जाने वाले लोग ऐसे ही आश्चर्यचकित होकर बातें करते हैं जैसे बिहार से आआ हुआ 16 वर्षीय लड़का करता था| वास्तव में गुजरात में नियमित बिजली आपूर्ति, अच्छी सड़कें, विकसित होता उधोग जगत, अच्छे सरकारी स्कूल, मिड-दे मील (1984 से सुचारू रूप से चल रहा है), आंगनवाडी (बालवाड़ी), राज्य परिवहन की बसें, और जनहित के बहुत से कार्यों समेत बहुत कुछ था (और है) जिसकी प्रशंसा की जा सकती थी (आज भी की जा सकती है)| बहुत से क्षेत्रों में गुजरात ने पहल की थी| केरल जैसा नहीं पर उससे बहुत पीछे भी नहीं था नई शुरुआत करने में|

प्री-स्कूल में, हम लोगों को ठंडे दूध का एक गिलास मिलता था (हम लोग इसलिए पीते थे क्योंकि दूध रंगबिरंगे प्लास्टिक के गिलासों में मिलता था)| वर्तमान में मीडिया न्यौछावर हो जाता है इस खबर पर कि किसी राज्य ने लड़कियों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करने के लिए उन्हें मुफ्त में साइकिलें देने की योजना पर अमल करना शुरू किया है| गुजरात में बहुत समय से लड़कियों को मुफ्त में शिक्षा दी जाती रही है, कम से कम तबसे तो निश्चित रूप से जब मैं आठवीं से बारहवीं कक्षाओं की पढ़ाई कर रही थी (सहायता प्राप्त स्कूलों में भी)|  विश्वविधालय में मेरी बी.ए   (1992-1995) का शुल्क  मात्र 36 रुपये प्रति वर्ष था|

ग्रामीण इलाकों में भी दृश्य अच्छा था| स्कूली छात्र के सरंक्षित रूप में हमने प्रकृति-शिक्षा-कैम्प के द्वारा ग्रामीण गुजरात देखा, और हम गिर के वनों में और पिरोटन द्वीप पर भी गये| स्कूल की वार्षिक पिकनिक के दौरान नर्मदा के किनारे भी गये| बड़े होने पर मैंने जाना कि गुरुदेश्वर, ज़देश्वर, और उत्कंठेश्वर गुजरात के आदिवासी इलाकों के भाग हैं जो कि तुलनात्मक रूप से राज्य का पिछडा इलाका माना जाता था| तब भी उस समय जैसी सड़कें हमने वहाँ देखीं, वैसी सड़कें, शोध के सिलसिले में 2005-2007 के दौरान मध्य प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय राजमार्गों पर भे इन्हीं पाईं (हालांकि अब वहाँ भी कफी सुधार हो गया है)| केवल आज के दौर में ये स्थान ऐसे हाइवे पा रहे हैं जैसे गुजरात नब्बे के दशक में ही इस्तेमाल में ला रहा था| पिछले चौदह सालों में देश के बहुत सारे राज्यों में शोध के सिलसिले में दौरे करने के बाद मुझे यह एहसास हो गया है कि क्यों मेरे विधार्थी जीवन में भी गुजरात में पहली बार आने वाले वहाँ पर विकास का स्तर देखकर क्यों आश्चर्यचकित रह जाते थे और कि गुजरात ने वास्तव में बहुत पहले से ही अच्छा इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर लिया था|

बड़ोदा को अपने क्षेत्रीय और धार्मिक बहुलतावाद पर गर्व रहा है| स्कूल में मेरे साथ हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, पारसी, और सिंधी छात्र पढते थे| मुझे आज भी ओणम, पोंगल, और पतेती के अवसर पर मिलने वाली दावतों की याद है| पर वर्तमान में दुखद रूप से सब बदल चुका है| 2007 में जब संजय दत्त को आतंकवादियों से संपर्क करने के कारण सजा हुयी थी तब मेरी सात साल की भतीजी ने मासूमियत से पूछा था,” वह आतंकवादी कैसे हो सकता है, वह तो मुस्लिम नहीं है?”

ऐसा नहीं है कि गुजरात में पहले साम्प्रदायिक भावनाएं नहीं थीं| पर बड़े होने तक इन् सब भावों से कभी भी सीधी मुठभेड़ नहीं हुयी थी|

गुजरात में पाले पढ़े होने में सबसे ज्यादा (स्वादिष्ट खाद्य सामग्रियों के अलावा, जिनमें हमेशा ही चीनी नहीं डाली जाती!) महत्वपूर्ण बात जो मुझे लगती है  वो है स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता के भाव जो मुझे मिले क्योंकि चारों और बेहद सुरक्षित वातावरण था|  दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स से एम ए (1995-7),  करते हुए मैं कई बार राजधानी एक्सप्रेस से सुबह तीन बजे बड़ोदा पहुँची और मेरे लिए यह बड़ा स्वाभाविक ठ अकी मैं अकेली स्टेशन से बाहर ऑटो स्टैंड पर जाऊं और उतना ही स्वाभाविक था मेरे औटो में बैठने के बाद मीटर चालू करके ऑटोवाले का मुझसे पूछना कि मुझे कहां जाना है? गहरी नींद में सोये हुए अपने माता-पिता को मैं जाकर जगाती थी| उन्हे कभी चिंता में नींद खराब नहीं कानी पड़ी कि मैं कैसे अकेली घर तक आउंगी|  दिल्ली में ऐसा कर पाना आज भी एक स्वप्न सा लगता है, मेरे जैसे सामाजिक पृष्ठभूमि के इंसान के लिए भी| बिना भय के कहीं भी घूमने की स्वतंत्रता का मोल हम अक्सर हल्के में लेते हैं|

इन स्व-अनुभवों से भरे किस्सों के अलावा तथ्य क्या कहते हैं? नीचे दी गई तालिका में गुजरात और राष्ट्रीय स्तर परपांच समाजिक और आर्थिक सूचकांकों का औसत दिया गया है 90 के दशक के बाद के काल में| आंकड़े बताते हैं कि नब्बे के दशक में ही गुजरात का औसत दश के औसत से बेहतर था| तब गुजरात देश के दस ऊँचे राज्यों में से एक था| 2000 के बाद के दशक में यह सफल नहेने हो पाया अपनए ही पिछले प्रदर्शन को कायम रखने में (मुफ्त शिक्षा, मिड-डे मील, शिशु-विकास योजनाएं, विस्तृत और उच्च विकास आधारित इकोनॉमी)| अन्य राज्यों की तुलना में गुजरात का सामाजिक सूचकांक नीचे गिरा है|  स्पष्टतः गुजरात कोई एक दिन में नहीं बना था और गुजरात को बनाने में किया गया कठोर परिश्रम मोदी काल से कम से कम एक दशक पहले की बात है|

मेरा यह कहना नहीं है कि अस्सी और नब्बे के दशकों में गुजरात के पहले के विकास का श्रेय कांग्रेस को दिया जाना चाहिए जिसने उन सालों में सबसे अधिक सालों तक गुजरात में सत्ता चलाई| उपलब्धियों की निरतंरता ऋणात्मक सूचकांकों की रोशनी में भी देखी परखी जा सकती है| भ्रष्टाचार कम से कम अस्सी के दशक से हमारे साठ साठ विचरण कर रहा है| नब्बे के दशक में एक चुटकला प्रसिद्द था – “CM”, “Chief Minister” का संक्षिप्तीकरण न रहकर “Crore-Making” का संक्षिप्त रूप हो गया था – CM के बारे में यह माना जाने लगा था कि वह एक दिन में करोड़ों कमा रहा था|  मुझे बताया गया है कि गुजरात में आजकल अगर सारी नहीं तो अधिकतर प्रोपर्टी डील काले धन के इस्तेमाल के बगैर सम्पन्न नहीं होतीं| देश के बाकी स्थानों की तरह ही रोजमर्रा के स्तर पर भ्रष्टाचार घर कर चुका है वहाँ| आपातकालीन स्थितियों में यात्रा करने की मजबूरी के कारण एक व्यक्ति को ट्रेन छोटने से दो घंटे पहले स्टेशन पर 1000 रुपयों की घूस देकर टिकट मिला|

भाजपा की प्रचार मशीनरी गुजरात को “ईश्वर की अपनी धरती” के रूप में प्रचारित कर रही है| जबकि उत्तर भारतीय मैदानों से गये आदमी की निगाहों से देखें तो गुजरात की विकास की कहानी मोदी काल से बहुत पहले ही कायम हो चुकी थी| दक्षिण की दृष्टि से देखें तो गुजरात एक धनी राज्य दिखाई देता है पर सामाजिक सूचकांकों के आधार पर पिछडा हुआ राज्य है, तमिलनाडु की तुलना में, केरल की बात तो अलग ही है|

reetika-khera-gfx.jpg.png
Original article

अप्रैल 18, 2014

अरविंद केजरीवाल : कहानी डेंटिस्ट की ज़ुबानी

AKeatingअरविंद से मेरी पहली मुलाक़ात तब हुयी जब वे एक मरीज के तौर पर मेरे पास आए| दांत में दर्द के कारण वे पिछली रात सो नहीं पाए थे| मैंने जांच के बाद उन्हें बताया कि या तो उन्हें रूट-कैनाल करवाना पड़ेगा या फिर दांत निकलवाना पड़ेगा|

अन्य डाक्टरों के मुकाबले मैं काफी सस्ता था पर जब मैंने उन्हें रूट कैनाल करवाने का खर्चा बताया तो उन्होंने कहा कि वे यह खर्च वहन नहीं कर सकते| उन्होंने दांत उखड़वा लिया|

मैं कभी कल्पना भी नहीं कर सकता था कि एक IRS अधिकारी मेरे जैसे सस्ते डेंटिस्ट का इलाज भी वहन नहीं कर सकता|

उसके बाद दीपावली की शाम मैं बाजार से दिए आदि खरीदने घर से बाहर निकला तो देखा कि केजरीवाल दंपत्ति अपनी इमारत के बाहर एक मेज के पीछे खड़े थे और मेज पर तोहफे रखे हुए थे|

यह सब क्या है? मैंने पूछा!

अरविंद बोले,”दीवाली से पहले ही घर के दरवाजे के बाहर मैंने नोटिस लगा दिया था”नो गिफ्ट्स”, पर तब भी लोग तोहफे दे गये| यह भी दीवाली की आड़ में जबर्दस्ती घूस देने वाली बात है- जैसे बच्चों के लिए मिठाई”|

उन्होंने बताया कि वे वहाँ तोहफों को बेचने के लिए खड़े हैं और इनसे होने वाली कमाई को एनजीओ को दान कर देंगें|

मेरे लिए एक IRS दंपत्ति का इस तरह सड़क पर खड़े होकर सामान बेचना अकल्पनीय था| मैं स्तब्ध रह गया|

मुझे गुस्सा आता है जब लोग उनके ऊपर स्याही फेंक देते हैं, उन पर शारीरिक हमले कर देते हैं| पर अरविंद इन् सब हमलों से प्रभावित नहीं होते| मैं क्रोघित हो उठता हूँ क्योंकि मेरे लिए अरविंद का दर्जा बहुत ऊपर है| मैं नास्तिक हूँ पर मेरे लिए वह ईश्वर जैसे हैं…

जब उन्होंने राबर्ट वाड्रा के खिलाफ प्रेस कांफ्रेंस की थी और बाद में अन्य शक्तिशाली लोगों के खिलाफ तो मैं बहुत भयभीत हो गया था| पश्चिमी उ.प्र में कानून व्यवस्था का क्या हाल है इससे सभी परिचित हैं| इंसानी जान की कीमत वहाँ कुछ भी नहीं है|

तब हमने सोचा कि उनसे बात की जाए कि अगर वे सरकार से सुरक्षा नहीं लेना चाहते तो उन्हें कम से “आप” के स्वयंसेवकों को चौबीस घंटों साथ रखना चाहिए| पर वे तैयार नहीं हुए| तब हमने फेसबुक पर एक पेज बनाया – आप एक राष्ट्रीय संपत्ति हैं, और आप पर हमारा अधिकार है| थोड़ी ही देर में दस हजार लोगों ने इस पर अपने हस्ताक्षर किये| पर अरविंद नहीं माने|

उनका विश्वास दृढ़ है|

जब हम दिल्ली विधानसभा  के चुनाव में उतरे तो हमने देखा कि “आप” के स्वयंसेवक जबर्दस्त ऊर्जा से लबरेज थे| उनकी मानसिकता अलग है| वे अरविंद के साथ एक लक्ष्य के तहत थे और वह लक्ष्य सबसे बड़ा था उनके दिमाग में|

जब अरविंद विचार कर रहे थे शीला दीक्षित के खिलाफ चुनाव लड़ने के बारे में तो मैंने उन्हें चेताया कि यह राजनीतिक आत्महत्या के बराबर होगा| अरविंद की नई दिल्ली से जीत अनोखी थी…

समस्या यह हो गई है कि मीडिया अचानक से इतना महत्वपूर्ण बन गया है देश में कि ज्यादातर तो यह लोगों के विचार बनाने लगता है|

शिक्षित मध्यवर्ग थोड़ा निराश है| पर ये लोग ये नहीं समझते कि जनता की सवारी नहीं की जा सकती| हमारे ज्यादातर मंत्री आम-जन थे| यदि कोई मुझे 50 करोड़ रूपये देता है एक पेपर पर साइन करने के लिए – मैं ईमानदार हूँ जब तक कि मुझे मौक़ा नहीं मिला कमाने का, ऐसा है कि नहीं?

जनलोकपाल के बिना बहुत खतरे थे| जनलोकपाल के साथ बहुत चीजें सुधर सकती थीं| तो आप या तो गिलास को आधा भरा देख सकते हैं या आधा खाली…

बिना शक शिक्षित मध्य वर्ग के समर्थन के बिना दिल्ली में इतनी सीटें नहीं मिलतीं पर अरविंद द्वारा त्यागपत्र दिए जाने पर बहस की जा सकती है|

बहुत से कह रहे हैं कि अरविंद ने जिम्मेदारी छोड़ दी…आप मुझे बताओ अगर किसी एक भी आदमी ने गलती कर दी होती तो सारा आंदोलन नष्ट हो जाता हमेशा के लिए|

सच है कि कुर्सी के अंदर बिच्छू हैं…

एक कठोर कानून जैसे कि जन-लोकपाल की महती आवश्यकता है| अगर अरविंद भी गलती करे तो वे भी उत्तरदायी रहें और पकडे जा सकें|

समस्या यह है कि शिक्षित मध्य वर्ग  चाय-कॉफी पीते हुए इन पर बहस करता रहता है| वे कभी सड़कों पर नहीं आयेंगें पुलिस की लाठियाँ और पानी की बौछार सहने के लिए| उनमें से कितने अपने बच्चों को सीमाओं पर भेजेंगे?

सत्यता यह है कि यह सब जो दिखाया जा रहा है कि मध्य वर्ग का एक तबका अरविंद से निराश है यह कुछ ही समय की बात है| नरेंद्र मोदी का प्रोपेगंडा कम ही समय जी पायेगा|

दूध का दूध और पानी का पानी होने में ज्यादा देर नहीं लगेगी| मध्य वर्ग का भ्रमित तबका भी जल्द ही इस बात का बोध कर लेगा कि अरविंद सही आदमी हैं|

अरविंद सत्ता के पीछे कभी नहीं रहे| वे केवल 45 साल के हैं और वे कभी भी भौतिकवाद के पीछे नहीं भागे हैं| 

मैं उन्हें 1995 से जानता हूँ पर पहले उनके इतना करीब नहीं था|

उन्होंने गाज़ियाबाद में कौशाम्बी, जहां वे रहते थे, एक पायलेट प्रोजेक्ट चलाने के बारे में सोचा और उसके लिए उन्हें मेरी सहायता की जरुरत थी क्योंकि मैं हमेशा ही एक सामाजिक आदमी रहा हूँ|

अरविंद हमेशा से ही अपने काम के प्रति जूनूनी रहे हैं| जब वे किसी काम को हाथ में लेते हैं तो उसी में रम जाते हैं|

लगभग ढाई साल तक अरविंद और मैं सुबह से शाम साथ साथ उस इलाके में एक-एक घर गये| सीवर नहीं था और हम लोगों को बताते थे कि वे हाउस टैक्स क्यों दे रहे हैं जबकि उसमें सीवरेज का पैसा भी शामिल है जबकि आपको यह सुविधा दी ही नहीं जा रही है|

लोगों ने कभी इस बारे में सोचा ही नहीं था| और ये सब लोग शिक्षित थे और इसी बात से खुश थे कि उनका घर साफ था और उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं था कि घर से निकला सीवेज कहाँ जा रहा था|

ढाई साल के कठोर परिश्रम के बाद स्थानीय प्रशासन हरकत में आया| मायावती के दाहिने हाथ समझे जाने वाले – विजय शंकर पांडे के छोटे भाई अजय शंकर पांडे जो कि गाजिआबाद नगर निगम में कमिश्नर थे, उन्होंने एक जनसभा में वादा किया कि RWA को रोड पर लाइट्स, पार्क, और अन्य जन सुविधाओं को सँभालने की जिम्मेदारी दी जायेगी|

अरविंद की किताब- स्वराज यही बताती है कि सड़कें, स्ट्रीट-लाईट, पानी, सीवर आदि जन सुविधाओं – की जिम्मेदारी स्थानीय लोगों के पास होनी चाहियें|  जो भी धन राज्य से इस मद में मिलता है वह लोगों की जरुरत और सामहिक सहमति से खर्च किया जाना चाहिए| ठेकेदार को भुगतान तभी हो जब स्थानीय निवासी ढंग से कार्य पूरा होने की रपट दे दें|

अरविंद और मनीष सिसौदिया ने 2001 में परिवर्तन नाम की एनजीओ शुरू की थी| पहले दिन से  मनीष, अरविंद के साथ हैं|

मेरी समझ में लोकसभा चुनाव लड़ने का फैसला समझदारी का नहीं था| शुरू में अरविंद भी इसके पक्ष में नहीं थे|

8 दिसम्बर के बाद बहुत आशामयी माहौल था और मेरे जैसे बहुत से लोगों का मानना रहा है कि इस उर्जावान माहौल को संगठन को मजबूत बनाने में लगाना चाहिए था पर ऊपर बहुत से नेताओं का यह भी मानना था कि पार्टी को राष्ट्रीय चुनाव लड़ना चाहिए ताकि इस ऊर्जा को सही ढंग से इस्तेमाल किया जा सके और राष्ट्रीय दल के रूप में मान्यता मिल सके लेकिन अरविंद और मनीष के दिल्ली सरकार में व्यस्त हो जाने के कारण मुझे यह निर्णय गलत लगता था|

अगर लोकसभा चुनाव में निर्णय अनुकूल नहीं आते तब भी अरविंद जैसे लोग थक-हार कर घर बैठने वाले नहीं हैं|

भारतीयों में जो निराशा घर कर गई है उसे दूर करना जरूरी है| “आम आदमी पार्टी” के उदय के साथ लोगों को पहली बार पता चला कि राजनीति ऐसे भी हो सकती है और यह सफल भी हो सकती है|

अरविंद के प्रति मेरा विश्वास पूर्ण है| अरविंद अपने जीवन को ताक पर लगाकर देश के प्रति अपनी निष्ठा रखते हैं और यह बात लोगों को कुछ समय में ही इसका बोध हो जायेगा|

जब अगस्त 2011 में अन्ना आन्दोलन शुरू हुआ तो हमारे दिमाग में राजनीतिक बात नहीं थी| जब प्रधानमंत्री ने अपने हस्ताक्षर वाला आश्वासन पत्र हमें दिया और संसंद ने उसका अनुमोदन किया किनती बाद में ये सरे सांसद अपनी बात से पलट गये तब पहली बार राजनीतिक परिपाटी में भागीदारी की बात उठने लगी|

मेरे पिता बताते हैं कि उस आंदोलन के कुछ माह बाद वे और अरविंद ऑटो से मेट्रो स्टेशन जा रहे थे और वहाँ पहुंचकर पिताजी ने अरविंद से कहा कि अब राजनीति में उतरने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है तो अरविंद ने तुरंत इस बात का पुरजोर विरोध कर दिया था|

उस समय केवल कुछ लोग ही थे जो यह बात कह रहे थे, संगठन के अंदर से यह आवाज नहीं आ रही थी|

जन लोकपाल ड्राफ्ट का प्रत्येक शब्द अरविंद ने खुद गढा था| जब इस आंदोलन की रूपरेखा बन रही थी, बैनर आदि के बारे में विचार चल रहा था, मैंने अरविंद से कहा कि यह आपके दिमाग की उपज है तो आपका फोटो इस पर होना चाहिए पर अरविंद अलग ही किस्म के इंसान हैं|

उन्होंने केवल अन्ना का फोटो जन-लोकपाल के साथ रखा| यह कोई मामूली त्याग नहीं है| मुझे कोई नहीं दिखाई देता संसार में जो यह काम करता, और तब से जन-लोकपाल आंदोलन अन्ना आंदोलन बन गया|

किसी ने नहीं कहा कि यह अरविंद का आंदोलन था, यह अन्ना का आंदोलन था| बिल का हरेक शब्द अरविंद ने सोचा और लिखा था और कानूनी भाषा के सुधार के लिए प्रशांत भूषण जी, शान्ति भूषण जी और जज राजिंदर सच्चर जी ने इसे बाद में देखा|

अरविंद ने 25 जुलाई से 10 दिनों का अनशन करने की घोषणा की| मैं उनके साथ अकेला डाक्टर था| अनशन के दौरान मेडिकल जिम्मेदारी मेरे ऊपर थी| मैं उन दस दिनों और बाद के अनशन के पन्द्रह दिनों को कभी नहीं भूल सकता| अरविंद ने वास्तव में मेरी परीक्षा ली|

अरविंद मधुमेह के करीज हैं| और मधुमेह के मरीज को नियमित अंतराल पर कुछ खाना पड़ता है, और समय पर दवाइयाँ लेनी पड़ती हैं| लेकिन जब से वे जन-जीवन में उतरे हैं तब से खाना और दवाइयों को समय पर लेना लगभग असंभव हो गया है|

मुझे लगा था कि मधुमेह के मरीज के लिए अनशन करना आत्मघाती कदम था| मैंने उनके साथ लड़ाई की पर उन्होंने मेरी एक न सुनी|

एक बार उन्होंने अपना मन बना लिया तो धरती पर कोई भी उन्हें लक्ष्य से हटने के लिए विवश नहीं  कर सकता|

लक्ष्य के प्रति उनका समर्पण, जूनून … आजकल लोग उनका उपहास करते हैं और उनकी गलतियां गिनाते हैं पर इन् लोगों ने उनका त्याग नहीं देखा है|

अगर आप देश के प्रति अरविंद की प्रतिबद्धता को समझेंगे तो आप साहस नहीं जुटा पायेंगे उनके खिलाफ कुछ भी कहने की|

जब वे अनशन कर रहे थे मैंने उन्हें बताया,” आपको क्या लगता है कोई आपके परिवार को सहयोग देगा अगर आपको कुछ हो जाता है तो?”

जब उन्होंने IRS की नौकरी छोड़ी और समाज सेवा में आए तो उनके नाते-रिश्तेदारों ने उन्हें कोसा और याद दिलाया कि उनका एक परिवार भी है|

अनशन के तीसरे दिन राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डाक्टरों ने सलाह दी कि अरविंद को अस्पताल में भर्ती कर देना चाहिए| एक डीजीपी ने हमें फोन किया और इस बाबत चेताया कि अस्पताल में भर्ती मत करना क्योंकि डाक्टर झुक जाते हैं|

मैं कठिन परिस्थिति में फंस चुका था| राम मनोहर लोहिया के वरिष्ठ डाक्टर सलाह दे रहे थे तुरंत अस्पताल में भर्ती करने की और अरविंद कह रहे थे कि वे एकदम ठीक थे|

अन्य स्वयंसेवक डाक्टर भी थे और 450 लोग अनशन कररहे थे, अरविंद, मनीष और गोपाल राय के साथ| डाक्टरों ने कहा कि कीटोन का स्तर 3+ होने के बाद अरविंद की अस्पताल में भर्ती जरूरी है|

मैंने कहा कि वे नहीं चाहते और क्लीनीकली ठीक लग रहे हैं| अरविंद प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेद पर ज्यादा निर्भर करते हैं| उन्हें पूरा विश्वास था कि उन्हें कुछ नहीं होगा|

मेरे पास कोई विकल्प नहीं था| हम वहाँ केवल डाक्टर की तरह नहीं थे बल्कि अरविंद के आंदोलन को स्वयंसेवकों की तरह सहयोग देने के लिए भी थे|  एक हफ्ता और गुजरा पर मेरे ऊपर बहुत भारी समय था|

एक पत्रकार, जो आंदोलन को कवर कर रहे थे, ने कहा,” डाक्टर साहब, आप ठीक कर रहे हैं? आपका पूरा व्यावसायिक करियर दांव पर हैं, अगर अरविंद को कुछ हो गया तो आपका लाइसेंस निरस्त हो जायेगा, आपको जेल हो जायेगी क्योंकि सरकारी डाक्टर पहले ही तुरंत अस्पताल में भर्ती की बात कह चुके हैं और आपने सलाह मानी नहीं है”|

लेकिन अरविंद के साथ इतने बरसों काम करने के अनुभव ने सिखा दिया है कि हमेशा किताब में लिखी बात के साथ नहीं चला जा सकता|

शुक्रवार को दोपहर बाद मैंने अरविंद से कहा,” बहुत हो गया| सरकार तो सुन ही नहीं रही है, फिर क्या फायदा?”

अरविंद ने कहा,” कुछ गणमान्य लोगों ने पत्र लिखा है कि अब राजनीतिक विकल्प को अपनाए बिना काम नहेने चलेगा और उस पत्र की घोषणा शाम पांच बजे होगी”|

उन्होंने कहा.” हम यह बात जनता के सामने रखेंगे और लोगों को दो दिनों का समय देंगें सोचने विचारने के लिए| अगर लोग कहते हैं आंदोलन – तो हम इसे जारी रखेंगे चाहे जां चली जाए और अगर लोग कहते हैं राजनीतिक विकल्प चुनो तो हम लोग एक पार्टी बनाने पर विचार करेंगे|”

लेकिन उससे पहले ही हमें पता चला कि अन्ना ने घोषणा कर दी है| अन्ना ने गणमान्य लोगों द्वारा पत्र लिखे जाने की बात पहले ही सबके सामने कह दी|

अरविंद का सोचना अलग था| वे इस पर जनमत संग्रह करवाना चाहते थे| मंच पर बैठे प्रशांत भूषण और संजय सिंह स्तब्ध थे| और अरविंद भी विचलित नज़र आए|

जब अन्ना मंच से उतरे तो अरविंद उनसे बात करने गये| अन्ना ने पूछा,” मैंने कुछ गलत किया?”

मैं विज्ञान का विधार्थी हूँ और मैंने कभी ईश्वर के सामने हाथ नहीं जोड़े| मैं नास्तिक रहा हूँ|

मैं अरविंद के साथ झुग्गियों में भी गया हूँ| मैंने उनके रिश्तेदारों को उन्हें जलील करते देखा है| मैंने उनके जीवन को देखा है और उस समय राजनीति उनके दिमाग में बिल्कुल नहीं थी|

उनके बारे में कुछ बातें समझनी बेहद जरूरी हैं| मैंने अरविंद के  त्याग बहुत करीब से देखे हैं| मुझे पता है वे किसा तरह के विचार रखते हैं और कैसे सोचते हैं| मुझे उन पर पूरा भरोसा है| उन्होंने अपने लिए कभी कोई चीज नहीं चाही|

जो उन्हें नहीं जानते वे कैसे भी विचार उनके बारे में रख सकते हैं|

मैं उनका कटु-आलोचक भी हूँ|

उनका विवाह तब हो गया था जब वे नागपुर में IRS की ट्रेनिंग ले रहे थे| वहीं उनके एक सहयोगी उनकी और भाभी की बातें सुनकर कहते थे कि दोनों एक तरह से सोचते हो|

2011 के अगस्त में आंदोलन के समय भाभी का ट्रांसफर कर दिया गया और जो मकान उन्हें मिला हुआ था वह खाली करना था| मैं अरविंद के माता-पिता के साथ दस दिनों तक कौशाम्बी में भटका पर माहौल को देखकर लोग उन्हें किराए पर घर देने के लिए तैयार नहीं थे|

जब “आप” का गठन हुआ तो कोई भी दफ्तर खोलने के लिए जगह देने के लिए तैयार नहीं था और हमारे पास पैसे भी नहीं थे| मेरे पास एक खाली फ़्लैट था जो मैंने उन्हें दिया|

हम डाक्टरों को लोग हमारे व्यवसाय की वजह से सम्मान देते हैं| हमारे काम को पुण्य का काम कहा जाता है| पर सच यह है कि हम लोग आजीविका कमा रहे हैं| इसके साइड इफेक्ट के रूप में हम अच्छा काम भी कर जाते हैं पर हम यहाँ पुण्य करने नहीं बिल्कुल नहीं आते|

अरविंद की वजह से मैंने वह पाया है जो मैं अपने व्यवसाय से बिल्कुल नहीं पा सकता था| मैंने अन्य डाक्टरों की तरह से व्यवसाय नहीं किया शायद यही वजह होगी कि मैं अरविंद के करीब पहुँच सका|

इस आंदोलन ने मुझे बहुत कुछ दिया है जीवन में|

नोट: मूल अंग्रेजी में रेडिफ़ पर छपा है

Rediff link

अप्रैल 12, 2014

अरविंद केजरीवाल का मूल्याँकन सीटों से नहीं (रवीश कुमार – NDTV)

AKej@homeहार जायें या हवा हो जायें या जीत जायें । इन तीनों स्थितियों को छोड़ दें तो अरविंद केजरीवाल ने राजनीति को बदलने का साहसिक प्रयास तो किया ही । हममें से कई राजनीतिक व्यवस्था को लेकर मलाल करते रहते हैं लेकिन अरविंद ने कुछ कर के देखने का प्रयास किया । कुछ हज़ार लोगों को प्रेरित कर दिया कि राजनीति को बदलने की पहली शर्त होती है इरादे की ईमानदारी । अरविंद ने जमकर चुनाव लड़ा । उनका साथ देने के लिए कई लोग विदेश से आए और जो नहीं आ पाये वो इस बदलाव पर नज़रें गड़ाए रहें । आज सुबह जब मैं फ़ेसबुक पर स्टेटस लिख रहा था तब अमरीका से किन्हीं कृति का इनबाक्स में मैसेज आया । पहली बार बात हो रही थी । कृति ने कहा कि वे जाग रही हैं । इम्तहान की तरह दिल धड़क रहा है । ऐसे कई लोगों के संपर्क में मैं भी आया ।

अरविंद ने बड़ी संख्या में युवाओं को राजनीति से उन पैमानों पर उम्मीद करने का सपना दिखाया जो शायद पुराने स्थापित दलों में संभव नहीं है । ये राजनीतिक तत्व कांग्रेस बीजेपी में भी जाकर अच्छा ही करेंगे । कांग्रेस और बीजेपी को भी आगे जाकर समृद्ध करेंगे । कौन नहीं चाहता कि ये दल भी बेहतर हों । मैं कई लोगों को जानता हूँ जो अच्छे हैं और इन दो दलों में रहते हुए भी अच्छी राजनीति करते हैं । ज़रूरी है कि आप राजनीति में जायें । राजनीति में उच्चतम नैतिकता कभी नहीं हो सकती है मगर अच्छे नेता ज़रूर हो सकते हैं ।
एक्ज़िट पोल में आम आदमी पार्टी को सीटें मिल रहीं हैं । लेकिन आम आदमी पार्टी चुनाव के बाद ख़त्म भी हो गई तब भी समाज का यह नया राजनीतिक संस्करण राजनीति को जीवंत बनाए रखेगा । क्या कांग्रेस बीजेपी चुनाव हार कर समाप्त हो जाती है ? नहीं । वो बदल कर सुधर कर वापस आ जाती है । अरविंद से पहले भी कई लोगों ने ऐसा प्रयास किया । जेपी भी हार गए थे । बाद में कुछ आई आई टी के छात्र तो कुछ सेवानिवृत्त के बाद जवान हुए दीवानों ने भी किया है । हममें से कइयों को इसी दिल्ली में वोट देने के लिए घर से निकलने के बारे में सोचना पड़ता है लेकिन अरविंद की टोली ने सोचने से आगे जाकर किया है ।  वैसे दिल्ली इस बार निकली है । जमकर वोट दिया है सबने ।
राजनीति में उतर कर आप राजनीतिक हो ही जाते हैं । अरविंद बार बार दावा करते हैं कि वे नहीं है । शायद तभी मतदान से पहले कह देते हैं कि किसी को भी वोट दीजिये मगर वोट दीजिये । तब भी मानता हूँ कि अरविंद नेता हो गए हैं । आज के दिन बीजेपी और कांग्रेस के विज्ञापन दो बड़े अंग्रेज़ी दैनिक में आए हैं आम आदमी पार्टी का कोई विज्ञापन नहीं आया है । अरविंद के कई क़दमों की आलोचना भी हुई, शक भी हुए और सवाल भी उठे । उनके नेतृत्व की शैली पर सवाल उठे । यही तो राजनीति का इम्तहान है । आपको मुफ़्त में सहानुभूति नहीं मिलती है । कांग्रेस बीजेपी से अलग जाकर एक नया प्रयास करना तब जब लग रहा था या ऐसा कहा जा रहा था कि अरविंद लोकपाल के बहाने बीजेपी के इशारे पर हैं तो कभी दस जनपथ के इशारे पर मनमोहन सिंह को निशाना बना रहे हैं । मगर अरविंद ने अलग रास्ता चुना । जहाँ हार उनके ख़त्म होने का एलान करेगी या मज़ाक़ का पात्र बना देगी मगर अरविंद की जीत हार की जीत होगी । वो जितना जीतेंगे उनकी जीत दुगनी मानी जायेगी । उन्होंने प्रयास तो किया । कई लोग बार बार पूछते रहे कि बंदा ईमानदार तो है । यही लोग लोक सभा में भी इसी सख़्ती से सवाल करेंगे इस पर शक करने की कोई वजह नहीं है । अरविंद ने उन मतदाताओं को भी एक छोटा सा मैदान दिया जो कांग्रेस बीजेपी के बीच करवट बदल बदल कर थक गए थे ।
इसलिए मेरी नज़र में अरविंद का मूल्याँकन सीटों की संख्या से नहीं होना चाहिए । तब भी नहीं जब अरविंद की पार्टी धूल में मिल जाएगी और तब भी नहीं जब अरविंद की पार्टी आँधी बन जाएगी । इस बंदे ने दो दलों से लोहा लिया और राजनीति में कुछ नए सवाल उठा दिये जो कई सालों से उठने बंद हो गए थे । राजनीति में एक साल कम वक्त होता है मगर जब कोई नेता बन जाए तो उसे दूर से परखना चाहिए । अरविंद को हरा कर न कांग्रेस जीतेगी न बीजेपी । तब आप भी दबी ज़ुबान में कहेंगे कि राजनीति में सिर्फ ईमानदार होना काफी नहीं है । यही आपकी हार होगी ।
जनता के लिए ईमानदारी के कई पैमाने होते हैं ।
इस दिल्ली में जमकर शराब बंट गई मगर सुपर पावर इंडिया की चाहत रखने वाले मिडिल क्लास ने उफ्फ तक नहीं की । न नमो फ़ैन्स ने और न राहुल फ़ैन्स ने । क्या यह संकेत काफी नहीं है कि अरविंद की जीत का इंतज़ार कौन कर रहा है । हार का इंतज़ार करने वाले कौन लोग हैं ? वो जो जश्न मनाना चाहते हैं कि राजनीति तो ऐसे ही रहेगी । औकात है तो ट्राई कर लो ।
कम से कम अरविंद ने ट्राई तो किया ।
शाबाश अरविंद ।
यह शाबाशी परमानेंट नहीं है । अभी तक किए गए प्रयासों के लिए है । अच्छा किया आज मतदान के बाद अरविंद विपासना के लिए चले गए । मन के साथ रहेंगे तो मन का साथ देंगे।
साभार कस्बा
अप्रैल 9, 2014

अरविंद केजरीवाल: “आप” बचा पायेगी भारतीय राजनीति को कोर्पोरेट के औपनिवेशिक हमले से?

10000CRORbjpदिल्ली में और कई अन्य स्थानों पर कल 10 अप्रैल को चुनाव होना है और आज 9 अप्रैल को कई बड़े कांग्रेसी नेता ट्वीट आदि माध्यमों से बताते रहे कि भाजपा (मोदी) 10,000 करोड़ रूपये खर्च कर चुके हैं| इतनी अथाह धनराशी के बलबूते भारत को एक प्रोपेगंडा में डुबाकर नरेंद्र मोदी की नकली लहर का भ्रम पैदा करने वाली भाजपा के सामने 20 करोड़ के चंदे के साथ खड़ी “आप” कैसे लड़ पायेगी? क्या पैसा सच्चाई को हरा देगा?

देश को देखना और सिद्ध करना है कि लोकतंत्र में पैसा ही सब कुछ नहीं| आखिर जो लोग 10,000 करोड़ रूपये  चुनाव जीतने के लिए खर्च कर रहे हैं वे सत्ता में आने के बाद इस खर्चे की भरपाई भी तो करेंगे ही और वह वह जनता का शोषण किये बगैर तो हो नहीं सकती|

क्या कांग्रेस चुनाव होने से पहले ही हार मान चुकी है? दिल्ली में कुछ अरसा पहले राहुल गांधी के भी पोस्टर लगे थे पर ज्यादातर उन्ही स्थानों पर अब मोदी के पोस्टर लग गये हैं और राहुल गांधी के पोस्टर लगभग गायब हो गये हैं| कांग्रेस कहीं भी ढंग से चुनाव प्रचार करती नहीं दिखाई दे रही| क्या कांग्रेस कोर्पोरेट आकाओं का आदेश मान कर चुप है कि – इस बार मोदी की सरकार बन जाने दो?
अरविंद केजरीवाल जो कहते हैं उसकी तीव्र और तीखी प्रतिक्रया देश भर में होती है और मीडिया और राजनीतिक नेता उन पर आक्रमण कर देते हैं पर कुछ समय बाद ही अरविंद के कथन सच साबित होने लगते हैं| इस बार भी कुछ महीनों में ही स्पष्ट हो जायेगा कि अरविंद वाकई सच बोल रहे थे कि कोर्पोरेट इस देश पर कब्जा कर चुके हैं और कांग्रेस और भाजपा सरकारों की अदला बदली केवल जनता की आँखों में धूल झोंकने का प्रयास मात्र है|

AKatRajghatकल फिर अरविंद केजरीवाल पर हमला हुआ और सोशल मीडिया पर मोदी समर्थक जश्न मनाते दिखाई दिए और कांग्रेस समर्थक चुटकियाँ लेते|

भारत में मोदी समर्थक बहुतायत में सेडिस्ट हैं और यह बार बार सिद्ध हो रहा है| इतनी बड़ी संख्या में मानसिक रुग्णता इस देश का अहित करेगी ही करेगी| मोदी जैसों के मूड न भी हों पर यह भीड़ अपने अंदर की पाशविक हिंसा की संतुष्टि के लिए उन जैसे नेताओं को तानाशाह बना कर ही चैन पायेगी क्योंकि तब इस भीड़ के लिए अपने विरोधियों से बदला चुकाना और निबटना आसान हो जायेगा|

बड़े आनंद की बात है कि विजय मल्होत्रा जैसे निरर्थक हो चुके नेता को सारी कीमियागिरी पता है कि अरविंद केजरीवाल पर हमले उनकी खुद की रची नौटंकी है, तब वे क्यों नहीं ऐसा नाटक करके वर्तमान राजनीति में सार्थक बन जाते? दूसरा आनंद का विषय है कि जब ये थप्पड़-मुक्के मारने वाले नाटक के पात्र बनते हैं तो क्या पिटने के लिए भी तैयार होकर आते हैं? समर्थक तो ऐसे अचानक उत्पन्न हुए हालात में रोकते रोकते भी दो चार रसीद कर ही देते हैं|

भाजपाइयों की थकी हुयी बुद्धि के अनुसार “आप” और अरविंद केजरीवाल सब कुछ मीडिया का ध्यान पाने के लिए करते हैं| भाजपाइयों की मूर्खतापूर्ण सोच के साथ यही सिद्ध होता है पहले दिल्ली विधानसभा में कांग्रेस और भाजपा के पैरों के नीचे से कालीन खींच कर “आप” ने सोचा कि अब सरकार बनाने के बाद तो मीडिया उन्हें पूछेगा नहीं सो उन्होंने आनन्-फानन में विनोद कुमार बिन्नी को लुभाया और उससे कहा कि अब तू “आप” से विद्रोह करने का नाटक कर और रोज मुझे और “आप” को गालियाँ दे| तू भी मीडिया में रहेगा और हम भी| और देखना कहीं भाजपाइयों और कांग्रेसियों के साथ रसगुल्ले खाते हुए न पकड़ा जाना वरना तेरा सारा खेल चौपट और तेरे साथ हमारा भी|

daughterAK
कुछ दिन ऐसा चला फिर अरविंद ने अपने कई साथियों को, जो “आप” में रहकर दिल में भाजपा को बसाए रखते थे, कहा कि अब वे एक एक करके उनका और “आप” का विरोध करें और “आप” छोड़ दें या “आप” उन्हें निकाल देगी और इस तरह सभी चरित्र मीडिया में बने रहेंगे| “अश्विन उपाध्याय” को भी भरमाया कि भाई तुम ऐसे ऐसे आरोप लगाओ कि मीडिया दौड़ा चला आए तुम्हारे पास और तुम ऐसे ऐसे संवाद बोलना कि मीडिया सारे सारे दिन तुम्हारे वचन ही दिखाता रहे| फिर अरविंद ने अपने को पिटवाने और शारीरिक क्षति पहुंचाने वाले लोग भी तैयार कर लिए| आखिर मीडिया में बने जो रहना था|

बातों के थप्पड़ सही, और लात-घूंसों के मामले झूठे? वाह भाजपा, वाह  कांग्रेस!

वो (भाजपाईकांग्रेसी) क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होती, अरविंद आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम!’ !

सरकार, क़ानून और मीडिया और कांग्रेस + भाजपा क्या अरविंद केजरीवाल और “आप” द्वारा एफ.आई.आर करवाने का ही मुँह ताकते रहते हैं? किसी ने शारीरिक हमला किया, जमाने ने देखा, हमलावर को पकड़ो, जैसी जांच करवानी है करवाओ, उसे क़ानून के घेरे में लाओं| मीडिया और विपक्षी अपने तौर पर गहरी जांच कर लें कि सच्चाई क्या है| दसियों हजार करोड़ खर्च करने वाली भाजपा के पास क्या लोकल जासूसों को देने के लिए भी पैसे नहीं बचे जो सच्चाई सामने लाकर अरविंद को दुनिया के सामने एक्सपोज कर दें? कहाँ गये मीडिया के स्टिंग धुरंधर? ज़रा सामने तो आओ, अपनी कला का नमूना दिखाओ| या भय यह है कि अगर असली मास्टर माइंड तक पहुँच गये लोग तो किरकिरी हो जायेगी?

अरविंद तो खुद ही दिल्ली के पुलिस कमिश्नर श्री बी.एस.बस्सी के पास गये कि उन पर हो रहे लगातार हमलों की जांच करवाई जानी चाहिए जिससे कि पता लग सके इन् सब हमलों के पीछे कौन मास्टर माइंड है?

अरविंद अपने पर आक्रमण करने वाले से मिलने उसके घर गये तो AK laliभाजपा को तो छोड़ ही दें संघ को भी समस्या होने लगी कि वे क्यों अपने पर हमले करने वालों को माफ करे दे रहे हैं|

“लगे रहो अरविंदभाई” गांधीगिरी में, बदलाव आएगा ही आएगा!

जन्म से ही कोई महान नहीं होता, अलबत्ता उसमें ऐसी संभावनाओं के बीज जरुर छिपे रहते हैं पर उसे सप्रयास इन् बीजों को अंकुरित करके पहले पौधे और बाद में फल-फूल से भरा वृक्ष बनाना पड़ता है और यह एक लंबा और सतत चलने वाला और बेहद कठिन और परिश्रमबद्ध कार्य होता है| इस कार्य में परिस्थितियाँ और विरोधी लोग बार-बार अपमान करते हैं, शारीरिक और मानसिक हानि पहुंचाते हैं, पर कठिन परिस्थितियों और बेहद कठिन कसौटियों से गुजर कर ही जन-नायकों का उदय होता है| महात्मा गांधी की आत्मकथा “सत्य के प्रयोग” में अतुल्य हीरा बनने की यात्रा का बेहद असरदार वर्णन है| गांधी जब अपने अंतस पर नियंत्रण पाकर, जनता के दुख दर्द तो आत्मसात करके उनके हित की ही बात करके जीने का प्रण लेकर द.अफ्रीका से भारत आए तो वे 45 साल के थे| और अगले कुछ दशकों में उन्होंने गुलामी के कारण थक-हार कर घिसट-घिसट कर जीवन जीते भारत की न केवल आत्मा को जगाया बल्कि निहत्थे, गरीब और कमजोर भारतीयों को इतने  तेज से भर दिया कि वे पूरे देश में अंग्रेजों और उनकी अथाह ताकत के सामने सिर उठा कर खड़े हो गये और अंग्रेजों को यहाँ से अपना अत्याचारी राज खत्म करके वापिस अपने देश जाना पड़ा|

AAP49daysगांधी का अंतिम सपना “स्वराज” का था परन्तु ऐसे लोग जो अंग्रेजों के शासन में अपनी ज्यादा भलाई समझते थे, उनके ऐसे किसी भी लक्ष्य के विरोधी थे और अंततः साम्प्राद्यिक राजनीति की कुत्सित विचारधारा में पाले बढे अपराधी मानसिकता के लोगों ने गांधी की ह्त्या कर दी| जिन्होने देश को सम्भाला अंग्रेजों के बाद, उनका लक्ष्य “स्वराज” नहीं था, और अपनी तमाम भलमनसाहत के बावजूद वे इस बात के लिए सही तरीके से शिक्षित नहीं थे कि सोच विचार कर गांधी के लक्ष्य को पूरा करने के मार्ग पर चल सकें और बाद के नेताओं की पीढियां तो अपने घर भरने में ही लगी रहीं और भ्रष्टाचार को इस कदर पचने वाला तत्व बना दिया गया भारतीय समाज में भारतीय राजनेताओं द्वारा कि ऐसा माने जाना लगा कि ईमानदारी की बात करने वाला आदमी “पागल” होता है|
दशकों भारत में भ्रष्टाचार का अँधेरा व्याप्त रहा है अब जाकर कुछ रोशनी की किरण चमकी है और इस आशा को जगाने में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का बहुत बड़ा हाथ है, परन्तु यह आंदोलन किसी खास राजनीतिक दल के खिलाफ सीमित नहीं हो सकता और इसीलिए जो लोग इस आंदोलन से अपने राजनीतिक हित साधने के लिए जुड़े थे वे धीरे धीरे करके अपने अपने राजनीतिक आकाओं के पाले में जाकर बैठ गये हैं और खुलकर भारतीय राजनीति में ईमानदारी लेन वाले निष्पक्ष योद्धाओं के खिलाफ मोर्चा संभाल रहे हैं|

AKpolice
45 साल के अरविंद केजरीवाल को भी हम लोग अपने को निरंतर अपने को गढते, तराशते और तैयार करते देख रहे हैं और उनके बहुत से अन्य साथी भी इस कार्य में लगे हुए हैं| और यही एक बात बहुत बड़ी आशा बंधाती है| ऐसा कभी किसी काल में नहीं हुआ कि सिर्फ अपना हित देखने वाले भ्रष्टाचारी, बुरी ताकतों के खिलाफ कोई आवाज उठाये और ये ताकतें उस आंदोलनकारी का पुरजोर विरोध न करें| वे करेंगे और उनका लक्ष्य ऐसे विरोध को कुचलने का और संभव हो तो ऐसे नेता को नष्ट करने का होता है| यही सब कुत्सित प्रयास हमारे इर्द-गिर्द चल रहे हैं| पर बुराई के साथ साथ अच्छाई का जन्म और विकास भी प्रकृति में चलता ही रहता है और हर बार प्रकृति यह स्थापित करके दिखाती है कि अंततः अच्छाई बुराई पर विजय प्राप्त कर ही लेती है| यह जीत आज मिले या दस साल बाद या बीस साल बाद मिले पर भारतीय राजनीति के उद्धार की जो प्रक्रिया शुरू हुई है यह अब रुकने वाली है नहीं| आर्थिक और सुविधाओं के लिहाज से समाज के सबसे नीचे तबके से लेकर सबसे ऊपर के तबके में सुगबुगाहट है और एक मंथन चल रहा है और हर स्तर से लोग इस आंदोलन के समर्थन (और विरोध में भी) में सामने आयेंगे या मौन रहकर अपना मत देकर समर्थन देंगे| इस आंदोलन के कारवाँ के यात्रियों को हमेशा एक बात स्मृति में रखने की जरुरत है कि वे अकेले नहीं हैं और उन जैसी भावनाओं वाले करोड़ों भारतीय देश के कोने कोने में इस महान यात्रा में उनके सहभागी हैं| भारत सुधार की ओर अग्रसर है, सो स्पष्ट है कि भ्रष्ट ताकतें अपने हमलों की तीव्रता और शक्ति बढाएंगी ही पर यही उनकी हताशा का सूबूत भी होगा|

दिल्ली में और कई अन्य स्थानों पर जहां कल चुनाव होगा, “आप” कि स्थिति बहुत बेहतर है कांग्रेस और भाजपा की तुलना में, और ऐसा हुआ है भाजपा और कांग्रेसी षड्यंत्रों के बावजूद|

Vote4AAP
रात में एक आरामपूर्ण नींद के बाद सुबह उठकर ताजगी भरे मन से देश की सफाई की शुरुआत करने की बेहद महत्वपूर्ण घड़ी लोगों के सामने कल सुबह 7 बजे आ जायेगी और पूरे दिन यह शुभ उपलब्ध रहेगा| देश की सफाई के लिए “झाडू” को शक्ति देना एक पुनीत कार्य में हाथ बंटाना है| पहली बार वोट देने वालों ने इतना थ्रिल पहले कभी महसूस नहीं किया होगा जीवन में जैसा वे कल सुबह करेंगे “झाडू” को वोट देते हुए|
“आरम्भ” होती है “आप” की देश-सफाई -यात्रा कल सुबह से! कल का वोट देश में बड़े बदलाव लाने का पहला और बेहद महत्वपूर्ण कदम है|

 

%d bloggers like this: