Archive for ‘लोकपाल’

फ़रवरी 2, 2015

दिल्ली में ‘आम आदमी पार्टी’ की लहर है : योगेन्द्र यादव

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

फ़रवरी 1, 2015

आम आदमी पार्टी : मेनिफेस्टो (दिल्ली विधानसभा चुनाव 2015)

दिल्ली विधानसभा चुनाव घोषणापत्र-2015

70 सूत्री कार्ययोजना

आम आदमी पार्टी के लिए, राजनीति एक परस्पर संवादात्मक और निरंतर संवाद की प्रक्रिया है। दिल्ली विधान सभा नवंबर 2014 के पहले सप्ताह में भंग कर दी गई थी, इसके तुरंत बाद, आम आदमी पार्टी ने अपने बहुचर्चित व सफल कार्यक्रम दिल्ली संवाद Delhi Dialogue  की शुरूआत की। और इस अनूठी पहल के जरिए पार्टी ने समाज के विभिन्न वर्गों के विशेषज्ञों व आम नागरिकों के बीच साझेदारी के जरिए नए व गंभीपर सुझावों के आधार पर पार्टी के घोषणापत्र की रूपरेखा तैयार की है।

एक ईमानदार, जवाबदेह और उत्तरदायी राजनीतिक दल शासन में लोगों की भागीदारी को अहम मानती है। दिल्ली डायलॉग में जाने-माने शिक्षाविदों, व्यवसायियों, नौकरशाहों,निर्वाचित अधिकारियों, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विद्वान, विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ और आम आदमी के विचार को भी शामिल किया गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इऩ सबने मिलकर दिल्ली के भविष्य के लिए-हमारे भविष्य के एक ठोस व प्रभावी खाका तैयार किया है।

विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के साथ आम लोगों की सैकड़ों बैठकों और गोल मेज के आयोजनों, ऑनलाइन टिप्पणियों, ईमेल सुझाव, WhatsApp संदेश, ट्वीट्स और फेसबुक टिप्पणियों के जरिए हजारों प्राप्त सुझावों के बाद आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के युवाओं, महिलाओं, व्यापारियों. व्यावसायियों, उद्यमियों, ग्रामीण व शहरीकृत गांवों, सफाई कर्मचारियो, अल्पसंख्यकों, अनधिकृत व पुनर्वास कॉलोनियों, जेजे कल्सटर्स, रेसिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन, कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटियों और ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों के लिए 70 सूत्री कार्ययोजना तैयार की है।

दिल्ली के नागरिकों की दृष्टिकोण और आकांक्षाओं को सूचित करने के लिए बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, स्वच्छता, रोजगार, परिवहन, सामाजिक न्याय, महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा के मुद्दों पर दिल्ली डायलॉग के तहत चर्चा हुई। दिल्ली डायलॉग के दौरान कई ऐसे मुद्दे भी उठे जो दिल्ली सरकार के अधिकार क्षेत्र के तहत नहीं आते । आम आदमी पार्टी ऐसे मुद्दों का भी नेतृत्व करेगी और अपनी पूरी नैतिक और राजनीतिक अधिकार के साथ इन मुद्दों का समाधान देश के समक्ष लाने की कोशिश करेगी।

दिल्ली डायलॉग का उद्देश्य दिल्ली के विकास के लिए ऐसा खाका तैयापर करना था जो दिल्ली के सभी क्षेत्रों के लोगों के इंद्रधनुषी आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करेगा। आम आदमी पार्टी की नजर में दिल्ली की परिकल्पना:-

 

  • सबके लिए रोजगार

  • सबके लिए उच्च स्तरीय शिक्षा

  • सर्वोत्तम स्वास्थ्य सुविधाएं

  • महिलाओं की सुरक्षा

  • आबादी के हिसाब से सड़कें, वाहन और परिवहन सुविधाएं

  • बिजली सस्ती और सबके लिए

  • मुफ्त पीने का पानी

  • नागरिकों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं

  • यमुना की सफाई, स्वच्छता और सौंदर्यीकरण

  • सभी धर्म और समुदाय के बीच परस्पर प्रेम

  • प्रदूषण मुक्त दिल्ली

  • शासन व विकास में आम जनता की भागीदारी

  • समृद्ध, आधुनिक और प्रगतिशील दिल्ली

 

 

आम आदमी पार्टी दिल्ली में ऐसी सरकार लेकर आएगी जो पारदर्शिता सहाभागिता और परस्पर संवाद की पक्षधर होगी और दिल्ली में अपने 70 सूत्री कार्य योजना को पूरा करने की दिशा में काम करेगी-

  1. दिल्ली जनलोकपाल बिल: आम आदमी पार्टी सत्ता में आने के बाद दिल्ली जन लोकपाल विधेयक को पारित करेगी। दिल्ली सरकार के सभी सरकारी अधिकारी (मुख्यमंत्री,मंत्री और विधायक) भी इसके जांच के दायरे में आएंगे। दिल्ली के सरकारी अधिकारियों के लिए अपनी परिसंपत्तियों के बारे में सालाना घोषणा करना जरूरी होगा। किसी भी अघोषित परिसंपत्तियों को जब्त कर लिया जाएगा। भ्रष्टाचार के मामलों की समयबद्ध जांच सुनिश्चित होगी। दिल्ली लोकपाल को भ्रष्टाचार के आरोपी लोगों के खिलाफ जांच और अभियोजन शुरू करने की शक्ति होगी। दिल्ली के सभी सरकारी दफ्तरों में’नागरिक चार्टर भी शुरू की जाएगी। ह्विसल्ब्लोअर्स को सुरक्षा दी जाएगी और भ्रष्टाचार विरोधी प्रणाली में योगदान देने के लिए उन्हें सम्मानित भी किया जाएगा।

  2. स्वराज विधेयक: आम आदमी पार्टी स्वराज लाएगी -यानि स्व-शासन और सबसे अच्छा प्रशासन। आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली में शासन संरचना में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध है जिसमें स्थानीय समुदायों को सूक्ष्म स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता होगी। इससे नौकरशाहों और निर्वाचित प्रतिनिधियों की बजाए फैसले लेने की राजनीतिक क्षमता आमलोगों के हाथों में होगी। इसके लिए आम आदमी पार्टी स्वराज विधेयक कानून लाएगी। स्थानीय समुदाय को प्रभावित करने वाले निर्णय नागरिकों द्वारा लिए जाएंगे और उन्हें सचिवालय द्वारा लागू किया जाएगा। मोहल्ला सभा को और रेसिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन को स्थानीय क्षेत्र विकास (सी-लाड) फंड दिया जाएगा।

3.दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा- संवैधानिक ढांचे के भीतर रहते हुए आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए अपनी नैतिक और राजनीतिक अधिकार का प्रयोग करेगी। डीडीए, एमसीडी और दिल्ली पुलिस दिल्ली की निर्वाचित सरकार के प्रति जवाबदेह हो यह भी सुनिश्चित करेगी।

4.बिजली बिल आधे किए जाएंगे- आम आदमी पार्टी की सरकार बिजली के बिल को आधे से कम करने के अपने वादे को निभाएगी। साथ ही बिलिंग में गड़बड़ियों और मीटर दोषों को सही करने के अलावा  बढ़ती बिजली बिलों से परेशान जनता को राहत प्रदान करने के उपाय करेगी।

5.डिस्कॉम का स्वतंत्र ऑडिट- आम आदमी पार्टी बिजली वितरण कंपनियों को ऑडिट कराएगी। ऑडिट परिणाम विधानसभा में पेश करने के बाद, बिजली टैरिफ का पुनर्गठन किया जाएगा।

6.दिल्ली का अपना पॉवर स्टेशन- आम आदमी पार्टी दिल्ली में अपना पावर स्टेशन लगाने की पक्षधर है और मानती है कि इससे दिल्ली में 6200MW तक बिजली की खपत को पूरा करने में सहायता मिलेगी और इससे बिजली समस्या का समाधान होगा। राजघाट और बवाना संयंत्र का कुशलता से संचालन भी किया जाएगा।

7.बिजली वितरण कंपनियों में प्रतिस्पर्धा की शुरूआत- आम आदमी पार्टी उपभोक्ताओं को बिजली प्रदाताओं के बीच चयन करने का अधिकार प्रदान करने संबंधी दिसम्बर 2013 के दिल्ली घोषणा पत्र  में किए अपने वादे को फिर से दोहराती है। दिल्ली में बेहतर सेवाएं प्रदान करने और टैरिफ में कमी के लिए प्रतिस्पर्धी वितरण प्रणाली को लागू करेगी।

8.दिल्ली को सोलर सिटी बनाने की योजना- आम आदमी पार्टी ऊर्जा के अक्षय और वैकल्पिक स्रोतों के लिए एक चरणबद्ध पारी की शुरूआत करेगी। घरों, हाउसिंग सोसायटी,उद्यम और उद्योगो को सौर उर्जा के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। वर्ष 2025 तक दिल्ली में ऊर्जा जरूरतों का 20 प्रतिशत सौर ऊर्जा के माध्यम से प्राप्त करने का लक्ष्य है।

9.पानी का अधिकार- आम आदमी पार्टी एक अधिकार के रूप में पानी उपलब्ध कराएगी। पार्टी किफायती मूल्य पर दिल्ली के सभी नागरिकों को स्वच्छ पेयजल की सुविधा देगी। पानी को अधिकार बनाने के लिए आम आदमी पार्टी दिल्ली जल बोर्ड के अधिनियम में भी संशोधन करेगी। एक समयबद्ध योजना के तहत दिल्ली को दिल्ली जल बोर्ड के पाइप कनेक्शन व सीवेज नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।  पानी सप्लाई व वितरण प्रणाली को सुचारू बनाया जाएगा।

10.मुफ्त पानी- आम आदमी पार्टी दिल्ली जल बोर्ड के मीटर के जरिए प्रति माह हर घर के लिए 20 किलोलीटर (20,000 लीटर) तक मुफ्त जीवन रेखा पानी सुनिश्चित करेगी। इस योजना से हाउसिंग सोसायटी भी लाभान्वित होंगे।

11.निष्पक्ष और पारदर्शी पानी मूल्य निर्धारण- आम आदमी पार्टी सस्ती व स्थायी कीमत पर दिल्ली के सभी नागरिकों को पीने के पानी की सुविधा मुहैया कराएगी। पानी की दरों में अनिवार्यत: सालाना 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी के प्रावधान को समाप्त करेगी और किसी भी तरह की बढ़ोतरी विचार-विमर्श के बाद ही की जाएगी।

  1. मुनक नहर से पानी-दिल्ली हरियाणा से अतिरिक्त कच्चे पानी की हकदार है । उच्च न्यायालय के इस आदेश  का कार्यान्वयन हो इसके लिए आम आदमी पार्टी पूरी कोशिश करेगी।
  2. जल संसाधन बढाने पर जोर-आम आदमी पार्टी की सरकार वर्षा जल संचयन, कुओं के पुनर्भरण, वाटरशेड विकास और मिट्टी-जल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं के जरिए जल संसाधनों की कमी को पाटने की पहल करेगी। आम आदमी पार्टी मोहल्ला सभा की साझेदारी से झीलों, तालाबों और बावड़ियों जैसे जल निकायों को पुनर्जीवित करेगी।
  3. पानी माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई-आम आदमी पार्टी राजनीतिक नेताओं के संरक्षण में पनप रहे दिल्ली के शक्तिशाली पानी माफिया पर रोक लगानेके लिए प्रतिबद्ध है। आम आदमी पार्टी एक पारदर्शी टैंकर पानी वितरण प्रणाली विकसित करेगी। विभिन्न इलाकों में सक्रिय टैंकरों की अनुसूची ऑनलाइन और मोबाइल फोन पर उपलब्ध कराई जाएगी। निजी टैंकरों को आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा बनाये दिशा निर्देशों के तहत काम करने की अनुमति दी जाएगी। इससे काफी हद तक पानी के अधिक मूल्य निर्धारण और निजी टैंकर ऑपरेटरों की मनमानी से उपभोक्ताओं की रक्षा हो सकेगी।
  4. यमुना पुनर्जीवित-यमुना नदी एक लंबे समय से दिल्ली की सामूहिक स्मृति का हिस्सा रही है लेकिन जीवन रेखा नदी मर रही है। आम आदमी पार्टी इसको फिर से पुनर्जीवित करने के लिए संभावित कदम उठाएगी। इसी कड़ी में एक व्यापक सीवरेज नेटवर्क और नई कार्यात्मक मलजल उपचार संयंत्रों के निर्माण किया जाएगा। साथ ही यमुना नदी में अनुपचारित पानी और औद्योगिक अपशिष्ट के प्रवेश पर सख्ती से रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाएगी।
  5. वर्षा जल संचयन को प्रोत्साहन-आम आदमी पार्टी की सरकार वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देगी। वर्षा जल संचयन को अपनाने वाले परिवारों को पानी अनुकूल परिवारों-water- friendly families कहा जाएगा। ऐसे परिवारों को सरकार प्रोत्साहन भी देगी।
  6. 200,000 सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण-आम आदमी पार्टी 2 लाख शौचालय बनवाएगी। मलिन बस्तियों और जेजे क्लस्टरों में लगभग 1.5 लाख शौचालय और सार्वजनिक स्थलों में 50,000 शौचालय बनवाए जाएंगे।  एक लाख शौचालयों महिलाओं के लिए बनाए जाएंगे। ये शौचालय मुख्य रूप से सार्वजनिक स्थलों और स्लम क्षेत्रों बनाए जाएंगे। आम आदमी पार्टी पानी की बचत के लिए ईको-शौचालयों का निर्माण करेगी।
  7. बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन-आम आदमी पार्टी बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन के लिए दुनिया भर के अपशिष्ट प्रबंधन तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी। घरेलू स्तर परbiodegradable और गैर biodegradable कचरे के रीसाइक्लिंग को भी प्रोत्साहित करेगी। सार्वजनिक स्थानों पर कचरा या किसी भी तरह के मलबे के निपटान करने पर भारी जुर्माना भरना पड़ेगा। आम आदमी पार्टी शहर में प्लास्टिक की थैलियों पर प्रतिबंध को सख्ती से लागू करेगी।

19.500 नए सरकारी स्कूल- दिल्ली के हर बच्चे के लिए बेहतर क्वालिटी की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए आम आदमी पार्टी 500 नए स्कूलों का निर्माण करेगी। इसमें माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक स्तर के स्कूल होंगे।

  1. उच्च शिक्षा गारंटी योजना-12 वीं के बाद की पढ़ाई की इच्छा रखने वाले छात्रों को सरकार बैंक से ऋण लेने की सुविधा देगी। इसके लिए गारंटी भी सरकार देगी। ऋण ट्यूशन फीस और रहने का खर्च दोनों को कवर करेगी। छात्र ऋण का भुगतान नौकरी लगने के बाद कर सकते हैं।

21.20 नए डिग्री कॉलेज- आम आदमी पार्टी गांवों के साथ साझेदारी कर शहर के बाहरी इलाके में 20 नए डिग्री कॉलेज खोलेगी। इसके अलावा दिल्ली के प्रमुख विश्वविद्यालय,अम्बेडकर विश्वविद्यालय सहित दिल्ली सरकार के कॉलेजों में मौजूदा सीटों की क्षमता दोगुनी की जाएगी।

22.निजी स्कूलों की फीस पर निगरानी- निजी स्कूलों की फीस को नियमित करने के लिए आम आदमी पार्टी फीस स्ट्रक्चर और उनके अकाउंट को ऑनलाइन करेगी। कैपिटेशन शुल्क भी समाप्त कर दिया जाएगा।

23 स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता- आम आदमी पार्टी नर्सरी और केजी में दाखिले की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाएगी। प्रवेश प्रक्रिया को कारगर बनाने के लिए, नर्सरी दाखिले के लिए एक केंद्रीकृत ऑनलाइन प्रणाली विकसित की जाएगी। इससे दाखिला संबंधी भ्रष्टाचार पर भी रोक लगेगी।

  1. सरकारी स्कूलों को अच्छे निजी स्कूलों के समकक्ष लाने की योजना-आम आदमी पार्टी दिल्ली के सभी नागरिकों को शिक्षा की उच्च गुणवत्ता प्रदान करने के लिए सरकारी स्कूलों के स्तर में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। हर स्कूल में विशेष रूप से लड़कियों के लिए शौचालय बनाया जाएगा। स्कूलों में लाइट, पंखे, ब्लैकबोर्ड और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के लिए स्कूल के प्रिंसिपल को पर्याप्त बजट दिए जाने की योजना है। कंप्यूटर और उच्च गति के इंटरनेट कनेक्टिविटी की सुविधा हर स्कूल में होगी। सरकारी स्कूलों में सत्रह हजार नए शिक्षकों की भर्ती की जाएगी।
  2. शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च में वृद्धि-शिक्षा और स्वास्थ्य आम आदमी पार्टी की शीर्ष प्राथमिकता होगी। स्वास्थ्य सेवा पर कुल बजटीय आवंटन में इसपर होने वाले खर्च के अनुसार वृद्धि की जाएगी।

26.स्वास्थ्यवर्धक बुनियादी ढ़ांचो में वृद्धि- आम आदमी पार्टी 900 नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और अस्पतालों में 30,000 अतिरिक्त बेड की सुविधा देगी। इसमें 4000 बेड प्रसूति वार्ड के लिए होगा।  आम आदमी पार्टी दिल्ली में हर 1000 लोगों के लिए पांच बेड के अंतरराष्ट्रीय मानदंड को भी सुनिश्चित करेंगी।

  1. सभी के लिए सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं-दवा और दवा उपकरणों की खरीद को सौ फीसदी भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए इसे केंद्रीकृत किया जाएगा। सामान्य, सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं जनता के लिए आसानी से उपलब्ध कराई जाएंगी।
  2. सड़कों पर पर्याप्त रोशनी-दिल्ली में सत्तर प्रतिशत सड़कों की बत्ती नहीं जलती। रात में सड़कों पर पसरा अंधेरा विशेष रूप से महिलाओं के खिलाफ अपराधों को बढ़ावा देता है। आम आदमी पार्टी दिल्ली की हर सड़क हर गली में सौ फीसदी रोशनी की व्यवस्था करेगी।
  3. लास्ट माइल कनेक्टिविटी-महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या को कम करने में प्रभावी सार्वजनिक परिवहन प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके लिए आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली में लास्ट माइल कनेक्टिविटी की सुविधा देगी। साझा ऑटो रिक्शा, मेट्रो फीडर सेवाओं और ई-रिक्शा को लास्ट माइल कनेक्टिविटी के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इन साझा सेवाओं को निश्चित स्थान से मेट्रो और बस के समय के साथ समन्वयित किया जाएगा।
  4. सार्वजनिक स्थलों और बसों में सीसीटीवी कैमरे-अपराधों पर रोक लगाने के लिए आम आदमी पार्टी डीटीसी बसों,बस स्टैंडों पर और भीड़-भाड़ वाले जगहों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना बना रही है। आम आदमी पार्टी सुनिश्चित करना चाहती हैं कि घर से बाहर हर जगह महिलाएंअपने आपको सुरक्षित महसूस करे।
  5. त्वरित न्याय-आम आदमी पार्टी की सरकार महिला उत्पीड़न और अन्य अपराधों के मामलों के तुरत निपटान के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन पर जोर देगी। आम आदमी पार्टी ने त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए जनवरी 2014 में नई फास्ट ट्रैक कोर्ट के निर्माण का ऐलान किया था। आम आदमी पार्टी की सरकार के आने के बाद 47 नई फास्ट ट्रैक कोर्ट में काम शुरू हो जाएगा। यदि जरूरत पड़ी तो महिलाओं के खिलाफ अपराधों की सुनवाई के लिए कोर्ट में दो पारियों में भी सुनवाई पर विचार कर सकती है। ताकि छह महीने के भीतर सभी मामलों की सुनवाई पूरी हो सके।

32- दिल्ली में वकीलों और न्यायपालिका का सशक्तीकरण- नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की जाएगी। आम आदमी पार्टी की सरकार निचली अदालतों में प्रैक्टिस कर रहे सरकारी अधिवक्ताओं और वकीलों के लिए किफायती आवास मुहैया कराएगी। कानूनी अधिकारियों को चिकित्सा योजनाओं की अधिकतम कवरेज सुविधा सुनिश्चित करने के लिए सरकार मौजूदा कानून को अधिक कारगर बनाएगी।

  1. महिला सुरक्षा बल-आम आदमी पार्टी की सरकार 15,000 होमगार्ड जवानों की मदद से महिला सुरक्षा दल या महिलाओं सुरक्षा बल का गठन करेगी। ये होम गार्ड जवान वर्तमान में वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रियों के आवासों पर नौकरों, ड्राइवरों और रसोइयों के रूप में काम करने को मजबूर हैं। आम आदमी पार्टी महिला की सुरक्षा के लिए सार्वजनिक परिवहनों में 5000 मार्शलों की भी नियुक्ति करेगी।
  2. सुरक्षा बटन-आम आदमी पार्टी की सरकार हर मोबाइल फोन पर एक सुरक्षा या एसओएस बटन की सुविधा देगी। इस सुरक्षा बटन के जरिए महिलाएं आपात स्थिति में निकटतम पुलिस स्टेशन, पीसीआर वैन, रिश्तेदारों और स्वयंसेवक समुदाय से संपर्क कर सकती हैं।
  3. मोबाइल फोन पर शासन-सभी सरकारी सेवाओं की जानकारी और फार्म ऑनलाइन उपलब्ध होंगे। ये जानकारी फोन पर भी उफलब्ध होगी। सभी सरकारी परियोजनाओं,उनसे से संबंधित जानकारियां, खातों और सरकारी कर्मियों से संबंधित आंकड़े ऑनलाइन पोस्ट किए जाएंगे। इससे शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की शुरूआत होगी।
  4. गांवों के विकास पर विशेष ध्यान-दिल्ली के गांवों के विकास के बारे में निर्णय ग्राम सभा, द्वारा लिया जाएगा। ग्राम सभा ग्राम विकास निधि का उपयोग गांव में विकास कार्यों की प्राथमिकताओं के अनुसार कर सकेगी। सरकार कृषि और पशुपालन में लगे लोगों को प्रोत्साहन और ढांचागत समर्थन देगी। गांवों के युवाओं को खेल में प्रोत्साहित करने के लिए गांवों में खेल सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी। ग्रामीण दिल्ली के लिए बस और मेट्रो सेवाओं के माध्यम से कनेक्टिविटी में वृद्धि की जाएगी।

37.किसान समर्थक भूमि सुधार- आम आदमी पार्टी दिल्ली भूमि सुधार अधिनियम की धारा 33 और 81, हटाएगी। कोई भी भूमि ग्राम सभा की सहमति के बिना अधिग्रहित नहीं की जाएगी। गांवों में भूमि के उपयोग के संबंध में अनावश्यक प्रतिबंध को हटाने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव डालेगी।

  1. वाई-फाई दिल्ली-आम आदमी पार्टी पूरी दिल्ली में वाई-फाई की सुविधा देगी। इससे शिक्षा, उद्यम, व्यवसाय, और रोजगार को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही महिलाओं की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
  2. दिल्ली में व्यापार और खुदरा हब –आम आदमी पार्टी व्यापारियों के अनुकूल नीतियों तैयार करेगी और व्यवसायों की स्थापना और चलाने के लिए संबंधित नियमों और कानूनों को कारगर बनाएगी। आम आदमी पार्टी व्यापारियों के लिए अनुपालन और लाइसेंस को आसान बनाने के लिए सिंगल विंडो क्लियरेंस की प्रणाली विकसित करेगी। आम आदमी पार्टी दिल्ली में कोई भी नया व्यापार या व्यवसाय शुरू करने के लिए एक सप्ताह का समय सुनिश्चित करेगी। व्यापार संबंधी नीतियों को तैयार करने में व्यापारियों की भागीदारी को भी प्रोत्साहित करेगी।
  3. खुदरा में कोई प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नहीं-हमारी सरकार दिल्ली में खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर रोक के अपने फैसले पर कायम रहेगी।
  4. सबसे कम वैट व्यवस्था-देश मेंदिल्ली में सबसे कम वैट की व्यवस्था होगी। आम आदमी पार्टी वैट और अन्य टैक्स संरचनाओं को सरल बनाएगी। हर इलाके और बाजार से एकत्र वैट के एक हिस्से को व्यवसाय और व्यापार को बढ़ाने में लगाया जाएगा। इस राशि को बाजार के रखरखाव और उन्नयन के लिए उपयोग में लाया जाएगा।
  5. छापे और इंस्पेक्टर राज का अंत-आम आदमी पार्टी की सरकार छापे की संस्कृति और इंस्पेक्टर राज प्रथा को खत्म करेगी। केवल विशेष परिस्थितियों में वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति से छापा डाला जा सकेगा।
  6. वैट नियमों का सरलीकरण-आम आदमी पार्टी वैट नियमों, प्रक्रियाओं और इसके प्रारूपों को सरल बनाएगी। 30 पेज लंबे वैट फार्म को व्यापारियों की सहुलियत के लिए एक पेज में तब्दील करेगी। संबंधित विभाग के साथ सभी संचार प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जाएगा। लाइसेंस का आवेदन और इसकी प्राप्ती घर बैठे कर सकते हैं।
  7. दिल्ली कौशल मिशन का गठन- दिल्ली में अचल कौशल की खाई को पाटने के लिए आम आदमी पार्टी की सरकार स्कूलों और कॉलेजों में व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देगी। युवाओं को सक्षम करने के लिए दिल्ली कौशल मिशन पैदा करेगी।
  8. 8 लाख रोजगार के अवसर-आम आदमी पार्टी अगले पांच साल में आठ लाख नए रोजगार के अवसर पैदा करेगी। आम आदमी पार्टी उद्यमियों को सहायता मुहैया कराने के लिए अभिनव और निजी स्टार्टअप की सुविधा भी देगी। निजी उद्दोगों के माध्यम से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र बनाएगी।
  9. दिल्ली एक स्टार्ट-अप हब-सरकार विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में व्यापार और प्रौद्योगिकी इन्क्यूबेटरों की स्थापना करकेstartups हब के लिए प्रोत्साहित करेगी। एक पायलट परियोजना के रूप में, तीन लाख वर्ग फुट में व्यापार के लिए सस्ती जगह भी विकसित की जाएगी।
  10. ठेके के सभी पद नियमित किए जाएंगे-आम आदमी पार्टी दिल्ली सरकार और दिल्ली सरकार के स्वायत्त निकायों में 55,000 रिक्तियों को तत्काल आधार पर भरेगी। साथ ही 4000 डॉक्टरों और 15,000 नर्सों और सहयोगी स्टाफ को स्थायी किया जाएगा।
  11. सामाजिक सुरक्षा पर जोर-आम आदमी पार्टी एक लचीला और निष्पक्ष श्रम नीति लागू करेगी। हमारी नीति असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करेगी। इस नीति से मजदूरी, सेवाओं और घरेलू श्रमिकों के काम के घंटे को निर्धारित करने और खपरैल बीनने के काम की स्थिति में सुधार होगा। स्थानीय मोहल्ला सभा निर्धारित स्थानों के लिए फेरी वाले और हॉकरों को लाइसेंस देगी।
  12. प्रदूषण कम करने पर जोर-दिल्ली शहर की आत्मा दिल्ली रिज को अतिक्रमण और वनों की कटाई से संरक्षित किया जाएगा। स्थानीय मोहल्ला सभा के सहयोग से पर्यावरण के अनुकूल वनीकरण को दिल्ली के सभी भागों में बढ़ावा दिया जाएगा। आम आदमी पार्टी शहर को साफ करने के लिए यंत्रीकृत वैक्यूम सफाई वाहनों को अधिग्रहित करेगी। सड़कों से कारों की संख्या को कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहनों की हालत सुधारेगी। इसके अतिरिक्त सीएनजी और बिजली की तरह कम उत्सर्जन ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अलावा प्रदूषण कम करने के लिए सरकार कार-पूलिंग को प्रोत्साहित करेंगी। और ईंधन में मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त  कार्रवाई करेगी।
  13. एकीकृत परिवहन प्राधिकरण-आम आदमी पार्टी मेट्रो,बसों, ऑटो रिक्शा, रिक्शा और ई-रिक्शा सहित सभी परिवहन व्यवस्था के लिए समग्र परिवहन नीतियों का गठन करेगी। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए एक ‘एकीकृत परिवहन प्राधिकरण’ स्थापित करेगी।

51.बस सेवाओं में बड़े पैमाने पर विस्तार- आम आदमी पार्टी दिल्ली में भारी पैमाने पर बस सेवाओं का विस्तार करेगी। आगामी पांच साल में शहर को कम से कम 5,000 नई बसों से जोड़ने की योजना है।  इससे शहर में परिवहन लागत कम हो जाएगी और प्रदूषण भी कम होगा।

  1. ईरिक्शा के लिए तत्काल निष्पक्ष नीति-पिछले कई महीने सेदिल्ली के ई-रिक्शा चालक असंमजस की स्थिति में है। भाजपा सरकार की गलत नीतियों के कारण कई महीने से बेकार बैठे है। आम आदमी पार्टी सुरक्षा पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ई-रिक्शा चालकों के स्वामित्व और सुचारू संचालन के लिए एक स्पष्ट नीति और मानक लेकर आएगी।
  2. मेट्रो रेल का विस्तार-आम आदमी पार्टी मेट्रो रेल का विस्तार और दिल्ली में रिंग रेल सेवा को विकसित करने के लिए भारतीय रेलवे के साथ समझौता करेगी। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, दिल्ली मेट्रो का बड़े पैमाने पर विस्तार करने की योजना है। वरिष्ठ नागरिकों, छात्रों और विकलांग लोगों को बसों पर और मेट्रो में रियायत देने का भी प्रावधान है।
  3. ऑटो चालकों के लिए निष्पक्ष व्यवस्था-ऑटो रिक्शा स्टैंड की संख्या में वृद्धि की जाएगी। ऑटो-रिक्शा की खरीद के लिए त्वरित बैंक ऋण की सुविधा होगी। आचरण में सुधार के लिए ऑटो चालकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। ऑटो यात्रियों के हितों की रक्षा के लिए सख्त कानून बनाए जाएंगे। और, किसी भी तरह के दुर्व्यवहार के मामले में ऑटो चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाएगी। आम आदमी पार्टी पुलिस से ऑटो रिक्शा चालकों के उत्पीड़न रोकने संबंधी कानून भी बनाएगी।
  4. पुनर्वास कालोनियों का फ्रीहोल्ड-आम आदमी पार्टी पुनर्वास कालोनियों को फ्रीहोल्ड अधिकार देने के लिए सरल समाधान का प्रस्ताव लाएगी। मूल आवंटी को सिर्फ 10,000 रुपये में उसके प्लाट का स्वामित्व मिलेगा।

जो मूल आवंटी नहीं हैं उन्हें 50000 रूपए में प्लाट के स्वामित्व का अधिकार मिलेगा। बोझिल बहु पृष्ठ प्रपत्र का सरलीकरण करके एक ही पृष्ठ के फार्म में तब्दील किया जाएगा।

  1. अनधिकृत कालोनियों का नियमितिकरण व परिवर्तन-हम पुनर्वास कालोनियों में संपत्ति और बिक्री के कामों में पंजीकरण का अधिकार देंगे। इसके अलावा,हम एक व्यवस्थित और चरणबद्ध तरीके से बिजली, पानी,सीवर लाइन और, स्कूलों व अस्पतालों की सुविधा भी मुहैया कराएंगे। बुनियादी जरूरतों को पूरा करके ही  अनधिकृत कालोनियों को सशक्त बनाने के लिए एक ही रास्ता है। आम आदमी पार्टी की सरकार के गठन के एक वर्ष के भीतर, इन अनधिकृत कालोनियों को नियमित कर दिया जाएगा और निवासियों के स्वामित्व अधिकार दिया जाएगा।
  2. सभी के लिए किफायती आवास: आम आदमी पार्टी की सरकार कम आय वर्ग के लिए किफायती आवास  बनाएगी। दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड की वर्तमान में खाली पड़ी 200 एकड़ की जमीन को किफायती आवास के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
  3. मलिन बस्तियों में सीटू विकास-झुग्गी वासियों को मौजूदा मलिन बस्ती में ही भूखंड या फ्लैट्स उपलब्ध कराया जाएगा। यह संभव नहीं हुआ, तो उनका निकटतम संभावित स्थान में पुनर्वास कराया जाएगा। मोहल्ला सभा पुनर्वास प्रक्रिया की योजना है और इसके सफल कार्यान्वयन की निगरानी की जाएगी। पुनर्वास कार्य तक मलिन बस्तियों को किसी भी हाल में ध्वस्त नहीं किया जाएगा। पीने के पानी, साफ-सफाई और दूसरी बुनियादी सुविधाएं सभी मलिन बस्तियों में उपलब्ध कराई जाएंगी। मलिन बस्तियों में गलियों की मरम्मत की जाएगी और सड़कें पक्की बनाई जाएंगी।

59-वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल- सरकार तुरंत एक सार्वभौमिक और गैर-अंशदायी वृद्धावस्था पेंशन प्रणाली शुरू करेगी। एक न्यूनतम सम्मानजनक राशि मुद्रास्फीति में सूचीबद्ध के लिए दी जाएगी। संवितरण और पेंशन के संबंध में मनमाने ढंग से फैसलों में देरी का सफाया हो जाएगा। भुगतान अदायगी व पेंशन से संबंधित फैसलों में मनमाने ढ़ंग से होने वाली देरी को दूर किया जाएगा।

  1. नियंत्रित मूल्य वृद्धि-खुदरा और थोक व्यापार में,जमाखोरी और मुनाफाखोरी को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। आम आदमी पार्टी की सरकार सब्जियों, फलों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए काला बाजारी, जमाखोरी को रोकने के लिए पूरी ताकत लगा देगी। राशन की दुकानों और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को भ्रष्टाचार मुक्त करेगी और बढ़ती लागत से आम आदमी को राहत देगी।

  2. नशा मुक्त दिल्ली-आम आदमी पार्टी दिल्ली को पूरी तरह से नशा मुक्त राज्य बनाना चाहता है। नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए निगरानी प्रणाली और दोषियों के लिए सख्त सजा का प्रावधान बनाएगी। नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाएगी और ऐसे लोगों के पुनर्वास में मानसिक और मनोरोग समर्थन दिया जाएगा। साथ ही स्कूलों में किशोरों के लिए प्रभावी परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराएगी।

  3. विकलांगों का सशक्तिकरण-आम आदमी पार्टी विकलांग व्यक्तियों (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है, और उम्मीद करती है कि दिल्ली भारत के बाकी के हिस्से के लिए मिसाल साबित होगी। आम आदमी पार्टी विकलांग व्यक्तियों के लिए तीन प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करेगी। आम आदमी पार्टी सरकारी स्कूलों में विशेष शिक्षकों की भर्ती करेगी। आम आदमी पार्टी विकलांग बच्चों के स्कूलों और कॉलेजों में प्रवेश के लिए आसान प्रावधान बनाएगी और विकलांग बच्चों के लिए काम कर रही संस्थानों को वित्तीय सहायता भी देगी।

  4. 1984 के दंगों पीड़ितों के लिए न्याय-1984का दंगा दिल्ली के इतिहास का सबसे काला पन्ना है। इस हादसे के जिम्मेदार लोग आज भी खुलेआम घूम रहे हैं। न्याय से वंचित सिख समुदाय की भावना को आम आदमी पार्टी अच्छी तरह समझती है। इस मुद्दे पर केंद्र की भाजपा नेतृत्व वाली सरकार का रवैया अभी भी संदेहास्पद है। आम आदमी पार्टी की सरकार ने जनवरी 2014 1984 सिख विरोधी दंगे की जांच के लिए एसआईटी के गठन का आदेश दिया था। आम आदमी पार्टी की सरकार इस दिशा में फिर से प्रयास करेगी। और, इस दंगे की जांच प्रक्रिया को दोबारा कराने का वादा करती है।

  5. पूर्व सैनिकों का सम्मान-पूर्व सैनिकों और महिलाओं की सबसे बड़ी आबादी दिल्ली में रहती है। आम आदमी पार्टी “एक रैंक, एक पेंशन ‘की मांग कर रहे भूतपूर्व सैनिकों की लड़ाई में उनके साथ है। दिल्ली रोजगार बोर्ड और अन्य निकायों को पूर्व सैनिकों की जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता साथ पूरा करने का निर्देश दिया जाएगा। आरक्षित नौकरी की रिक्तियों को केवल पूर्व सैनिकों से भरा जाएगा।

  6. अल्पसंख्यकों को समानता और विकास-दिल्ली में हाल ही में कुछ स्थानों पर हुए सांप्रदायिक तनाव ने पूरी तरह से शहर के सामाजिक ताने-बाने को हिला कर रख दिया है। दिल्ली भर में पूजा स्थलों पर भड़काऊ भाषणों की भी आम आदमी पार्टी निंदा करती है। आम आदमी पार्टी ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए मोहल्ला सभा शांति समितियों की स्थापना करेगी। समिति का मकसद स्वराज की भावना को बनाए रखने और पास-पड़ोस में शांति व सद्भाव सुनिश्चित करने की कोशिश होगी। आम आदमी पार्टी दिल्ली वक्फ बोर्ड के कामकाज में पारदर्शिता लाने व निजी पार्टियों और सरकार द्वारा वक्फ संपत्ति पर अतिक्रमण हटाने की दिशा में भी ठोस पहल करेगी।

  7. सफाई कर्मचारी को गरिमा-आम आदमी पार्टी की सरकार ठेका प्रथा को खत्म करेगी। ठेके पर काम कर रहे मौजूदा कर्मचारियों को नियमित किया जाएगा। सीवेज नालों में प्रवेश करने वाले श्रमिकों को मास्क,सूट और मशीनों जैसे सुरक्षात्मक गियर उपलब्ध कराए जाएंगे। आग सेनानियों के लिए बीमा का प्रावधान होगा। सफाई कर्मचारियों के कैरियर में उन्नति के लिए उनके शिक्षा व प्रशिक्षण में सहायता दी जाएगी । ड्यूटी के दौरान “सफाई कर्मचारी” की मौत पर उनके शोक संतप्त परिवार को 50 लाख रूपए दिए जाएंगे।

  8. हाशिए की जिंदगी गुजार रहे लोगों को सुरक्षा-आम आदमी पार्टी की सरकार अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े जाति वर्गों के लिए दिल्ली सरकार की नौकरियों में आरक्षण की नीतियों के पालन को सुनिश्चित करेगी। अनुसूचित जातियों के उद्यमियों के लिए छोटे व्यवसायों की शुरूआत के लिए शून्य या कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराने का प्रावधान होगा। जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाएगा। आम आदमी पार्टी दिल्ली में बसे डिनोटिफाइड और खानाबदोश समुदायों के भेदभाव और उत्पीड़न को समाप्त करने के लिए कदम उठाएगी। ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और उचित पहचान पत्र दिया जाएगा।

  9. खेल संस्कृति को बढ़ावा-आम आदमी पार्टी विशेष रूप से दिल्ली के ग्रामीण और शहरी गांवों में, एथलीटों के लिए खेल सुविधाएं, बुनियादी ढांचे और प्रभावी मानव संसाधन प्रबंधन पैदा करेगी। युवाओं के लिए दिल्ली में नए स्टेडियम और खेल परिसर खोले जाएंगे। 3000 से अधिक सरकारी स्कूलों में खेल के मैदान बनाए जाएंगे जहां स्कूल के बाद खेलने की सुविधा होगी।

  10. पंजाबी,संस्कृत और उर्दू को बढ़ावा- उर्दू और पंजाबी को दूसरी भाषा का दर्जा देगी । उर्दू और पंजाबी पढ़ाने के लिए शिक्षकों की संख्या बढ़ाई जाएगी। दिल्ली के विभिन्न विश्वविद्यालयों में उर्दू और पंजाबी में रिसर्च को प्रोत्साहित किया जाएगा। संस्कृत के अध्ययन और रिसर्च को भी प्रोत्साहित किए जाने की योजना।

  11. हमारी विरासत और साहित्य का संरक्षण-दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। सभी के लिए सुलभ एक जीवंत सार्वजनिक स्थान मुहैया कराने की योजना। पढ़ने और जिज्ञासा की संस्कृति को प्रोत्साहित करेगी आम आदमी पार्टी की सरकार। एक सार्वजनिक पुस्तकालय या समुदायिक पढ़ने की जगह दिल्ली के हर निर्वाचन क्षेत्र में बनाने की योजना।

 

 

अप्रैल 12, 2014

अरविंद केजरीवाल का मूल्याँकन सीटों से नहीं (रवीश कुमार – NDTV)

AKej@homeहार जायें या हवा हो जायें या जीत जायें । इन तीनों स्थितियों को छोड़ दें तो अरविंद केजरीवाल ने राजनीति को बदलने का साहसिक प्रयास तो किया ही । हममें से कई राजनीतिक व्यवस्था को लेकर मलाल करते रहते हैं लेकिन अरविंद ने कुछ कर के देखने का प्रयास किया । कुछ हज़ार लोगों को प्रेरित कर दिया कि राजनीति को बदलने की पहली शर्त होती है इरादे की ईमानदारी । अरविंद ने जमकर चुनाव लड़ा । उनका साथ देने के लिए कई लोग विदेश से आए और जो नहीं आ पाये वो इस बदलाव पर नज़रें गड़ाए रहें । आज सुबह जब मैं फ़ेसबुक पर स्टेटस लिख रहा था तब अमरीका से किन्हीं कृति का इनबाक्स में मैसेज आया । पहली बार बात हो रही थी । कृति ने कहा कि वे जाग रही हैं । इम्तहान की तरह दिल धड़क रहा है । ऐसे कई लोगों के संपर्क में मैं भी आया ।

अरविंद ने बड़ी संख्या में युवाओं को राजनीति से उन पैमानों पर उम्मीद करने का सपना दिखाया जो शायद पुराने स्थापित दलों में संभव नहीं है । ये राजनीतिक तत्व कांग्रेस बीजेपी में भी जाकर अच्छा ही करेंगे । कांग्रेस और बीजेपी को भी आगे जाकर समृद्ध करेंगे । कौन नहीं चाहता कि ये दल भी बेहतर हों । मैं कई लोगों को जानता हूँ जो अच्छे हैं और इन दो दलों में रहते हुए भी अच्छी राजनीति करते हैं । ज़रूरी है कि आप राजनीति में जायें । राजनीति में उच्चतम नैतिकता कभी नहीं हो सकती है मगर अच्छे नेता ज़रूर हो सकते हैं ।
एक्ज़िट पोल में आम आदमी पार्टी को सीटें मिल रहीं हैं । लेकिन आम आदमी पार्टी चुनाव के बाद ख़त्म भी हो गई तब भी समाज का यह नया राजनीतिक संस्करण राजनीति को जीवंत बनाए रखेगा । क्या कांग्रेस बीजेपी चुनाव हार कर समाप्त हो जाती है ? नहीं । वो बदल कर सुधर कर वापस आ जाती है । अरविंद से पहले भी कई लोगों ने ऐसा प्रयास किया । जेपी भी हार गए थे । बाद में कुछ आई आई टी के छात्र तो कुछ सेवानिवृत्त के बाद जवान हुए दीवानों ने भी किया है । हममें से कइयों को इसी दिल्ली में वोट देने के लिए घर से निकलने के बारे में सोचना पड़ता है लेकिन अरविंद की टोली ने सोचने से आगे जाकर किया है ।  वैसे दिल्ली इस बार निकली है । जमकर वोट दिया है सबने ।
राजनीति में उतर कर आप राजनीतिक हो ही जाते हैं । अरविंद बार बार दावा करते हैं कि वे नहीं है । शायद तभी मतदान से पहले कह देते हैं कि किसी को भी वोट दीजिये मगर वोट दीजिये । तब भी मानता हूँ कि अरविंद नेता हो गए हैं । आज के दिन बीजेपी और कांग्रेस के विज्ञापन दो बड़े अंग्रेज़ी दैनिक में आए हैं आम आदमी पार्टी का कोई विज्ञापन नहीं आया है । अरविंद के कई क़दमों की आलोचना भी हुई, शक भी हुए और सवाल भी उठे । उनके नेतृत्व की शैली पर सवाल उठे । यही तो राजनीति का इम्तहान है । आपको मुफ़्त में सहानुभूति नहीं मिलती है । कांग्रेस बीजेपी से अलग जाकर एक नया प्रयास करना तब जब लग रहा था या ऐसा कहा जा रहा था कि अरविंद लोकपाल के बहाने बीजेपी के इशारे पर हैं तो कभी दस जनपथ के इशारे पर मनमोहन सिंह को निशाना बना रहे हैं । मगर अरविंद ने अलग रास्ता चुना । जहाँ हार उनके ख़त्म होने का एलान करेगी या मज़ाक़ का पात्र बना देगी मगर अरविंद की जीत हार की जीत होगी । वो जितना जीतेंगे उनकी जीत दुगनी मानी जायेगी । उन्होंने प्रयास तो किया । कई लोग बार बार पूछते रहे कि बंदा ईमानदार तो है । यही लोग लोक सभा में भी इसी सख़्ती से सवाल करेंगे इस पर शक करने की कोई वजह नहीं है । अरविंद ने उन मतदाताओं को भी एक छोटा सा मैदान दिया जो कांग्रेस बीजेपी के बीच करवट बदल बदल कर थक गए थे ।
इसलिए मेरी नज़र में अरविंद का मूल्याँकन सीटों की संख्या से नहीं होना चाहिए । तब भी नहीं जब अरविंद की पार्टी धूल में मिल जाएगी और तब भी नहीं जब अरविंद की पार्टी आँधी बन जाएगी । इस बंदे ने दो दलों से लोहा लिया और राजनीति में कुछ नए सवाल उठा दिये जो कई सालों से उठने बंद हो गए थे । राजनीति में एक साल कम वक्त होता है मगर जब कोई नेता बन जाए तो उसे दूर से परखना चाहिए । अरविंद को हरा कर न कांग्रेस जीतेगी न बीजेपी । तब आप भी दबी ज़ुबान में कहेंगे कि राजनीति में सिर्फ ईमानदार होना काफी नहीं है । यही आपकी हार होगी ।
जनता के लिए ईमानदारी के कई पैमाने होते हैं ।
इस दिल्ली में जमकर शराब बंट गई मगर सुपर पावर इंडिया की चाहत रखने वाले मिडिल क्लास ने उफ्फ तक नहीं की । न नमो फ़ैन्स ने और न राहुल फ़ैन्स ने । क्या यह संकेत काफी नहीं है कि अरविंद की जीत का इंतज़ार कौन कर रहा है । हार का इंतज़ार करने वाले कौन लोग हैं ? वो जो जश्न मनाना चाहते हैं कि राजनीति तो ऐसे ही रहेगी । औकात है तो ट्राई कर लो ।
कम से कम अरविंद ने ट्राई तो किया ।
शाबाश अरविंद ।
यह शाबाशी परमानेंट नहीं है । अभी तक किए गए प्रयासों के लिए है । अच्छा किया आज मतदान के बाद अरविंद विपासना के लिए चले गए । मन के साथ रहेंगे तो मन का साथ देंगे।
साभार कस्बा
सितम्बर 3, 2011

भ्रष्टाचार: कुछ अनबुझे सवाल

एक किसान होकर मैं
पूछता हूँ कि,
बीज बोने से लेकर
फसल काटने तक
किसान, खेत मज़दूर जो
जीतोड़ मेहनत करके
अपनी फसल तैयार करके
मंडी में बेचने ले जाता है
और वहां कौड़ियों के भाव
अपनी फसल बेचने के बाद
खाली हाथ लौटकर
क़र्ज़ के बोझ तले
घुटन भरी जिंदगी जीने को मजबूर
आत्महत्या को विवश होता है,

और

किसान से खरीदी गयी
उसी फसल को
चौगुने दाम बेचने वाले’ दलालों’
और जो खुली बाज़ार व्यवस्था के नाम पर
किसान, मज़दूर के भाग्य से
खुलकर खेलतें हैं
उन मुनाफाखोरों से निबटने का
क्या लोकपाल के पास
कोई उपाय है?

जो किसान, खेत-मजदूर अन्न उगाए
वही पेट भर न खाए
व्यवस्था की इससे बड़ी नाकामी
और कोई है क्या?

यह केवल अन्याय ही नहीं
एक बड़ा अत्याचार भी है
जो रोटी पैदा करे
उसी से रोटी छीन ली जाए
और अन्न
बड़े बड़े ताले लगे गोदामों में
ज्यादा कीमतों के फेर में
भूखे गरीब का पेट भरने के बजाय
सड़, गल कर फैंक दिया जाए
तो ऐसे जमाखोरों से
निबटने के लिए
लोकपाल के पास
है कोई उपाय?

इसलिए
उस शहरी पढे लिखे मध्यम वर्ग
जिसने थाली में पड़ी
गोल रोटी तो देखी है
पर जिसे यह अहसास नहीं कि
इस रोटी के पीछे
किसान खेत मज़दूर की
कितनी पसीने की बूंदे बहीं हैं
भला सोचो वह क्योँ और
कितनी कशिश से
इसके विरुद्ध लड़ाई लड़ सकता है?

सबको रोटी कपड़ा
पैदा करने वाला किसान, खेत मज़दूर
जब तक पेटभर रोटी और
पूरा तन ढकने के लिए कपड़ा
तक भी न जुटा पाएगा
तब तक
भ्रष्टाचार के विरुद्ध
लड़ी जाने वाली कोई भी लड़ाई
इसलिए सफल न होगी

क्योंकि…

अत्याचार और अन्याय
किसी भी किस्म के
भ्रष्टाचार से बढकर होता है!

(अश्विनी रमेश)

अगस्त 29, 2011

कौन रहेगा ईमानदार?


विजय दिवस था कल
एक बूढी लाठी के आगे
नतमस्तक हुए शाह–वजीर
अचरज से देख रहे थे
कबाड़े से निकल आई
गाँधी टोपियों का कमाल
सिर पर रखते ही
हरीशचन्द्र बन रहे थे लोग
जिन्हें लेख का शीर्षक भी पता नही
टीकाकार बन गए थे कौवे
कोयलें चुप थीं।

उस बड़े मैदान में
सुनहरे कल के सपने
प्यासों के आगे
बिसलेरी बोतलों के समान
उछाले जा रहे थे,
परंतु जो सपना उठा लाया
वह रात भर सो न सका
उसे याद आ गया था
माटी बने पुल की नींव से
कमीशन खोद कर निकालना है,
उसने भी माइक पर
ईमान की कसम दोहराई थी
रोज गीता–कुरआन पर
हाथ रख कर,
झूठी गवाहियाँ देने वाला दिल
व्याकुल रहता कब तक?

वह उठा और
माटी के पुल के रास्ते चल पडा
उस समय तक सभी सियार
जश्न का खुमार उतरने के बाद
शेर की खाल ओढ़ रहे थे,
रोज़मर्रा समान
निजी लाकरों और स्विस बैंकों के
दफ्तर भी खुल चुके थे।

(रफत आलम)

अगस्त 28, 2011

समय साक्षी है : हिमांशु जोशी का भविष्योन्मुखी उपन्यास आज के परिपेक्ष्य में


लेखक निस्संदेह समाज के अन्य वर्गों की तुलना में करवट लेते समय को ज्यादा गहराई से समझ पाता है, वह आने वाले समय की आहट, और लोगों से पहले ही सुन लेता है। लेखक, अगर भूतकाल में घटी घटनाओं पर भी कुछ लिखता है तो वह गहराई से उस भूतकाल और उस समय हुये घटित का विश्लेषण करता है। यही पैनी दृष्टि और विश्लेषण क्षमता वह वर्तमान में घटित हो रहे घटनाक्रमों के बारे में भी अपनाता है।

अगर हिमांशु जोशी के राजनीतिक उपन्यास “समय साक्षी है” को देखें तो यह भूत काल का भी लगता है और हो सकता है कि सत्तर के दशक के जय प्रकाश आंदोलन से कुछ प्रेरणा उन्होने ली हो इस उपयास को रचते समय। जिन्होने यह उपन्यास पिछली सदी के अस्सी या नब्बे के दशकों में या नयी सदी के पहले दशक में पढ़ा हो उनके सामने यह उपन्यास ऐसी आदर्शवादी कल्पनायें लेकर आता है जहाँ लगता है कि काश ऐसा हो जाये।

लोकतंत्र में राजनीति से किनारा नहीं किया जा सकता। राजनीति और राजनीतिज्ञों की नैतिकता का स्तर किसी भी देश की समूची नैतिकता से जुड़ा होता है। अगर राजनेता ईमानदार हैं तो ऐसा हो नहीं सकता कि देश में भ्रष्टाचार फैल जाये क्योंकि वे बर्दाश्त ही नहीं करेंगे और भ्रष्टाचार करने वाले कर्मचारियों को और जब प्रशासन में ईमानदारी बसेगी तो बाकी जगह अपने आप ईमानदारी से काम होगा।

आदमी एक एकल ईकाई के रुप में ईमानदार नहीं भी हो तब भी अगर उच्च स्तरीय पदों पर ईमानदार लोग बैठे हैं और उसे पता है कि भ्रष्टाचार करने पर उसके लिये मुसीबत खड़ी हो सकती है तो वह हिम्मत ही नहीं करेगा भ्रष्ट आचरण दिखाने की।

भारत में मौजूदा समय में सर्वव्यापी भ्रष्टाचार को देख कर सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि पिछले कुछ दशकों में भारत के राजनेताओं के चरित्र में कितनी गिरावट आ गयी है। नैतिकता की बात उनके लिये बेमानी हो चुकी है।

भारतीय राजनीति, चुनावी राजनीति, दलगत राजनीति और राजनैतिक एवम समाज को झझकोरने वाले आंदोलन से सम्बंधित यह अपने तरह का एक अलग ही उपन्यास है। किसी किसी पृष्ठ पर ऐसा लगने लगता है कि भारतीय राजनीति की परतें कितनी गहराई से खुरची गयी हैं और इसकी शारीरिक और मानसिक बनावट का बड़ा गहरा अध्ययन किया गया है।

एक उदाहरण देखें- क्या लिखा गया है

समस्त राष्ट्र का भविष्य जब मात्र मुट्ठी-भर लोगों के हाथों में समा जाता है तो अनेक जटिल समस्याएँ उठ खड़ी होती हैं। यदि उनके निर्णय दूरदर्शितापूर्ण न हों तो राष्ट्र को उनके दूरगामी प्रभावों के परिणाम झेलने के लिए भी विवश होना पड़ता है। भारत आज जिस संक्रमण की स्थिति से गुजर रहा है, उसका दायित्व इन्हीं राजनीतिज्ञों पर है, जिन्होंने राजनीति में से नीति को तिरोहित कर, जाने या अनजाने, चाहे या अनचाहे समस्त राष्ट्र के अस्तित्व को दाँव पर लगा दिया है। आए दिन चारों ओर जो हिंसा, जो रक्तपात जो विघटनकारी घटनाएँ घटित हो रही हैं, उसके मूल में कहीं ये ही कारण हैं कि मात्र अपने व्यक्तिगत हितों के लिए उन्होंने किस तरह से समस्त राष्ट्र के हितों की बलि चढ़ा दी है।

हिमांशु जोशी उपन्यास की भूमिका में अपनी पैनी दृष्टि का परिचय देते हैं

राजनीति की भी कोई नीति नहीं होती है। नीति का परित्याग कर जब वह नीति अनीति का मार्ग अपनाने लगती है, तब उसके परिणाम घातक होते है- बड़े भयंकर। भारत के गत कुछ वर्षों का इतिहास इसका साक्षी है।
आज़ादी के बाद लोगों के मन में नई आशाएं, आकांक्षाएं जागीं। सदियों से शोषित दीन-हीन जनों को लगा-उम्मीदों का नया सूरज उगने वाला है,
यातनाओं की काली रात बीतने वाली है।
वह नया सूरज उगा, परन्तु सबके लिए नहीं।
शायद इसलिए काल-रात्रि अभी भी शेष है।

अभी करोड़ों लोग हैं, जिन्हें एक वक्त का भोजन भरपेट नहीं मिल पाता। करोडों लोग हैं। जिनके पास सिर छुपाने के लिए छत नहीं। दो हाथ हैं, पर उन्हें देने के लिए काम नहीं। तन को ढकने के लिए पूरे वस्त्र नहीं, बीमार होने पर दबा नहीं-मरने पर कफन नहीं।
आज़ादी का सपना किसी सीमा तक साकार हुआ, परन्तु वास्तव में वह आज़ादी मिली कहां, जिसके लिए स्वाधीनता-सेनानियों ने लौह-कपाटों के भीतर नारकीय यातनाग्रहों में अपनी देह को गला दिया था, फांसी के तख्तों पर हंस-हंस कर झूलते हुए जीवन के उषाकाल में ही सन्ध्या का वरण कर लिया था। रोटी-रोटी के लिए मोहताज, भीख मांगते ऐसे बच्चे मैंने स्वयं देखे हैं, जिनके अभिभावक स्वाधीनता की बलिवेदी पर अपने प्राणों की आहुति दे चुके थे। उन अनाम, अज्ञात शहीदों का क्या कहीं लेखा-जोखा है ? लेखा-जोखा उन्होंने चाहा भी न होगा, परन्तु उनके परिणामों का हिसाब आने वाली पीढ़ियां मागें तो उसे अनुचित भी नहीं कहूँगा।

देश के ‘भाग्य विधाता’ देश-सेवा के नाम पर क्या-क्या करते हैं ? अपने निहित स्वार्थों की पूर्ति के लिए किस तरह करोड़ों लोगो के भाग्य के साथ खिलवाड़ करते है ? भ्रष्टाचार्य सदाचार के आवरण में किस तरह प्रस्तुत किया जाता है-उसी ‘आदर्शोन्मुख’ समाज का चित्रण प्रस्तुत उपन्यास में किया गया है।

तिमिर वरन, मेघना, पी० पी० या अन्य पात्र काल्पनिक होते हुए भी काल्पनिक नहीं। भारतीय राजनीति से जो तनिक भी परिचित है, उन्हें पात्र भी सुपरिचित लगेंगे। उन्हें किसी-किसी रूप में आपने भी देखा होगा और आज भी देखते होंगे।
राजधानी में गत 25-26 साल से रहने के कारण राजनीति और राजनीतिज्ञों को तनिक निकट से देखने-परखने का मौका मिला। वे ही अनुभव और अनुभूतियां इसके लेखन में सहायक बनीं। कुछ घटनाएं आपको सत्य के इतने निकट लग सकती हैं कि हो सकता है, आप उन्हें सत्य ही मान लें। परन्तु अन्त में मैं यहीं कहूँगा कि मेरा उद्देश्य किसी की कमियों को, कमजोरियों को, रहस्यों को उजागर करके रस लेना नहीं रहा। हाँ जब इसे लिख रहा था, मेरी आंखों के सामने कोटि-कोटि संघर्षरत दीन-दुखियों का चित्र बार-बार अवश्य उभर आता था।

तथ्यों का उद्घाटन स्वयं में एक समस्या है। शायद इसलिए मैं महीनों तक आग के दरिया की धधकती लहरों से जूझता रहा। उन मित्रों का मैं कम आभारी नहीं जिन्होंने इसके लिए सामग्री जुटाने में हर तरह का जोखिम उठाकर मेरी सहायता की।

अन्ना हजारे द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन छेड़ने से और आमरण अनशन करके अपने प्राणों को ताक पर रखने से उपन्यास समय साक्षी है, के तिमिर बारन की याद ताजा हो उठती है और जिस तरह से देश के युवावर्ग ने इस आंदोलन में शिरकत की है उससे ऐसा प्रतीत होता है कि मानो समय साक्षी है का अंतिम अध्याय दिल्ली में एक नाटक के रुप में खेला जा रहा हो।

जहाँ तिमिर वरन खुद एक राजनीतिज्ञ हैं और बरसों सत्ता में रहे हैं और अपने ही दल के विरोधियों द्वारा उनके खिलाफ किये जा रहे षडयंत्रों के खिलाफ वे उठ खड़े होते हैं। देश हित में वे सड़क पर उतर आते हैं और युवाओं का आह्वान करते हैं। देश को जगाते हैं और बुरी राजनीतिक ताकतों, जो कि देश के हितों के खिलाफ काम कर रही हैं, के खिलाफ आंदोलन छेड़ देते हैं और उसे एक जनांदोलन के रुप में विकसित कर देते हैं।

समय साक्षी है उपन्यास का अंश पढ़ें-

‘नहीं, नहीं यह नहीं होगा। आइ से न्नो ! दांत पीसते हुए तिमिर वरन गरजे। आँखें अंगारे की तरह धधक रही थीं। चेहरा तमतमा आया था। आवेश में सारा शरीर कांपने-सा लगा था।
मुट्ठी भींचते वह दहाड़ने लगे ‘मेरी प्रतिष्ठा पर आंच आई तो सबकी इज़्जत धूल में मिला दूँगा। देखता हूँ- मुझे मंत्रिमंडल से हटाकर कौन सत्ता में टिका रहता है !’ अन्तिम चेतावनी देते हुए वह उठे फाइल बगल में दबाकर, धोती का पल्लू संभालते हुए फटफट बाहर की ओर चल पड़े।
उन्हें इस तरह उत्तेजित देखते ही धूप में बैठा ड्राइवर घबरा उठा और सिगरेट का टोटा फेंकता हुआ गाड़ी की ओर लपका।
चमचमाती हुई, एक नीली-सी लम्बी कार फर्राटे से गेट की ओर मुड़ी और हवा को चीरती हुई, वारीन्द्र घोष मार्ग पर निकल पड़ी।

बैठक में भाग लेनेवाले संसदीय दल के सभी सदस्य  क्षण-भर के लिए सन्न रह गए। तिमिर वरन का यह विकराल रौद्र रूप सबके मन में एक अजीब-सी दहशत पैदा कर गया था। एक भयावनी आशंका की कहीं दल विघटन फिर न हो जाए! इस बार दल के विघटन का अर्थ था। घोर अराजकता, सैनिक-शासन या पूर्ण तानाशाही !
पर देश इसमें से किसी भी स्थिति के लिए तैयार न था।
तिमिर वरन के पीछे पन्द्रह बीस और सदस्य उठ खड़े हुए। एक-एक कार में पाँच छह-छह जन लदकर  उसी दिशा में बढ़े जिधर से तिमिर वरन की विदेश से आयात की गई, कीमती गाड़ी अभी-अभी गुज़री थी।

सत्तर वर्ष के तिमिर वरन आज न जाने किस तरह एक ही छलांग में तीन-तीन चार-चार सीढ़ियाँ पार कर गए थे। और दिन थोड़ा-सा पैदल चलने में उनका दम फूलने लगता था। वह बुरी तरह हांफने लगते थे। आवेश के कारण, आज उन्हें कुछ भी सूझ न रहा था।
तीर की तरह वह सीधे बैठक में गए। सचिव बर्मन पीछे-पीछे दौड़ता हुआ आया। सोफे पर फाइल पलटकर वह धम्म से कुर्सी पर बैठ गए।
‘यस्सर’ की भंगिमाव बनाए बर्मन हाथ में स्लिप वाली सफेद नोट-बुक उठाए, सिर झुकाए सामने खड़ा था।
‘जिन संसद-सदस्यों की सूची तुम्हें कल दी थी, उन्हें गाड़ियां भेजकर बुलाओ। अबरार से कहो कि एक नया  ड्राफ्ट तैयार करें फौरन।’

बर्मन चला गया तो उन्होंने एक लम्बी सांस ली। पाँवों को दूर तक पसारा और टोपी उतारकर मेज़ पर रख दी। देर तक उनका हाथ यों ही टोपी के ऊपर रखा रहा। फिर उनके गंजे सिर पर पहुँच गया, आँखें मूंदकर वह कुछ सोचने लगे।
अब भी उनका चेहरा तमतमा रहा था। अब तक उनका दम फूल रहा था। कभी इस तरह अपमानित किया जाएगा-उन्होंने सपने में भी न सोचा था।
अभी सुबह के नौ भी न बजे थे-चारों ओर घिरा धुंध-सी फैली थी। नमदे की तरह मोटे-मोटे घने काले बादलों से आसमान घिरा था। सर्दी के कारण बाहर निकलना कठिन था। फिर भी सड़कों पर भीड़ कम न थी। साइकलों और कारों की सचिवालय की ओर कतार-सी चली जा रही थी।

तिमिर वरन देर तक उसी मुद्रा में बैठे रहे। उनके विरुद्ध षडयंत्र का जाल निरंतर बुना जा रहा है, उन्हें इसका अहसास था। वह जानते थे, दल के लोग सरकार की नीतियों के कारण बहुत-से छोटे-छोटे गुटों में बट रहे हैं। दूसरी पार्टियों से भी बहुत-से लोग आ गए थे। जिनका एक अलग समुदाय बन रहा था। वे सत्ता को हथियाने के लिए किसी भी सीमा तक जाने के लिए तैयार थे। तिमिर वरन के लिए यह सबसे बड़ा खतरा था। इस चुनौती का सामना करने के लिए उन्होंने भी कम चाले न चली थीं। अपनी तरफ से कहीं कोई कसर न रखी थी। किन्तु अब पासा पलट रहा था। धीरे-धीरे तिमिर वरन को शक्तिहीन करने की सुनियोजित योजना चल रही थी। उप-चुनावों में उनके ही दल के लोंगों ने, उनके समर्थक उम्मीदवारों को हराने के लिए विपक्ष के उम्मीदवारों का छिप-छिपकर समर्थन किया था। इस अभियान में उन्हें काफी हद तक सफलता भी मिली थी।

किन्तु तिमिर वरन भी कोई कच्चे खिलाड़ी न थे। विपक्ष के बहुत-से नेताओं से उनके आत्मीयता के गहरे सम्बन्ध थे। उन्होंने अपने ही दल के कम सदस्य-उम्मीदवारों की ज़मानते ज़ब्द नहीं करवाई थीं। बहुत-से लोग उनका आशीर्वीद प्राप्त कर संसद तक पहुँचने में सफल हुए थे। विपक्ष की बेचों पर  बैठने के बावजूद उन पर अगाध श्रद्धा रखते थे।
उनका व्यक्तित्व बर्फ से ढके ज्वालामुखी जैसा था। बाहर से जितने सौम्य-सन्त लगते थे, भीतर से उतने  ही रीति-नीति के धनी कूटनीतिज्ञ। खादी के साधारण-से कपड़े पावों में बेडोल की चप्पलें और सिर पर हिम श्रृंग की तरह जगमगाती शुभ्र स्वच्छ टोपी !  जब वह समाजवाद या गरीबी से दूर करने के नारे लगाते थे, तब लगता था, वाकई कोई भुक्त भोगी किसान अपने ही दुख-दर्द की बातें कर रहा है !

किसान-परिवार में अपने पैदा होने का उन्हें गर्व था।  मौंके-बेमौके इस तथ्य का उद्घाटन भी भूलते न थे। सोफे से धीरे से उठकर वह कमरे में ही चहलकदमी करने लगे। कमरे में किसी के भी प्रवेश की उन्होंने मनाही कर दी थी।
नई व्यूह-रचना के विषय में वह गम्भीरता से सोचने लगे। उन्हें-इस बार की पराजय का अर्थ है, राजनीति से पूर्ण संन्यास ! यानी कि उनकी राजनीतिक हत्या !

राजनीति से हटने से उन्हें एतराज न था। उम्र भी काफी हो गई थी। दस्तखत करते हुए हाथ कांपते थे। देर तक मीटिंग में बैठना भी कठिन लग रहा था। उस पर दिन रात टूर प्रोग्राम ! जन भाषाओं में भाषण तथा नित उठ खड़ी होने वाली नई-नई उलझने ! पर देश सेवा और जनहित के नाम पर वह वर्षों से इन यंत्रणाओं को सहते आ रहे थे। उनकी अन्तिम आकांक्षा थी कि कभी ऐसा संयोग हो और जनता  उन्हें प्रधानमंत्री के पद पर सुशोभित कर, अपने पर  किए गए उनके उपकारों का बदला चुकाए तो संभवता वह इस गरीब देश की कुछ सेवा कर सकेंगे।

आज के परिपेक्ष्य में हिमांशु जोशी का उपन्यास- समय साक्षी है, बेहद प्रासंगिक हो उठा है और एक अच्छी कृति की पहचान यही है कि वह समय समय पर जीवित होता रहता है और भिन्न काल की पीढ़ियों को अपने से जोड़ता रहता है।

…[राकेश]

अगस्त 17, 2011

हम खुद ही न मार डालें कहीं अन्ना को!


आजकल हालात के चलते
कई बार सोचने पर मजबूर हूँ
उस सच के बारे में
जिसे सब जानते है
पर बोलने को कोई तैयार नहीं-
यह कि सारे कुएँ में भ्रष्टाचार की भाँग पड़ी है।

मैं दस गुना फीस देकर
डाक्टर से इलाज करा रहा हूँ
उस पर तुर्रा यह
भगवान तुल्य वह बेशर्म डाक्टर
आपरेशन के अलग से मांगता है।

हम में कोई भी कम कहाँ है मित्रों!

बच्चों की आला स्कूल में भरती से लेकर
रेल टिकट तक के लिए
सब खुशी खुशी ऊपर से देते हैं
काले धन बल के बदले
मेघावी उम्मीदवारों को पीछे धकेल
अपनी कर्महीन संतानों के लिए
नौकरियाँ हथियाँ रहे हैं।

सारे कुएँ में भ्रष्टाचार की भांग पड़ी है।

इस बेईमान माहौल में
ये जो बूढा फकीर अन्ना बाबा
ईमान की भीख मांगता फिर रहा है
करनी के हम सब चोर
कथनी से उसे प्रोत्साहित करने वाले
शायद बेचारे को टूटा दिल मार देंगे।

कहो कौन है
अपने काले धन से अटे लॉकर खोलने वाला
बताओ कौन है
जो आगे आकर कहे
बाबा मुझसे पाप हुआ
देश के नाम लो ये
स्विस बैंक की चाबी।

सच तो यह है मित्रों!
सरापा बेईमान हो चुकी इस बस्ती में
ईमान की बात ही फ़िज़ूल है
फिर भी यदि अब भी कहीं
विवेक की चिंगारियाँ बाकी हैं
दुआ करो वे आग बने
काले धन के सर्वव्यापी इस कीचड़ में
ईमान के कंवल खिलें
हो सदा के लिए भ्रष्टाचार के तम का नाश
उजाला हो दिलो में, दिमागों में देश हित का
दुआ करो !प्रकाशित विकास मार्ग पर
कदम मिला कर सब चलें।

(रफत आलम)

अप्रैल 19, 2011

बगुलाभगत आये रे!

वो जो बेचते थे
जहर अब तक,
सुना है
पहने झक सफेद कपड़े
डाले गले में आला
महामारी भगाने की
अपनी क्षमता का
विज्ञापन करते
घूम रहे हैं।

भटका दिये गये थे
बहुरुपिये के स्वर्ण मृग रुपी कौशल से राम
हर ली गयी थी
साधु वेश में आये रावण के छल से सीता
दौ सौ साल लूटा
दास बनाकर भारत को
झुककर व्यापार करने की
इजाज़त लेने आये लूटेरों ने।

विदेशी लूटेरे चले गये
विशालकाय तिजोरियाँ खाली छोड़कर
पर उन पर जल्द कब्जे हो गये
वे फिर से भरी रहने लगीं
देश फिर से लूटा जाने लगा,
लूटा जाता रहा है दशकों से।

डाकुओं के खिलाफ आवाज़ें उठी
तो
छलिये रुप बदल सामने आ गये हैं
जो कहते न थकते थे
“पैसा खुदा तो नहीं
पर खुदा की कसम
खुदा से कम भी नहीं”
वे कस्में खा रहे हैं
रुखी सूखी खायेंगे
पानी पीकर
देश का स्वास्थ्य ठीक करेंगे,
भ्रष्ट हो गया है
यह देश
इसे ठीक करेंगे!

होशियार
सियार हैं ये
शेर की खाल ओढ़े हुये
सामने से नहीं
आदतन फिर से
लोगों की
पीठ में ही खंजर भोकेंगे
लोगों की
मिट्टी की
गुल्लकें
ले भागेंगे
हजारों मील दूर रखी
अपनी तिजोरियाँ भरने के लिये।

जाग जाओ
वरना ये फिर ठगेंगे
इंतजार बेकार है
किसी भगीरथ का
जो लाकर दे पावन गंगा
अब तो हरेक को
अपने ही अंदर एक भगीरथ
जन्माना होगा
जो खुद को भी श्वेत धवल बनाये
और आसपास की गंदगी भी
दूर बहा दे।

पहचान लो इस बात को
डर गये हैं कुटिल भ्रष्टाचारी
धूर्तता दिखा रहे हैं
इनके झांसे में न आ जाना
इनका सिर्फ ऊपरी चोला ही सफेद है
ये हंस नहीं
जो दूध और पानी को अलग कर दें
बल्कि ये तो बगुलेभगत हैं
जो गिद्ध दृष्टि गड़ाये हुये हैं
देश की विरासत पर।

सावधान ये करेंगे
हर संभव प्रयास
जनता को बरगलाने का
ताकि बनी रहे इनकी सत्ता
आने वाले कई दशकों तक
दबा-कुचला रहे
आम आदमी इनकी
जूतियों तले
साँस भी ले
तो इनके रहमोकरम
का शुक्रिया अदा करके।

वक्त्त आ गया है जब
इन्हे जाल में फँसा कर
सीमित करनी होगी इनकी उड़ान
तभी लौट पायेगा
इस देश का आत्म सम्मान
असमंजस की घड़ियाँ गिनने का वक्त चला गया
यह अवसर है
धर्म युद्ध में हिस्सा लेने का
जीत हासिल कर
एक नये युग का सूत्रपात करने का।

…[राकेश]

अप्रैल 12, 2011

लोकपाल समिति : सदस्यता लूट ले

भारत में चलती गाड़ी में चढ़ने की कोशिश करने वालों की संख्या बहुत अधिक है और नेतागण तो इस काम में बहुत आगे हैं। कुछ नेता लोकपाल मसले के बहाने अपनी छवि बनाने के लिये दैनिक स्तर पर तरह तरह की बयानबाजी कर रहे हैं और कुछ नेता इस पूरे मामले में पलीता लगाकर इसे उड़ाने की चेष्टा में हैं। इसे ध्वस्त करने की कोशिश करने वालों में सबसे बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो लोकपाल तैयार करने वाली समिति में शामिल लोगों पर एतराज करके अपनी अपनी पंसद के लोग वहाँ देखना चाहते हैं। बहाना वे कर रहे हैं कि महिला क्यों नहीं है, दलित क्यों नहीं है, पिछड़ा क्यों नहीं है, मुसलमान क्यों नहीं है, फलाना क्यों नहीं है ढ़िमाका क्यों नहीं है।

121  करोड़ लोगों की आबादी तले दबे भारत में भाँति-भाँति के लोग हैं और अगर किसी एक भी श्रेणी के लोगों की संख्या गिनी जाये तो वह भी करोड़ों में निकलेगी, मसलन गंजे लोग भी करोड़ों की संख्या में होंगे।

पूरे समाज का प्रतिनिधित्व यह समिति करे इसके लिये आवश्यक है कि समाज में वास कर रहे लोगों की हर श्रेणी से प्रतिनिधि इस बिल को बनाने वाली समिति के सदस्य होने चाहियें। तभी तो सामाजिक न्याय की कसौटी पर यह खरा उतरेगा। कुछ श्रेणियाँ नीचे सूचिबद्ध की गयी हैं।

लोकपाल बिल बनाने वाली समिति में निम्नांकित लोगों का होना बेहद जरुरी है।

  • एक काले बालों वाला, एक भूरे बालों वाला, और एक सफेद बालों वाला;
  • एक आधा गंजा और एक पूरा गंजा;
  • एक काली आँखों वाला, एक भूरी आँखों वाला, एक नीली आँखों वाला, एक कंजी आँखों वाला;
  • एक सिक्स पैक एब्स वाला, और एक तोंद वाला;
  • एक सबसे लम्बे कद का और एक सबसे छोटे कद का;
  • एक बिल्कुल स्वस्थ, और एक पूरी तरह से बीमार और रुग्ण शरीर वाला;
  • एक डी.लिट उपाधि वाला और एक बिल्कुल अनपढ़;
  • एक पूर्णतया शाकाहारी, एक पूर्णतया माँसाहारी;
  • एक दुनियाभर की सैर कर चुकने वाला और एक वह जो कभी अपने मोहल्ले से बाहर ही न गया हो;
  • एक हमेशा कपड़े पहनने वाला और एक हमेशा नग्न रहने वाला;
  • एक 32 दाँतो वाला और एक बिना दाँतो के पोपले मुँह वाला;
  • एक रोल्स रॉयस चलाने वाला और एक पैदल चलने वाला;
  • एक योग, व्यायाम करने वाला और एक सदा सोने वाला;
  • एक नाचने वाला और एक नाच न जाने आंगन टेढ़ा कहने वाला;
  • एक गा सकने वाला और एक गाने में गधे से मुकाबला करने वाला;
  • एक दिन में सोने वाला और एक रात में सोने वाला;
  • एक हिंसक और एक अहिंसक;
  • एक दो आँखों वाला, एक एक आँख वाला और एक न देख सकने वाला;
  • एक पूरा सुनने वाला और एक न सुन पाने वाला;
  • एक लगातार बोलने वाला और एक कभी भी बोल न सकने वाला;
  • एक दिन में तीन बार नहाने वाला और एक साल में एक बार नहाने वाला;
  • एक ब्रहमचारी और एक कामी;
  • एक ऐसा जो पत्नी के अलावा हरेक स्त्री में माँ-बहन देखे और एक ऐसा जिसे कम से कम एक बलात्कार का अनुभव हो;
  • एक साधु और एक हद दर्जे का अपराधी;
  • एक लगभग 5 साल का बच्चा और एक कम से कम 95 साल का वृद्ध;
  • एक सदैव प्रथम आने वाला और एक सदैव अनुत्तीर्ण होने वाला;
  • एक बला का शातिर, और एक निपट भोंदू…एकदम गोबरगणेश;
  • एक सवर्णों में सवर्ण, और एक दलितों में अति दलित;
  • एक अगड़ों में अगड़ा और एक पिछड़ों में पिछड़ा;
  • एक अतिआधुनिक, और एक पुरातनपंथी – एकदम पोंगापंथी;
  • एक खिलाड़ी और एक अनाड़ी;
  • एक खतरों का खिलाड़ी और एक चींटी तक से डर जाने वाला;
  • एक पुजारी और एक पूजा-प्रार्थना से घृणा करने वाला;
  • एक सन्यासी और एक संसारी;
  • एक आस्तिक और एक नास्तिक;
  • एक भ्रष्टाचारी और एक ईमानदार,
  • एक दानवीर और एक भिखारी;
  • एक महल में रहने वाला एक फुटपाथ पर बसर करने वाला;
  • एक वोट लेने वाला और एक वोट देने वाला;

आदि इत्यादी!

और बहुत सारी श्रेणियाँ छूट गयी हैं, पढ़ने वाले और इस मामले में रुचि रखने वाले लोग अपनी अपनी इच्छानुसार समाज के विभिन्न तबके के लोगों के प्रतिनिधि इस सूचि में जोड़ सकते हैं।

लोगों के बीमार शरीरों को ठीक करने वाली दवा को बनाने वाली शोधार्थियों की टीम से भारत के ये पंगेबाज महानुभाव यह नहीं कहते कि अपनी टीम में हर श्रेणी के लोग रखो क्योंकि वहाँ इनका बस नहीं चलता। करोड़ों तो ऐसे होंगे जो दवा का नाम भी ढ़ंग से उच्चारित नहीं कर सकते और वहाँ चूँकि शरीर के लाभ की बात है तो वहाँ इन्हे विशेषज्ञ चाहियें पर चूँकि यहाँ लोकपाल इनके हितों के खिलाफ है और चूँकि मामला मानसिक रुग्णता का है और मानसिक रुप से बीमार कभी भी ऐसा नहीं मानते कि वे बीमार हैं तो हरेक आदमी बढ़-चढ़ कर बोल रहा है।

जाति, सम्प्रदाय (रिलीजन), आर्थिक, क्षेत्र और भाषा के अंतर के मुद्दों को कुटिलता से उठाकर कुछ शातिर लोग लोकपाल बिल के मामले की हत्या करना चाहते हैं। इन शातिरों की राजनीति एक भ्रष्ट समाज में ही चल सकती है अतः वे घबराये हुये हैं कि अगर समाज ईमानदार बन गया तो उनकी दुकान बंद हो जायेगी इसलिये तरह तरह के मुखौटे ओढ़कर वे लोकपाल की भ्रूणहत्या करने आ गये हैं।

भारत को बचाना है तो ईमानदार, देशभक्त्तों को जाति, सम्प्रदाय, क्षेत्रवाद, और भाषा के तुच्छ अंतरों को भूलकर अपनी एकता बनाये रखकर इन शातिरों को करारा जवाब देना पड़ेगा। अगर भारत के सर्वनाश से फर्क नहीं पड़ता तो बनाये रखो इसे भ्रष्ट, जातिवादी, और साम्प्रदायिक। वर्तमान के भारत के लोगों की आने वाली पीढ़ियाँ मानवता के निम्न बिंदू को छूकर नये कीर्तिमान स्थापित करेंगी।

अब यहाँ कालिदास बन सकने की प्रक्रिया और परंपरा मर चुकी है, बहुमत मूर्ख ही जन्मते हैं, मूर्ख ही जीते हैं और ऐसे ही धरा छोड़ जाते हैं।

मुस्कुराइये कि आप भारत में रहते हैं।

…[राकेश]

Pic: Courtesy – srknews.com

अप्रैल 8, 2011

इस बार जंग ये जीत ली जाये

भ्रष्टाचार की फैक्टरी में
लोकहितकारी योजनाओं का लहू
निचोड़ा जाकर
सोने में बदला जा रहा है

अनगिनत बैंक लोकरों संग्रणग्रहों में
दफन हो चुके हैं सपने जो
विकास की हकीकत बनने थे
प्रजातंत्र के चारों स्तंभ
चोर उच्चके लफंगों के कब्जे में हैं
विवेक दुबका पडा है
बोले तो जान की खैर नहीं

तुमने देखा नहीं क्या
सच के उपासकों का अंजाम
कल ही एक जिंदा जलाया गया है
बाकी की तलाश में हैं गोलियाँ
आज के सफ़ेदपोश आतकंकारी
करोड़ों उम्मीदों के ये कातिल
बदतर हैं विदेशी दुश्मनों से
जिनके बम सौ पचास जानें लेते हैं

जो भी इन्ही की गफलत से
फौजी ताबूत और गोलीरोधी जाकेट तक
निगल खाए बेईमानों ने
कश्मीर से कन्याकुमारी तक
बेलगाम हैं ऊँगलीमालों के काले घोड़े

अब तथागत कहाँ?
कौन गाँधी?
फिर भी अचीर इस अंधकार में
रौशनी की दीर्घ किरण
अन्ना हजारे
बुझने से पहले
सुनहरा सूरज तुम्हे सौंपने को है आतुर

ए! छले गए, लूटे गए, बहलाए गए
शोषितो-शापितो-मुफलिसो
खास तौर से नौजवानो
बहुत कर चुके हो आत्महत्याये
अब वक्त शहादत का आया है
सच का कफ़न बाँध कर चल पडो
अन्ना हजारे के साथ
क्या पता
बेईमानों के विरुद्ध जंग
इस बार हम जीत ही जाएँ?

(रफत आलम)

Pic. courtesy : Hindustantimes

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