कॉल ड्राप का गोरखधंधा… (के.एन. गोविंदाचार्य)

4 दिन पूर्व कॉल ड्राप के बारे में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को लिखा विस्तृत पत्र आप सभी के साथ साझा कर रहा हूं   – के. एन. गोविंदाचार्य

दिनांक-30 मई 2016
प्रिय मित्र श्री नरेंद्र जी,

सादर नमस्ते!

सरकार की दूसरी वर्षगांठ पर आपको हार्दिक शुभकामनाएं। राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के लिए आपकी सरकार ने डिजीटल इंडिया समेत कई योजनाओं की शुरुआत की है परंतु सार्थक बदलावतो योजनाओं के सही क्रियान्वयन से ही आ सकता है। सुशासन के लिए आपने सार्थक सहयोग और सकारात्मक आलोचना हेतु जो अपील की है वह निश्चित ही स्वागत योग्य हैं। आज के समाचार पत्रों में टेलीकॉम कंपनियों द्वारा कॉल ड्रॉप के माध्यम से धांधली की खबर पर आपका ध्यानाकर्षित करना चाहता हूं, जिसकी वजह से 100 करोड़ से अधिक मोबाइल उपभोक्ता बेवजह लुट रहे हैं (संलग्नक-1)।

टेलीकॉम कंपनियों द्वारा मोबाइल नेटवर्क में निवेश की कमी से कॉल ड्रॉप एक राष्ट्रीय महामारी बन गई है। इसपर आप भी गंभीर चिंता व्यक्त कर चुके हैं। दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए 16 अक्तूबर 2015 को नियम बनाया था जिसे माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 11 मई 2016 के निर्णय से निरस्त कर दिया है। फैसले के अध्ययन से ऐसा प्रतीत होता है कि सर्वोच्च न्यायालय के सम्मुख सरकार द्वारा तथ्यों का सही प्रस्तुतीकरण नहीं किया गया, इसका संक्षिप्त विवरण मेरे पत्र के साथ संलग्न है (संलग्नक-2)। हमारी वज्र फाउंडेशन की टीम ने फैसले के विस्तृत अध्ययन के पश्चात कानूनी बिंदुओं कानिर्धारण किया है जिनका संक्षिप्त प्रस्तुतिकरण इस पत्र के साथ संलग्न है (संलग्नक-3)। मैं आशा करता हूं कि आप अविलंब दूरसंचार मंत्रालय तथा ट्राई को इस मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के सम्मुख पुनर्विचार याचिका दायर करने का निर्देश देंगे।

माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार सरकार द्वारा कॉल ड्रॉप पर मुआवजे का नियम सही तरीके से नहीं बनाया गया था। इस बारे में संसद को नया कानून पारित करना होगा। यदि सरकार सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से सहमत है तो फिर नए कानून के लिए अविलंब अध्यादेश जारी करना चाहिए जिससे देश में सबसे बड़े उपभोक्ता वर्ग ( जिनमें से अधिकांश मध्यवर्गीय और गरीब हैं ) को राहत मिल सके।

दरअसल कॉल ड्रॉप में उपभोक्ता की मोबाइल पर बात होती ही नहीं है तो फिर उस पर टेलीकॉम कंपनियों द्वारा पैसा वसूली एक खुली लूट ही है। इस पर सरकार लगाम लगाने में विफल रही है।आज के समाचार से स्पष्ट है कि जुर्माने से बचने के लिए टेलीकॉम कंपनिया अब ‘रेडियो लिंक टेक्नोलॉजी’ से उपभोक्ताओं को ठग रही हैं जिससे अब कॉल ड्रॉप के बावजूद कनेक्शन नहीं कटता। अटॉर्नी जनरल श्री मुकुल रोहतगी ने कॉल ड्रॉप मामले में बहस के दौरान सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि मोबाइल कंपनियां कार्टेल बनाकर जनता को लूट रही हैं। कॉल ड्रॉप मामले में आम जनता किस तरह ठगी गई है उसकी पुष्टि के लिए मैं संक्षिप्त विवरण आपको भेज रहा हूं (संलग्नक 4)।

कॉल ड्रॉप पर निर्धारित मापदंडों का पालन नहीं करने के लिए टेलीकॉम कंपनियों पर सख्त पेनॉल्टी के प्रावधान हैं जिनका ट्राई द्वारा पालन नहीं हो रहा है। कॉल ड्रॉप में बगैर सेवा दिए टेलीकॉम कंपनियों द्वारा पिछले कुछ सालों में ग्राहकों से हजारों करोड़ की अवैध वसूली की गई है।इसे ग्राहक निधि में जमा कराने के लिए 2007 के कानून का पालन हो यहसुनिश्चित कराने की आवश्यकता है।

मैं आशा करता हूं कि हमारे प्रतिवेदन का संज्ञान लेते हुएआप माननीय सर्वोच्च न्यायालय के सम्मुख अविलंब पुनर्विचार याचिका दायर करने का निर्देश देंगे। कानूनों के क्रियान्वयन से जनता को प्रभावी न्याय तथा सुशासन दिलाने के लिए मैं ऐसे अन्य विषयों पर आपको सहयोग देता रहूंगा जिससे हम सभी का राष्ट्रीय स्वप्न साकार हो सके।

शुभकामनाओं सहित।
सादर

(के एन गोविंदाचार्य)
श्री नरेंद्र मोदी जी,
प्रधानमंत्री, भारत सरकार
साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली

प्रति-

1- श्री रविशंकर प्रसाद, दूरसंचार मंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली
2- श्री आर एस शर्मा, चेयरमैन, ट्राई, नई दिल्ली

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