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जून 13, 2015

बिना पैर ऊँची उड़ान

एक बच्ची जन्मती है पर और बच्चों की तरह उसके पैर नहीं हैं, उसके जैविक माता-पिता इस घबराहट में कि वे बिना पैरों की बच्ची का लालन-पालन कैसे करेंगें, बच्ची को त्याग देते हैं| शारीरिक रूप से अपंग बच्ची को एक अन्य दयालू दंपत्ति गोद लेते हैं और उसे बचपन से सिखाते हैं कि असम्भव जैसा कुछ नहीं होता और वह बच्ची इस बात को अपने आत्मविशवास, दृढ-निश्चय और कड़ी मेहनत से सच सिद्ध करके दिखाती है|

मानव जीवन में इससे प्रेरक कुछ नहीं हो सकता जहां शारीरिक कमी कतई कोई बाधा उत्पन्न न कर पाई हो मानव के सम्मुख और मानव ने हर कठिनाई पर विजय प्राप्त करके शारीरिक रूप से पूर्णतया सक्षम मानवों को पीछे करके उपलब्धियां कमाई हों और वह भी ऐसे क्षेत्रों में जहां शारीरिक अंगों के सार्थक इस्तेमाल पर बात ठहरती हो|

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