बच्चे को क्या मालूम … मंटो

kid on gunpoint-001लिबलिबी दबी-पिस्तौल से झुंझलाकर गोली बाहर निकली।खिड़की में से बाहर झाकने वाला आदमी उसी जगह दोहरा हो गया।लिबलिबी थोड़ी देर के बाद फिर दबी-दूसरी गोली भिनभिनाती हुई बाहर निकली।सड़क पर माशकी की मश्क फटी, वह औंधे मुंह गिरा और उसका लहू मश्क के पानी में मिलकर बहने लगा।लिबलिबी तीसरी बार दबी-निशाना चूक गया, गोली एक गीली दीवार में जज्ब हो गई।चौथी गोली एक बूढ़ी औरत की पीठ में लगी, वह चीख भी न सकी और वहीं ढेर हो गई।

पाचवीं और छठी गोली बेकार गई, कोई हलाक हुआ न जख्मी। गोलिया चलाने वाला भिन्ना गया। दफ्अतन सड़क पर एक छोटा-सा बच्चा दौड़ता हुआ दिखाई दिया। गोलिया चलाने वाले ने पिस्तौल का मुंह उसकी तरफ मोड़ा। उसके साथी ने कहा: ”यह क्या करते हो?”

गोलिया चलाने वाले ने पूछा: ”क्यों?” ”गोलिया तो खत्म हो चुकी है!”

 

”तुम खामोश रहो.. इतने-से बच्चे को क्या मालूम?”

 

[मंटो की लघुकथा – बेखबरी का फायदा]

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: