ईश्वर की दलाली

अगर वह टाल पाता तो वह माँ के साथ मंदिर न जाता| पहले कभी नहीं गया था, पर आज फंस गया था, कोई और ले जाने वाला था नहीं सो उसे ही जाना पड़ा|
मंदिर के बाहर बहुत भीड़ थी| लोग लाइन लगा कर मंदिर में प्रवेश करने का इंतजार कर रहे थे| लाइन देख कर अंकित को लगा कि घंटो लग जायेंगे ऐसे तो|
वह माँ के साथ कार से उतरा और उसकी माँ, महिलाओं की पंक्ति में खड़ी हो गई|
वह कार के पास ही खड़ा रहा|
थोड़ी देर बाद ही धोती कुर्ता और माथे पर चन्दन का टीका लगाए हुए एक युवक उसके पास आया| वह लिबास से पुजारी सरीखा लग रहा था|
युवक ने उसने अंकित से पूछा,” मंदिर में भगवान की पूजा अर्चना करनी है?

हाँ, मेरी माँ को करनी है| पर भीड़ बहुत है|
युवक मुस्कराते हुए बोला,” हाँ भीड़ तो बहुत है, पर आप चाहो तो आपकी माता जी के लिए मंदिर में जल्दी प्रवेश करने की व्यवस्था हो सकती है”|
“कैसे”|
एक अन्य द्वार है मंदिर में प्रवेश करने के लिए| खास भक्त उधर से ही प्रवेश करते हैं और संतुष्टिपूर्वक पूजा करने का समय भी दिया जाता है खास भक्तों को|
ऐसा कैसे?
युवक धीमी आवाज में बोला,” हजार रुपया फीस है शीघ्र प्रवेश की”|
“आप पुजारी हैं मंदिर के?”
नहीं, मेरे मामा जी हैं मुख्य पुजारी|
और खास पूजा का क्या रेट है?
५ हजार| बिल्कुल नजदीक से शान्ति से अकेले में पन्द्रह- बीस मिनट पूजा कर सकते हैं|

और ये जो भीड़ बाहर खड़ी है ये दिक्कत नहीं करेगी?

नहीं नहीं, इसका इंतजाम है, मंदिर के सुरक्षा कर्मचारी इन्हे रोके रखते हैं जब भी कोई खास आदमी पूजा करता है|

अंकित ने कुछ देर सोचा और कहा,” कैसे इस बात को माँ लिया जाए”|
आप मेरे साथ आइये मैं मामा जी से आपको मिलवा देता हूँ|

चलिए आपके मामा जी अगर यही बात कह देंगे तो बात बने|

युवक अंकित को लेकर मंदिर के पीछे की ओर आ गया| और एक छोटे से द्वार से, जिस पर एक सुरक्षा कर्मचारी खड़ा पहरा दे रहा था, अंदर प्रवेश कर गया| पांच मिनट बाद युवक मंदिर के पुजारी के साथ आया|

पुजारी ने अंकित को देख कहा,”आप ईश्वर के विशेष दर्शन कर सकते हैं और उनकी पूजा कर सकते हैं, मेरे भांजे ने जो कहा उसके अनुसार व्यवस्था हो जायेगी|

पुजारी जी, मैं २५ हजार रूपये दूंगा अगर आप ईश्वर को बाहर लाकर मेरी माँ को उनके विशेष दर्शन करवा दें और पूजा करवा दें|

ये क्या बात कर रहे हो? भगवान कैसे बाहर आ जायेंगे?

आपके कहने से आ ही जायेंगे| आप जब भक्तों को अंदर उनसे मिलवा रहे हो| आप मुझसे पंच लाख रूपये ले लो अगर आप ईश्वर को मेरे घर लाकर माँ को उनके दर्शन करवा असकें|

पुजारी ने गुस्से में अपने भांजे को डपटा,” अरे मूर्ख किस पागल आदमी को ले आया पकड़ कर| भगाओ इसे यहाँ से|”

अंकित ने तेज स्वर में पुजारी से कहा,” पुजारी जी, ईश्वर की दलाली बंद कीजिए| कम से कम मंदिर को तो भ्रष्टाचार और घूसखोरी से मुक्त रखिये”|

पुजारी पहरेदार को अंकित को वहाँ से भगाने का आदेश देकर तेजी से मंदिर के अंदर भाग गया|

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2 टिप्पणियाँ to “ईश्वर की दलाली”

  1. Reblogged this on oshriradhekrishnabole and commented:
    Hey,,Paise ki bhukh Bhagvan ko chardivari tak phunch jati hain,,

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