अरविंद केजरीवाल : एक खुला पत्र आपके नाम …

AK-Tiharएक खुला पत्र अरविन्द के नाम—

प्रिय अरविन्द,

उम्मीद करता हूँ कि तिहाड़ की जेल में भी तुम आराम से होंगे…ऐसा इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि अब इस किस्म की बातों और चीजों से तुम कब के ऊपर उठ चुके हो…अब ये सब बातें शायद तुम्हारी जिन्दगी में अब कोई मायने भी नहीं रखती…बाकि यहाँ बाहर की दुनिया में सब ठीक है….तुम खामख्वाह ही इस मुल्क और इसके लोगों के लिए इतने परेशान रहते हो..

-लोग अब भी बड़े आराम से अपनी नौकरियों को अंजाम दे रहे हैं हमेशा की तरह- बाकि सब ठीक है..

– सिनेमा घरों में देशभक्ति की बातों और अभिनेता द्वारा बलात्कारियो, गुंडों और भ्रष्टाचारी नेता, अफसर और पुलिस के खिलाफ आवाज़ बुलंद करने पर लोग अब भी पहले की तरह खूब तालियाँ पीट कर अपने दिल की भड़ास निकालते हैं- बाकि सब ठीक है..

– टोल टैक्स पर आज भी घमंडी नेता और उनकी बिगडैल औलादें तीस-चालीस रूपए के टोल के लिए अपने आलिशान गाड़ियों से उतर कर टोल की एक मामूली सी नौकरी करने वाले आम से आदमी के अन्दर गरम लोहा डाल रहे हैं- बाकि सब ठीक है..

– उत्तर प्रदेश के देहात में अब भी कोई गरीब लाचार बाप अपनी बिटिया के साथ हुए बलात्कार की रिपोर्ट करवाने के लिए थानेदार के पैरों में पड़ा गिरिया रहा है- बाकि सब ठीक है..

– अन्याय के खिलाफ जन आन्दोलन की आवाज़ देने में जितने लोग सड़कों पर आते हैं उससे दस गुना ज्यादा लोग आज भी क्रिकेट स्टेडियम में कई सौ / हज़ार रूपए खर्च करके और हर चौके-छक्के पर तिरंगे को लहरा कर “इंडिया-इंडिया” चिल्लाकर और चियर्स लीडर के लोकनृत्य का आंनद लेते हुए देश की असीम सेवा बखूबी कर रहे हैं – बाकि सब ठीक है..

– दफ्तरों में बाबूओं ने महंगाई के चलते रिश्वत के रेट में “जायज बढ़ोतरी” कर दी है और वो पूरी “ईमानदारी” से अपने काम को पूरा कर रहे हैं- बाकि सब ठीक है..

– महज कुछ सौ रूपए ना दे पाने से हजारों गरीब आज भी जेल की काल-कोठरी में “कानून के उल्लंघन” में बंद हैं और गोपाल कांडा, राजा, कलमाड़ी, लालू, राजा भैय्या जैसे कानून की इज्ज़त करने वाले जमानत राशि भरकर जनता की सेवा कर रहे हैं- बाकि सब ठीक है..

-गरीब किसान, भूखे मजदुर, सरहद पर लड़ते सैनिक, कारखानों में खपते कारीगर, चाय की दूकान पर काम करते “छोटू”, साहब के घर पर बर्तन मांजती मासूम “पिंकी”, सरकारी स्कूलों में घटिया खाना खाते बच्चे, अस्पतालों में दम तोड़ते मरीजों की घटिया जिन्दगी से बहुत दूर पेज थ्री की खुबसूरत और रंगीन दुनिया और नेताओं के कपड़ों, जूतों से होते हुए सास-बहू की नौटंकी और निर्मल बाबा और जादुई तावीज़ और मर्दाना ताकत बढ़ाने वाले जादुई पाउडर के विज्ञापनों से सरोबार मीडिया अपना कर्तव्य पूरी निष्ठा और तत्परता से निभाते हुए देश को “असली और गंभीर” मुद्दों पर जागरूक कर रहा है- बाकि सब ठीक है..

अरविन्द, तुम यूँ ही परेशान रहते हो और लोगों को भी परेशान करते हो….जब इस मुल्क के लोग मौजूदा व्यवस्था से खुश हैं, उन्हें कोई दिक्कत नहीं और वो अपनी देशभक्ति क्रिकेट मैच और फिल्म देखने के दौरान प्रदर्शित करके संतुष्ट हैं तो तुम क्यों बेकार में उनका जीवन नरक बनाने पर तुले हो भाई ???????

देखो अरविन्द, मीडिया अब कह रहा है कि तुम अब नौटंकी कर रहे हो, नंबर एक ड्रामेबाज़ हो……बिलकुल सही कह रहा है- क्या अब तुम मीडिया से भी बड़े जानकार हो गए देश के हालात के बारे में ? जब मीडिया ने कह दिया है कि सब कुछ ठीक है तो सब कुछ ठीक ही होगा ना….जब लगभग सारा देश और ज्यादातर पढ़े –लिखे लोग भी मान गए हैं कि सब कुछ ठीक है तो तुम्हे पता नहीं क्या दिक्कत है ?

क्यों तुम बेवजह ही इन इतने पढ़े-लिखे और जहीन लोगों की शांतिप्रिय जिन्दगी में कोहराम मचाने आ जाते हो यार ? अरे बलात्कार इनमे से किसी के परिवार की महिला का तो नहीं हुआ ना ? इनकी घर की महिलायों को कोई थोड़े ही छेड़ता है बस में ? इनको थोड़े ही ना सरकारी अस्पताल में धक्के खाने पड़ते हैं ? इनके बच्चों को थोड़े ही ना सरकारी स्कूलों में फटे हुए टाट पर बैठ कर घटिया खाना खाना पडता है ? इनको थोड़े ही कोई राशन की दूकान पर लाइन में घंटो लगना पड़ता है ? कौन सा सरकार या भ्रष्ट नेता इनकी जेब से चुरा कर ले जाते हैं ? फिर कहे को इनको “ व्यवस्था परिवर्तन- व्यवस्था परिवर्तन ” की रट लगा कर इनकी जिन्दगी को नरक बना दिए हो तुम ?

बेहतर यही होगा कि अब तुम अपनी “नौटंकी” बंद करो, जमानत पर बाहर आ जाओ और “संत महात्मा तुल्य” जिन परम पूजनीय नेताओं पर तुमने इलज़ाम लगाये थे वो जनहित और देशहित में वापिस लेकर चुपचाप अपना और अपने परिवार का पेट पालो और जिन्दगी के मजे लूटो…..
AK delhi

इतना परेशान रहते हो मियां ? पढ़े-लिखे हो, थोडा सा समझदार भी दिखाई देते हो कहीं ना कहीं कोई नौकरी मिल ही जाएगी…..अब जब पूरा देश मिलकर एक साथ ये चिल्ला चिल्ला कर कह रहा है कि “सब कुछ ठीक” है तो तुम इसे मान क्यों नहीं लेते ? कभी तो हमारी भी बात मान लिया करो बड़े भाई….

खैर, तुम ये बात मानो या ना मानो तुम्हारी मर्ज़ी….हमारा काम था समझाना सो तुम्हे समझा दिया…पर एक बात कहे देते हैं भाई साहब !! हम हमेशा तुम्हारे साथ खड़े थे, खड़े हैं और खड़े रहेंगे……. क्या करें अब यार- तुम लाख सनकी, पागल, येड़े ही सही पर बात तुम्हारी ना एकदम दिल को छू जाती है…एक दम ” बीडी जलईले जिगर से पिया” वाले कलेजा चीर देने वाले इस्टाईल में…

बाकि अपना ख्याल रखना तिहाड़ में, दवाई समय पर लेते रहना- बाकि यहाँ सब ठीक है !!

राम-राम जी की ( अगर किसी ने पेटेंट करवा रखा हो तो माफ़ी चाहूँगा)…

(उमेश द्विवेदी)

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One Comment to “अरविंद केजरीवाल : एक खुला पत्र आपके नाम …”

  1. हम कश्मशे गम से गुजर क्यों नहीं जाते, मरना है बहरहाल तो मर क्यों जाते!

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