अरविंद केजरीवाल : हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण के शातिराना खेल का हिस्सा है मीडिया

Arvindbenaras15 अप्रैल को आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल बनारस पहुंचे भारत के चुनाव की सबसे बड़ी जंग में भाजपा के प्रधानमंत्री नरेंद मोदी को चुनौती देने के लिए| बनारस पहुँचते ही वे सड़क पर निकल पड़े और पहुँच गये एक ऐसे परिवार के घर जिनका एकमात्र कमाऊ सदस्य दुर्भाग्य से मेनहोल में घुसकर सीवर की सफाई करने के दौरान मृत्यु को प्राप्त हो गया था| शोकग्रस्त परिवार से मिलने के बाद उन्होंने एक संवाद कार्यक्रम में शिरकत की जहां लोगों ने उनसे विभिन्न तरह के सवाल पूछे| 

अगले दिन वे रोहिण्या, जो कि काशी देहात का क्षेत्र है, में पहुँच गये और गाँवों में रैलियां और सभाएं करते रहे और बीच में अपने रास्ते में अपने प्रशंसकों से रुक कर मिलते रहे| एजाज़ अशरफ कपारफोड़वा गाँव में अरविंद केजरीवाल के वाहन पर सवार हो गये और हर्सोस गाँव आने तक जहां एक और रैली थी, २०-२५ मिनट अरविंद केजरीवाल से सवाल पूछते रहे|

जब आप कुछ दिन पहले वाराणसी आए थे तो आप पर अंडे और स्याही फेंके गये थे| तब से आप पर कई बार हमले किये ज चुके हैं| आप पर इन हमलों का क्या असर पड़ा है? 

ये हमले वाराणसी में शुरू नहीं हुए|  कब शुरू हुए ये हमले? ये शुरू हुए जब मैंने मार्च की शुरुआत में गुजरात की यात्रा की| क्या यह केवल एक संयोग है या इससे अधिक कुछ है? मैं वास्तव में नहीं जानता| हम बहुत बड़े लोगों का विरोध कर रहे हैं और जाहिर सी बात है कि वे लोग चुप तो बैठेंगे नहीं| वे हम पर हमले करेंगे|

 इन हमलों ने व्यक्तिगत रूप से आप पर क्या प्रभाव डाले हैं|

ऐसे  हमलों से मुझे आश्चर्य नहीं हुआ था क्योंकि ये तो अपेक्षित थे| मुझे ऐसा भी लगता है कि चुनाव होने तक ये हमले हल्के रहेंगे क्योंकि उन्हें पता है कि मुझ पर घातक हमला करने से चुनाव में उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है|  पर चुनाव के बाद, मुझे लगता है वे मुझे छोड़ेंगे नहीं| वे लोग कुछ करेंगे| मोदी और अंबानी जैसे लोग … मुझे बताया गया है कि उधोगपतियों को धमकाया गया है, संपादकों को धमकाया गया है|  उन्हें कहा गया है कि मोदी सत्ता में आ रहे हैं और मोदी किसी को नहीं छोड़ते और वे बदला हमेशा लेते हैं| तो वे मुझसे भी बदला लेंगे…पर मैं तैयार हूँ किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए|

आपका परिवार कैसे लेता है इन सब बातों को?

वे नर्वस हैं| मैं उन्हें शांत करने की कोशिश करता हूँ| मुझे लगता है उनके पास अब कोई विकल्प भी नहीं है (हँसते हुए)

आप मार्च में भी वाराणसी आए थे| तब और अब के बीच आपके चुनाव प्रचार ने किसी प्रगति की है?

यह केवल मेरा चुनाव प्रचार नहीं है| यह तो जनता का चुनाव प्रचार है| यदि यह मेरा चुनाव प्रचार होता तो अलग बात होती और मैं आपके सवाल का जवाब दे सकता था| सांसद बन्ना मेरा लक्ष्य नहीं  है| मेरा लक्ष्य लोगों को जागरूक बनाना है| उन्हें बदलाव के लिए तैयार करना है| यदि वे इस बार जाग जाते हैं अच्छा है अन्यथा अगले चुनाव में सही| मेरी लड़ाई जारी रहेगी|

“आप” के उम्मीदवार पर नालंदा, बिहार में भी  हमला किया गया था|  कुछ उम्मीदवारों ने अपना नामांकन वापिस ले लिया| क्या ये दूसरों द्वारा डाले दबाव के कारण है…? T

दबाव एक कारण हो सकता है| कुछ उम्मीदवारों ने नामांकन वापिस लिए हैं क्योंकि हमारी पार्टी के पास उन्हें देने के लिए पैसे नहीं थे और उनके पाने पास भी पैसे नहीं थे| तो उन्होंने अपने नाम वापिस ले लिए यह कह कर कि किसी और उम्मीदवार को टिकट दे दिया जाए|  उन्होंने चुनाव से भले ही नाम वापिस ले लिए हों पर वे पार्टी के साथ खड़े हैं| दबाव भी एक कारण हो सकता है पर मेरे पास इस बात का कोई सुबूत नहीं है| नालंदा से हमारे उम्मीदवार पर किया हमला बताता है कि आज की राजनीति कितने एअमान्वीय हो चुकी है|

AK banaras1आप वाराणसी में मुस्लिम समुदाय से भी मिले हैं| आपको कैसी प्रतिक्रया मिली उनसे? 

स्पष्टत: मुस्लिम मोदी को हराना चाहते हैं| लेकिन हम इसे दूसरी तरह से देख रहे हैं| यदि इस बार ऐसा संभव हो कि हिंदू और मुसलमान मिल कर वोट दें बिना किसे प्रकार के ध्रुवीकरण का शिकार हुए हुए… आपको पता ही है कि मोदी की राजनीति ध्रुवीकरण वाली राजनीति है| क्या हम सभी संप्रदायों और जातियों के लोगों को एक साथ ला सकते हैं चुनाव लड़ने के लिए?  मुख्य प्रश्न यह है हमारे सामने| और यही हमारा ध्येय भी है|

मूलत: हमारी जंग तो सच्चाई और ईमानदारी के लिए है| ये तो सार्वभौमिक मूल्य हैं चाहे हिंदुत्व के एबात करें या इस्लाम की, या सिख धर्म की बात करें या जैन धर्म की| ये मूल्य हरेक धर्म में उपस्थित हैं| हमारी लड़ाई समाज में प्रेम और इंसानियत को कायम रखने की है|  उनकी राजनीति नफ़रत भरी है जबकि हम प्रेममयी राजनीति करना चाहते हैं|  उनकी राजनीति भ्रष्टाचार की पोषक भी है जबकि हम ईमानदारी की स्थापना राजनीति में करना चाहते हैं| यह अनिवार्य हो गया है कि सभी लोग एक साथ आएं और इस लक्ष्यपूर्ति में सहयोग दें|  I

तो एक तरह से वाराणसी उस राजनीतिक बदलाव की राजधानी बन सकता है जो आप और आपकी पार्टी दोनों देखना चाहते हैं?

ईश्वर ने वाराणसी और अमेठी के लोगों के हाथ में देश की राजनीति बदलने की कुंजी दे दी है| यदि लोग बाहर निकलते हैं और मोदी को वाराणसी में और राहुल गांधी को अमेठी में हरा देते हैं तो भारत की राजनीति में भूचाल आ जायेगा| कांग्रेस और भाजपा दोनों खत्म हो जायंगे| एक साल बाद फिर से चुनाव होगा और आप देखेंगे कि नये किस्म के लोग राजनीति में शामिल होंगे|

मुख्तार अंसारी ने चुनाव से अपनी उम्मीदवारी वापिस ले ली है| लोग इस बात को कई तरीकों से देख रहे हैं| (2009 में, मुख़्तार अंसारी, एक कथित माफिया, बसपा के टिकट पर वाराणसी से लड़ा था और भाजपा के मुरली मनोहर जोशी से  करीब 17000 वोटों से हार गया था) )

मुख्तार अंसारी इस देश का एक नागरिक है और यह उसकी स्वतंत्रता है कि वह चुनाव लड़े या अपना नाम वापिस ले ले| यह उस पर निर्भर करता है| लेकिन हम उसके संपर्क में नहीं हैं|

क्या आपने एक बार भी वाराणसी से हार जाने के बारे में सोचा है? क्या आपको हार का भय नहीं है?

जीत हो या हार, मैं इन् बातों की चिंता नहीं करता|  जीत या हार कुछ भी मेरी नहीं होगी| यह लोगों की जीत या हार होगी| मेरा लक्ष्य लोगों को यह समझाना है| मेरे हाथ में सिर्फ कर्म करना है फल तो ईश्वर के हाथ में है|

क्या आपको लगता है कि मीडिया के साथ आपके संबंधों में सुधार आ रहा है?

निश्चित रूप से नहीं! यह फेज तो बहुत महत्वपूर्ण है उनके लिए|  बहुत बड़ी मात्रा में धन निवेश  किया गया है मीडिया में और मीडिया-मालिकों और संपादकों को धमकियां दी गई हैं| मैं कुछ ऐसे रिपोर्टर्स को जानता हूँ जिनके बीट को केवल इसलिए बदल दिया गया क्योंकि उन्होंने हमारे पक्ष में साधारण से ट्वीट कर दिए|

क्या “आप” ने Times Now का बहिष्कार किया हुआ है? “आप” के प्रतिनिधि उस चैनल पर दिखाई नहीं देते| 

 हाँ, हम लोग कुछ टीवी चैनल्स से दूरी बना कर चल रहे हैं| क्योंकि हमने देखा कि वे हमारे खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे थे और गलत तरीकों से भाजपा को प्रचारित करने के लिए हमें निशाना बना रहे थे|  

तो हमने निर्णय लिया कि ऐसे चैनल्स के साथ बातचीत का कोई फायदा नहीं है| क्योंकि जो भी हम बोलेंगे वे लोग उसे तोडमरोड कर ही प्रस्तुत करेंगे|  तो हमने तय किया कि वे जो चाहें वो दिखाएँ हमारे बारे में अगर उनको अपनी ही मर्जी से ही तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करना है तो उनसे बात करके भी क्या लाभ होगा? हम लोग बहुत छोटे हैं वे बहुत बड़े हैं, बहुत शक्तिशाली हैं Times Now, India TV, India News, Dainik Jagran.

वाराणसी में आपका पहला पड़ाव एक दलित बस्ती में था और वहाँ का एक आदमी मेनहोल में सफाई करते हुए मारा गया था| पर टीवी आपकी काजी से मुलाकत को ही दिखाता रहा|

मीडिया पक्षपाती है| It यह भी हिंदू-मुस्लिम का ध्रुवीकरण काने वाले तंत्र का एक हिस्सा है| मीडिया स्वतंत्र नहीं है| सारे मीडिया के बारे में ऐसा नहीं कहूँगा| कुछ मीडिया अच्छा भी है| कुछ रिपोर्टर अच्छे हैं|  कुछ मीडिया के मालिक भ्रष्ट हो चुके हैं| पत्रकार मालिकों के दबाव के सम्मुख टिक नहीं पाते| उन्हें नौकरी की रक्षा करनी पड़ती है|

15 अप्रैल को वाराणसी के प्रभावशाली व्यापारियों के साथ आपकी भेंट हुयी| मैंने उनमें से कुछ के साथ बात की और मुझे लगा कि उनमें से बड़ी उम्र के लोग “आप” से भयभीत थे| 

वे “आप” से क्यों भयभीत हैं? भेंट में उन्होंने हमारी अर्थनीति के सन्दर्भ में कुछ शंकाएं व्यक्त कीं| मैंने उनके सभी शंकाओं का निवारण किया और मुझे लगा जी वे लोग बेहद प्रसन्न थे| |मैंने सुबूतों  के साथ उनसे स्पष्ट कहा और मैंने उन्हें अपने पुराने भाषण दिखाए कि मैं कोई अभी कहानियां नहीं बना रहा उनके सामने, बल्कि हमारी अर्थनीति में एक निरंतरता बनी रही है| उन्होंने इस बात को सराहा| मैंने उनसे कहा कि सबसे बड़ा सुबूत तों आँखों देखे अपने अनुभव का है|  मैंने उन्हें बताया कि दिल्ली में  49 दिनों की सरकार के दौरान मैंने दिल्ली के व्यापारियों और उधोगपतियों के साथ भेंट की और हमने कानूनों को आसान बनाने की चेष्टा की| वैट को आसान बनाया| हमने उधोगपतियों के लिए कुछ सार्थक करने की कोशिश की|   मैंने उन्हें बताया कि वे मेरे कहे पर न जाकर मेरे कहे की खुद ही जांच कर लें|  मुझे तों कहीं से नहीं लगा कि वे हमसे भयभीत थे|

(कार रुकती है, लोगों का झुण्ड उनसे बाहर निकलने के लिए अनुरोध करता है| लोग उन्हें माला पहनाते हैं और उनके समर्थन में नारे लगाते हैं| थोड़ी देर में वे वाहन में वापिस आ जाते हैं| मैं पूछता हूँ- कितना थकान भरा है यह सब संभालना?)

चुनाव प्रचार बेहद थकान वाला काम है| आपको पता है उनमें से एक ने मुझसे कहा कि एक आदमी के दो जगहों से चुनाव लड़ने पर प्रतिबन्ध लगना चाहिए| उसने कहा कि उसे भी दो क्षेत्रों से वोट देने की सुविधा मिलनी चाहिए क्योंकि नेता तों दो जगह से चुनाव लड़ लेते हैं|   गाँव वालों के पास बहुत विचार हैं|

मुझे यह भी बताया गया कि व्यापारियों के समूह में युवावर्ग “आप” के प्रति ज्यादा उत्सुक और खुला हुआ था|

हाँ मुझे भी ऐसा महसूस हुआ|लेकिन वास्तव में किसी व्यापारी को “आप” से डरने की जरुरत नहीं  है|

आपको भारत  की संसदीय प्रतिनिधि  प्रणाली में क्या कमियां लगती हैं?

हमारे लोकतंत्र में कुछ समस्याएं हैं| जैसे लोकसभा सीट के क्षेत्र बहुत बड़े बड़े हैं और एक प्रतिनिधि लगभग 20-25 लाख लोगों का अप्रतिनिधित्व करता है| बड़े लोकसभा क्षेत्रों को बांटने की जरुरत है|  और सांसद और विधायकों के पास वास्तव में कोई शक्ति नही हैं जबकि लोगों की उनसे अपेक्षायें बहुत होती हैं|  शक्तियां ब्यूरोक्रेट्स को दी गई हैं जो कि जनता के प्रति जिम्मेदार नहीं हैं| उन्हें मुख्या धारा में लाये जाने की जरुरत है| (गवर्नेंस तंत्र विकसित करने की जरुरत है)

आपकी पंजाब यात्रा कैसी थी?

बहुत अच्छी, देवीय, बहुत ही अच्छी| मुझे इतने बढ़िया रेस्पोंस की अपेक्षा नहीं थी| मैंने इससे पहले इतनी बड़ी संख्या में लोगों को सड़कों पर आते हुए नहीं देखा|  हमें पंजाब में अच्छा प्रदर्शन करना चाहिए|

AK nominationतो लोकसभा चुनाव में कितनी सीटें “आप” को मिल जायेंगीं?

(हँसते हुए) आपको सच बताऊँ तो मुझे इन सब बातों की चिंता नहीं है, कभी नहीं रही| मेरा मानना रहा है कि – कर्म करते रहो ईश्वर अपने आप फल देगा|

“आप” की क्या भूमिका संसद में रहेगी?

(हँसते हुए) अगर हमें बहुमत मिलता है तो हम सरकार चलायेंगे…

अरे बहुमत नहीं…

अन्यथा विपक्ष में बैठेंगे|

किसी के साथ गठबंधन नहीं?

नहीं!

वाराणसी में 12 मई को चुनाव के बाद आपकी क्या योजना है?

मैं जयपुर जाउंगा विपस्सना करने| मतगणना वाले दिन भी मैं ध्यान में रहूंगा| मैं वहाँ  20 मई तक रहूंगा|

अगर “आप” चौंकाने वाले परिणाम लेकर आती है और आपकी जरुरत हो सरकार बनाने की प्रक्रिया में?

और लोग निर्णय लेंगें| पार्टी सिर्फ अरविंद केजरीवाल तों है नहीं|

क्या आप हरियाणा और बिहार में विधानसभा चुनाव लड़ेंगे?

हम लोग लोकसभा चुनाव के नाद तैयारी शुरू कर देंगे|

आपको फंड कहाँ से मिलेगा?

जनता  के पास से फंड आएगा| यह उनका चुनाव है| 

By Ajaz Ashraf
मूल साक्षात्कार अंग्रेजी में – Arvind Kejriwal interview

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One Comment to “अरविंद केजरीवाल : हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण के शातिराना खेल का हिस्सा है मीडिया”

  1. जब अन्ना आंदोलन व दिल्ली के चुनाव में मीडिया केजरीवाल को हीरो बनाये हुए था तब अरविंद को मीडिया का शातिराना अंदाज नज़र नहीं आया? आज जब मीडिया उनकी गलतियों पर अंगुली उठाता है अन्य लोगों को भी कवरेज देता है तो उनहें वह शातिराना लगने लगा है.असल में केजरीवाल को मीडिया कवरेज में बने रहने का चस्का लग गया है वह यह अपना हक़ समझने लगे हैं की वे जो भी कहें उसका मीडिआ खूब प्रचार करें उनहें खुद को एक बड़ा व एकमात्र समझदार सामाजिक परिवर्तक समझने की भी ग़लतफ़हमी हो गयी है जो लोकतंत्र में किसी भी नेता के लिए घातक बन जाती है.इतिहास गवाह है ऐसा पहले भी हुआ है आगे भी होता रहेगा.

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