अरविंद केजरीवाल का मूल्याँकन सीटों से नहीं (रवीश कुमार – NDTV)

AKej@homeहार जायें या हवा हो जायें या जीत जायें । इन तीनों स्थितियों को छोड़ दें तो अरविंद केजरीवाल ने राजनीति को बदलने का साहसिक प्रयास तो किया ही । हममें से कई राजनीतिक व्यवस्था को लेकर मलाल करते रहते हैं लेकिन अरविंद ने कुछ कर के देखने का प्रयास किया । कुछ हज़ार लोगों को प्रेरित कर दिया कि राजनीति को बदलने की पहली शर्त होती है इरादे की ईमानदारी । अरविंद ने जमकर चुनाव लड़ा । उनका साथ देने के लिए कई लोग विदेश से आए और जो नहीं आ पाये वो इस बदलाव पर नज़रें गड़ाए रहें । आज सुबह जब मैं फ़ेसबुक पर स्टेटस लिख रहा था तब अमरीका से किन्हीं कृति का इनबाक्स में मैसेज आया । पहली बार बात हो रही थी । कृति ने कहा कि वे जाग रही हैं । इम्तहान की तरह दिल धड़क रहा है । ऐसे कई लोगों के संपर्क में मैं भी आया ।

अरविंद ने बड़ी संख्या में युवाओं को राजनीति से उन पैमानों पर उम्मीद करने का सपना दिखाया जो शायद पुराने स्थापित दलों में संभव नहीं है । ये राजनीतिक तत्व कांग्रेस बीजेपी में भी जाकर अच्छा ही करेंगे । कांग्रेस और बीजेपी को भी आगे जाकर समृद्ध करेंगे । कौन नहीं चाहता कि ये दल भी बेहतर हों । मैं कई लोगों को जानता हूँ जो अच्छे हैं और इन दो दलों में रहते हुए भी अच्छी राजनीति करते हैं । ज़रूरी है कि आप राजनीति में जायें । राजनीति में उच्चतम नैतिकता कभी नहीं हो सकती है मगर अच्छे नेता ज़रूर हो सकते हैं ।
एक्ज़िट पोल में आम आदमी पार्टी को सीटें मिल रहीं हैं । लेकिन आम आदमी पार्टी चुनाव के बाद ख़त्म भी हो गई तब भी समाज का यह नया राजनीतिक संस्करण राजनीति को जीवंत बनाए रखेगा । क्या कांग्रेस बीजेपी चुनाव हार कर समाप्त हो जाती है ? नहीं । वो बदल कर सुधर कर वापस आ जाती है । अरविंद से पहले भी कई लोगों ने ऐसा प्रयास किया । जेपी भी हार गए थे । बाद में कुछ आई आई टी के छात्र तो कुछ सेवानिवृत्त के बाद जवान हुए दीवानों ने भी किया है । हममें से कइयों को इसी दिल्ली में वोट देने के लिए घर से निकलने के बारे में सोचना पड़ता है लेकिन अरविंद की टोली ने सोचने से आगे जाकर किया है ।  वैसे दिल्ली इस बार निकली है । जमकर वोट दिया है सबने ।
राजनीति में उतर कर आप राजनीतिक हो ही जाते हैं । अरविंद बार बार दावा करते हैं कि वे नहीं है । शायद तभी मतदान से पहले कह देते हैं कि किसी को भी वोट दीजिये मगर वोट दीजिये । तब भी मानता हूँ कि अरविंद नेता हो गए हैं । आज के दिन बीजेपी और कांग्रेस के विज्ञापन दो बड़े अंग्रेज़ी दैनिक में आए हैं आम आदमी पार्टी का कोई विज्ञापन नहीं आया है । अरविंद के कई क़दमों की आलोचना भी हुई, शक भी हुए और सवाल भी उठे । उनके नेतृत्व की शैली पर सवाल उठे । यही तो राजनीति का इम्तहान है । आपको मुफ़्त में सहानुभूति नहीं मिलती है । कांग्रेस बीजेपी से अलग जाकर एक नया प्रयास करना तब जब लग रहा था या ऐसा कहा जा रहा था कि अरविंद लोकपाल के बहाने बीजेपी के इशारे पर हैं तो कभी दस जनपथ के इशारे पर मनमोहन सिंह को निशाना बना रहे हैं । मगर अरविंद ने अलग रास्ता चुना । जहाँ हार उनके ख़त्म होने का एलान करेगी या मज़ाक़ का पात्र बना देगी मगर अरविंद की जीत हार की जीत होगी । वो जितना जीतेंगे उनकी जीत दुगनी मानी जायेगी । उन्होंने प्रयास तो किया । कई लोग बार बार पूछते रहे कि बंदा ईमानदार तो है । यही लोग लोक सभा में भी इसी सख़्ती से सवाल करेंगे इस पर शक करने की कोई वजह नहीं है । अरविंद ने उन मतदाताओं को भी एक छोटा सा मैदान दिया जो कांग्रेस बीजेपी के बीच करवट बदल बदल कर थक गए थे ।
इसलिए मेरी नज़र में अरविंद का मूल्याँकन सीटों की संख्या से नहीं होना चाहिए । तब भी नहीं जब अरविंद की पार्टी धूल में मिल जाएगी और तब भी नहीं जब अरविंद की पार्टी आँधी बन जाएगी । इस बंदे ने दो दलों से लोहा लिया और राजनीति में कुछ नए सवाल उठा दिये जो कई सालों से उठने बंद हो गए थे । राजनीति में एक साल कम वक्त होता है मगर जब कोई नेता बन जाए तो उसे दूर से परखना चाहिए । अरविंद को हरा कर न कांग्रेस जीतेगी न बीजेपी । तब आप भी दबी ज़ुबान में कहेंगे कि राजनीति में सिर्फ ईमानदार होना काफी नहीं है । यही आपकी हार होगी ।
जनता के लिए ईमानदारी के कई पैमाने होते हैं ।
इस दिल्ली में जमकर शराब बंट गई मगर सुपर पावर इंडिया की चाहत रखने वाले मिडिल क्लास ने उफ्फ तक नहीं की । न नमो फ़ैन्स ने और न राहुल फ़ैन्स ने । क्या यह संकेत काफी नहीं है कि अरविंद की जीत का इंतज़ार कौन कर रहा है । हार का इंतज़ार करने वाले कौन लोग हैं ? वो जो जश्न मनाना चाहते हैं कि राजनीति तो ऐसे ही रहेगी । औकात है तो ट्राई कर लो ।
कम से कम अरविंद ने ट्राई तो किया ।
शाबाश अरविंद ।
यह शाबाशी परमानेंट नहीं है । अभी तक किए गए प्रयासों के लिए है । अच्छा किया आज मतदान के बाद अरविंद विपासना के लिए चले गए । मन के साथ रहेंगे तो मन का साथ देंगे।
साभार कस्बा
Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: