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मार्च 15, 2014

छिल रहे हैं मेरे सपनो के नर्म अहसास

मत कहो तुम कुछ mirrorwoman-001

सुन तो हम तब भी लेंगे

रोक लो खुद को चाहे

कितना ही,

आँखे बोल देंगी तुम्हारी

होंठ मेरे सब खुद-ब-खुद  सुन लेंगे

आओ लो संभालो अपनी अमानत

बहुत दिनों से तुम्हारे लिए इसे

खाद पानी दे के बड़ा किया है

अब इसका क़द मुझसे ऊंचा हो रहा है

तुम्ही हो जो रख सकती हो इसे अपने साए में

बहुत बेचैन रहता है तुम्हारी नर्म बाहों को

संभालो कि इस से छिल रहे हैं

मेरे अपने ही सपनो के नर्म अहसास…

तुम्हारे प्रति मेरे प्यार की साँसे

उखड़ जाएँ

उससे पहले आ जाओ…

Rajnish sign

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