तुम जो फ़ांसी चढ़ने से बच गये हो…(भगत सिंह)

bhagatभगत सिंह का पत्र——- बटुकेश्वर दत्त के नाम

प्रिय भाई,

मुझे दंड सुना दिया गया है और फ़ांसी का आदेश हुआ है। इन कोठरियों में मेरे अतिरिक्त फ़ांसी की प्रतीक्षा करने वाले बहुत से अपराधी हैं। ये लोग यही प्रार्थना कर रहे हैं कि किसी तरह फ़ांसी से बच जाएं, परंतु उनके बीच शायद मैं ही एक ऐसा आदमी हूं जो बेताबी से उस दिन की प्रतीक्षा कर रहा हूं जब मुझे अपने आदर्श के लिए फ़ांसी के फ़ंदे पर झूलने का सौभाग्य प्राप्त होगा।

मैं खुशी के साथ फ़ांसी के तख्ते पर चढ़कर दुनिया को यह दिखा दूंगा कि क्रांतिकारी अपने आदर्शों के लिए कितनी वीरता से बलिदान दे सकते हैं।

मुझे फ़ांसी का दंड मिला है, किन्तु तुम्हे आजीवन कारावास का दंड मिला है। तुम जीवित रहोगे और तुम्हे जीवित रह्कर दुनिया को यह दिखाना है कि क्रांतिकारी अपने आदर्शों के लिए केवल मर ही नहीं सकते, बल्कि जीवित रह कर हर मुसीबत का मुकाबला भी कर सकते हैं। मृत्यु सांसारिक कठिनाईयों से मुक्ति प्राप्त करने का साधन भी नहीं बननी चाहिये, बल्कि जो क्रान्तिकारी संयोगवश फ़ांसी के फ़ंदे से बच गए हैं, उन्हे जीवित रह्कर दुनिया को यह दिखा देना चाहिए कि वे न केवल अपने आदर्शों के लिए फ़ांसी चढ़ सकते हैं, बल्कि जेलों की अंधकारपूर्ण छोटी कोठरियों में घुल-घुलकर निकृष्टतम दर्जे के अत्याचारों को सहन भी कर सकते हैं।

तुम्हारा
भगतसिंह

सेन्ट्रल जेल, लाहौर
अक्टूबर ,१९३०

सरदार भगतसिंह के राजनैतिक दस्तावेज”, संपादक चमनलाल व प्रकाशक नेशनल बुक ट्रस्ट, इन्डिया

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3 टिप्पणियाँ to “तुम जो फ़ांसी चढ़ने से बच गये हो…(भगत सिंह)”

  1. भगत सिंह जी आप ने तो देश के लिए शहादत दे दी पर आज़ादी बाद मुल्क ऐसे लोगों के हाथों आ गया जो इस शहादत का मूल्य समझे ही नहीं वे मुल्क को लूटने में ही लगे है शायद भगत सिंह ने ऐसे देश की कल्पना ही नहीं की होगी ये नेता तो आज सब कुछ भूल गए है

  2. hme e khud ko pahle badalna hoga netao ki sankhya hm aam logo se km h aur hm etne se logo ko apne pr havi kaise hone de rahe h aj hm e to hr mod pe jhuth bolte h jahaa pe 3 panch rupaye de ke hmara kam jaldi bn rha ho wahaa pe de dete h aur agar ek adaaa koi ese krne me saksham na b ho to wo pis jata h kyu k hm apno ka sath nai dete to kaise in sahido k sapno ka bharat sakar hoga. apna ap ko sbhi badal denge to sab kuch khud e badal jayega

    kabir daas ka wo dohaa h na
    Bura Jo Dekhan Main Chala, Bura Naa Milya Koye
    Jo Munn Khoja Apnaa, To Mujhse Bura Naa Koye

    is liye hme apne mn me burai dhundni hogi tabi to badlaw ayega

  3. भगत सिंह जी आप ने तो देश के लिए
    शहादत दे दी पर आज़ादी बाद मुल्क
    ऐसे लोगों के हाथों आ गया जो इस
    शहादत का मूल्य समझे ही नहीं वे
    मुल्क को लूटने में ही लगे है
    jai hind

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