Archive for जनवरी 30th, 2014

जनवरी 30, 2014

दूर नज़र के छुपा बैठा है

मन की भटकन Dk-001

खोज में किसकी

पता नहीं क्यूँ

चैन नहीं है

क्या पाना है

क्या खोया है

दूर नज़र के पार देश में

कोई छुप के जा बैठा है

कैसे उसको पास बुलाये

पंख लगा कोई कैसे जाए

मन के साथ में तन भी तो है

तन के साथ रहे न पल भर

मन बस उसके संग हो जाए

Rajnish sign

जनवरी 30, 2014

मीठे गीत जीवन के

कितना छोटा है जीवन

यह तो मीठे गीतों

और

आराम से बहती हवा

का आनंद लेने के लिए है

पर हरेक कहता है

जीवन को शांतिपूर्वक जीना संभव नहीं ,

और हरेक को मुट्ठी तान कर

जीवन में  कठिन, और जटिल रास्तों से जूझना चाहिए |

लेकिन मुझे जो दिखाई देता है

जहां तक मेरी समझ जाती है

जहां तक दृष्टि देख सकती है

जहां तक मेरे हाथ पहुँच सकते हैं

जहां तक मैं चल सकता हूँ

– गीत रहेंगे और हवा के झोंके भी बहेंगे

मुस्कुराहट तुम बने रहना

तमाम बाधाओं और शत्रुओं

से घिरे होने के बावजूद

मैं इन् सबको साथ लेकर

चलता रहूँगा

इनसे पार जाने के लिए

Yugalsign1

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