Archive for नवम्बर 25th, 2013

नवम्बर 25, 2013

सीला सुलगता मन

शाम के धुएं सेDk-001

आखें गीली हो गयी हैं

मन की आग

खूब जोरों से भड़क नहीं रही

सीली लकड़ी सी

सुलग भर रही है

तुम्हारी याद का ताप

अगन को ठंडा नहीं होने देता

और –

तुम आओगी,

यह शीतल सी आस

कहीं पास भी नहीं है!

Yugalsign1

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नवम्बर 25, 2013

मेरे सपनो की ताबीर

एक ख़याल पे मुहर धर दीwoman-001

कल रात ने,

मेरी सुबह ओ’ शाम-

बस जैसे तुम्हारा जगना, सोना

तुम्हारी सुबह-

मेरी तमन्नाओं का जगना

तुम्हारी रात-

मेरे ख्वाबों को पर लगना

लेकिन कल

स्याही गहरी हुयी

एक और हकीकत की भी –

न तुम थीं,

न तुम हो,

न तुम होगी,

मेरे लिए

मेरी,

मेरे सपनो की ताबीर कभी…

अक्सर मैं तुम्हारी

बेजारी पढता हूँ…

तुम ढँक नहीं पाती

झल्लाहट,

खिजलाहट…

तुम न चाहो तो भी

लफ्ज़

कोई न कोई

कर ही जाता है

इन्हें बयाँ…

Rajnish sign

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