Archive for नवम्बर 20th, 2013

नवम्बर 20, 2013

लोअर माल रोड

आडू बेचता युवकfruit-001

खूब मोलभाव करता है-

चिथड़े कपडे,

तन मैला,

मेरी आँखों के दर्पण में :

अनरोमांटिक,

सुबह से शाम तक

ठण्डी सी इस सड़क के उजले कोने में|

अब,

उसकी बीवी

पास आ बैठ गई है

सहेजती है आड़ू

लाल-लाल ऊपर

पीली रंगत नीचे|

सड़क पर आवाजाही नहीं है

किसी गिरफ्तारी के विरोध में

बंद है बाजार

सन्नाटा है परसा,

हर ओर,

और उनके बीच भी|

Yugalsign1

नवम्बर 20, 2013

ज़िन्दगी ख्वाब क्यूँ न हुयी…

रात की खुमारी,MB-001
तेरे बदन की खुशबू,
नथुनों में समाती मादक गंध
तेरे होठों से चूती शराब…
तेरे सांचे में ढले बदन की छुअन
रेशम में आग लगी हो जैसे
तराशे हुए जिस्म पे तेरे

फिरते मेरे हाथ
वो लरजना
वो बहकना
वो दहकना
वो पिघलना
हाय वो मिलना

अगर वो ख्वाब था तो इतना कम क्यूँ था
अगर वो ख्वाब था तो ज़िन्दगी ख्वाब क्यूँ न हुयी…

(रजनीश)

%d bloggers like this: