द पिक्चर ऑफ इनर डार्कनेस

बाहर के घुप्प अँधेरे में,shadow-001

झाँकने पर –

कांच की खिड़की के पार

अपना ही प्रतिविम्ब नज़र आया|

वीभत्स, डरावना, कालिख पुता सा-

चौंक कर पलटने का वक्त न था –

सो-

मैंने मुस्कराकर हाथ आगे बढ़ाया,

वह बोला-

ठण्ड है बाहर,

अंदर आ जाऊँ?

अवश सा मैं,

द्वार खोल बैठा-

तब से घुप्प अन्धेरा

मेरे अंदर घर कर गया है-

अब शीशे पर कोई अक्स नहीं उभरता,

बस

एक काली, स्याह आकृति भर!

Yugalsign1

One Comment to “द पिक्चर ऑफ इनर डार्कनेस”

  1. वाह| बेहद चित्रात्मक और संकेतात्मक|

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