Archive for नवम्बर 7th, 2013

नवम्बर 7, 2013

ढूंढोगे तो राम मिलेगा…

सौ मुंह हों औ’ सौ सौ बात ram-001

वहाँ मनुज की क्या औकात

अगर खुदा भी वहाँ आ गया तो

वह भी बदनाम मिलेगा

ढूंढोगे तो राम मिलेगा…

तुम मानो न अजूबा हूँ मैं

अभी अकेला डूबा हूँ मैं

कुछ ही दिनों में इसमें डूबा

हरेक खासोआम मिलेगा

ढूंढोगे तो राम मिलेगा…

तुम मुझको इल्जाम न देना

मेरी बात मान तो लेना

जिस दिन मैं खुद को बेचूंगा

मुंह मांगा हर दाम मिलेगा

ढूंढोगे तो राम मिलेगा…

सच से फिर किसलिए डरूं मैं

लो, यह वादा आज करूँ मैं

जो भी मेरे साथ दिखेगा

दुनिया में सरनाम मिलेगा

ढूंढोगे तो राम मिलेगा…

{कृष्ण बिहारी}

नवम्बर 7, 2013

जली तो तुम भी मेरी याद की तपिश में

कल रात भर fire-001

आग बीनता रहा मैं…

हर करवट पे चटकते जिस्म से

जैसे धुंआ सा उठता रहा

उस दिन देखा था चटकती लकड़ियों से

निकलती नीली-नीली चिंगारियों को

उड़-उड़ मुझ तक आती थीं

कल मुझसे भी निकली आग

लेकिन

शायद तुम तक पहुँची नहीं …

शायद दूरियां…

शायद मजबूरियां…

शायद बेरुखी…

शायद बेहिसी…

शायद बे-ताल्लुकी…

पता नहीं क्या…

पता नहीं क्या-क्या सोचता रहा दिमाग

और पता नहीं क्या-क्या समझाता रहा दिल

दिल जीता…

मैं हारा

दिल कहता है बेचैन तो तुम भी होती हो

चाहे थोडा ही सही…

उदासी मेरी जाती जरुर है तुम तक…

थकी-थकी सी सही…

कुछ कहो न कहो

सामने रहो…

मुझे बा-होश रखो

खुद चाहे बे-होश रहो

जान पाया इन दूरियों की वज़ह से ही

कि इन दूरियों के माने कुछ भी नहीं

तुमको हर दम मैंने देखा है

अपने आस पास यहीं

मेरे जलते बदन के कोयलों को टटोलते

कल रात

हाँ कल रात ही तो…

नहीं पता कब सोया

लेकिन तुम्हे शिकायत करते पाया आज

 उँगलियों के जलने की

(रजनीश)

 

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