कम्युनिज्म : ‘सआदत हसन मंटो’ की दृष्टि में

वह अपने घर का तमाम जरूरी सामान एक ट्रक में लदवाकर दूसरे शहर जा रहा था कि रास्ते में लोगों ने उसे रोक लिया|
एक ने ट्रक के सामान पर नज़र डालते हुए कहा,” देखो यार, कितने मजे से अकेला इतना सामान उडाये चला जा रहा है|”
सामान के मालिक ने कहा.”जनाब माल मेरा है|”
दो तीन आदमी हँसे,” हम सब जानते हैं|”
एक आदमी चिल्लाया,” लूट लो! यह अमीर आदमी है, ट्रक लेकर चोरियां करता है|”

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One Comment to “कम्युनिज्म : ‘सआदत हसन मंटो’ की दृष्टि में”

  1. मंटो की एक अच्छी रचना है।

    मैँ आपको एक विशेष लघुकथा “गाँधी और भगत सिँह” पढने के लिए आमंत्रित करता हूँ।
    http://www.yuvaam.blogspot.com

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