अमिताभ बच्चन का हिंदी प्रेम : असली नकली?

Amitabhलगता है भारत में लोगों के जीवन में वाकई बोरियत आ गयी है या कि भीषण गर्मी का असर है| जनता का एक तबका इसी बात पर न्यौछावर हुआ जा रहा है कि श्री अमिताभ बच्चन ने कान फेस्टीवल में हिंदी में अपना भाषण/संबोधन बोला/पढ़ा? अमिताभ बच्चन इलाहाबद में जन्मे, पिता उनके हिंदी के लेखक, और वे पढ़ाते भले ही अंगरेजी रहे हों, पर जीवन में सम्मान और उच्च पद उन्हें हिंदी की बदौलत ही प्राप्त हुए| प्रो. ड़ा हरिवंश राय बच्चन के पास इतना धन तो था हे कि वे अपने दो बेटों को शेरवुड जैसे पब्लिक स्कूल में पढवा पाए और उन्हें अंग्रेजी में भी पारंगत करवा दिया| अमिताभ को भी सारी धन-संपदा, मान- सम्मान हिंदी फिल्मों में काम करने से ही प्राप्त हुआ है पर वह वक्त बहुत पुराना नहीं हुआ है जब इस बात की चर्चा की जाती थी कि अमिताभ अंग्रेजी बहुत अच्छी बोलते हैं| यह समझ से परे है कि अमिताभ के कान में हिंदी बोलने पर इतना बवाल क्यों? अमिताभ ऐसे हिंदी प्रेमी भे नहीं हैं| अगर होते तो अस्सी के दशक में जब उन्होंने बिलियर्ड चैम्पियनशिप में (शायद गीत सेठी जिस साल चैम्पियन बने उस साल) हिंदी में बोलते, या जब कि बम्बई में उन्हें सीए एसोसियेशन ने बुलाया मुख्य अतिथि के तौर पर तब वे हिंदी में बोलते (बोफोर्स तब चल ही रहा था, और एक सज्जन की टिप्पणी छपी थी कि- अंग्रेजी में कितना जबरदस्त बोलता है यह आदमी, बेचारे को गलत फंसा दिया)| अस्सी और नब्बे के दशक के ज्यादातर पुराने कार्यक्रमों में अमिताभ अंग्रेजी में ही बोलते दिखाई देंगे| क्यों? क्या इसलिए कि हिंदी फिल्मों के ज्यादातर कलाकार हिंदी में ही बोलते थे उस समय और अमिताभ को अलग दिखना था, एक अलग कुलीन छवि बनाए रखनी थी? नब्बे के दशक में जब अमिताभ ने फिल्मों से अस्थायी अवकाश ले लिया था तब पत्र-पत्रिकाओं में उनके एक अंग्रेजी साक्षात्कार के बड़ी चर्चा थी क्योंकि उसमें उन्होंने अंग्रेजी डिक्शनरी में उपस्थित (उस वक्त) सबसे बड़ा शब्द- Floccinaucinihilipilification, प्रयुक्त किया था| उस वक्त अमिताभ के चर्चे ऐसे अभिनेता के रूप में ही थे जो हिंदी फिल्मों का बड़ा सितारा है और जो बहुत अच्छी अंग्रेजी बोलता है|
नब्बे के दशक में जब हिंदी भाषी अभिनेताओं के अंग्रेजीदां पुत्र नायक बन हिंदी फिल्मों पर छ गये और पिछले बीस-पच्चीस सालों में ज्यादातर अभिनेता और अभिनेत्रियां अंग्रेजी ही बोलने, लिखने और पढ़ने वाले हो गये तो अमिताभ के हिंदी की चर्चा भी जोर पकड़ने लगी| क्या अब हिंदी पर उनका इतना जोर व्यवसायिक कारणों से नहीं है? अमिताभ के सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिंदी में बोलने के ग्राफ का संबंध उनके जीवन में आर्थिक पतन (ऐ.बी.सी.एल के डूबने) और फिर के.बी.सी के कारण उत्थान से भी जोड़ा जा सकता है| के.बी.सी में जन-साधारण से हिंदी के कारण बार्तालाप से बढ़ी उनकी प्रसिद्धि का बहुत बड़ा हाथ है उनके हिंदी प्रेम के पीछे|

अगर वे इतने हिंदी प्रेमी होते तो उनके बेटे – अभिषेक और बेटी-श्वेता, हिंदी में तंग हाथ वाले न होते| अमिताभ के हिंदी प्रेम को हार पहनाकर उस दिन सम्मान देना उचित न होगा जिस दिन अभिषेक बच्चन बिना तैयारी के मौके पर ही धाराप्रवाह सही हिंदी में पांच मिनट बोल लें? क्या अमिताभ की जिम्मेवारी इतना कहने भर से खत्म हो जाती है कि वे तो अभिषेक से खूब कहते हैं कि हिंदी पर पकड़ मजबूत बनाओ – (कई सालों से अभिषेक कोशिश भी कर रहे हैं, और तरक्की भी की है उन्होंने)| पर इसके मूल में भी यही बात है कि अभिषेक को हिंदी फिल्मों में काम करके जीविकोपार्जन करना है इसलिए अमिताभ को इस बात कि चिंता है कि अभिषेक को सही हिंदी सीखनी चाहिए जिससे वह अपने साथी कलाकारों से आगे रह सके| अगर अमिताभ को हिंदी की चिंता होती तो वे बचपन से इस बात पर ध्यान देते (जैसे उनके पिता ने उन पर दिया होगा)| अभिनय को क्यों इतना तूल दिया जा रहा है? ज्यादातर दुनिया के सभी अभिनेता वैश्विक आयोजनों में अपनी भाषा में ही बोलते हैं| अमिताभ ने हिंदी में बोल दिया तो क्या गजब कर दिया| क्या हिन्दुस्तानी वेशभूषा भे उन्होंने पहनी अपना भाषण देते हुए?

वास्तव में पहले उन्होंने नफीस अंग्रेजी में अपनी बात कही और फिर हिन्दुस्तानियों के लिए वही बात हिंदी में भी बोली| या सारा मामला पी.आर गतिविधियों का है?


 

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