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मार्च 17, 2013

तुम्हारी हँसी … Pablo Neruda

रोटी मुझसे ले लो,

अगर तुम चाहो तो,

हवा दूर ले जाओ,

लेकिन मुझसे

अपनी हँसी दूर मत ले जाना|

दूर मत ले जाना,

वो गुलाब,

वो लंबा, नुकीला फूल, जो तुमने तोड़ा है,

वो खुशी, जो जल के झरने की तरह

एकदम से फूट पड़ता है

वो चांदी जैसी चमक

जो अनायास जगमगा उठती है

तुम्हारे अंदर|

मेरा संघर्ष कठिन है,

और मैं वापस आता हूँ,

थकी आँखों के साथ,

और कभी-कभी बदलाव न ला पाने की निराशा के साथ

लेकिन जब तुम्हारी हँसी

देखता हूँ तो

यह मुझे अहसास कराती है

कि अभी आकाश की ऊँचाइया

बाकी हैं छू पाने को

तुम्हारी हँसी खोल देती है

जीवन में आशा के सब द्वार|

मेरे प्रिय!

जब तुम हंसती हो तो

जीवन के सबसे अंधकार भरे समय में

भी मुझे संबल मिलता है,

और यदि कभी अचानक तुम

देखो कि मेरा रक्त सडकों

को रंग रहा है,

तो तुम हंसना,

क्योंकि तुम्हारी हँसी

मुझे लड़ने के लिए वही ताजगी देगी

जैसे शस्त्रहीन हो चुके किसी सैनिक

को अचानक से एक नयी धारदार तलवार

मिल जाए|

पतझड़ में

तुम्हारी हँसी

समुद्र से लगातार आती झागदार लहरों को

ऊँचा उठा देती है,

और बसंत में बढ़ा देती है प्यार को,

मुझे तुम्हारी हँसी का इतंजार ऐसे ही रहता है

जैसे कि मैं इंतजार करता हूँ

खिलने का अपने पसंदीदा फूलों के,

नीले फूल,

यादों में बसे मेरे देश के गुलाब|

तुम हंसना रात पर,

दिन पर,

या चाँद पर,

हंसना

इस द्वीप की टेढी-मेढ़ी गलियों पर,

या इस अनगढ़ लड़के पर जो तुमसे प्रेम करता है,

पर जब में अपनी आँखें खोलूं

और बंद करूँ,

जब मैं जाऊं,

जब मैं वापस आऊँ,

मुझे भले ही

रोटी, हवा, प्रकाश,

बसंत,

मत देना,

पर कभी भी मुझे अपनी

हँसी देने से इनकार मत करना,

क्योंकि तुम्हारी हँसी के

लिए मैं मर सकता हूँ|

(Your LaughterPablo Neruda)

हिंदी अनुवाद – …[राकेश]

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