गीत गुनगुनाने दो

 

सपने हैं शीशे से साफ़ करो इनको

सपनों की गलती क्या माफ करो इनको |

मन में कुछ आने दो कुछ मन से आने दो

गीत गुनगुनाने दो …|

मोहक हर दर्पण था मोह गया मन को

आकर्षण बंधन का तोड़ गया तन को |

सुख को तुम माने दो दुख में कुछ गाने दो

गीत गुनगुनादे दो…|

मन को तो रोक लिया मिलने से उनको

भीतर के जग में अब रोकोगे किनको |

सृष्टि है लुभाने दो दो दृश्य हैं रमाने दो

गीत गुनगुनाने दो…|

दूर जा चुके हैं सब जाना था जिनको

अब किसे पुकारें हम आना है किनको |

अब दिया बुझाने दो दर्द को सुलाने दो

गीत गुनगुनाने दो…|

{कृष्ण बिहारी}

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