श्वेत-श्याम के द्वंद

सफ़ेद और काले रँगों में
ज़न्मों ही से बैर है।

इन्द्रधनुष के घटक अवयवों में
सफ़ेद ही की उलट फेर है
कायनात में जो दिख रहा है,
देखा जा रहा श्वेत की बदौलत है।

फूल-बसंत-धूप-तितली
गुलाबी होंठ-कुंदन से बदन,
असीम शांति-पवित्रता-पाकीजगी
हसीन मंज़र–दिलकश नज़ारे
या फिर हों रोती रुतें
सूखे उड़ते पत्ते–पिंजरों के बेबस पंछी
अंतिम सच की यात्रा के लिए कफ़न
आँखों की तमाम जिंदा रौशनी
सब सफ़ेद की ही दौलत हैं।

जबकि काला रँग
सोच, समझ और बुद्धि को
अन्धकार के फेर में डाल देता है
समस्त तामसिक क्रियाएं जन्माता है
मैले ह्रदयों, कलुषित मस्तिष्कों का चहेता
सदा से दुश्मन है मानवता का।

काले रँग ने सदा फैलाई है
मानवबुद्धि पर जहालत की सियाही
जिसमें डूबती है मानवता सारी
युद्ध-रक्तपात-बलवे-गारतगर्दी
आदमी की आदमी पर बरतरी
मुल्कों, कौमों और नस्लों को
गुलामी की जंजीरों में जकड़े देखा है,
लालच की काली चुडैल की कोख से
घूस–घोटालों और बदनीयती को जन्मते देखा है।

चिरकाल से युद्ध जारी है
भलाई और बुराई के बीच
जिसके प्रतीक ये रँग है काले-उजले
गवाह है समय पुस्तक के फड़फड़ाते पन्ने।

रौशन विचारों से इन्कलाब जागता है
दबे–कुचले-पीड़ितों के लश्कर जब उठ खड़े होते हैं
दुम दबा कर अज्ञान का अन्धकार भागता है
तम कितना ही डरावना हो!
ज़ुल्म ओ सितम काली की रात के बाद
उगता है,
उजला सूरज सुहावना हो!

(रफत आलम)

5 Responses to “श्वेत-श्याम के द्वंद”

  1. Beautiful creation, I love the way you said lighted thoughts revolutionize. Super…

  2. Gr888 explanation of black and white with reference to acchai and burai 🙂

  3. एक सुरक्षित समाज का निर्माण ही हम सब भाईयों की ज़िम्मेदारी है
    बहनों की रक्षा से भी कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

    इसके बाद हम यह कहना चाहेंगे कि भारत त्यौहारों का देश है और हरेक त्यौहार की बुनियाद में आपसी प्यार, सद्भावना और सामाजिक सहयोग की भावना ज़रूर मिलेगी। बाद में लोग अपने पैसे का प्रदर्शन शुरू कर देते हैं तो त्यौहार की असल तालीम और उसका असल जज़्बा दब जाता है और आडंबर प्रधान हो जाता है। इसके बावजूद भी ज्ञानियों की नज़र से हक़ीक़त कभी पोशीदा नहीं हो सकती।
    ब्लॉगिंग के माध्यम से हमारी कोशिश यही होनी चाहिए कि मनोरंजन के साथ साथ हक़ीक़त आम लोगों के सामने भी आती रहे ताकि हरेक समुदाय के अच्छे लोग एक साथ और एक राय हो जाएं उन बातों पर जो सभी के दरम्यान साझा हैं।
    इसी के बल पर हम एक बेहतर समाज बना सकते हैं और इसके लिए हमें किसी से कोई भी युद्ध नहीं करना है। आज भारत हो या विश्व, उसकी बेहतरी किसी युद्ध में नहीं है बल्कि बौद्धिक रूप से जागरूक होने में है।
    हमारी शांति, हमारा विकास और हमारी सुरक्षा आपस में एक दूसरे पर शक करने में नहीं है बल्कि एक दूसरे पर विश्वास करने में है।
    राखी का त्यौहार भाई के प्रति बहन के इसी विश्वास को दर्शाता है।
    भाई को भी अपनी बहन पर विश्वास होता है कि वह भी अपने भाई के विश्वास को भंग करने वाला कोई काम नहीं करेगी।
    यह विश्वास ही हमारी पूंजी है।
    यही विश्वास इंसान को इंसान से और इंसान को ख़ुदा से, ईश्वर से जोड़ता है।
    जो तोड़ता है वह शैतान है। यही उसकी पहचान है। त्यौहारों के रूप को विकृत करना भी इसी का काम है। शैतान दिमाग़ लोग त्यौहारों को आडंबर में इसीलिए बदल देते हैं ताकि सभी लोग आपस में ढंग से जुड़ न पाएं क्योंकि जिस दिन ऐसा हो जाएगा, उसी दिन ज़मीन से शैतानियत का राज ख़त्म हो जाएगा।
    इसी शैतान से बहनों को ख़तरा होता है और ये राक्षस और शैतान अपने विचार और कर्म से होते हैं लेकिन शक्ल-सूरत से इंसान ही होते हैं।
    राखी का त्यौहार हमें याद दिलाता है कि हमारे दरम्यान ऐसे शैतान भी मौजूद हैं जिनसे हमारी बहनों की मर्यादा को ख़तरा है।
    बहनों के लिए एक सुरक्षित समाज का निर्माण ही हम सब भाईयों की असल ज़िम्मेदारी है, हम सभी भाईयों की, हम चाहे किसी भी वर्ग से क्यों न हों ?
    हुमायूं और रानी कर्मावती का क़िस्सा हमें यही याद दिलाता है।

    रक्षाबंधन के पर्व पर बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं…

    देखिये
    हुमायूं और रानी कर्मावती का क़िस्सा और राखी का मर्म

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