फाइबर : अच्छे पाचन-तंत्र की युक्त्ति

आंतों को स्वस्थ रखने और कैंसर जैसी प्राण-घातक बीमारी से बचाने की विधि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के लिये भी चिंतन का विषय है। मनुष्य इतना ज्यादा जंक फूड और मीट आदि खाता है कि उसकी आंतों की स्वस्थता एक बड़ा मसला बन जाती है।
आयुर्वेद की भांति आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी अब Animal Food के बजाय Plant Food को तरजीह देने लगा है। खायी हुयी कोई भी खाद्य-सामग्री आंतों से गुजर कर जाती है और खाद्य-सामग्री में उपस्थित अघुलनशील फाइबर roto-rooter की तरह से कार्य करता हुआ पचने से बचे हुये बेकार अवशेषों और शरीर के लिये जहरीले तत्वों को शरीर से बाहर करने में मुख्य भूमिका निभाता है। खाद्य-सामग्री में फाइबर की मात्रा पर्याप्त न होने से कब्ज हो सकता है और अगर किसी को 24 घंटे तक एक बार भी हाजत नहीं होती तो उसे अपनी भोजन सामग्री में फाइबर की कम मात्रा के बारे में चिंतन करना चाहिये और इस मात्रा को कई गुना बढ़ा देना चाहिये।

कई दशकों पहले तक भारत में बहुत ज्यादा चोकर डालकर रोटी सेकी जाती थी जबकि उस समय के लोग शारीरिक श्रम आज के भारतीयों के मुकाबले ज्यादा करते थे, पैदल ज्यादा चलते थे। आज के भारतीय का जीवन आरामतलब हो गया है और गेहूँ का आटा चोकर रहित होकर मैदा बन गया है।

आज के मशीनी सहायता से चलने वाले दौर में ज्यादा अघुलनशील फाइबर भोजन का आवश्यक अंग होना चाहिये और मनुष्य को ऐसे फाइबर को भोजन के साथ ग्रहण करके बाद में पूरे दिन काफी मात्रा में पानी पीना चाहिये।

घुलनशील फाइबर पाचन-तंत्र से रक्त्त में मिश्रित होकर arteries और veins की दीवारों से cholesterol, fats और plaque को हटाता है जिससे कि ब्लड-प्रैशर और दिल की बीमारी से बचाव होता है।

मीट, मछली, अंडों, पोल्ट्री और डेरी पदार्थों जैसी खाद्य-सामग्रियों को खाने से यथासंभव बचना चाहिये और अगर ऐसा न हो सके तो इनकी मात्रा धीरे-धीरे काफी कम कर देनी चाहिये।

फलों, सब्जियों, अनाज, सीडस, बीन्स, और मेवों में फाइबर होता है अतः इनका अधिकाधिक प्रयोग करना चाहिये और ये खाद्य-पदार्थ फाइबर-सप्लीमेंट्स से हर तरह से श्रेष्ठ विकल्प हैं। इनमें विटामिन्स और मिनरल्स भी ज्यादा होते हैं जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायता करते हैं।

रेड मीट (पोर्क, बीफ, बकरा, लैम्ब) और प्रोसेस्ड मीट (हैम, सलामी, हॉट डॉग, एवम सौसेसेज़ आदि) को एकदम तिलांजलि देनी चाहिये। शोध बताते हैं कि इन्हे खाने से आंतों के कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है।

अच्छे पाचन-तंत्र को बनाये रखने के लिये नियमित रुप से व्यायाम या शारीरिक श्रम आवश्यक है। सारे समय का आरामतलब जीवन और अच्छा पाचन-तंत्र नदी के दो किनारों के समान हैं जो मुश्किल से ही मिल सकते हैं।

(चिकित्सा विज्ञान और खाद्य-सामग्री  संबंधी लेखों में दी जानकारी पर आधारित)

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