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जुलाई 23, 2011

स्वास्थ्य : ब्लड टैस्टस -1

जिस तरह से भारत में थल, जल और वायु के प्रदुषणों ने स्थायी घर बना लिया है और वातावरण को प्रदुषित करके जन समूह को अपनी चपेट में लेने का कार्य आरम्भ कर दिया है, उससे बिल्कुल स्वस्थ रहना एक चुनौती बन गया है। ऐसे माहौल में करेले पर नीम चढ़े की कहावत को चिरतार्थ कर रहे हैं बहुत सारे लोभी व्यापारी, जो मौत के सौदागर बनकर खाद्य-पदार्थों में मिलावट कर रहे हैं। यूरिया केवल खेत में ही नहीं पड़ता वरन यह दूध और मावे की शोभा भी बढ़ाता है भारत में। एक से बढ़कर एक गम्भीर बीमारियाँ भारतीयों को अपनी चपेट में ले रही हैं। ऐसे प्रदुषित माहौल में हरेक व्यक्त्ति के सामने अपने को स्वस्थ बनाये रखने की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। जीविकोपार्जन के लिये संघर्षपूर्ण जीवन जी रहे भारतीयों के लिये स्वास्थ्य का प्रश्न बहुत बड़ा है। बहुत सारी बीमारियाँ तभी सामने आती हैं जब वे विकसित अवस्था में पहुँच चुकी होती हैं। ऊपर से स्वस्थ दिखायी दे रहे व्यक्त्ति भी बीमार हो सकते हैं या गम्भीर बीमारी का शिकार हो सकते हैं। जीवन में स्वास्थ्य को बनाये रखने के लिये बहुत जरुरी हो गया है कि खान-पान, व्यायाम और संतुलित जीवन शैली अपनाने के अलावा साल भर में एक बार हरेक को शरीर की पूरी मेडिकल जाँच करवा लेनी चाहिये।

गांव-देहात और छोटी जगहों पर लोग आर.एम.पी या अन्य ऐसे चिकित्सकों के रहमोकरम पर रहते हैं जिन्हे चिकित्सा विज्ञान का बहुत ज्ञान नहीं होता और इसीलिये तात्कालिक लाभ लेकर व्यक्त्ति गम्भीर बिमारियों की तरफ से मुँह मोड़ लेता है और जब तक चेतता है तब तक बीमारी गम्भीर अवस्था में पहुँच चुकी होती है।

कुछ ब्लड टैस्टस ऐसे होते हैं जो शरीर में ऐसी बीमारियों के आगमन की सूचना दे देते हैं जो शरीर का दरवाजा बस खटखटा ही रही होती हैं। चिकित्सा विज्ञान निरंतर तरक्की कर रहा है और बहुत सी गम्भीर बीमारियों से मानव बच सकता है अगर उनके संक्रमण की आरम्भिक अवस्था में ही उनका पता लगा लिया जाये।

अगर सारे ब्लड टैस्ट्स सामान्य आते हैं तो व्यक्त्ति सोच सकता है कि बेकार पैसा और समय नष्ट किये पर यही टैस्ट्स उसे बताते हैं कि हाल-फिलहाल उसका     शरीर सुचारु रुप से कार्य कर रहा है। और अगर दुर्भाग्य से किसी बीमारी के लक्षण नजर आते हैं तो डाक्टर्स के पास पूरा मौका रहता है बीमारी के शिकार होने वाले व्यक्त्ति को बीमारी की प्रारम्भिक अवस्था में ही चिकित्सा प्रदान करने का।

रक्त्त/खून/ब्लड शरीर में सारे सेल्स, न्यूट्रियेन्ट्स और ऑक्सीजन की आपूर्ति करता है और यह शरीर से कार्बन-डाई-ऑक्साइड और अन्य बेकार पदार्थ बाहर निकालता है। दर्जनों तरह के ब्लड टैस्टस हो सकते हैं और कुछ सामान्य परन्तु शरीर के लिहाज से महत्वपूर्ण टैस्टस शरीर के स्वास्थ्य के सम्बंध में महत्वपूर्ण जानकारी दे सकते हैं। वक्त्त पर ही चेताने वाले कुछ टैस्टस नीचे दिये गये हैं।

(1) Fasting Glucose Test : इस टैस्ट से रक्त्त में मौजूद ग्लूकोज की मात्रा पता लगती है। अगर किसी के रक्त्त के नमूने में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ी मिलती है तो वह व्यक्त्ति या तो डायबिटीज का शिकार हो चुका है या होने वाला है।

(2) Lipids Test : इस टैस्ट के द्वारा triglycerides, HDL cholestrol और LDL cholestrol के स्तरों के बारे में पता चलता है। triglycerides, और LDL cholestrol के उच्च स्तर और  HDL cholestrol  के निम्न स्तर से पता चलता है कि व्यक्त्ति या दिल के रोग का शिकार हो चुका है या इस गम्भीर बीमारी की ओर अग्रसर है। चालीस पार कर चुके व्यक्त्तियों के लिये यह टैस्ट बहुत उपयोगी हो सकता है और वे समय पर अपने शरीर में कोलेस्ट्रोल और ट्रैग्लिसराइड्स की मात्रायें जानकर अपनी जीवन शैली में अनुकूल परिवर्तन कर सकते हैं जिससे ह्रदय रोग से बच सकें।

(3) TSH ( Thyroid Stimulating Hormone) : TSH, शरीर में उपस्थित एक रसायन है जो Thyroid gland को प्रेरित करता है Thyroid Hormone उत्पन्न करने के लिये और TSH का असमान्य स्तर जताता है कि Thyroid सही तरीके से अपने लिये निर्धारित कार्य को अंजाम नहीं दे रहा है।

(4) ALT (Alanine Aminotransferase) : ALT लीवर द्वारा बनाये जाने वाले एंजाइम्स में से एक है। और ऐसे किसी भी एंजाइम का बढ़ा हुआ स्तर बताता है कि लीवर सही ढ़ंग से काम नहीं कर रहा है और व्यक्त्ति हेपाटाइटिस और गॉल ब्लेडर से सम्बन्धित रोगों के खतरे का सामना कर रहा है।

(5) CBC (Compelete Blood Count) : CBC न केवल रैड ब्लड सैल्स, व्हाइट ब्लड सैल्स और Platelets (जो कि ब्लड क्लॉटिंग में सहायता करते हैं) के बारे में बता है बल्कि यह एनीमिया, ल्यूकेमिया और रक्त्त न जमने जैसी बीमारियों के बारे में भी बताता है।

अगर परिवार में किसी बीमारी या किन्ही बिमारियों का इतिहास रहा है तो व्यक्त्ति को ज्यादा चौकन्ना रहना चाहिये और सही आयु आने पर सम्बंधित टैस्ट करवा लेने चाहियें। अपने जनरल डाक्टर के मार्गदर्शन में वांछित टैस्ट करवा लेने चाहियें। बीमारी झेलने से बहुत अच्छा वक्त्त पर उसके बारे में जान लेना है। समय पर बरती गयी सतर्कता अवश्य ही इलाज से हर लिहाज से कम खर्चीली होती है।

(चिकित्सा विज्ञान से सम्बंधित लेखों में दी गयी जानकारी पर आधारित)

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जुलाई 23, 2011

कल और आज

अब कोई चरवाहा
बाँसुरी की सुरीली तान पर
प्रेम गीत नहीं गाता
और न ही कोयल कूकती
चिड़िया भी बहुत कम चहचहाती है
घर की चहेती गाय
जिसका दूध कई पीढ़ियों तक
अमृत पान की तरह पिया
उसके  ढूध न देने के बाद
उसे बेकार समझकर
सडकों पर आवारा घूमने
धक्के और डंडे खाने के लिए
बेसहारा छोड़ दिया
अब कोई बच्चा भावुकता भरे स्वर में
माँ को
अम्मा कहकर नहीं पुकारता
अब खेत में स्वस्थ लहलहाती फसलें नहीं
कीटनाशकों को पीने वाली
नशीली फ़सलें उगती हैं
गांव में बड़े बूढ़ों की
अब कोई चौपाल नहीं बैठती
जिसमे कभी
सुख दुःख की बातें हुआ करती थीं
अब तो घर में
बूढ़ों को बोझ समझकर
बच्चे भी उनको धक्के मारते हैं
और कुत्ते की तरह
उनको दूर से रोटी फेंकते हैं
और जवान ये सब
मौन होकर देखतें हैं
ये सब देखकर
मेरे मन में
बस रोज यही सवाल
घूमता है कि
ये इन्सानियत की नयी उन्नति है
या फिर
उपभोक्तावाद की लादी हुयी बेबसी
कुछ भी हो
मेरे पास इस प्रश्न का कोई उत्तर नहीं कि
शरीर ढ़ोया जा रहा है
या फिर
जीवन धीरे धीरे बेमौत मर रहा है
यदि उपभोक्तावाद से बेबस व्यक्ति
केवल शरीर ढ़ो रहा है
और चेतना कहीं
अंधकार के गर्त में खो गयी है
तो यही कहना होगा कि
उपभोक्तावाद की इस भयानक आंधी में
यदि तुम चेतना के
दीपक की लौ अपने घर के अंदर भी
जलाए रख सको तो भी
सत्य तुम्हे इस साहस के लिए भी
दुगुनी हिम्मत, ताकत देगा
और तुम यह हिम्मत कर बैठोगे कि
तुम्हे शरीर ढोने वाली
उधार की ज़िंदगी नहीं
बेशक दिन में कुछ पलों के लिए ही सही
मानवीय संवेदना वाली
कुदरत की दी हुई
स्वाभाविक ज़िंदगी जीनी है!

(अश्विनी रमेश)

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