Archive for जुलाई 16th, 2011

जुलाई 16, 2011

ये कैसा आया जमाना

“जीन्स-कल्चर” की
नवीन जीवनशैली
नकल की है हमने
खुदगर्ज़-ह्रदयहीन पश्चिम से।

“लेपटाप” बन गए हैं
सब सम्बन्ध
घंटों अन्तरंग “चेट”
पल में सब “डीलिट”।

नैतिकता के उसूल
बेलगाम उन्मुक्तता के
विष सागर में डूब कर
‘चिल’ होते दिख रहे हैं।

“स्लीवलैस” “जीरो फ़ीगर” बेटी
तारिका बनने के सपनो में मगन
बेशरमी से “कास्टिंग-काउच” पर
कहीं ‘स्क्रिप्ट” में है गुम
स्क्रीन टेस्ट जो होना है।

“मॉड-जंकी’बेटा
मॉडल बनने की धुन में
लाल–पीली पोशाकें धारे
तमाशा बन कर
‘स्मैक’ में धुंआ हो रहा है।

दो दिवसी शोहरत के पीछे
जवानी मरीचिका हुई जाती है
मूल्यों के इस कत्लेआम में
मीडिया-टीवी के
प्रतिभाखोजी ‘रियलिटी-शो’
भौंडेपन के अखाड़े बने हैं
‘लव मीटरों’ से चैनलों पर
निजी रिश्ते जाँचे जा रहे हैं।

हीर-राँझा का देश
ऐसे संस्कारहीन माहौल में
किया भी क्या जाए
‘मॉम’ बेचारी ‘मम’ है
बेबस है ‘पॉप”
बेचारा ज़िदा ‘डेड’ हो गया है।

(रफत आलम)

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