बाबा रामदेव: आर.एस.एस, भाजपा और कांग्रेस


बतकही 1-
बाबा रामदेव: छाप, तिलक, अनशन सब छीनी रे नेताओं ने पुलिस लगाय के

अशोक – एक बार को मान भी लो कि चलो भाई आर.एस.एस ने बाबा रामदेव के कार्यक्रम का समर्थन किया तो ऐसा करना कहाँ गलत है? क्या आर.एस.एस को अधिकार नहीं है भ्रष्टाचार का विरोध करने का? क्या आर.एस.एस भारत का अंग नहीं है।

हरि – अशोक बाबू हमारा आर.एस.एस की अनुदार विचारधारा से हमेशा से मतभेद रहा है परंतु यहाँ हमें भी आपकी बात के कुछ पहलू अनुचित नहीं लगते। कोई भी संगठन क्यों न हो उसका कैसा भी इतिहास क्यों न र्हा हो, उसकी कैसी भी छवि न रही हो, अगर वह भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष में साथ देना चाहता है तो क्यों उसके इन प्रयासों को गलत नज़र से देखा जाये?

सुनील – यह बात सही है। एक तरफ तो सरकार आतंकवादियों से हथियार छोड़ने, मुख्य धारा में आने और देश के विरोध में अलगाववादी बातें करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही नहीं करती और दूसरी ओर इस आसान से मुद्दे को इतना जटिल बना कर पेश कर रही है। यहाँ असली मुद्दा आर्थिक भ्रष्टाचार का है और अगर आर.एस.एस इस लड़ाई में साथ आना चाहती है तो यह स्वागत योग्य कदम है। भाई या तो आर.एस.एस और अन्य संगठनों को देश निकाला दे दो या फिर उनकी आड़ लेकर भ्रष्टाचार जैसे बहुत महत्वपूर्ण मुद्दे की धार खत्म मत करो।

विजय – लोकतंत्र की बढ़ोत्तरी के लिये भारत के राजनीतिक और सामाजिक रुख में और उदारता और स्पष्टता लाने की जरुरत है। हर मुद्दे को अलग-अलग ढ़ंग से देखे जाने की जरुरत है। अभी अगर आर्थिक मुद्दा हल हो जाये तो अगला मुद्दा नैतिकता का होगा। और उस मुद्दे पर सभी राजनीतिक और सामाजिक संगठन कमजोर नज़र आते हैं। वहाँ सभी दलों और संगठनों में बहुत ज्यादा सुधार की आवश्यकता है।

हरि- मुझे तो ऐसा लगता है कि अन्ना हज़ारे के अनशन के बाद से जैसा माहौल देश में बना था उसमें ज्यादातर नेता, चाहे वे किसी भी दल के क्यों न हों, अपनी साख खो चुके थे और घायल होकर वे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वालों के पीछे हाथ धोकर पड़ गये हैं। कांग्रेस को खुश होना चाहिये कि आर.एस.एस भ्रष्टाचार जैसे एक मुद्दे पर मुख्य धारा से जुड़ना चाहती है और यह ऐसा मुद्दा है जिसने पूरे देश के और इसके सभी वर्गों के लोगों के विकास के काम को बाधित किया है।

अशोक – अजी कांग्रेस के राज में इतना भ्रष्टाचार पनपा है। उसे तो घबराहट होगी ही।

सुनील – अशोक जी, यह एकतरफा सोच है। भ्रष्टाचार तो हरेक सरकार के काल में जम कर पनपा है। भाजपा के काल में भी कम नहीं था भ्रष्टाचार। कुछ को ही सही पर कांग्रेस के काल में कलमाड़ी, ए. राजा, और कनीमोझी जैसे शक्तिशाली नेताओं को जेल में बंद किया गया है। उन पर जाँच चल रही है। अशोक – इन्हे तो जनता के दबाव में अंदर किया गया है।

विजय – सुनील जी, आपकी बात वाजिब है। सनक भरी एकतरफा सोच से तो देश का काम चलेगा नहीं। आपकी बात को थोड़ा आगे बढ़ाऊँ तो मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि भले ही कांग्रेस द्वारा की जा रही कार्यवाही भ्रष्टाचार के विकराल रुप को देखते हुये ऊँट के मुँह में जीरा लगे पर एक शुरुआत तो हुयी है। ऐसा लगता है कि कांग्रेस ने चाहे किन्ही भी दबाव में ऐसा किया हो पर आर.टी.आई आदि जैसी सुविधायें जनता को दी हैं। अपने और सहयोगी दलों के नेताओं को जेल भेजा है। कांग्रेस की बदकिस्मती से वक्त्त ऐसा है कि जनता केवल इतने भर से संतुष्ट नहीं है। जहाँ कांग्रेस आशा कर रही थी कि उसे जनता से सहयोग और शाबासी मिलेगी इन निर्णयों को लेने से वहीं जनता के सामने बहुत बड़े बड़े मामले खुलते जा रहे हैं। विदेश में जमा काला धन, देश में काले धन की समांतर अर्थ-व्यवस्था, मंहगाई, राजनीतिक भ्रष्टाचार और अक्षमता आदि मुद्दे जनता को अधीर कर रहे हैं। अब जनता का बहुत बड़ा हिस्सा मूर्ख बन कर नेताओं को लाभ देते रहने की स्थिति को पार कर चुका है या तेजी से पार करता जा रहा है। कांग्रेस को कुछ और ठोस कदम उठाने पड़ेंगे तभी वह कुछ उजली और सक्षम दिख सकती है अन्य दलों के मुकाबले में।

सुनील- विजय जी सही है आपकी बात। मुझे भी ऐसा ही लग रहा है कि कांग्रेस अपने द्वारा लिये गये कुछ अच्छे निर्णयों पर भी जनता से सराहना नहीं पा सकी है और यही इसकी कुंठा है। इसी कुंठा में वह बाबा रामदेव के मुद्दे को ढ़ंग से सुलटा नहीं पायी। उसे यह भी दिख गया कि अगर वह आगे भी अच्छे निर्णय अन्ना हज़ारे और बाबा रामदेव जैसे गुटों के दबाव के कारण लेगी तो उसे कोई राजनीतिक लाभ नहीं होने वाला है। मुझे लगता है कि कुछ निर्णय कांग्रेस अपने आप लेगी और उसकी ही नहीं बल्कि हर दल के नेताओं की अंदुरनी इच्छा और कोशिश यही होगी कि ऐसे गुट निष्प्रभावी हो जायें ताकि जनता में पैंठ बना चुके इन मुद्दों के राजनीतिक लाभ नेताओं को ही मिलें।

हरि – इन विचारों से मेरे दिमाग में एक बात आयी है कि चूँकि कांग्रेस को आर.टी.आई और कलमाड़ी आदि को जेल भेजने के फैसलों का लाभ नहीं मिल पा रहा था तो उसके सामने साफ हो गया कि ये मुद्दे तो अपनी जगह है पर इन मुद्दों की आड़ में राजनीतिक तंत्र की सारी कालिख कांग्रेस के मुँह पर ही मलने के गुपचुप प्रयास भी हो रहे थे। सरकार घोटालों और महंगाई के बावजूद विपक्ष के मुकाबले मजबूत थी और भाजपा समेत विपक्ष के सामने अगले तीन साल तक सरकार को गिराने का बहुत बड़ा अवसर था नहीं। पाँच साल तक दल इंतजार करने को तैयार नहीं थे, खासकर भाजपा। चूँकि कोई भी दल भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहीम में पाक-साफ नज़र नहीं आ सकता इसीलिये भाजपा और आर.एस.एस ने मौका तलाशते हुये बाबा रामदेव और अन्ना हज़ारे के अंदोलन से उठी जन-जाग्रती की लहर पर सवार होने की चेष्टा की।

अशोक – ऐसा कैसे कहा जा सकता है?

विजय – बात से बात निकलती है। आपकी बात में सच्चाई नज़र आती है सुनील जी। भाजपा खुद ऐसा आंदोलन नहीं खड़ा कर सकती थी क्योंकि उस पर भी भ्रष्टाचार के बहुत बड़े बड़े आरोप लगे हुये हैं। वह ऐसा करती तो दोगली करार दी जाती। तभी जब जनता आंदोलित हो गयी तो भाजपा के प्रवक्त्ता आदि टीवी चैनलों पर एक बात स्थापित करने में जोर लगा रहे हैं कि ये सारे मुद्दे आडवाणी ने उठाये थे। आडवाणी तो उप-प्रधानमंत्री भी रहे हैं और भाजपा अध्यक्ष भी, तब तो उन्होने अपने दल पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के खिलाफ कदम नहीं उठाये। भाजपा की राजनीति के पीछे कहीं न कहीं यह इच्छा भी है कि किसी तरह से आडवाणी एक बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ले लें। अगर तीन साल और इंतजार किया तो जीवन भर यह मौका हाथ नहीं आयेगा। हो सकता है आने वाले तीन सालों में राजनीतिक फिजां बदल जाये और कांग्रेस कुछ और बड़ी मछलियों को जेल भेजे और जनता अंतत: कांग्रेस के पक्ष में हो जाये। ऐसा लगता है कि कलमाड़ी आदि को जेल भेजना विपक्षी दलों को हिला गया है। भ्रष्ट सभी दल हैं और अगर कांग्रेस अपने नेताओं को जेल भेज सकती है तो दूसरे दल के नेताऒ पर कोताही करने का कोई मतलब है ही नहीं।

हरि- आप लोग कह रहे हैं तो मुझे भी दूर की एक कौड़ी सूझी है। भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन तो अब देश में खड़ा होना ही है और हो रहा है पर कांग्रेस जो कह रही है कि बाबा रामदेव के आंदोलन के पीछे आर.एस.एस का हाथ है तो यह कुछ हद तक सही लगता है। खाली आर.एस.एस का ही नहीं बल्कि अन्य ताकतों का भी जो भी कांग्रेस की सप्रंग सरकार को पाँच साल तक सत्ता में देखने को तैयार नहीं है। देखिये हो सकता है दूर की कौड़ी हो परंतु ध्यान दिया जाये तो जून का महीना भारत में राजनीतिक रुप से इमेरजैंसी वाले महीने के रुप में याद दिलाने की चेष्टा गैर-कांग्रेसी दल करते रहे हैं। भाजपा और आडवाणी इस बात पर विशेष तवज्जो देते रहे हैं। रामदेव का अनशन जून के माह में ही क्यों आयोजित किया गया? यह मार्च में भी हो सकता था जब इतनी गर्मी नहीं थी। या कुछ माह बाद सितम्बर या अक्टुबर में। पर इसे जून में किया गया। अगर आंदोलन केवल रामदेव के हाथों में होता तो शायद वे सरकार से कई मुद्दों पर आश्वासन मिलने के बाद अनशन खत्म कर देते पर उनके ऐसा करने से केवल उन्हे और सरकार को ही लाभ और राहत मिलती। विपक्षी दल अपने आप को सारे मामले से अलग महसूस करते। अनशन न तोड़ने देने के लिये जरुर ही रामदेव को शातिर दिमागों ने सलाह दी होगी। रामदेव राजनीति में नौसिखिया हैं। वे इतनी दूर का नहीं सोच सकते। कुछ लोगों को पक्का पता था कि अगर रामदेव दिल्ली में डटे रहें तो सरकार और रामदेव में टकराव होना ही होना है। उन्होने सोचा था कि सरकार सख्ती करेगी और उस पर आपातकाल के आरोप लगाये जायेंगे। अगर सरकार रामदेव के आंदोलन को कुचलती है तो एक तो रामदेव व्यक्तिगत रुप से उसके खिलाफ हो जायेंगे दूसरे सरकार बदनाम होगी और तीसरे भ्रष्टाचार का मुद्दा रामदेव और अन्ना हज़ारे के पास ही न रहकर विपक्षी दलों खासकर भाजपा के पास आ जायेगा। रामदेव का तो ठीक है कि उन्हे राजनीति की समझ नहीं है पर कांग्रेस को क्या कहा जाये वह भी इन चालों के सामने धराशायी हो गयी? एक से एक शातिर राजनीतिक दिमाग कांग्रेस के पास हैं और वे इन संभावनाओं को नहीं देख पाये और अब टीवी चैनलों पर तमतमाये हुये बयान देते घूम रहे हैं और अपनी और ज्यादा फजीहत करा रहे हैं।

अशोक – आपको लगता है कि आर.एस.एस और भाजपा इतनी आगे की सोच सकते हैं? अगर रामदेव उनके बढ़ाये हुये होते तो उन्हे रामदेव की ऐसी हालत करके क्या हासिल होता। रामदेव की समझ में भी तो आयेगा कि उन्हे इस्तेमाल किया गया है।

सुनील- राजनीतिक दल कितनी भी आगे की सोच सकते हैं। हरि भाई आपकी सोच पर चलें तो अब समझ में आता है राजघाट पर खुशी से नाचने का मतलब। अब यह भी लगता है कि अगर आर.एस.एस और भाजपा को भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन चलाना भी है तो उन्हे पहले अपने संगठनों से शुरुआत करनी चाहिये। बल्कि किसी भी राजनीतिक दल को यही करना चाहिये। उन्हे किसने रोका है कि वे अपने दल के आरोपित लोगों के खिलाफ कार्यवाही करें? अभी तो इन सभी दलों ने असली मुद्दे को पीछे ढ़केल दिया है और अपनी अपनी राजनीतिक रोटी सेकने आगे आ गये हैं। आर.एस.एस को खुले रुप में आंदोलन खड़ा करना चाहिये। उनका इतना बड़ा काडर है वे आज तक क्यों भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन नहीं कर पाये। भाजपा का इतना बड़ा समर्थक वर्ग है वह खुद से और अपने समर्थकों से शुरुआत क्यों नहीं करती। मुझे ऐसा लगता है कि कोई भी दल और संगठन गम्भीर नहीं है भ्रष्टाचार को समापत करने के लिये। ऐसा करना उनके हितों के खिलाफ है।

विजय- सही है सुनील जी, रामदेव के आंदोलन से सही ढ़ंग से निबटने में कांग्रेस की विफलता ने भाजपा को वह जगह मुहैया करा दी है जो उसे मिल नहीं रही थी उसके लाख प्रयास के बावजूद। लोगों का जिस तेजी से कांग्रेस से मोह भंग हुआ है उसकी भरपाई करने के लिये कांग्रेस को बहुत बड़े कदम उठाने पड़ेंगे। अभी ऐसा माहौल बना दिया गया है कि कांग्रेस के कारण भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन गति नहीं पकड़ पा रहा है। जबकि सच्चाई यह नहीं है। सभी दल भ्रष्ट हैं। कांग्रेस ने दिखावे के लिये ही सही पर थोड़े से कदम उठाये हैं, पर वे काफी नहीं हैं। अपनी जमीन वापिस पाने के लिये उसे बड़े कदम उठाने ही पड़ेंगे। अब कांग्रेस को जमीन में तो दफनाया नहीं जा सकता। आर.एस.एस समर्थित भाजपा से तो लोगों की शंकायें रहेंगी ही। देशव्यापी दलों में कांग्रेस ही है जिस पर देश के बहुत सारे वर्गों का भरोसा रहा है। देश की एकजुटता की खातिर कांग्रेस का बने रहना जरुरी है। कांग्रेस को अपनी और देश की खातिर अपनी सफाई और अपने सुधार से शुरुआत करनी चाहिये।

हरि – कांग्रेस और भाजपा, दोनों बड़ी राजनीतिक शक्तियों को चाहिये कि देश हित में भ्रष्टाचार जैसे राक्षस को समाप्त करने के लिये वे भले ढ़ंग से आपस में सहयोग करें। कांग्रेस को चाहिये कि वह बचे हुए तीन सालों में सत्ता का सदुपयोग करके भ्रष्टाचार समाप्त करने की ओर ठोस कदम उठाये। भाजपा को चाहिये कि एक अच्छे विपक्ष की तरह सरकार पर दबाव बनाये रखे। पिछले दरवाजे से सत्ता नहीं मिलने वाली और अगर मिल भी जाये तो यह दलों की साख गिराती ही है। भारत के लोकतंत्र को स्वच्छ और विकसित बनाने के लिये राजनीतिक दलों को शातिर और कुटिल चालों के बजाय साफ-सुथरी और पारदर्शी राजनीति को स्थान देना ही पड़ेगा।

…जारी…

2 Responses to “बाबा रामदेव: आर.एस.एस, भाजपा और कांग्रेस”

  1. Ramdev g aap aage bdho ham aap k shaat h black manny vappas ham layge

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