अमृता प्रीतम का पता

रसीदी टिकट नामक आत्मकथा लिखने वाली अमृता प्रीतम संक्षिप्त में इस कविता में वह सब कह जाती हैं जिसे प्रदर्शित करने के लिये एक निबंधकार शायद कुछ हजार शब्दों का जमावड़ा कर देगा। कलाकार साधारण मानव की समझ वाली परिभाषाओं के बंधनों से परे चले जाते हैं। उन्मुक्त्त आत्मा की उदआन को दर्साती है यह कविता।

आज मैंने अपने घर का नम्बर हटाया है
और गली के माथे पर लगा
गली का नाम हटाया है
और हर सड़क की
दिशा का नाम पोंछ दिया है
पर अगर आपको मुझे जरुर पाना है
तो हर देश के
हर शहर की
हर गली का
द्वार खटखटाओ
यह एक श्राप है
एक वर है
और जहाँ भी
आज़ाद रुह की झलक पड़े
समझना वह मेरा घर है

(अमृता प्रीतम)

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6 टिप्पणियाँ to “अमृता प्रीतम का पता”

  1. aisee hii rahii hongee ve .. pooravishw hi unakaa ghar tha ..raseedee tikat men yah baat baar baar kahi hai unhone .

  2. आनन्द आ गया अमृता जी की यह रचना पढ़कर.

  3. असरदार रचना अमृता जी की ठीक रसीदी टिकट जेसी छोटी पर फेलाव में दुनिया समेटे .वीडियो क्या ही कहने .आभार

  4. बहुत खूब. आशा है आपकी नजर जिंदगीनामा पर पड़ी होगी.

  5. अमृता जी,
    आपकी कविता बहत अच्छी है जैसी कि आपसे अपेक्षा की जानी चाहिए ! ये मेटर नहीं करता कि कौन कितना लिखता है बल्कि मेटर यह करता है कि रचना में दिल को छूने की कितनी गहराई है !

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